“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
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श्री बटुक भैरव मंदिर, वाराणसी काशी के कोतवाल — जहाँ भय मिटता है, कृपा बरसती है जहाँ काशी की रक्षा होती है वाराणसी के कामाच्छा क्षेत्र में, गलियों की आत्मा में बसा है एक ऐसा धाम — जो आकार में छोटा है, पर शक्ति में अपार। यहाँ विराजते हैं श्री बटुक भैरव — भगवान शिव का बाल स्वरूप। न रणभूमि के भैरव, न विकराल। यहाँ वे हैं एक बालक के रूप में — निश्छल, सरल, और अपने भक्तों के लिए करुणा से भरे। काशी उन्हें अपना कोतवाल मानती है। जो इस नगरी की रक्षा करते हैं — दिन में भी, रात में भी। जो हर संकट में ढाल बनते हैं, हर भय को हरते हैं। पौराणिक महत्व बटुक भैरव — यह नाम ही अपने आप में एक आश्वासन है। पुराणों में कथा है कि जब काशी पर अदृश्य शक्तियों का संकट मँडराने लगा, तब स्वयं महादेव ने एक बालक का रूप धारण किया। वही बालक जो हर भक्त के जीवन में प्रकाश लेकर आता है, हर अड़चन को मार्ग देता है। उनका वाहन है कुत्ता — वह पवित्र प्राणी जो स्वामिभक्ति का प्रतीक है। मंदिर के आस-पास आपको उनकी उपस्थिति मिलेगी — और भक्त इसे भैरव बाबा की जीवंत उपस्थिति मानते हैं। मंदिर का स्वरूप अखण्ड दीप — जो कभी नहीं बुझता मंदिर के भीतर एक दीपक अनादिकाल से जल रहा है। यह केवल ज्योति नहीं — यह भरोसे की लौ है। इस दीपक का तेल अनेक भक्त प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं, जिसे वे आध्यात्मिक शुद्धि और कृपा का वाहक मानते हैं। सरल भाव, असीम फल यहाँ भेंट में आडंबर नहीं चाहिए। फूल, धूप, तेल का दीपक, मिठाई — यहाँ तक कि बिस्कुट और टॉफी भी बटुक बाबा को प्रिय हैं। क्योंकि वे बालक हैं, और बालक को सच्चा प्रेम ही चाहिए। आरती और भजन का वातावरण प्रातःकाल की पहली आरती से लेकर संध्या की अंतिम ज्योति तक — मंदिर में मंत्रोच्चार, घंटे की ध्वनि और दीपों की आभा एक अलग ही लोक की अनुभूति कराती है। पूजा और अनुष्ठान नित्य पूजा में सम्मिलितः दीपदान पुष्प, धूप, और नैवेद्य अर्पण भैरव मंत्र का जापः "ॐ बटुक भैरवाय नमः" प्रातः एवं सायंकालीन आरती व भजन विशेष अनुष्ठानः भैरव हवन/यज्ञ — वैदिक मंत्रों, घी, तिल और आहुतियों से संपन्न यह यज्ञ मानसिक शांति, बाधा-निवारण और जीवन में प्रगति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। उत्सवः बटुक भैरव जयंती — विशेष पूजा, भजन संध्या, प्रसाद वितरण महाशिवरात्रि और नवरात्रि — भव्य आयोजन, विशेष दीपदान एवं अनुष्ठान दर्शन समय मंदिर प्रतिदिन लगभग प्रातः 5 बजे से रात्रि 10ः30 बजे तक खुला रहता है। आरती के समय भक्तों की विशेष भीड़ रहती है। स्थान एवं मार्ग रथयात्रा–कामाच्छा मार्ग, कामाच्छा–भेलूपुर क्षेत्र, वाराणसी ऑटो, रिक्शा या टैक्सी से सुगमता से पहुँचा जा सकता है। निकटवर्ती स्थानः कामाक्षी देवी मंदिर भक्तों को प्राप्त होने वाले आशीर्वाद भय से मुक्ति और नकारात्मकता से सुरक्षा मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन की बाधाओं का नाश स्वास्थ्य, समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास का संचार अनेक भक्त अखण्ड दीप के तेल से आध्यात्मिक उपचार का अनुभव साझा करते हैं। पुजारी जी के साथ पूजा बुक करें श्री बटुक भैरव मंदिर में प्रामाणिक और व्यवस्थित पूजा सेवाएं — अब आपकी पहुँच में। सम्पूर्ण बटुक भैरव पूजा व्यवस्था दीपदान एवं संकल्प पूजा भैरव हवन और विशेष मंत्र जाप मनोकामना पूर्ति एवं सुरक्षा अनुष्ठान अनुभवी वैदिक पुजारियों का मार्गदर्शन ऑन-साइट एवं ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा आपकी विशेष समस्या के अनुसार व्यक्तिगत पूजा हर अनुष्ठान सम्पूर्ण वैदिक विधि, श्रद्धा और प्रामाणिकता के साथ सम्पन्न किया जाता है। पुजारी जी पर अभी बुक करें और पाएं बटुक बाबा की दिव्य सुरक्षा, साहस और कृपा। आपकी श्रद्धा — हमारी सेवा।

