“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
अनुभवी ब्राह्मण पुजारियों द्वारा आपके घर की सुविधा में प्रामाणिक वैदिक अनुष्ठानों का अनुभव करें।

आयु वर्धक हवन एक प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान है, जो आयु बढ़ाने और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। इसमें पवित्र अग्नि में विशेष जड़ी-बूटियों और सामग्री की आहुति दी जाती है और स्वास्थ्य, सुरक्षा व ऊर्जा के लिए मंत्रों का जाप किया जाता है। यह हवन वातावरण को शुद्ध करता है और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है।

अमावस्या के दिन किया जाने वाला पितृ तर्पण हिंदू परंपरा का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसमें जल, तिल और मंत्रों के माध्यम से पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी जाती है। यह पितृ दोष को शांत करता है, आत्माओं को शांति देता है और परिवार में सुख-शांति व समृद्धि लाता है।

भूमि पूजन निर्माण कार्य से पहले भूमि को शुद्ध करने और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए किया जाता है। इसमें गणेश पूजा, वास्तु पूजा और भूमि देवी को अर्पण शामिल होते हैं, जिससे स्थिरता, समृद्धि और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

बुध ग्रह जाप कुंडली में बुध ग्रह के शुभ प्रभाव को बढ़ाने और अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए किया जाता है। यह मंत्र जाप वाणी, तर्क क्षमता, व्यापारिक सफलता और निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर बनाता है।

गुरु चांडाल योग शांति जब कुंडली के किसी भाव में गुरु और राहु या केतु ग्रह के साथ युति होती है और उससे उत्पन्न होने वाली सभी समस्याओं को दूर करके सुख समृद्धि प्राप्त करने के लिए यह शांति किया जाता है

चंडी हवन एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जो चंडी पाठ या दुर्गा सप्तशती के बाद किया जाता है। इसमें पवित्र अग्नि में सामग्री अर्पित करते हुए मंत्रों का जाप किया जाता है, जिससे दिव्य शक्ति का आह्वान होता है। यह हवन बाधाओं को दूर करता है, नकारात्मक शक्तियों को समाप्त करता है और जीवन में शक्ति, शांति व समृद्धि लाता है।

व्यक्ति को मानसिक अशांति, भावनात्मक उतार-चढ़ाव, पारिवारिक कलह और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। जब चंद्र कुण्डली में अशुभ/गलत होता है या चौथे, छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होता है, तो यह स्मृति हानि, आत्मविश्वास में कमी, मासिक धर्म की परेशानी, सांस लेने में समस्या और प्रजनन संबंधी समस्याओं जैसी बाधाओं का कारण बनता है। चंद्रमा को ज्योतिष में मन, भावनाएं, मातृत्व और शीतलता का कारक माना जाता है। यह व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।

दुर्गा पूजा के साथ चंडी पाठ में देवी दुर्गा की पूजा और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से नवरात्रि और अन्य शुभ अवसरों पर किया जाता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, बाधाएं समाप्त होती हैं और जीवन में सफलता, शांति व देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

आश्लेषा नक्षत्र गंडमूल नक्षत्रों में से एक है, जिसमें जन्म लेने पर कुछ विशेष दोष या चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं। यह शांति पूजा मंत्र जाप, हवन और विधि-विधान के माध्यम से इन प्रभावों को कम कर व्यक्ति और परिवार के लिए शांति, स्थिरता और सुख सुनिश्चित करती है।

सत्तईसा पूजा, जिसे गंड मूल नक्षत्र शांति पूजा भी कहा जाता है, सनातन धर्म में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह पूजा तब की जाती है जब किसी बच्चे का जन्म गंड मूल नक्षत्र में होता है। यह पूजा बच्चे के जन्म के 27 वें दिन की जाती है, जब चंद्रमा उसी नक्षत्र में पुनः प्रवेश करता है। गंड मूल नक्षत्रों में अश्विनी, आश्लेषा, मघा, रेवती, ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र शामिल हैं। इन नक्षत्रों में जन्म लेने वाले बच्चों के लिए गंड मूल नक्षत्र शांति पूजा अनिवार्य मानी जाती है।अगर आप यह पूजा किसी कारनवश नहीं करवा पाए है तो 27 वें महीने या उचित मुहूर्त में जब भी आप करवा सकें तब करवा लेना चाहिए ।

