“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja

वाराणसी, जिसे काशी और बनारस के नाम से भी जाना जाता है, हिन्दू धर्म में मोक्षदायिनी नगरी मानी जाती है। यहाँ गंगा तट पर विधि-विधान से किया गया पिंडदान पितृ दोष शांति, पूर्वजों की तृप्ति तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है।
Duration
1h – 2h
Best time
सुबह
Starting price
₹4,100
वाराणसी, जिसे काशी एवं बनारस के नाम से भी जाना जाता है, हिन्दू धर्म में मोक्षदायिनी नगरी मानी जाती है। पवित्र माँ गंगा के तट पर स्थित यह प्राचीन तीर्थ भगवान शिव की नगरी कहलाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी में किए गए पितृ कर्म, श्राद्ध एवं पिंडदान से पूर्वजों की आत्मा को शांति, तृप्ति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त पिंडदान एवं तर्पण संस्कार कराने के लिए काशी आते हैं।
पिंडदान हिन्दू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण पितृ कर्म है। “पिंड” चावल, तिल, घी एवं शहद से निर्मित पवित्र अर्पण होता है, जिसे दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए समर्पित किया जाता है। गरुड़ पुराण, स्कंद पुराण तथा धर्मशास्त्रों में पिंडदान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा एवं विधि-विधान से किया गया पिंडदान पितृ दोष को शांत करता है, पूर्वजों को संतुष्ट करता है और परिवार में सुख-शांति तथा समृद्धि लाता है।
वाराणसी में मणिकर्णिका घाट, दशाश्वमेध घाट एवं पिशाच मोचन कुंड पिंडदान के प्रमुख एवं पवित्र स्थल माने जाते हैं। विशेष रूप से मणिकर्णिका घाट को मोक्ष का द्वार कहा जाता है, जहाँ स्वयं भगवान शिव जीवात्मा को तारक मंत्र प्रदान करते हैं।
पिंडदान की प्रक्रिया वैदिक संकल्प के साथ प्रारम्भ होती है। सबसे पहले गंगा तट पर आचमन एवं संकल्प कराया जाता है, जिसमें दिवंगत पूर्वजों का नाम एवं गोत्र लिया जाता है। इसके पश्चात तर्पण में तिल मिश्रित जल पितरों को अर्पित किया जाता है। फिर चावल, तिल, घी एवं शहद से पिंड तैयार कर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्वजों को समर्पित किए जाते हैं।
अंत में पिंड विसर्जन, ब्राह्मण भोजन, दान-दक्षिणा एवं आशीर्वाद के साथ पूजा पूर्ण होती है। यह अनुष्ठान सामान्यतः पितृ पक्ष, अमावस्या, वार्षिक श्राद्ध तिथि अथवा किसी शुभ मुहूर्त में सम्पन्न कराया जाता है। विशेष रूप से पितृ पक्ष के दौरान किया गया पिंडदान अत्यंत फलदायी माना जाता है।
परंपरागत रूप से यह पूजा परिवार के बड़े पुत्र द्वारा की जाती है, लेकिन यदि परिवार में पुरुष सदस्य न हो, तो महिलाएँ भी पिंडदान कर सकती हैं। रामायण में माता सीता द्वारा राजा दशरथ के लिए पिंडदान करने का उल्लेख भी मिलता है।
Puजरिज़ि.coम द्वारा काशी के अनुभवी वैदिक आचार्यों के माध्यम से सम्पूर्ण पिंडदान पूजा शास्त्रोक्त विधि से सम्पन्न करवाई जाती है। हमारी सेवाओं में अनुभवी पंडित जी, सम्पूर्ण पूजा सामग्री, संकल्प, तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन, नाव व्यवस्था तथा फोटो-वीडियो अपडेट सुविधा शामिल है।
यदि आप काशी नहीं आ सकते, तो ऑनलाइन अथवा प्रतिनिधि के माध्यम से भी पिंडदान सेवा उपलब्ध करवाई जाती है। हमारे पास हिन्दी, संस्कृत, तेलुगु एवं तमिल परंपरा के अनुभवी आचार्य उपलब्ध हैं, जो श्रद्धा एवं शास्त्रीय विधि से सम्पूर्ण अनुष्ठान सम्पन्न कराते हैं।

वाराणसी
मणिकर्णिका घाट वाराणसी के सबसे आध्यात्मिक और पवित्र स्थलों में से एक है, जिसका हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित यह प्राचीन घाट मुख्य रूप से एक पवित्र श्मशान स्थल के रूप में जाना जाता है, जहाँ सदियों से अंतिम संस्कार और पितृ कर्म सम्पन्न किए जाते रहे हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती का “मणिकर्ण” अर्थात कर्णफूल इस स्थान पर गिरा था, जिसके कारण इसका नाम “मणिकर्णिका” पड़ा। स्कंद पुराण और काशी खंड में इस घाट को भगवान शिव से जुड़ा दिव्य स्थान बताया गया है, जहाँ आत्मा को मोक्ष प्राप्त होने की मान्यता है।
ऐसी मान्यता है कि यहाँ अंतिम संस्कार या पितृ कर्म करने से आत्मा जन्म-मृत्यु के बंधनों से मुक्त होकर परम शांति प्राप्त करती है। इसी कारण भारत ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु यहाँ अस्थि विसर्जन, पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए आते हैं।
घाट का आध्यात्मिक वातावरण, वैदिक मंत्रों की ध्वनि और निरंतर बहती माँ गंगा इस स्थान को अत्यंत दिव्य और भावनात्मक अनुभव प्रदान करती है। यद्यपि यह एक श्मशान घाट है, फिर भी मणिकर्णिका घाट सनातन धर्म में जीवन, मृत्यु और मोक्ष के शाश्वत सत्य का प्रतीक माना जाता है।
मणिकर्णिका घाट का दर्शन एक गहन आध्यात्मिक अनुभव माना जाता है, जो श्रद्धा, भक्ति और मोक्ष की भावना को जागृत करता है।
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यह पवित्र अनुष्ठान पितरों की आत्मा की शांति, पितृ दोष निवारण, पूर्वजों की तृप्ति एवं मोक्ष प्राप्ति हेतु अत्यंत फलदायी माना जाता है।
पवित्र Varanasi में किया गया पिंडदान भगवान शिव एवं माँ गंगा की कृपा प्रदान करने वाला अत्यंत पुण्यदायी पितृ कर्म माना गया है।
पूजा प्रक्रिया:
महत्वपूर्ण निर्देश:- पूजा के समय सफेद एवं स्वच्छ वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।
नोट:- पूजा की सभी आवश्यक सामग्री एवं व्यवस्थाएं आचार्यों द्वारा सम्पन्न कराई जाती हैं।
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“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
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