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Pujari Ji

त्रिपिंडी श्राद्ध

राम घाट, उज्जैन
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
त्रिपिंडी श्राद्ध

यह पवित्र अनुष्ठान रामघाट, उज्जैन में पावन क्षिप्रा नदी के तट पर पूर्ण वैदिक विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न कराया जाता है। भगवान महाकाल की पावन नगरी उज्जैन में सम्पन्न यह अनुष्ठान विशेष रूप से पितृ दोष, पितृ बाधा, अतृप्त पितरों की शांति, पूर्वजों की सद्गति एवं परिवार की सुख-समृद्धि के लिए अत्यंत पुण्यदायी एवं प्रभावशाली माना जाता है।

Duration

3h – 4h

Best time

पूरा दिन

Starting price

₹11,000

लाभ

  • त्रिपिंडी श्राद्ध पितृ दोष एवं उससे उत्पन्न अशुभ प्रभावों की शांति प्राप्त करने में सहायक माना जाता है।
  • यह पितृ देवताओं की तृप्ति एवं उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान है।
  • प्रेत बाधा, पारिवारिक कलह एवं जीवन में बार-बार आने वाली बाधाओं को दूर करने में लाभकारी माना जाता है।
  • परिवार में सुख, शांति, सामंजस्य एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में सहायता करता है।
  • कार्य, व्यवसाय एवं आर्थिक उन्नति के मार्ग में आने वाली रुकावटों को दूर कर समृद्धि प्राप्त करने में सहायक माना जाता है।
  • पितरों की कृपा से परिवार के कल्याण, सौभाग्य एवं समग्र उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

त्रिपिंडी श्राद्ध

यह पवित्र त्रिपिंडी श्राद्ध पावन रामघाट, उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न कराया जाता है। प्राचीन काल से उज्जैन पितृ कर्म, श्राद्ध, तर्पण एवं वैदिक अनुष्ठानों का प्रमुख तीर्थ माना जाता है। भगवान महाकाल की नगरी में स्थित रामघाट पर सम्पन्न पितृ कर्म विशेष रूप से पुण्यदायी एवं शीघ्र फलदायी माने जाते हैं।

त्रिपिंडी श्राद्ध एक महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान है, जो पितरों की आत्मा की शांति, तृप्ति एवं सद्गति की मंगलकामना के लिए किया जाता है। यह विशेष रूप से उन पूर्वजों के लिए किया जाता है जिनका विधिपूर्वक श्राद्ध, तर्पण अथवा पिंडदान नहीं हो पाया हो या जिनकी आत्मा अतृप्त मानी जाती हो। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धापूर्वक सम्पन्न त्रिपिंडी श्राद्ध से पितर प्रसन्न होकर परिवार को सुख, शांति, समृद्धि एवं उन्नति का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

इस अनुष्ठान में पितृ देवता, भगवान श्रीहरि विष्णु, सात्त्विक प्रेत, राजसिक प्रेत एवं तामसिक प्रेत का शास्त्रोक्त पूजन किया जाता है तथा तीनों प्रेत स्वरूपों के निमित्त विशेष पिंडदान अर्पित किया जाता है। वैदिक परंपरा के अनुसार यह विधि अतृप्त एवं विभिन्न योनियों में स्थित पितरों की तृप्ति एवं सद्गति की मंगलकामना के लिए की जाती है।

पूजा का प्रारम्भ भगवान श्री गणेश के पूजन एवं संकल्प से किया जाता है। इसके पश्चात भगवान श्रीहरि विष्णु, पितृ देवताओं एवं संबंधित देव शक्तियों का पूजन, वैदिक मंत्र जप, तर्पण, विशेष पिंडदान, हवन तथा पूर्णाहुति सम्पन्न कराई जाती है। अंत में आरती एवं पितरों के आशीर्वाद की प्रार्थना के साथ परिवार की सुख-समृद्धि, मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना की जाती है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

इस पवित्र अनुष्ठान में मुख्य रूप से पितृ देवता, भगवान श्रीहरि विष्णु, सात्त्विक प्रेत, राजसिक प्रेत एवं तामसिक प्रेत का शास्त्रोक्त पूजन किया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा एवं विधिपूर्वक सम्पन्न पिंडदान से पितरों को तृप्ति एवं सद्गति प्राप्त होती है। इससे पितृ दोष एवं पितृ बाधा के अशुभ प्रभावों की शांति तथा परिवार में सुख, शांति, समृद्धि एवं सकारात्मक ऊर्जा की मंगलकामना की जाती है। रामघाट, उज्जैन में सम्पन्न यह अनुष्ठान पितृ कर्म के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

यह अनुष्ठान कब कराना चाहिए?