धर्मारण्य तीर्थ, गया — पितृ मोक्ष का पवित्र स्थल धर्मारण्य तीर्थ, गया के गया-बोधगया क्षेत्र में स्थित एक अत्यंत पवित्र पितृ तीर्थ है। यहाँ पितृ शांति, पितृदोष निवारण, पूर्वजों की आत्मा की मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति हेतु पिंडदान, तर्पण एवं त्रिपिंडी श्राद्ध अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। पौराणिक कथा एवं महत्व महाभारत काल की कथा मान्यता है कि महाभारत युद्ध के पश्चात धर्मराज युधिष्ठिर ने धर्मारण्य वेदी पर यज्ञ, पिंडदान और श्राद्ध कर गुरु-ब्रह्म दोष एवं पितृदोष से मुक्ति प्राप्त की थी। धार्मिक मान्यता धर्मारण्य “पंचतीर्थ वेदी” का एक भाग माना जाता है। यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध (तीन पीढ़ियों की शांति हेतु) और पिंडदान करने से पितरों को शांति का मार्ग तथा साधक को मनोकामना-पूर्ति का फल मिलता है। विशेष स्थल यहाँ अरहट कूप और यज्ञकूप स्थित हैं, जहाँ पिंड सामग्री, जौ, तिल, चावल और नारियल का विधिपूर्वक विसर्जन किया जाता है। मुख्य पूजा-अनुष्ठान तर्पण् सबसे पहले श्रद्धालु फल्गु नदी के तट पर तिल-जल से तर्पण करते हैं, जिससे पूर्वजों की आत्मा को जल अर्पित कर तृप्ति प्रदान की जाती है। पिंडदान एवं त्रिपिंडी श्राद्ध पंडितों के मार्गदर्शन में धर्मारण्य वेदी पर जौ, चावल, तिल, गुड़ आदि से बने पिंड अर्पित किए जाते हैं। त्रिपिंडी श्राद्ध में पिता, पितामह और प्रपितामह के लिए विशेष पिंड विधान किया जाता है। हवन एवं विसर्जन पिंडदान के उपरांत यज्ञकूप/अरहट कूप में पिंड सामग्री एवं नारियल का विसर्जन किया जाता है, जिससे पितृदोष, प्रेतबाधा और गुरु-दोष शांत होने का विश्वास है। मंत्र एवं विधि ब्राह्मण पंडित वैदिक मंत्र (पितृसूक्त आदि) का जाप कर क्रमबद्ध रूप से तर्पण, पिंडदान और हवन संपन्न कराते हैं। अनुष्ठानों के लाभ पितृदोष, प्रेतबाधा एवं अशांति का निवारण पूर्वजों की आत्मा को शांति, संतोष एवं मोक्ष परिवार में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिक संतुलन पुजारी जी द्वारा उपलब्ध सेवाएँ संपूर्ण पिंडदान एवं त्रिपिंडी श्राद्ध व्यवस्था फल्गु नदी तट पर तर्पण धर्मारण्य वेदी पर पिंड अर्पण यज्ञकूप/अरहट कूप में विसर्जन संकल्प एवं गोत्र उच्चारण सहित विधिपूर्ण प्रक्रिया पुजारी जी द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली पूजा सामग्री हम शास्त्रसम्मत एवं शुद्ध सामग्री की संपूर्ण व्यवस्था करते हैं, जिसमें शामिल हैं— जौ (बार्ली) काला तिल चावल गुड़ पिंड निर्माण सामग्री पवित्र वस्त्र नारियल पुष्प एवं दूर्वा हवन सामग्री घृत (घी) एवं समिधा पूजन पात्र एवं संपूर्ण अनुष्ठान सामग्री ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा व्यवस्था सभी सामग्री वैदिक नियमों के अनुसार व्यवस्थित की जाती है। अनुभवी पंडित मार्गदर्शन गया क्षेत्र के शास्त्र-प्रमाणित आचार्य शुद्ध वैदिक मंत्रोच्चारण