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Pujari Ji

पिंड दान गया जी

श्री विष्णुपद मंदिर, गया
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
पिंड दान  गया जी

गया जी में पिंड दान हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जो पितरों की शांति और पितृ दोष निवारण के लिए किया जाता है। यह पवित्र फल्गु नदी और विष्णुपद मंदिर में किया जाता है, जिससे पितरों को शांति और परिवार को आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Duration

45 min – 1h 30m

Starting price

₹5,100

लाभ

  • पिंडदान को भक्ति और आस्था के साथ विधिपूर्वक करना चाहिए।
  • गया में वर्ष के 365 दिन पिंडदान किया जा सकता है।
  • सभी पिंडदान सामग्री की संपूर्ण व्यवस्था हमारी ओर से की जाएगी।
  • पितृ पक्ष के दौरान गया में पिंडदान का विशेष धार्मिक महत्व होता है।
  • पिंड विसर्जन विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट और फल्गु नदी में किया जाएगा।

पिंड दान गया जी

श्रद्धा से करें पितृमोक्ष का पावन अनुष्ठान

गया जी का नाम गयासुर नामक एक राक्षस के नाम पर पड़ा है, जिसने घोर तपस्या द्वारा विशेष शक्तियाँ प्राप्त कर ली थीं। लोक कल्याण के लिए भगवान विष्णु ने गयासुर पर अपने चरण रखकर उसे मोक्ष प्रदान किया। ऐसी मान्यता है कि भगवान के चरण जहां पड़े, वहीं विष्णुपद मंदिर की स्थापना हुई, और गयासुर की देह गया की पर्वत श्रृंखलाओं में बदल गई। इसीलिए गया को पितृमोक्ष तीर्थ कहा जाता है।

गया जी के प्रमुख पिंडदान स्थलः

विष्णुपद मंदिर

अक्षयवट वृक्ष

फल्गु नदी तट

पिंडदान का उद्देश्यः

पिंडदान दिवंगत आत्मा की शांति और पितृलोक गमन हेतु किया जाता है। यह कर्म मृत व्यक्ति की मृत्यु-तिथि पर अथवा विशेषतः पितृ पक्ष में किया जाता है। श्रद्धा और शांत मन से किया गया पिंडदान पूर्वजों की कृपा और आशीर्वाद को सुनिश्चित करता है।

पिंडदान की मुख्य विधियाँः

विश्वदेव स्थापना पूजन:

अनुष्ठान का प्रारंभिक वैदिक पूजन।

पिंड प्रदान:

चावल, घी, शहद, दूध, व तिल से पिंड बनाकर पितरों को अर्पित करना।

तर्पण:

काले तिल के साथ जल अर्पण कर पितरों को तृप्त करना।

ब्राह्मण भोजन एवं दान:

ब्राह्मण को भोजन कराना और वस्त्र व दक्षिणा अर्पित करना।

समय अवधिः संपूर्ण पिंडदान विधि आमतौर पर 45 मिनट से 1.5 घंटे के बीच पूरी होती है।

गया में पिंडदान करने से एक बार में 21 पीढ़ियों तक के पितरों को तृप्ति मिलती है। इस कारण गया जी को पितृमोक्ष तीर्थ भी कहा जाता है।

एक ही स्थान से संपूर्ण सुविधा– "बुकिंग से अनुष्ठान तक"

गया पिंडदान के लिए पुजारी को बुक करें। सभी पूजा सामग्री पंडित जी द्वारा लाई जाएगी। सभी पंडित अनुभवी हैं और वैदिक पाठशाला से पढ़े हुए हैं। आप हमसे पूछताछ कर अथवा ऑनलाइन, गया पिंडदान की बुकिंग कर सकते हैं। कृपया पूजा मूल्य के लिए पैकेज को सलेक्ट करें, और समावेश को भी देखें:

पूजा स्थानगया

श्री विष्णुपद मंदिर

श्री विष्णुपद मंदिर

गया

विष्णुपाद मंदिर गया में फल्गु नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत पवित्र और प्राचीन हिंदू मंदिर है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और अपनी धर्मशिला (भगवान विष्णु के चरणचिह्न) के लिए विश्वप्रसिद्ध है। लगभग 40 सेंटीमीटर लंबे ये पवित्र चरणचिह्न गर्भगृह में चांदी के आवरण के भीतर स्थापित हैं।

इतिहास एवं पौराणिक कथा

गयासुर की कथा

पुराणों के अनुसार गयासुर नामक एक दैत्य ने कठोर तपस्या कर महान शक्तियाँ प्राप्त कर ली थीं। भगवान विष्णु ने उससे यज्ञ हेतु उसके शरीर को समर्पित करने का निवेदन किया और अंततः उसे पृथ्वी के नीचे स्थापित कर दिया। उसी स्थान पर धर्मशिला पर भगवान विष्णु के चरणचिह्न अंकित हुए, जिन्हें आज विष्णुपाद मंदिर में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।