सत्तईसा पूजा, जिसे गंड मूल नक्षत्र शांति पूजा भी कहा जाता है, सनातन धर्म में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह पूजा तब की जाती है जब किसी बच्चे का जन्म गंड मूल नक्षत्र में होता है। यह पूजा बच्चे के जन्म के 27 वें दिन की जाती है, जब चंद्रमा उसी नक्षत्र में पुनः प्रवेश करता है। गंड मूल नक्षत्रों में अश्विनी, आश्लेषा, मघा, रेवती, ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र शामिल हैं। इन नक्षत्रों में जन्म लेने वाले बच्चों के लिए गंड मूल नक्षत्र शांति पूजा अनिवार्य मानी जाती है।अगर आप यह पूजा किसी कारनवश नहीं करवा पाए है तो 27 वें महीने या उचित मुहूर्त में जब भी आप करवा सकें तब करवा लेना चाहिए ।

मघा नक्षत्र गंडमूल नक्षत्रों में से एक है, जिसमें जन्म लेने पर पारिवारिक जीवन, स्थिरता या जीवन की दिशा से जुड़ी कुछ चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं। यह शांति पूजा मंत्र जाप, हवन और विधि-विधान के माध्यम से इन प्रभावों को कम कर सुरक्षा, संतुलन और सफलता प्रदान करती है।

गंडमूल नक्षत्रों में आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, रेवती और अश्विनी शामिल हैं। इन नक्षत्रों में जन्म लेने पर कुछ दोष उत्पन्न हो सकते हैं, जो स्वास्थ्य, परिवार या जीवन की प्रगति को प्रभावित कर सकते हैं। यह शांति पूजा मंत्र जाप, हवन और विधि-विधान के माध्यम से इन प्रभावों को कम कर संतुलन और सकारात्मकता लाती है।

रेवती नक्षत्र गंडमूल नक्षत्रों में से एक है, जिसमें जन्म लेने पर जीवन में कुछ चुनौतियां या असंतुलन उत्पन्न हो सकते हैं। यह शांति पूजा मंत्र जाप, हवन और विधि-विधान के माध्यम से इन प्रभावों को कम कर सुरक्षा, स्थिरता और समग्र कल्याण प्रदान करती है।

गणेश पूजा हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसे किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में किया जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि व समृद्धि के देवता माना जाता है। यह पूजा कार्यों में सफलता और शुभ परिणाम सुनिश्चित करती है।

ग्रह दोष तब उत्पन्न होता है जब कुंडली में ग्रहों की स्थिति अशुभ होती है, जिससे स्वास्थ्य, करियर, संबंध या आर्थिक जीवन में बाधाएं आती हैं। यह पूजा मंत्र जाप, हवन और विधि-विधान के माध्यम से इन प्रभावों को कम कर सकारात्मक परिणाम और संतुलन प्रदान करती है।

गृह प्रवेश पूजा नए घर में प्रवेश से पहले देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए की जाती है। इसमें गणेश पूजा, वास्तु शांति, कलश स्थापना और हवन जैसे अनुष्ठान शामिल होते हैं, जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर घर में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि लाते हैं।

गुरु (बृहस्पति) ज्ञान, शिक्षा, धन और आध्यात्मिकता का ग्रह है। इसके अशुभ प्रभाव से शिक्षा, धन, विवाह और निर्णय क्षमता में समस्याएं आ सकती हैं। यह पूजा मंत्र जाप, हवन और विधि-विधान के माध्यम से गुरु के प्रभाव को संतुलित कर प्रगति, स्पष्टता और सकारात्मक परिणाम प्रदान करती है।

लक्ष्मी कुबेर हवन एक पवित्र अनुष्ठान है, जो धन और समृद्धि को आकर्षित करने तथा आर्थिक बाधाओं को दूर करने के लिए किया जाता है। इसमें पवित्र अग्नि में विशेष सामग्री अर्पित कर मंत्रों का जाप किया जाता है, जिससे व्यापार में सफलता और आर्थिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसे दीपावली, अक्षय तृतीया या नए कार्य की शुरुआत पर करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