व्यक्तिगत संकल्प एवं गोत्रानुसार पूजा क्रमबद्ध एवं पारदर्शी प्रक्रिया ऑन-साइट एवं ऑनलाइन सुविधा अग्रिम ऑनलाइन बुकिंग भारत एवं विदेश से सेवा उपलब्ध आवश्यकता अनुसार लाइव वीडियो सुविधा सुव्यवस्थित एवं सम्मानपूर्वक अनुष्ठान संपादन पुजारी जी से अपनी सेवा बुक करें हम आपकी श्रद्धा-यात्रा को विधिपूर्वक, पवित्र और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराते हैं, ताकि आपके पितरों को शांति मिले और आपके जीवन में सहज समृद्धि एवं संतुलन आए। श्रद्धा आपकी, सेवा हमारी

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित भगवान शिव का एक अत्यंत पवित्र और विश्वप्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे काशी के कोतवाल भगवान शिव का दिव्य धाम माना जाता है। यह मंदिर मोक्षदायिनी नगरी काशी के हृदय में स्थित है और यहाँ दर्शन मात्र से जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति प्राप्त होने का विश्वास किया जाता है। पौराणिक एवं आध्यात्मिक महत्व शास्त्रों के अनुसार काशी भगवान शिव की प्रिय नगरी है, जहाँ वे स्वयं साक्षात निवास करते हैं। काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग को सृष्टि के आदि और अनंत स्वरूप का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि जो भक्त यहाँ श्रद्धा और भक्ति के साथ दर्शन एवं पूजन करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंदिर की विशेषताएँ यह मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख शिवधाम है मंदिर का स्वर्णमंडित शिखर इसकी दिव्यता को दर्शाता है यह गंगा तट के समीप स्थित है जिससे इसकी आध्यात्मिक महत्ता और बढ़ जाती है काशी विश्वनाथ परिसर में सुव्यवस्थित दर्शन व्यवस्था उपलब्ध है देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ दर्शन हेतु आते हैं भक्तों को प्राप्त होने वाले लाभ पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति जीवन की बाधाओं और कष्टों से राहत स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की प्राप्ति सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल में वृद्धि कैसे पहुँचें मंदिर वाराणसी नगर के मध्य भाग में स्थित है निकट स्थलः दशाश्वमेध घाट, गंगा नदी निकटतम रेलवे स्टेशनः वाराणसी जंक्शन तथा मंडुवाडीह निकटतम हवाई अड्डाः लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा यहाँ ऑटो, रिक्शा और अन्य स्थानीय साधनों द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है हम प्रत्येक पूजा को पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध वैदिक विधि और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराते हैं पुजारीजी डॉट कॉम के माध्यम से अपनी पूजा बुक करें और बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करें

मार्कंडेय महादेव मंदिर वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र अंतर्गत कैथी गाँव में गंगा–गोमती संगम पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन, पौराणिक और सिद्ध शिवधाम है। यह मंदिर विशेष रूप से संतान प्राप्ति, अकाल मृत्यु भय निवारण, गंभीर रोग शांति तथा कष्ट मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं। मंदिर का इतिहास धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह स्थान ऋषि मार्कंडेय की तपोभूमि है। अल्पायु होने के कारण जब यमराज उनके