“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja

ग्रहण दोष तब बनता है जब राहु सूर्य को प्रभावित करता है, जिससे, करियर में भ्रम, अस्थिरता, पहचान की कमी और मानसिक तनाव उत्पन्न होता है। यह पूजा मंत्र जाप, हवन और विधि-विधान के माध्यम से इन प्रभावों को शांत कर आत्मविश्वास, स्थिरता और प्रगति प्रदान करती है।
Duration
2h – 3h
Starting price
₹5,100
ग्रहण दोष एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय दोष है जो तब बनता है जब जन्मकुंडली में सूर्य या चंद्रमा के साथ राहु-केतु की युति या दृष्टि होती है, या ये ग्रह एक ही भाव में स्थित होते हैं। यह दोष केवल एक खगोलीय घटना नहीं है बल्कि एक गूढ़ ज्योतिषीय स्थिति मानी जाती है जो व्यक्ति के मन, भावना, निर्णय क्षमता और भाग्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इससे व्यक्ति जीवन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उतार-चढ़ाव, भ्रम, मानसिक तनाव, अवसाद़ जैसी स्थितियों का सामना कर सकता है।
कुंडली में ग्रहण दोष कई स्थानों पर विभिन्न प्रभाव डालता हैः
दशम भाव में ग्रहण दोष करियर में रुकावटें, नौकरी बदलने की स्थितियाँ या व्यापार में निरंतर अस्थिरता ला सकता है।
द्वितीय, छठा, ग्यारहवाँ भाव में दोष वित्तीय बाधाएं, धन हानि या देनदारी जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।
सातवें भाव में ग्रहण योग वैवाहिक जीवन में मतभेद, संबंधों में कड़वाहट या समझौता-हीन स्थिति ला सकता है।
चतुर्थ भाव दोष परिवार, घर-परिवार के सुख-शांति में कमी तथा स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों को जन्म दे सकता है।
ग्रहण दोष के प्रभाव इसीलिए गंभीर माने जाते हैं कि यह सूर्य की जीवन शक्ति और चंद्रमा की मानसिक स्थिरता को प्रभावित करता है। सूर्य आत्म-विश्वास, शक्ति, प्रतिष्ठा और स्वास्थ्य का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि चंद्रमा मन, भावनाएँ और मानसिक संतुलन का कारक है। जब इनका प्रभाव राहु-केतु के प्रतिकूल संयोजन से बाधित होता है, तो व्यक्ति अक्सर प्रयास करके भी सफलता न मिलना, मेहनत का फल न मिलना, करियर में अस्थिरता, बार-बार नौकरी बदलना या व्यवसाय का सही दिशा न पाना जैसी स्थितियों से गुजरता है।
ग्रहण दोष शांति पूजा के विशेष लाभ
ग्रहण दोष को शांत करने के लिए वैदिक शास्त्रों में ग्रहण दोष शांति पूजा सबसे प्रभावी उपाय माना गया है। इस पूजा में संकल्प, गणेश-नवग्रह पूजन, विशिष्ट मंत्रों का जाप, वैदिक हवन और शांति-पाठ होता है। पूजा के मुख्य लाभ इस प्रकार हैंः
ग्रहण दोष पूजा सिर्फ कुंडली दोष का निवारण नहीं है, यह जीवन के हर क्षेत्र में रोक-टोक और बाधाओं को तोड़कर उन्नति, मानसिक संतुलन व स्थिरता प्रदान करने का शक्तिशाली उपाय भी है।
पूजा के दौरान कुछ विशेष नियम भी अपनाए जाते हैं — जैसे पवित्र वस्त्र पहनना, जो विशेष रूप से पूजा के समय शुभ माना जाता है, और पूजा समाप्ति के बाद इन्हें वहीं छोड़ देना। इसके अतिरिक्त दान भी किया जाता है, जिसमें राहु-केतु से संबंधित दान सामग्री जैसे सफेद वस्त्र, चंदन, चांदी आदि का दान करना शुभ फल देता है।
पुजारी जी से पूजा बुकिंग के लाभ
आज यह पूजा आप आसानी से पुजारी जी के माध्यम से विश्व-स्तरीय सेवाओं के साथ बुक कर सकते हैं, जहाँ अनुभवी, पारंपरिक और वैदिक ज्ञान मे पारंगत पंडित पूजा को सही मुहूर्त पर सम्पन्न कराते हैं। इसके लाभः्
सभी सामग्री और मंत्रों का समुचित प्रबंध।
इस पूजा से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, नए अवसर, स्थिरता और मानसिक संतुलन आता है — यही कारण है कि ग्रहण दोष शांति पूजा को आजकल बहुत लोगों द्वारा अपनाया जा रहा है।

त्र्यंबकेश्वर
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का उल्लेख शिवपुराण, स्कंदपुराण, पद्मपुराण और लिंगपुराण में विशेष रूप से मिलता है। यह केवल एक ज्योतिर्लिंग स्थल नहीं, बल्कि ऋषि-तप, यज्ञ, पितृ कर्म, श्राद्ध और ग्रह-दोष शांति की आदि भूमि मानी जाती है।
ब्रह्मगिरि पर्वत को पुराणों में “तपोभूमि” कहा गया है, जहाँ वैदिक काल से ही महर्षि-मुनियों ने कठोर तपस्या, यज्ञ और वेदाध्ययन किया। शास्त्रों में उल्लेख है कि यह क्षेत्र त्रेता और द्वापर युग से ही अत्यंत पवित्र रहा है तथा यहाँ की गई शिव-आराधना शीघ्र फलदायी मानी जाती है।