मंगल ग्रह ऊर्जा, साहस और शक्ति का प्रतीक है। इसके अशुभ प्रभाव से क्रोध, विवाद, विवाह में देरी या स्वास्थ्य समस्याएं वाहन दुर्घटना हो सकता हैं। यह पूजा मंत्र जाप, हवन और विधि-विधान के माध्यम से मंगल के प्रभाव को संतुलित कर शांति, आत्मविश्वास और सफलता प्रदान करती है।

मांगलिक दोष तब बनता है जब मंगल ग्रह कुंडली के कुछ विशेष भावों में स्थित होता है, जिससे विवाह में देरी या बाधाएं आ सकती हैं। यह पूजा मंत्र जाप, हवन और विधि-विधान के माध्यम से इसके प्रभाव को शांत कर संबंधों में सामंजस्य और सफलता लाती है।

मृत्युंजय हवन पूजा में महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए पवित्र अग्नि में आहुति दी जाती है। यह पूजा एक सुरक्षा कवच बनाती है, नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होती है। यह विशेष रूप से बीमारी, तनाव या कठिन ग्रह दशा के समय अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।

महा मृत्युंजय मंत्र जाप हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और शक्तिशाली मंत्रों में से एक है। यह अकाल मृत्यु से रक्षा, रोगों से मुक्ति और मानसिक शांति प्रदान करने वाला माना जाता है। इसका नियमित जाप या विशेष अनुष्ठान जीवन की कठिनाइयों को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने में सहायक होता है।

चंडी पाठ देवी दुर्गा को समर्पित एक पवित्र पाठ है, जिसे विशेष रूप से नवरात्रि में किया जाता है। इसमें दुर्गा सप्तशती के 700 श्लोकों का पाठ किया जाता है, जो नकारात्मकता को दूर करने, बाधाओं को समाप्त करने और जीवन में समृद्धि, साहस तथा आध्यात्मिक उन्नति लाता है।

कार्यालय उद्घाटन पूजा नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए की जाती है। इसमें गणेश पूजा, वास्तु शांति और हवन शामिल होते हैं, जो बाधाओं को दूर कर कार्य में सफलता और प्रगति सुनिश्चित करते हैं।

प्रेम प्राप्ति पूजा प्रेम जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने और अनुकूल जीवनसाथी प्राप्त करने के लिए की जाती है। मंत्र जाप और विधि-विधान के माध्यम से यह पूजा गलतफहमियों को दूर कर रिश्तों में मधुरता और सकारात्मकता लाती है।

रुद्राभिषेक हिंदू धर्म की सबसे शक्तिशाली पूजाओं में से एक है, जो भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए की जाती है। इसमें शिवलिंग पर पवित्र सामग्री अर्पित की जाती है और रुद्र मंत्रों का जाप किया जाता है। यह पूजा नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है, इच्छाओं की पूर्ति करती है और जीवन में शांति, स्वास्थ्य और सफलता प्रदान करती है।

संतान गोपाल मंत्र जाप एक शक्तिशाली आध्यात्मिक साधना है, जिसे संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपति करते हैं। यह मंत्र भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप का आह्वान करता है, जिससे संतान संबंधी बाधाएं दूर होती हैं और स्वस्थ संतान तथा सुखी परिवार का आशीर्वाद मिलता है।

सत्य नारायण व्रत कथा एक लोकप्रिय हिंदू पूजा है, जो पूर्णिमा, गृह प्रवेश, विवाह या किसी शुभ अवसर पर की जाती है। इसमें व्रत, पूजा और कथा का श्रवण शामिल होता है, जो जीवन में सफलता, सुख-शांति और बाधाओं से मुक्ति प्रदान करता है।

शतचंडी पाठ, चंडी पाठ का एक उन्नत और विस्तृत रूप है, जिसे कई पंडितों द्वारा कई दिनों तक किया जाता है। इसमें दुर्गा सप्तशती का बार-बार पाठ, हवन और विशेष अनुष्ठान शामिल होते हैं, जिससे प्रबल दिव्य ऊर्जा का आह्वान होता है। यह पूजा बड़ी समस्याओं को दूर करने, सफलता प्राप्त करने और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ाने के लिए की जाती है।