प्राण हरने आए, तब ऋषि मार्कंडेय ने यहीं शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव की घोर तपस्या की। भगवान शिव प्रकट हुए, यमराज को रोका और ऋषि मार्कंडेय को अमरता का वरदान प्रदान किया। इसी कारण यह स्थल मार्कंडेय महादेव तथा महामृत्युंजय मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसका उल्लेख मार्कंडेय पुराण में भी मिलता है। पौराणिक एवं धार्मिक महत्व यह धाम महामृत्युंजय स्वरूप में भगवान शिव की आराधना का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यहाँ पूजा करने से— संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है गर्भ बाधा का निवारण होता है वंश वृद्धि होती है सावन मास, प्रदोष और त्रयोदशी तिथि पर यहाँ विशेष भीड़ रहती है। यह स्थल पूर्वांचल के प्रमुख शिवधामों में गिना जाता है और द्वादश ज्योतिर्लिंगों के तुल्य प्रभावशाली माना जाता है। यहाँ होने वाली प्रमुख पूजाएँ Puजरिजि.coम के माध्यम से या स्थल पर निम्न पूजाएँ कराई जाती हैंः संतान प्राप्ति विशेष पूजा संतान गोपाल मंत्र जप संतान बाधा निवारण हवन दंपत्ति विशेष संकल्प पूजा महामृत्युंजय पूजा महामृत्युंजय मंत्र जप लघु मृत्युंजय अनुष्ठान अकाल मृत्यु, रोग, भय एवं ग्रहबाधा शांति हेतु शिव रुद्राभिषेक दूध, दही, घृत, गंगाजल एवं तीर्थ जल से अभिषेक सावन, महाशिवरात्रि एवं नागपंचमी पर विशेष फलदायी अन्य पूजाएँ मंगल दोष निवारण पूजा विवाह बाधा निवारण पूजा ग्रह शांति एवं विशेष अनुष्ठान प्रमुख मंत्र (श्रद्धालुओं हेतु) महामृत्युंजय मंत्रः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥ संतान गोपाल मंत्रः ॐ देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ कैसे पहुँचे? दूरीः वाराणसी शहर से लगभग 30 किमी मार्गः वाराणसी–गाजीपुर राजमार्ग निकटतम रेलवे स्टेशनः राजवारी स्टेशन – लगभग 7 किमी औनिहार जंक्शन – लगभग 11 किमी स्थानः कैथी गाँव, गंगा–गोमती संगम, वाराणसी श्रद्धालुओं के लिए विशेष यह मंदिर अत्यंत शांत, प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण में स्थित है। संगम तट पर होने के कारण यहाँ ध्यान, जप और अनुष्ठान का प्रभाव विशेष रूप से अनुभव किया जाता है। मार्कंडेय महादेव मंदिर, कैथी केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि संतान सुख, जीवन रक्षा और शिव कृपा का सिद्ध केंद्र है। जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से यहाँ पूजन करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। श्रद्धा आपकी, सेवा हमारी

महा मृत्युंजय मंदिर वाराणसी भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन और अत्यंत पवित्र स्थल है। इस मंदिर का विशेष महत्व आयु, स्वास्थ्य और अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए माना जाता है। यहाँ नियमित रूप से महा मृत्युंजय जाप, रुद्राभिषेक और हवन जैसे शक्तिशाली अनुष्ठान किए जाते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है और यहाँ स्थित पवित्र कुंड का जल औषधीय गुणों से भरपूर है। भक्त यहाँ जीवन की बाधाओं, रोगों और भय से मुक्ति पाने के लिए आते हैं। यही कारण है कि यह मंदिर आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ अकाल या असामान्य मृत्यु से पीड़ित आत्माओं की शांति हेतु अनुष्ठान किए जाते हैं। यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष और ब्रह्म दोष