पिंडदान का महत्व

मान्यता है कि यहाँ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष, शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। इसी कारण गया हिंदू धर्म का एक प्रमुख मोक्ष-धाम माना जाता है।

भव्य वास्तुकला

विष्णुपाद मंदिर विशाल ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित है। इसकी अष्टकोणीय (आठ-भुज) संरचना लगभग 100 फीट ऊँची है। मंदिर में चारों ओर सुंदर नक्काशीदार स्तंभ हैं तथा शिखर पर लगभग 50 किलो स्वर्ण ध्वजा और कलश स्थापित है, जो इसकी दिव्यता को दर्शाते हैं।

धर्मशिला एवं पूजन

गर्भगृह में भगवान विष्णु के पवित्र चरणचिह्न चांदी के आवरण से सुरक्षित हैं। सामने माता लक्ष्मी की प्रतिमा भी विराजमान है, जिनकी प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा और श्रृंगार किया जाता है।

पिंडदान एवं तर्पण अनुष्ठान

विष्णुपाद मंदिर पिंडदान और पितृश्राद्ध का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालु फल्गु नदी के तट पर तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और श्राद्ध कर्म संपन्न करते हैं। विशेष रूप से पितृपक्ष के दौरान लाखों भक्त यहाँ अपने पितरों की शांति हेतु अनुष्ठान कराते हैं।

श्राद्धकाल का महत्व

पितृ पक्ष एवं अमावस्या के अवसर पर यहाँ विशेष पूजा-अनुष्ठान आयोजित होते हैं। श्रद्धालु पूर्ण वैदिक विधि से पिंडदान और तर्पण कराते हैं।

Puजरिजि.coम द्वारा उपलब्ध सेवाएँ

  • पूजा आयोजन एवं पिंडदान सेवा – शास्त्रसम्मत विधि से पिंडदान, तर्पण एवं श्राद्ध की संपूर्ण व्यवस्था।
  • अनुभवी पंडित मार्गदर्शन – वैदिक मंत्रोच्चारण, संकल्प और पूजा सामग्री सहित पूर्ण सहयोग।
  • ऑन-साइट एवं ऑनलाइन सुविधा – स्थल पर व्यवस्था तथा ऑनलाइन बुकिंग विकल्प।
  • ब्राह्मण भोजन एवं दान सेवा – पूजा के पश्चात ब्राह्मण भोजन, दक्षिणा और श्रद्धादान की व्यवस्था।

👉 हम आपकी श्रद्धा-यात्रा को सरल, सुव्यवस्थित और पुण्यपूर्ण बनाने के लिए संकल्पित हैं।

धार्मिक महत्ता

पितरों को मोक्ष एवं शांति – विधिवत पिंडदान से पूर्वजों को मोक्ष मार्ग और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

परिवार में समृद्धि और संतुलन – पितृश्राद्ध से कुल में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और सुख-समृद्धि का अनुभव होता है।

आध्यात्मिक अनुभूति – फल्गु नदी के तट पर अनुष्ठान करने से मन में गहन शांति, भक्ति और आत्मिक संतुलन की अनुभूति होती है।

पहुँच एवं यात्रा

📌 स्थानः विष्णुपाद मंदिर रोड, चांद चौरा, गया, बिहार – 823001

🚆 निकटतम रेलवे स्टेशनः गया जंक्शन (ऑटो/कैब से सहज पहुँच)

✈️ निकटतम हवाई अड्डाः गया एयरपोर्ट

श्री विष्णुपाद मंदिर, गया जी — भगवान विष्णु के पवित्र पदचिह्न पर निर्मित यह प्राचीन तीर्थ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध का सर्वोच्च केंद्र माना जाता है। यह स्थल पितृमोक्ष, परिवार की शांति और आध्यात्मिक उन्नति का दिव्य स्थान है।

श्रद्धा आपकी, सेवा हमारी

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तीर्थ नहीं जा पा रहे हैं?

जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।

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हमारी गारंटी

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    1 आचार्य + सभी पिंड दान सामग्री

    इस पैकेज में 1 आचार्य एवं सभी आवश्यक पिंडदान सामग्री शामिल है, जो एक दिन का पिंडदान एवं पितृ शांति अनुष्ठान विधि-विधान से सम्पन्न किया जाता है, जिससे पूर्वजों की शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    पूजा प्रक्रिया:

    • संकल्प
    • आचार्य यजमान के पूर्वजों के नाम, गोत्र एवं विवरण लेकर शास्त्रानुसार संकल्प करते हैं।
    • तर्पण
    • जल, तिल और कुश से तर्पण देकर पूर्वजों को संतुष्ट किया जाता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
    • पिंडदान
    • चावल/जौ का आटा, तिल, जौ और गाय के घी से पिंड बनाए जाते हैं।
    • मंत्रों के साथ पिंड अर्पित किए जाते हैं,
    • पिंडदान
    • यह अनुष्ठान फल्गु घाट, विष्णुपद मंदिर एवं अक्षयवट जैसे पवित्र स्थलों पर सम्पन्न किया जाता है।
    • अंत में पिंडों का विसर्जन कर पूर्वजों की शांति एवं मोक्ष की कामना की जाती है।