शिव पार्थिव पूजा में मिट्टी से बने शिवलिंग की स्थापना और पूजा की जाती है। यह अत्यंत शुभ और प्रभावशाली मानी जाती है। भक्त इस पूजा को बाधाओं को दूर करने, समस्याओं से मुक्ति पाने और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए करते हैं। पूजा के बाद शिवलिंग का जल में विसर्जन किया जाता है, जो समर्पण और शुद्धि का प्रतीक है।

श्री सूक्त हवन में वेदों के शक्तिशाली श्री सूक्त का पाठ करते हुए पवित्र अग्नि में आहुति दी जाती है। यह देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने और धन, सफलता व समृद्धि को आकर्षित करने में सहायक होता है। यह हवन आर्थिक बाधाओं को दूर करने और समृद्ध वातावरण बनाने के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।

सूर्य ग्रह ऊर्जा, अधिकार, आत्मविश्वास और जीवन शक्ति का प्रतीक है। इसके अशुभ प्रभाव से स्वास्थ्य समस्याएं, आत्मविश्वास की कमी, करियर में अस्थिरता या अधिकार से जुड़े मुद्दे हो सकते हैं। यह पूजा मंत्र जाप, हवन और विधि-विधान के माध्यम से सूर्य के प्रभाव को संतुलित कर शक्ति, नेतृत्व और सकारात्मक प्रगति प्रदान करती है।

उपनयन संस्कार, जिसे जनेऊ संस्कार भी कहा जाता है, हिंदू परंपरा का एक महत्वपूर्ण संस्कार है। यह शिक्षा, अनुशासन और आध्यात्मिक जागरूकता की शुरुआत का प्रतीक है। इस अनुष्ठान में बच्चे को गायत्री मंत्र की दीक्षा दी जाती है और उसे धर्म एवं ज्ञान के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया जाता है।

वास्तु शांति पूजा स्थान को शुद्ध करने और वास्तु के अनुसार सकारात्मक ऊर्जा के साथ संतुलित करने के लिए की जाती है। इसमें गणेश पूजा, नवग्रह शांति और हवन जैसे अनुष्ठान शामिल होते हैं, जो नकारात्मक प्रभावों को दूर कर शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करते हैं।

विवाह हिंदू धर्म के प्रमुख संस्कारों में से एक है, जो दो व्यक्तियों और उनके परिवारों के मिलन का प्रतीक है। इसमें कन्यादान, सात फेरे और मंगलसूत्र-बंधन जैसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान शामिल होते हैं, जो प्रेम, समर्पण और जिम्मेदारी को स्थापित करते हैं। यह समारोह वैदिक मंत्रों और आशीर्वाद के साथ सम्पन्न होता है, जिससे सुखी और समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है।
कैसे काम करता है
अनुष्ठान देखें और पैकेज चुनें
सुरक्षित भुगतान और विवरण साझा करें
शुद्ध वैदिक अनुष्ठान—आपके घर या पवित्र तीर्थ स्थलों में
भक्तों की प्रतिक्रिया
“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
हम शुद्ध वैदिक परंपरा की प्रामाणिकता और भक्तों की सुविधा को सर्वोपरि रखते हैं।

हमारे सभी पुजारी वैदिक अनुष्ठानों में पारंगत हैं और विभिन्न पूजाओं के संचालन में वर्षों का अनुभव रखते हैं।
अपनी सुविधा के अनुसार, कभी भी और कहीं भी—घर या पवित्र तीर्थ स्थल पर पूजा बुक करें।
हम सभी आवश्यक पूजा सामग्री उपलब्ध कराते हैं, ताकि आपको एक पूर्ण और प्रामाणिक अनुभव मिल सके।
शुद्ध वैदिक अनुष्ठान—आपके घर या पवित्र तीर्थ स्थलों में
हजारों परिवारों के साथ जुड़ें, जिन्होंने हमारे पुजारी-निर्देशित सेवाओं, व्यक्तिगत संकल्प और प्रामाणिक वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से शांति और संतोष प्राप्त किया है।
हमारे वैदिक विद्वान आपकी आवश्यकताओं के अनुरूप उपयुक्त अनुष्ठान, मंदिर और शुभ मुहूर्त का मार्गदर्शन करेंगे।
औसत प्रतिक्रिया समय: 15 मिनट