से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बलि, पिंडदान और तर्पण जैसे प्रमुख अनुष्ठान संपन्न होते हैं। निकट स्थित कपर्दीश्वर महादेव मंदिर इसकी आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाता है। कुंड के पास स्थित पीपल वृक्ष को असंतुष्ट आत्माओं की शांति का प्रतीक माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए आते हैं। पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी में स्थित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष, ब्राह्मण दोष तथा अकाल मृत्यु से मुक्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहाँ भगवान शिव स्वयं आत्मा को तारक मंत्र देकर मुक्ति प्रदान करते हैं। किंतु जो व्यक्ति काशी के बाहर अकाल या असामयिक मृत्यु को प्राप्त होते हैं, उनकी आत्मा की शांति एवं उद्धार के लिए पिशाच मोचन कुंड का विशेष महत्व है। इतिहास एवं पौराणिक कथा काशी खंड एवं गरुड़ पुराण के अनुसार, पिशाच मोचन का प्राचीन नाम विमल तीर्थ या विमलोदक तीर्थ था। इसकी उत्पत्ति गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से भी पूर्व मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान शिव के भक्त कपर्दी ने इस कुंड की स्थापना की। उनकी तपस्या से यहाँ कपर्दीश्वर महादेव प्रकट हुए। कथा के अनुसार महर्षि वाल्मीकि के मार्गदर्शन में एक ब्राह्मण, जो अपने पूर्व कर्मों के कारण प्रेत योनि में था, इस कुंड में स्नान कर कपर्दीश्वर महादेव की पूजा करने से मुक्त हुआ। तभी से यह स्थल “पिशाच मोचन” कहलाया। आध्यात्मिक महत्व 🔹 गया के बाद यह पितृ कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। 🔹 यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध विधिपूर्वक संपन्न किया जाता है। 🔹 पितृ पक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ श्राद्ध, तर्पण एवं विशेष अनुष्ठान करते हैं। पवित्र पीपल वृक्ष कुंड के समीप स्थित पीपल वृक्ष लोक-मान्यता के अनुसार असंतुष्ट आत्माओं की शांति से जुड़ा है। यहाँ प्रतीकात्मक रूप से सिक्के और कीलें लगाई जाती हैं। यद्यपि यह शास्त्रसम्मत परंपरा नहीं है, परंतु यह वर्षों से लोक-विश्वास का भाग रही है। यहाँ किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान 🔸 त्रिपिंडी श्राद्ध सत्व, रज और तम – तीनों प्रकार की प्रेत योनियों से मुक्ति हेतु। ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की पूजा तथा तिल, जौ और चावल के आटे से पिंडदान। 🔸 नारायण बलि दुर्घटना, आत्महत्या या अकाल मृत्यु से ग्रस्त आत्माओं की शांति हेतु। 🔸 पिंडदान एवं तर्पण तीन पीढ़ियों तक के पितरों की शांति और पितृ दोष निवारण के लिए। Pujariji.com द्वारा उपलब्ध सेवाएँ 🔹 पूर्ण त्रिपिंडी श्राद्ध व्यवस्था 🔹 नारायण बलि विशेष अनुष्ठान 🔹 विधिपूर्वक पिंडदान एवं तर्पण 🔹 नाम, गोत्र एवं कुल अनुसार व्यक्तिगत संकल्प 🔹 अनुभवी एवं शास्त्र-प्रमाणित स्थानीय पंडित 🔹 संपूर्ण पूजा सामग्री (तिल, जौ, चावल, वस्त्र, कलश, हवन सामग्री आदि) 🔹 ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा व्यवस्था 🔹 ऑन-साइट एवं ऑनलाइन बुकिंग सुविधा 🔹 विदेश से श्रद्धालुओं हेतु लाइव वीडियो विकल्प हम प्रत्येक अनुष्ठान को पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध वैदिक विधि और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराते हैं। 