    मुख्य विशेषताएं:

    • शुद्ध एवं वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न अनुष्ठान
    • प्रभावशाली मंत्रोच्चारण
    • गोत्रानुसार पितृ कर्म का पालन

    नोट: यह एक दिवसीय विशेष अनुष्ठान है। बुकिंग के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

    सभी पिंड दान सामग्रीदक्षिणा
    ₹5,100₹7,10028% off

    2 वस्तुएँ शामिल

  • श्रेष्ठ

    1 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    यह विशेष वैदिक गया श्राद्ध एवं पिंडदान अनुष्ठान पवित्र गया धाम, गया जी में 1 अनुभवी वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में शास्त्रोक्त विधि-विधान के अनुसार 3 दिवसीय रूप से सम्पन्न कराया जाता है। यह अनुष्ठान पितरों की तृप्ति, शांति, सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना के लिए कराया जाता है।

    इस विशेष अनुष्ठान में गया जी के प्रमुख पिंडदान स्थलों जैसे सीता कुंड, फल्गु नदी तट, विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट, प्रेतशिला एवं धर्मारण्य आदि में स्थानीय परंपरा एवं आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान की विधियां सम्पन्न कराई जाती हैं।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • तीर्थ एवं पितृ कर्म संबंधी विधि
    • तर्पण
    • भगवान विष्णु पूजन
    • पितृ आवाहन
    • श्राद्ध संकल्प
    • शास्त्रोक्त श्राद्ध विधि
    • विभिन्न पवित्र वेदियों एवं स्थलों पर पिंडदान
    • फल्गु नदी तट पर पितृ तर्पण
    • विष्णुपद मंदिर में पिंडदान
    • अक्षयवट में पितृ कर्म
    • प्रेतशिला एवं धर्मारण्य आदि पवित्र स्थलों पर पिंडदान
    • विशेष मंत्रोच्चारण एवं पितृ प्रार्थना
    • ब्राह्मण भोजन
    • ब्राह्मण दक्षिणा
    • पितृ शांति प्रार्थना एवं आशीर्वाद
    • आवश्यक तर्पण एवं अन्य पितृ कर्म

    विशेष सुविधाएं

    • 3 दिवसीय गया श्राद्ध एवं पिंडदान अनुष्ठान की धार्मिक व्यवस्था।
    • अनुभवी वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में शास्त्रोक्त श्राद्ध कर्म।
    • गया धाम के प्रमुख पवित्र पिंडदान स्थलों पर परंपरानुसार पितृ कर्म।
    • सीता कुंड, फल्गु नदी तट, विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट, प्रेतशिला एवं धर्मारण्य आदि स्थलों पर पिंडदान की व्यवस्था।
    • ब्राह्मण भोजन, वस्त्र दान, शय्यादान एवं तीर्थ पुरोहित दान सम्मिलित।
    • पितरों के नाम एवं गोत्र के अनुसार संकल्प एवं पिंडदान।
    • स्थानीय परंपरा एवं आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार पिंडदान के स्थलों एवं विधियों का निर्धारण।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • पूर्वजों के नाम
    • यजमान से पूर्वजों का संबंध
    • आवश्यक संकल्प संबंधी जानकारी
    • पिंडदान के लिए नए एवं स्वच्छ पारंपरिक वस्त्र

    विशेष निर्देश: एक पिंडदान स्थल से दूसरे स्थल तक आने-जाने की व्यवस्था यजमान को स्वयं करनी होगी। गया जी तक यात्रा, ठहरने एवं भोजन की व्यवस्था भी यजमान की स्वयं की होगी। महिला एवं पुरुष, दोनों अपनी कुल एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार यह अनुष्ठान करा सकते हैं।

    गया धाम में सम्पन्न यह 3 दिवसीय श्राद्ध एवं पिंडदान अनुष्ठान पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना के साथ किया जाने वाला पवित्र वैदिक कर्म है। यह पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने तथा परिवार के सुख, शांति एवं कल्याण की प्रार्थना का धार्मिक माध्यम है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹11,000₹15,00027% off

    2 वस्तुएँ शामिल

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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कैसे काम करता है

एक बार बुक करें — बाकी सब पुजारीजी संभाले

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  1. आप

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    पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।

  2. पुजारीजी

    हम प्रमाणित पुजारी नियुक्त करते हैं

    जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।

  3. पुजारीजी

    हम पूरी पूजा सामग्री की व्यवस्था करते हैं

    हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।

  4. पुजारीजी

    वैदिक विधि-विधान से पूजा संपन्न

    तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।

  5. पुजारीजी

    आपको प्रसाद व आशीर्वाद मिलता है

    संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।

हर चरण पर कॉल और व्हाट्सएप पर मार्गदर्शन व सहायता।

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