“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja

अन्नप्राशन संस्कार शिशु के जीवन में पहली बार ठोस आहार ग्रहण करने की शुभ शुरुआत का प्रतीक है। सनातन परंपरा में अन्न को जीवन और पोषण का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। इस संस्कार में वैदिक मंत्रोच्चार, देव पूजन और मंगलकामनाओं के माध्यम से शिशु के स्वस्थ, सुखी एवं समृद्ध जीवन के लिए प्रार्थना की जाती है। पुजारीजी.कॉम के माध्यम से यह संस्कार घर पर अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा विधि-विधान के अनुसार संपन्न कराया जा सकता है।
Duration
1h – 2h
Best time
मुहूर्त अनुसार
Starting price
₹11,000
अन्नप्राशन संस्कार हिंदू धर्म की एक प्राचीन धार्मिक परंपरा है, जिसके अंतर्गत शिशु को पहली बार दूध के अतिरिक्त अन्न, जैसे चावल या खीर, ग्रहण कराने का विधान है। यह संस्कार शिशु के विकास के एक नए चरण का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवसर पर देवताओं का पूजन करके शिशु के स्वास्थ्य, बुद्धि, बल, दीर्घायु और उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद माँगा जाता है। परिवार के सदस्य इस शुभ अवसर पर एकत्र होकर शिशु के जीवन की मंगलमय शुरुआत का उत्सव मनाते हैं।
मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व
अन्नप्राशन संस्कार में सामान्यतः भगवान गणेश, भगवान विष्णु, कुलदेवता और इष्टदेव की पूजा की जाती है। परिवार की परंपरा के अनुसार अन्य देवी-देवताओं का पूजन भी किया जा सकता है।
भगवान गणेश की पूजा शुभारंभ और विघ्नों से मुक्ति की प्रार्थना के लिए की जाती है। भगवान विष्णु की आराधना पालन, कल्याण और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ी है। इस संस्कार में शिशु के उत्तम पोषण, अच्छे स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास के लिए मंगलकामना की जाती है।
शुभ मुहूर्त / यह पूजा कब करानी चाहिए?
परंपरागत रूप से अन्नप्राशन संस्कार शिशु की आयु, परिवार की परंपरा और शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर किया जाता है।
धार्मिक मुहूर्त के साथ शिशु की आयु, स्वास्थ्य और ठोस आहार ग्रहण करने की तैयारी को प्राथमिकता देना आवश्यक है। पहली बार ठोस आहार शुरू करने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
किन परिस्थितियों में यह पूजा करानी चाहिए?
प्रमुख मंत्र
भगवान गणेश मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः॥
भगवान विष्णु मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
इन मंत्रों का जप श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। अनुष्ठान के दौरान वैदिक आचार्य संकल्प, देव पूजन और मंगलकामना के मंत्रों का उच्चारण भी कर सकते हैं।
पूजा के लाभ
अन्नप्राशन संस्कार का मुख्य उद्देश्य शिशु के जीवन में अन्न ग्रहण की शुभ शुरुआत को धार्मिक आस्था और पारिवारिक मंगलकामनाओं के साथ मनाना है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस संस्कार से जुड़े प्रमुख आध्यात्मिक और पारिवारिक भाव निम्नलिखित हैं।
यह संस्कार धार्मिक आस्था और मंगलकामनाओं से जुड़ा है। इसके धार्मिक लाभों को किसी विशेष स्वास्थ्य या विकास संबंधी परिणाम की गारंटी नहीं समझना चाहिए।
पूजा विधि एवं प्रमुख अनुष्ठान
अन्नप्राशन संस्कार अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा परिवार की परंपरा और निर्धारित विधि के अनुसार संपन्न कराया जाता है। इसमें सामान्यतः निम्नलिखित अनुष्ठान शामिल हो सकते हैं।
अनुष्ठानों की वास्तविक विधि परिवार की परंपरा और चयनित पूजा व्यवस्था के अनुसार निर्धारित की जा सकती है।
आध्यात्मिक महत्व
अन्नप्राशन संस्कार अन्न के प्रति सम्मान, जीवन के पोषण और पारिवारिक आशीर्वाद का प्रतीक है। यह संस्कार शिशु के जीवन के नए चरण को धार्मिक श्रद्धा और शुभकामनाओं के साथ आरंभ करने का अवसर प्रदान करता है। इस अवसर पर परिवार शिशु के स्वस्थ, सुखी और मंगलमय जीवन की प्रार्थना करता है तथा सनातन परंपराओं के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करता है।