👉 Pujariji.com से पिशाच मोचन कुंड में अपनी सेवा बुक करें और पितरों को शांति एवं मोक्ष प्रदान करने का पुण्य लाभ प्राप्त करें। पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ अकाल या असामान्य मृत्यु से पीड़ित आत्माओं की शांति हेतु अनुष्ठान किए जाते हैं। यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष और ब्रह्म दोष से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बलि, पिंडदान और तर्पण जैसे प्रमुख अनुष्ठान संपन्न होते हैं। निकट स्थित कपर्दीश्वर महादेव मंदिर इसकी आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाता है। कुंड के पास स्थित पीपल वृक्ष को असंतुष्ट आत्माओं की शांति का प्रतीक माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए आते हैं। पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी में स्थित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष, ब्राह्मण दोष तथा अकाल मृत्यु से मुक्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहाँ भगवान शिव स्वयं आत्मा को तारक मंत्र देकर मुक्ति प्रदान करते हैं। किंतु जो व्यक्ति काशी के बाहर अकाल या असामयिक मृत्यु को प्राप्त होते हैं, उनकी आत्मा की शांति एवं उद्धार के लिए पिशाच मोचन कुंड का विशेष महत्व है। इतिहास एवं पौराणिक कथा काशी खंड एवं गरुड़ पुराण के अनुसार, पिशाच मोचन का प्राचीन नाम विमल तीर्थ या विमलोदक तीर्थ था। इसकी उत्पत्ति गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से भी पूर्व मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान शिव के भक्त कपर्दी ने इस कुंड की स्थापना की। उनकी तपस्या से यहाँ कपर्दीश्वर महादेव प्रकट हुए। कथा के अनुसार महर्षि वाल्मीकि के मार्गदर्शन में एक ब्राह्मण, जो अपने पूर्व कर्मों के कारण प्रेत योनि में था, इस कुंड में स्नान कर कपर्दीश्वर महादेव की पूजा करने से मुक्त हुआ। तभी से यह स्थल “पिशाच मोचन” कहलाया। आध्यात्मिक महत्व 🔹 गया के बाद यह पितृ कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। 🔹 यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध विधिपूर्वक संपन्न किया जाता है। 🔹 पितृ पक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ श्राद्ध, तर्पण एवं विशेष अनुष्ठान करते हैं। पवित्र पीपल वृक्ष कुंड के समीप स्थित पीपल वृक्ष लोक-मान्यता के अनुसार असंतुष्ट आत्माओं की शांति से जुड़ा है। यहाँ प्रतीकात्मक रूप से सिक्के और कीलें लगाई जाती हैं। यद्यपि यह शास्त्रसम्मत परंपरा नहीं है, परंतु यह वर्षों से लोक-विश्वास का भाग रही है। यहाँ किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान 🔸 त्रिपिंडी श्राद्ध सत्व, रज और तम – तीनों प्रकार की प्रेत योनियों से मुक्ति हेतु। ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की पूजा तथा तिल, जौ और चावल के आटे से पिंडदान। 🔸 नारायण बलि दुर्घटना, आत्महत्या या अकाल मृत्यु से ग्रस्त आत्माओं की शांति हेतु। 🔸 पिंडदान एवं तर्पण तीन पीढ़ियों तक के पितरों की शांति और पितृ दोष निवारण के लिए। Pujariji.com द्वारा उपलब्ध सेवाएँ 🔹 पूर्ण त्रिपिंडी श्राद्ध व्यवस्था 🔹 नारायण बलि विशेष अनुष्ठान 🔹 विधिपूर्वक पिंडदान एवं तर्पण 🔹 नाम, गोत्र एवं कुल अनुसार व्यक्तिगत संकल्प 🔹 अनुभवी एवं शास्त्र-प्रमाणित स्थानीय पंडित 🔹 संपूर्ण पूजा सामग्री (तिल, जौ, चावल, वस्त्र, कलश, हवन सामग्री आदि) 🔹 ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा व्यवस्था 🔹 ऑन-साइट एवं ऑनलाइन बुकिंग सुविधा 🔹 विदेश से श्रद्धालुओं हेतु लाइव वीडियो विकल्प हम प्रत्येक अनुष्ठान को पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध वैदिक विधि और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराते हैं। 👉 Pujariji.com से पिशाच मोचन कुंड में अपनी सेवा बुक करें और पितरों को शांति एवं मोक्ष प्रदान करने का पुण्य लाभ प्राप्त करें।