शिवपुराण और स्कंदपुराण के अनुसार महर्षि गौतम और माता अहिल्या ने ब्रह्मगिरि पर्वत पर कठोर तप किया। उनके आश्रम में कभी अकाल नहीं पड़ा, जबकि आसपास के क्षेत्र में संकट था। इससे कुछ ऋषियों में ईर्ष्या उत्पन्न हुई और उन्होंने गौतम ऋषि को गौहत्या का दोषी ठहराने के लिए षड्यंत्र रचा।
प्रायश्चित स्वरूप गौतम ऋषि ने भगवान शिव की घोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने अपनी जटाओं से गोदावरी नदी को पृथ्वी पर प्रवाहित किया। उसी क्षण वे स्वयं यहाँ ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए, जो आगे चलकर त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग कहलाया।
शिवपुराण का श्लोकः
“गौतमस्य तपोबलात्
शिवः प्रसन्नतामगात् ।
जटाजूटात् समुत्पन्ना
गोदावरी महा नदी ॥”
अर्थः गौतम ऋषि के तपोबल से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने अपनी जटाओं से गोदावरी नदी को उत्पन्न किया।
पुराणों के अनुसार भगवान शिव यहाँ “त्र्यंबक” कहलाते हैं क्योंकि—
यहाँ स्थित ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह मानी जाती है कि इसमें तीन मुखाकार स्वरूप निहित हैं, जो इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से विशिष्ट बनाते हैं।
गोदावरी को शास्त्रों में “दक्षिण की गंगा” कहा गया है। पद्मपुराण में वर्णन मिलता है—
“गंगाया दक्षिणे भागे
गोदावरी महामुने।”
अर्थः दक्षिण दिशा में गोदावरी, गंगा का ही स्वरूप है।
इसी कारण त्र्यंबकेश्वर में स्नान, तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पितरों को शीघ्र शांति और साधक को पुण्य की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों के अनुसार नाग दोष, पितृ दोष और ग्रह दोष मनुष्य के पूर्व जन्म के कर्म एवं पितृ ऋण से जुड़े होते हैं। शिवपुराण में उल्लेख है—
“नागानां प्रकोपो यत्र
तत्र शम्भु स्मरणं शुभम्।”
अर्थः जहाँ नाग दोष हो, वहाँ शिव-स्मरण और शिव क्षेत्र में किया गया अनुष्ठान शीघ्र फल देता है।
इसी कारण त्र्यंबकेश्वर को—
का सर्वोच्च केंद्र माना गया है।
वर्तमान त्र्यंबकेश्वर मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में पेशवा काल में कराया गया माना जाता है। काले पत्थर से निर्मित यह मंदिर प्राचीन नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसकी भव्य शिल्पकला, वैदिक प्रतीक और स्थापत्य आज भी इसे जीवंत आध्यात्मिक केंद्र बनाए हुए हैं।
Puजरिजि.coम त्र्यंबकेश्वर की हजारों वर्ष पुरानी आध्यात्मिक परंपरा को आधुनिक सुविधा के साथ श्रद्धालुओं तक पहुँचाता है—
श्रद्धा आपकी, सेवा हमारी
जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।
1 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
इस पैकेज में 1 आचार्य एवं सभी आवश्यक पूजा सामग्री शामिल है, जो सूर्य-राहु ग्रहण दोष शांति पूजा को पवित्र तीर्थ क्षेत्र में विधि-विधान से सम्पन्न करने के लिए किया जाता है।
पूजा प्रक्रिया:
विशेष निर्देश:
2 वस्तुएँ शामिल
3 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
इस पैकेज में 3 आचार्य एवं सभी आवश्यक पूजा सामग्री शामिल है, जो सूर्य-राहु ग्रहण दोष शांति पूजा को पवित्र तीर्थ क्षेत्र में अधिक प्रभावशाली रूप से सम्पन्न करता है।
इस विशेष अनुष्ठान में तांत्रिक राहु मंत्र जाप (18,000) एवं तांत्रिक सूर्य मंत्र जाप (7,000) शामिल है, जो दोष शांति एवं ग्रहों के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
पूजा प्रक्रिया:
विशेष निर्देश:
अतिरिक्त:
अधिक फल प्राप्ति हेतु सूर्य ग्रह दान सामग्री का दान किया जा सकता है।
2 वस्तुएँ शामिल
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WhatsAppभक्तों की प्रतिक्रिया
“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
एक बार जानकारी दें। पुजारी, सामग्री, विधि-विधान और अपडेट — सब आपके लिए संभाला जाता है।
पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।
जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।
हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।
तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।
संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।
ऊपर दिए गए पैकेज में से चुनें या पूछताछ करें, हमारी टीम आपकी तारीख और विवरणों की पुष्टि करेगी।