हमारे अनुभवी वैदिक आचार्य आपके घर पर निर्धारित विधि-विधान और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अन्नप्राशन संस्कार संपन्न कराने में सहायता करते हैं।
विशेष जानकारी
अन्नप्राशन संस्कार शिशु के जीवन में अन्न ग्रहण करने की शुभ शुरुआत का प्रतीक है। इस पावन अवसर को सनातन परंपराओं एवं वैदिक विधि-विधान के अनुसार श्रद्धापूर्वक सम्पन्न कराएँ और अपने शिशु के स्वस्थ, सुखमय एवं मंगलमय जीवन की कामना करें।
2 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
अन्नप्राशन संस्कार हिंदू धर्म के सोलह प्रमुख संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है। इस पवित्र परंपरा में शिशु को पहली बार दूध के अतिरिक्त अन्न, जैसे चावल या खीर, ग्रहण कराया जाता है। उन्नत पैकेज के अंतर्गत दो अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा घर पर संपूर्ण पूजा विधि-विधान से संपन्न कराई जाती है। यह अनुष्ठान लगभग 60 से 120 मिनट तक चलता है और शिशु के उत्तम स्वास्थ्य, विकास, सुखमय जीवन तथा मंगलमय भविष्य के लिए ईश्वर से आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु किया जाता है।
पूजा में शामिल विधियां
विशेष सुविधाएं
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अन्नप्राशन संस्कार शिशु के जीवन में अन्न ग्रहण की शुभ शुरुआत का प्रतीक है। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा एवं आशीर्वाद के माध्यम से शिशु के उत्तम स्वास्थ्य, शारीरिक एवं मानसिक विकास, दीर्घायु और सुखमय भविष्य के लिए मंगलकामना की जाती है। यह संस्कार परिवार के लिए एक पवित्र एवं स्मरणीय अवसर माना जाता है।
सभी आवश्यक पूजा सामग्री जैसे हल्दी, अबीर, गुलाल, आम के पत्ते, तुलसी, दर्भा, कलश, पान के पत्ते, सुपारी, समिधा, पूजन द्रव्य, वस्त्र, घी आदि आचार्य द्वारा लाई जाएगी। यजमान को घर की सामान्य वस्तुएँ जैसे बर्तन, दीपक, आसन, कटोरी, चौकी, थाली, प्रसाद, फोटो, हवन कुंड आदि की व्यवस्था करनी होगी।
नोट: बुकिंग के बाद विस्तृत निर्देश साझा किए जाएंगे।
2 वस्तुएँ शामिल
5 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
अन्नप्राशन संस्कार हिंदू धर्म के सोलह प्रमुख संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है। इस पावन अवसर पर शिशु को पहली बार दूध के अतिरिक्त अन्न ग्रहण कराने की पारंपरिक विधि संपन्न की जाती है। श्रेष्ठ पैकेज के अंतर्गत पाँच अनुभवी वैदिक ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ पूजा कराई जाती है। लगभग 2 से 3 घंटे तक चलने वाले इस संस्कार में शिशु के उत्तम स्वास्थ्य, बुद्धि, बल, सुख एवं समृद्ध भविष्य के लिए मंगलकामना की जाती है।
पूजा में शामिल विधियां
विशेष सुविधाएं
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अन्नप्राशन संस्कार शिशु के जीवन में अन्न ग्रहण करने की शुभ शुरुआत का प्रतीक है। वैदिक मंत्रोच्चार एवं श्रद्धापूर्वक संपन्न इस संस्कार के माध्यम से शिशु के उत्तम स्वास्थ्य, शारीरिक एवं मानसिक विकास, बुद्धि, दीर्घायु तथा सुख-समृद्धि के लिए ईश्वर से आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है।
सभी आवश्यक पूजा सामग्री जैसे हल्दी, अबीर, गुलाल, आम के पत्ते, तुलसी, दर्भा, कलश, पान के पत्ते, सुपारी, समिधा, पूजन द्रव्य, वस्त्र, घी आदि आचार्य द्वारा लाई जाएगी। यजमान को घर की सामान्य वस्तुएँ जैसे बर्तन, दीपक, आसन, कटोरी, चौकी, थाली, प्रसाद, फोटो, हवन कुंड आदि की व्यवस्था करनी होगी।
नोट: बुकिंग के बाद विस्तृत निर्देश साझा किए जाएंगे।
2 वस्तुएँ शामिल
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WhatsAppभक्तों की प्रतिक्रिया
“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
एक बार जानकारी दें। पुजारी, सामग्री, विधि-विधान और अपडेट — सब आपके लिए संभाला जाता है।
पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।
जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।
हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।
आपके घर पर, नियुक्त पुजारी द्वारा।
संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।
ऊपर दिए गए पैकेज में से चुनें या पूछताछ करें, हमारी टीम आपकी तारीख और विवरणों की पुष्टि करेगी।