श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर , उत्तर प्रदेश के Vaरनसि में स्थित एक अत्यंत प्राचीन और श्रद्धा-पूर्ण मंदिर है। यह मंदिर भगवान ळोर्द ःaनुमन को समर्पित है, जिन्हें “संकट मोचन” अर्थात सभी कष्टों को दूर करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर विशेष रूप से उन भक्तों के लिए प्रसिद्ध है जो जीवन की बाधाओं, भय, रोग और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति की कामना करते हैं। 📖 पौराणिक एवं आध्यात्मिक महत्व मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना महान संत ग़ोस्वमि टुल्सिदस ने की थी, जिन्हें यहाँ भगवान हनुमान के प्रत्यक्ष दर्शन हुए थे। यहाँ हनुमान जी को “संकट मोचन” रूप में पूजा जाता है, जो अपने भक्तों के सभी संकटों और कष्टों का निवारण करते हैं। ✨ मंदिर की विशेषताएँ 🔸 संकट निवारण का प्रमुख स्थान – सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति हेतु प्रसिद्ध 🔸 मंगलवार और शनिवार का विशेष महत्व 🔸 सिंदूर से अलंकृत हनुमान जी की दिव्य मूर्ति 🔸 भजन, कीर्तन और हनुमान चालीसा पाठ का विशेष आयोजन 🔸 देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु 🌟 भक्तों को प्राप्त होने वाले लाभ 🌟 जीवन के संकटों और बाधाओं से मुक्ति 🌟 भय, नकारात्मक ऊर्जा और ग्रह-दोष से राहत 🌟 स्वास्थ्य, शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि 🌟 करियर, शिक्षा और प्रतियोगिता में सफलता 🌟 मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल 📍 कैसे पहुँचें मंदिर वाराणसी के दुर्गाकुंड क्षेत्र के पास स्थित है। 📌 निकट लैंडमार्कः दुर्गा कुंड मंदिर, Bःऊ क्षेत्र 🚉 निकटतम रेलवे स्टेशनः वाराणसी जंक्शन ✈️ निकटतम एयरपोर्टः लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा ऑटो, रिक्शा और टैक्सी द्वारा यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है। 🪔 Puजरिजि.coम द्वारा उपलब्ध सेवाएँ Puजरिजि.coम के माध्यम से श्रद्धालु निम्नलिखित सेवाएँ प्राप्त कर सकते हैं— 🔹 संकट मोचन विशेष हनुमान पूजा 🔹 हनुमान चालीसा एवं सुंदरकांड पाठ 🔹 बाधा-निवारण एवं शत्रु-शांति अनुष्ठान 🔹 ग्रह-दोष शांति एवं नकारात्मक ऊर्जा निवारण पूजा 🔹 अनुभवी वैदिक पंडित द्वारा मंत्रोच्चारण 🔹 संपूर्ण पूजा सामग्री की व्यवस्था 🔹 ऑनलाइन एवं ऑन-साइट बुकिंग सुविधा 🔹 व्यक्तिगत संकल्प पूजा हम प्रत्येक पूजा को पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध वैदिक विधि और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराते हैं। 👉 Puजरिजि.coम से अपनी पूजा बुक करें और संकट मोचन हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करें। श्रद्धा आपकी, सेवा हमारी 🙏