  • अमावस्या, पंचमी, अष्टमी, एकादशी, त्रयोदशी अथवा चतुर्दशी तिथि पर।
  • भरणी, मघा अथवा कृत्तिका नक्षत्र में।
  • पितृ दोष की शांति हेतु योग्य वैदिक आचार्य द्वारा बताए गए शुभ मुहूर्त में।
  • पितृपक्ष के दौरान अथवा वर्ष के किसी भी शुभ दिन संकल्प लेकर।
  • पितरों की शांति, तृप्ति एवं सद्गति की मंगलकामना हेतु।

किन समस्याओं में यह अनुष्ठान कराना चाहिए?

  • पितृ दोष अथवा पितृ बाधा।
  • बार-बार पूर्वजों का स्वप्न में दिखाई देना।
  • विवाह, संतान अथवा रोजगार में निरंतर बाधाएं।
  • आर्थिक संकट एवं परिवार में अशांति।
  • बहुत प्रयास करने के बाद भी सफलता प्राप्त न होना।
  • बिना कारण मानसिक तनाव, भय एवं नकारात्मकता।
  • पूर्वजों से संबंधित ज्योतिषीय संकेत अथवा पितृ असंतोष की संभावना।

त्रिपिंडी श्राद्ध के लाभ

  • पितरों की आत्मा की शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है।
  • पितृ दोष एवं उसके अशुभ प्रभावों की शांति की प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि की मंगलकामना की जाती है।
  • विवाह, संतान एवं करियर संबंधी बाधाओं से राहत की प्रार्थना की जाती है।
  • आर्थिक उन्नति एवं सकारात्मक ऊर्जा की कामना की जाती है।
  • पितरों के आशीर्वाद से जीवन में उन्नति एवं मंगलकारी अवसर प्राप्त होने की मंगलकामना की जाती है।

आध्यात्मिक महत्व

त्रिपिंडी श्राद्ध केवल एक वैदिक कर्मकाण्ड नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं सनातन परंपरा के पालन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुष्ठान माना जाता है। यह व्यक्ति एवं उसके पितरों के बीच आध्यात्मिक संबंध को सुदृढ़ करने तथा परिवार में सकारात्मक एवं सात्त्विक वातावरण स्थापित करने का माध्यम है।

रामघाट, उज्जैन में वैदिक मंत्रों, शास्त्रोक्त विधि-विधान, तर्पण एवं पिंडदान के साथ सम्पन्न यह अनुष्ठान पितरों की कृपा प्राप्त करने तथा जीवन में शांति, समृद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

हमारे अनुभवी वैदिक आचार्य पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रों के अनुसार यह अनुष्ठान श्रद्धापूर्वक सम्पन्न कराते हैं।

विशेष जानकारी

  • यह अनुष्ठान रामघाट, उज्जैन में अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सम्पन्न कराया जाता है।
  • सम्पूर्ण अनुष्ठान शास्त्रोक्त वैदिक विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न होता है।
  • अनुष्ठान हेतु आवश्यक समस्त सामग्री हमारी ओर से उपलब्ध कराया जाता है।
  • संकल्प यजमान के नाम, गोत्र एवं उपलब्ध विवरण के अनुसार कराया जाता है।
  • पूजा सम्पन्न होने के पश्चात प्रसाद एवं आवश्यक पूजा विवरण उपलब्ध कराया जाता है।
  • श्रद्धालु अनुष्ठान के समय स्वच्छ एवं पारंपरिक वस्त्र धारण करें।
  • आवश्यकता होने पर ऑनलाइन संकल्प के माध्यम से भी यह अनुष्ठान सम्पन्न कराया जा सकता है।

रामघाट, उज्जैन में सम्पन्न यह त्रिपिंडी श्राद्ध पितरों की आत्मा की शांति, तृप्ति, सद्गति, पितृ दोष एवं पितृ बाधा की शांति, परिवार में सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना हेतु अत्यंत पवित्र एवं प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान माना जाता है।

पूजा स्थानउज्जैन

राम घाट

राम घाट

उज्जैन

पवित्र क्षिप्रा नदी के दिव्य तट पर स्थित राम घाट उज्जैन के सबसे प्रमुख, प्राचीन एवं पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है। यह घाट सनातन धर्म के श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत आस्था, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल के दौरान इस पवित्र क्षेत्र में आगमन किया था, जिसके कारण इस घाट का नाम राम घाट पड़ा।

उज्जैन आने वाले अधिकांश श्रद्धालु सबसे पहले राम घाट पर स्नान, तर्पण एवं पूजा-अर्चना कर अपनी धार्मिक यात्रा का शुभारंभ करते हैं। क्षिप्रा नदी का यह पवित्र तट मोक्ष, पितृ तृप्ति, ग्रह शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

