“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja

नारायण नाग बली पूजा दो अनुष्ठानों—नारायण बली और नाग बली—का संयोजन है, जो पितरों की आत्मा को शांति देने और कर्मजन्य बाधाओं को दूर करने के लिए किया जाता है। यह परिवार, धन और जीवन की समस्याओं को दूर कर संतुलन और शांति लाता है।
Duration
4h – 5h
Best time
सुबह
Starting price
₹21,000
नारायण नाग बली पूजा एक अत्यंत महत्वपूर्ण और शक्तिशाली वैदिक अनुष्ठान है, जो पितृ दोष और नाग दोष जैसे गंभीर दोषों को दूर करने के लिए किया जाता है। यह विशेष रूप से तब किया जाता है जब जीवन में बार-बार समस्याएं आती हैं, जैसे आर्थिक हानि, स्वास्थ्य समस्या, पारिवारिक कलह या बिना कारण बाधाएं।
यह पूजा दो भागों में होती है—नारायण बली, जो उन आत्माओं की शांति के लिए किया जाता है जिन्हें उचित मुक्ति नहीं मिल पाई, और नाग बली, जो सर्प से जुड़े दोषों या पापों के प्रायश्चित के लिए किया जाता है।
यह अनुष्ठान आमतौर पर पवित्र स्थलों या नदियों के किनारे अनुभवी पंडितों के मार्गदर्शन में किया जाता है। इसमें संकल्प, पिंड दान, मंत्र जाप और विस्तृत वैदिक विधियां शामिल होती हैं, जो एक या अधिक दिनों तक चल सकती हैं।
यह पूजा पितृ दोष को दूर करने, आत्माओं को शांति देने और जीवन की बाधाओं को समाप्त करने में अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। इससे परिवार में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
विधि-विधान और श्रद्धा के साथ किया गया नारायण नाग बली पूजा गहरे कर्म दोषों को दूर कर जीवन में शांति, संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।

त्र्यंबकेश्वर
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का उल्लेख शिवपुराण, स्कंदपुराण, पद्मपुराण और लिंगपुराण में विशेष रूप से मिलता है। यह केवल एक ज्योतिर्लिंग स्थल नहीं, बल्कि ऋषि-तप, यज्ञ, पितृ कर्म, श्राद्ध और ग्रह-दोष शांति की आदि भूमि मानी जाती है।
ब्रह्मगिरि पर्वत को पुराणों में “तपोभूमि” कहा गया है, जहाँ वैदिक काल से ही महर्षि-मुनियों ने कठोर तपस्या, यज्ञ और वेदाध्ययन किया। शास्त्रों में उल्लेख है कि यह क्षेत्र त्रेता और द्वापर युग से ही अत्यंत पवित्र रहा है तथा यहाँ की गई शिव-आराधना शीघ्र फलदायी मानी जाती है।
शिवपुराण और स्कंदपुराण के अनुसार महर्षि गौतम और माता अहिल्या ने ब्रह्मगिरि पर्वत पर कठोर तप किया। उनके आश्रम में कभी अकाल नहीं पड़ा, जबकि आसपास के क्षेत्र में संकट था। इससे कुछ ऋषियों में ईर्ष्या उत्पन्न हुई और उन्होंने गौतम ऋषि को गौहत्या का दोषी ठहराने के लिए षड्यंत्र रचा।
प्रायश्चित स्वरूप गौतम ऋषि ने भगवान शिव की घोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने अपनी जटाओं से गोदावरी नदी को पृथ्वी पर प्रवाहित किया। उसी क्षण वे स्वयं यहाँ ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए, जो आगे चलकर त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग कहलाया।
शिवपुराण का श्लोकः
“गौतमस्य तपोबलात्
शिवः प्रसन्नतामगात् ।
जटाजूटात् समुत्पन्ना
गोदावरी महा नदी ॥”
अर्थः गौतम ऋषि के तपोबल से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने अपनी जटाओं से गोदावरी नदी को उत्पन्न किया।
पुराणों के अनुसार भगवान शिव यहाँ “त्र्यंबक” कहलाते हैं क्योंकि—
यहाँ स्थित ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह मानी जाती है कि इसमें तीन मुखाकार स्वरूप निहित हैं, जो इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से विशिष्ट बनाते हैं।
गोदावरी को शास्त्रों में “दक्षिण की गंगा” कहा गया है। पद्मपुराण में वर्णन मिलता है—
“गंगाया दक्षिणे भागे
गोदावरी महामुने।”
अर्थः दक्षिण दिशा में गोदावरी, गंगा का ही स्वरूप है।
इसी कारण त्र्यंबकेश्वर में स्नान, तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पितरों को शीघ्र शांति और साधक को पुण्य की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों के अनुसार नाग दोष, पितृ दोष और ग्रह दोष मनुष्य के पूर्व जन्म के कर्म एवं पितृ ऋण से जुड़े होते हैं। शिवपुराण में उल्लेख है—
“नागानां प्रकोपो यत्र
तत्र शम्भु स्मरणं शुभम्।”
अर्थः जहाँ नाग दोष हो, वहाँ शिव-स्मरण और शिव क्षेत्र में किया गया अनुष्ठान शीघ्र फल देता है।
इसी कारण त्र्यंबकेश्वर को—
का सर्वोच्च केंद्र माना गया है।
वर्तमान त्र्यंबकेश्वर मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में पेशवा काल में कराया गया माना जाता है। काले पत्थर से निर्मित यह मंदिर प्राचीन नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसकी भव्य शिल्पकला, वैदिक प्रतीक और स्थापत्य आज भी इसे जीवंत आध्यात्मिक केंद्र बनाए हुए हैं।
Puजरिजि.coम त्र्यंबकेश्वर की हजारों वर्ष पुरानी आध्यात्मिक परंपरा को आधुनिक सुविधा के साथ श्रद्धालुओं तक पहुँचाता है—
श्रद्धा आपकी, सेवा हमारी
जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।
1 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
इस पैकेज में आचार्य एवं सभी आवश्यक पूजा सामग्री शामिल है, जो 3 दिन का नारायण बली एवं नाग बली अनुष्ठान पवित्र तीर्थ क्षेत्र में विधि-विधान से सम्पन्न किया जाता है।
यह सम्पूर्ण अनुष्ठान 3 दिनों में क्रमबद्ध रूप से सम्पन्न किया जाता है।
पूजा प्रक्रिया:
दिन 1 – नारायण बली
दिन 2 – नाग बली
दिन 3 – समापन विधि
विशेष सुविधा:
इस पैकेज में यजमान के लिए आवास (Accommodation) शामिल है।
महत्वपूर्ण निर्देश:
2 वस्तुएँ शामिल
नारायण नाग बलि पूजा के बारे में हमसे बात करें
WhatsAppभक्तों की प्रतिक्रिया
“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
एक बार जानकारी दें। पुजारी, सामग्री, विधि-विधान और अपडेट — सब आपके लिए संभाला जाता है।
पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।
जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।
हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।
तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।
संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।
ऊपर दिए गए पैकेज में से चुनें या पूछताछ करें, हमारी टीम आपकी तारीख और विवरणों की पुष्टि करेगी।