दुर्गा मंदिर, जिसे दुर्गा कुंड मंदिर भी कहा जाता है, पवित्र नगरी वाराणसी में स्थित एक प्राचीन, प्रसिद्ध एवं अत्यंत पूजनीय शक्तिपीठ है। यह मंदिर माँ दुर्गा को समर्पित है और हिंदू धर्म में इसका विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। यह वाराणसी के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है, जहाँ देश-विदेश से श्रद्धालु माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं। मंदिर का इतिहास दुर्गा मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में बंगाल की महान महारानी रानी भवानी (नाटोर) द्वारा कराया गया था। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में विराजमान माँ दुर्गा की प्रतिमा स्वयंभू (स्वयं प्रकट) है, अर्थात् इसे किसी मानव ने निर्मित नहीं किया। देवी भागवत पुराण के अध्याय 23 के अनुसार, काशी नरेश की पुत्री शशिकला और वनवासी राजकुमार सुदर्शन की कथा इस मंदिर की स्थापना से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि एक युद्ध के समय माँ दुर्गा सिंह पर सवार होकर प्रकट हुईं और काशी की रक्षा की। उसी दिव्य घटना की स्मृति तथा काशी की निरंतर सुरक्षा के उद्देश्य से इस मंदिर की स्थापना की गई। मंदिर की वास्तुकला दुर्गा मंदिर का निर्माण उत्तर भारतीय नागर शैली में किया गया है। मंदिर का लाल और केसरिया रंग शक्ति, ऊर्जा और तेज का प्रतीक माना जाता है। मंदिर में सुंदर नक्काशीदार पत्थर, आपस में जुड़े छोटे-छोटे शिखर और भव्य संरचना इसकी दिव्यता और आकर्षण को और अधिक बढ़ाते हैं। दुर्गा कुंड मंदिर के समीप स्थित दुर्गा कुंड एक पवित्र सरोवर है, जो पूर्वकाल में गंगा नदी से जुड़ा हुआ था। यह कुंड मंदिर की पवित्रता और सौंदर्य को और अधिक बढ़ाता है। नवरात्रि एवं अन्य प्रमुख पर्वों के दौरान यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से भर जाता है। धार्मिक महत्व मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन और श्रद्धा से यहाँ माँ दुर्गा की पूजा करता है, उसे— • भय एवं कष्टों से मुक्ति • शत्रुओं और बाधाओं का नाश • मनोकामनाओं की पूर्ति • शक्ति, साहस और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। Puजरिजि.coम पर उपलब्ध सेवाएँ श्रद्धालु Puजरिजि.coम के माध्यम से दुर्गा मंदिर, वाराणसी में निम्नलिखित पूजाएँ बुक कर सकते हैं— ✔️ विशेष दुर्गा पूजा ✔️ नवरात्रि विशेष अनुष्ठान ✔️ मनोकामना पूर्ति पूजा श्रद्धा आपकी, सेवा हमारी
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शुद्ध वैदिक अनुष्ठान—आपके घर या पवित्र तीर्थ स्थलों में
भक्तों की प्रतिक्रिया
“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
हम शुद्ध वैदिक परंपरा की प्रामाणिकता और भक्तों की सुविधा को सर्वोपरि रखते हैं।

हमारे सभी पुजारी वैदिक अनुष्ठानों में पारंगत हैं और विभिन्न पूजाओं के संचालन में वर्षों का अनुभव रखते हैं।
अपनी सुविधा के अनुसार, कभी भी और कहीं भी—घर या पवित्र तीर्थ स्थल पर पूजा बुक करें।
हम सभी आवश्यक पूजा सामग्री उपलब्ध कराते हैं, ताकि आपको एक पूर्ण और प्रामाणिक अनुभव मिल सके।
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हजारों परिवारों के साथ जुड़ें, जिन्होंने हमारे पुजारी-निर्देशित सेवाओं, व्यक्तिगत संकल्प और प्रामाणिक वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से शांति और संतोष प्राप्त किया है।
हमारे वैदिक विद्वान आपकी आवश्यकताओं के अनुरूप उपयुक्त अनुष्ठान, मंदिर और शुभ मुहूर्त का मार्गदर्शन करेंगे।
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