“The entire process was seamless. The pandit performed the Satyanarayan Puja with complete devotion and we received the video proof the same day.”
Priya Sharma
Mumbai• Satyanarayan Puja

विष्णुपाद मंदिर गया में फल्गु नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत पवित्र और प्राचीन हिंदू मंदिर है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और अपनी धर्मशिला (भगवान विष्णु के चरणचिह्न) के लिए विश्वप्रसिद्ध है। लगभग 40 सेंटीमीटर लंबे ये पवित्र चरणचिह्न गर्भगृह में चांदी के आवरण के भीतर स्थापित हैं।
पुराणों के अनुसार गयासुर नामक एक दैत्य ने कठोर तपस्या कर महान शक्तियाँ प्राप्त कर ली थीं। भगवान विष्णु ने उससे यज्ञ हेतु उसके शरीर को समर्पित करने का निवेदन किया और अंततः उसे पृथ्वी के नीचे स्थापित कर दिया। उसी स्थान पर धर्मशिला पर भगवान विष्णु के चरणचिह्न अंकित हुए, जिन्हें आज विष्णुपाद मंदिर में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।
मान्यता है कि यहाँ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष, शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। इसी कारण गया हिंदू धर्म का एक प्रमुख मोक्ष-धाम माना जाता है।
विष्णुपाद मंदिर विशाल ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित है। इसकी अष्टकोणीय (आठ-भुज) संरचना लगभग 100 फीट ऊँची है। मंदिर में चारों ओर सुंदर नक्काशीदार स्तंभ हैं तथा शिखर पर लगभग 50 किलो स्वर्ण ध्वजा और कलश स्थापित है, जो इसकी दिव्यता को दर्शाते हैं।
गर्भगृह में भगवान विष्णु के पवित्र चरणचिह्न चांदी के आवरण से सुरक्षित हैं। सामने माता लक्ष्मी की प्रतिमा भी विराजमान है, जिनकी प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा और श्रृंगार किया जाता है।
विष्णुपाद मंदिर पिंडदान और पितृश्राद्ध का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालु फल्गु नदी के तट पर तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और श्राद्ध कर्म संपन्न करते हैं। विशेष रूप से पितृपक्ष के दौरान लाखों भक्त यहाँ अपने पितरों की शांति हेतु अनुष्ठान कराते हैं।
पितृ पक्ष एवं अमावस्या के अवसर पर यहाँ विशेष पूजा-अनुष्ठान आयोजित होते हैं। श्रद्धालु पूर्ण वैदिक विधि से पिंडदान और तर्पण कराते हैं।
🔹 पूजा आयोजन एवं पिंडदान सेवा – शास्त्रसम्मत विधि से पिंडदान, तर्पण एवं श्राद्ध की संपूर्ण व्यवस्था।
🔹 अनुभवी पंडित मार्गदर्शन – वैदिक मंत्रोच्चारण, संकल्प और पूजा सामग्री सहित पूर्ण सहयोग।
🔹 ऑन-साइट एवं ऑनलाइन सुविधा – स्थल पर व्यवस्था तथा ऑनलाइन बुकिंग विकल्प।
🔹 ब्राह्मण भोजन एवं दान सेवा – पूजा के पश्चात ब्राह्मण भोजन, दक्षिणा और श्रद्धादान की व्यवस्था।
👉 हम आपकी श्रद्धा-यात्रा को सरल, सुव्यवस्थित और पुण्यपूर्ण बनाने के लिए संकल्पित हैं।
✨ पितरों को मोक्ष एवं शांति – विधिवत पिंडदान से पूर्वजों को मोक्ष मार्ग और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
✨ परिवार में समृद्धि और संतुलन – पितृश्राद्ध से कुल में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और सुख-समृद्धि का अनुभव होता है।
✨ आध्यात्मिक अनुभूति – फल्गु नदी के तट पर अनुष्ठान करने से मन में गहन शांति, भक्ति और आत्मिक संतुलन की अनुभूति होती है।
📌 स्थानः विष्णुपाद मंदिर रोड, चांद चौरा, गया, बिहार – 823001
🚆 निकटतम रेलवे स्टेशनः गया जंक्शन (ऑटो/कैब से सहज पहुँच)
✈️ निकटतम हवाई अड्डाः गया एयरपोर्ट
श्री विष्णुपाद मंदिर, गया जी — भगवान विष्णु के पवित्र पदचिह्न पर निर्मित यह प्राचीन तीर्थ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध का सर्वोच्च केंद्र माना जाता है। यह स्थल पितृमोक्ष, परिवार की शांति और आध्यात्मिक उन्नति का दिव्य स्थान है।
श्रद्धा आपकी, सेवा हमारी
City
गया
Temple Status
Open for Enquiries
Pujas Listed
1
Map Support
Available
How It Works
Browse rituals and select a package
Secure payment and share your details
Performed at your home or sacred teerth locations
Vishnupad Temple Road, Chand Chaura, Gaya, Bihar – 823001 Nearest Railway Station: Gaya Junction (easily accessible by auto/cab) Nearest Airport: Gaya Airport
Devotee Testimonials
“The entire process was seamless. The pandit performed the Satyanarayan Puja with complete devotion and we received the video proof the same day.”
Priya Sharma
Mumbai• Satyanarayan Puja
“Living abroad, I was worried about getting authentic puja done at Kashi. Pujariji handled everything — from samagri to sankalp. Highly recommended!”
Rajesh Gupta
San Francisco, USA• Rudrabhishek
“Booked Graha Shanti puja for my new home. The pandit was very knowledgeable and explained every step. The video recording was a wonderful touch.”
Meena Iyer
Bangalore• Graha Shanti Puja
Pujariji Services
Pujariji arranges authentic Vedic pujas performed by experienced pujaris at श्री विष्णुपद मंदिर, गया. Choose a puja, select your package, and we handle everything — from samagri to sankalp.