राम घाट का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्मग्रंथों एवं पुराणों में क्षिप्रा नदी को अत्यंत पवित्र एवं मोक्षदायिनी बताया गया है। राम घाट को उज्जैन के प्रमुख तीर्थस्थलों में विशेष स्थान प्राप्त है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां स्नान, दान, तर्पण एवं पूजा करने से—

  • पितरों को तृप्ति प्राप्त होती है।
  • पितृ दोष में शांति मिलती है।
  • ग्रह बाधाओं का निवारण होता है।
  • जीवन के पापों का क्षय होता है।
  • आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।
  • सुख, समृद्धि एवं मानसिक शांति प्राप्त होती है।
  • मोक्ष मार्ग की प्राप्ति का पुण्य मिलता है।

विशेष रूप से अमावस्या, पूर्णिमा, श्राद्ध पक्ष, सोमवती अमावस्या एवं सिंहस्थ महापर्व के दौरान राम घाट का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

राम घाट में होने वाले प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान

राम घाट पर प्रतिदिन अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान सम्पन्न कराए जाते हैं।

प्रमुख पूजाएं एवं अनुष्ठान

  • पितृ तर्पण
  • पिंडदान
  • नारायणबली पूजा
  • त्रिपिंडी श्राद्ध
  • कालसर्प दोष शांति पूजा
  • नवग्रह शांति पूजा
  • महामृत्युंजय जाप
  • रुद्राभिषेक
  • क्षिप्रा दीपदान
  • संकल्प पूजा
  • ग्रह शांति हवन
  • पूर्वज मोक्ष अनुष्ठान
  • विशेष अमावस्या तर्पण

श्राद्ध पक्ष एवं अमावस्या के दिनों में यहां विशेष रूप से हजारों श्रद्धालु अपने पितरों की शांति हेतु धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं।

राम घाट के प्रमुख पवित्र स्थल

मुख्य स्नान घाट

क्षिप्रा नदी के किनारे बना मुख्य घाट श्रद्धालुओं के पवित्र स्नान एवं धार्मिक अनुष्ठानों का प्रमुख केंद्र है। यहां स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

दीपदान स्थल

सायंकाल के समय श्रद्धालु क्षिप्रा नदी में दीप प्रवाहित कर सुख, समृद्धि एवं पितृ कृपा की कामना करते हैं। यह दृश्य अत्यंत मनोहारी एवं आध्यात्मिक माना जाता है।

तर्पण एवं श्राद्ध क्षेत्र

राम घाट पर विशेष स्थान निर्धारित हैं जहां आचार्यों के मार्गदर्शन में पितृ तर्पण एवं पिंडदान अनुष्ठान सम्पन्न कराए जाते हैं।

यज्ञ एवं हवन स्थल

यहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विभिन्न ग्रह शांति एवं धार्मिक यज्ञ सम्पन्न होते हैं।

राम घाट में पूजा करवाने के लाभ

ऐसी मान्यता है कि राम घाट पर विधिपूर्वक पूजा एवं अनुष्ठान कराने से श्रद्धालुओं को अनेक आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं—

  • पितृ दोष से मुक्ति
  • पूर्वजों की कृपा प्राप्ति
  • ग्रह दोषों की शांति
  • मानसिक तनाव में कमी
  • परिवार में सुख एवं समृद्धि
  • स्वास्थ्य एवं आयु में वृद्धि
  • नकारात्मक ऊर्जा का नाश
  • व्यापार एवं कार्यक्षेत्र में उन्नति
  • आध्यात्मिक जागृति
  • मोक्ष प्राप्ति का पुण्य

विशेष रूप से पितृ दोष, कालसर्प दोष एवं पूर्वजों की अशांति से पीड़ित श्रद्धालुओं के लिए राम घाट अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

राम घाट का आध्यात्मिक वातावरण

राम घाट का वातावरण अत्यंत शांत, पवित्र एवं भक्तिमय रहता है। प्रातःकालीन स्नान, वैदिक मंत्रोच्चार, संध्या आरती एवं दीपदान का दृश्य श्रद्धालुओं को दिव्य आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है।

सायंकाल होने वाली क्षिप्रा महाआरती विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं।

विशेष अवसरों पर यहां अत्यधिक भीड़ रहती है—

  • सिंहस्थ कुंभ
  • सोमवती अमावस्या
  • श्राद्ध पक्ष
  • पूर्णिमा
  • अमावस्या
  • श्रावण मास
  • महाशिवरात्रि
  • कार्तिक पूर्णिमा

राम घाट कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग

निकटतम हवाई अड्डा देवी अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा, इंदौर है, जो उज्जैन से लगभग पचपन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

रेल मार्ग

उज्जैन जंक्शन देश के प्रमुख नगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, वाराणसी, अहमदाबाद एवं भोपाल से सीधे जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग

उज्जैन राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों से सुगमता से जुड़ा हुआ है। इंदौर, भोपाल, ओंकारेश्वर एवं अन्य प्रमुख नगरों से नियमित बस एवं किराये के वाहन उपलब्ध रहते हैं।

उज्जैन नगर के किसी भी भाग से राम घाट तक स्थानीय परिवहन आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

दर्शन एवं अनुष्ठान हेतु सर्वोत्तम समय

राम घाट वर्षभर दर्शन एवं धार्मिक अनुष्ठानों के लिए खुला रहता है, किन्तु निम्न अवसर विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं—

  • अमावस्या
  • पूर्णिमा
  • श्राद्ध पक्ष
  • सोमवती अमावस्या
  • कार्तिक मास
  • श्रावण मास
  • महाशिवरात्रि

प्रातःकालीन समय स्नान, संकल्प एवं पूजा-अनुष्ठान के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

निष्कर्ष: राम घाट केवल एक घाट नहीं, बल्कि श्रद्धा, पितृ तृप्ति, मोक्ष एवं आध्यात्मिक साधना का महान केंद्र है। पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित यह दिव्य तीर्थ श्रद्धालुओं को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति एवं पूर्वजों का आशीर्वाद प्रदान करने वाला अत्यंत पुण्यदायी स्थल माना जाता है। यहां सम्पन्न होने वाले वैदिक अनुष्ठान जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले माने जाते हैं।

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    यह पवित्र वैदिक अनुष्ठान उज्जैन के पावन रामघाट पर मोक्षदायिनी क्षिप्रा नदी के तट पर पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से सम्पन्न कराया जाता है। यदि आप अपने पितरों की आत्मा की शांति, सद्गति एवं पितृ दोष निवारण की कामना करते हैं, तो रामघाट में सम्पन्न त्रिपिंडी श्राद्ध अत्यंत पुण्यदायी एवं फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में सम्पन्न यह अनुष्ठान पितरों की तृप्ति, वंश की उन्नति, पारिवारिक सुख-शांति तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए विशेष महत्व रखता है।

    इस उन्नत पैकेज में 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा लगभग 3 से 4 घंटे तक सम्पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से त्रिपिंडी श्राद्ध सम्पन्न कराया जाता है।

    पूजा में शामिल प्रमुख अनुष्ठान

    • संकल्प
    • तर्पण
    • भगवान श्रीहरि विष्णु पूजन
    • कलश स्थापना
    • सात्त्विक, राजसिक एवं तामसिक प्रेत आवाहन एवं पूजन
    • पिंडदान
    • त्रिपिंडी श्राद्ध विधि
    • आशीर्वाद

    विशेष सुविधाएं

    • पवित्र रामघाट, उज्जैन में 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सम्पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से त्रिपिंडी श्राद्ध सम्पन्न कराया जाएगा।
    • अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा यजमान के संकल्प एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार सम्पूर्ण अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाएगा।
    • पूजा की सम्पूर्ण व्यवस्था हमारी टीम द्वारा की जाएगी।
    • समय-समय पर पूजा की जानकारी एवं आवश्यक अपडेट्स प्रदान किए जाएंगे।
    • यदि आप स्वयं उपस्थित नहीं हो सकते, तो आपके नाम एवं संकल्प से भी सम्पूर्ण अनुष्ठान सम्पन्न कराया जा सकता है।

    आवश्यक जानकारी

    • संकल्प के लिए यजमान का नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो) एवं आवश्यक विवरण उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।
    • यदि आप स्वयं उपस्थित होंगे, तो निर्धारित समय पर रामघाट, उज्जैन पहुँचें।
    • यदि आप उपस्थित नहीं हो सकते, तो आपके नाम एवं संकल्प से भी त्रिपिंडी श्राद्ध विधिवत सम्पन्न कराया जाएगा।
    • पुरुष यजमान के लिए इस अनुष्ठान में नया (अनसिला) वस्त्र धारण करना अनिवार्य होता है।
    • पूजा सम्पन्न होने के बाद वह नया वस्त्र रामघाट पर ही छोड़ना आवश्यक होता है। यह त्रिपिंडी श्राद्ध की पारंपरिक एवं शास्त्रोक्त विधि का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।
    • . इस अनुष्ठान में मुख्य रूप से पिंडदान, तर्पण एवं श्राद्ध विधि सम्पन्न की जाती है; हवन नहीं किया जाता।

    रामघाट, उज्जैन में सम्पन्न यह त्रिपिंडी श्राद्ध पितरों की आत्मा की शांति, सद्गति, पितृ दोष निवारण, पारिवारिक सुख-शांति, समृद्धि एवं जीवन में सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति हेतु अत्यंत पवित्र एवं पुण्यदायी वैदिक अनुष्ठान माना जाता है।

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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