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Pujari Ji

नारायण बलि पूजा

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
नारायण बलि पूजा

नारायण बलि पूजा उन पितरों की आत्मा की शांति के लिए की जाती है, जिनका निधन दुर्मरण (अकाल या अप्राकृतिक मृत्यु) के कारण हुआ हो। ऐसे पितर अक्सर असंतुष्ट रह जाते हैं और उनकी आत्मा को शांति नहीं मिल पाती।

उनके उद्धार एवं मोक्ष की प्राप्ति के लिए यह पूजा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

यह विधि पितृ दोष को दूर करके जीवन में आने वाली बाधाओं को समाप्त करती है तथा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करती है।

Duration

2h 30m – 3h

Starting price

₹21,000

लाभ

  • पितृ दोष से मुक्ति और सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति।
  • अकाल मृत्यु के कारण भटक रही आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति।
  • जीवन की अनचाही बाधाओं से छुटकारा।
  • पूर्वजों की आत्मा को शांति और उनकी प्रसन्नता।
  • मुख्य देवताः भगवान नारायण।

नारायण बलि पूजा

नारायण-बलि पूजा एक प्राचीन एवं अत्यंत प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान है, जिसका वर्णन गरुड़ पुराण में मिलता है। यह पूजा विशेष रूप से उन पितरों (पूर्वजों) की आत्मा की शांति एवं मोक्ष के लिए की जाती है, जिनकी मृत्यु अकाल या अप्राकृतिक परिस्थितियों में हुई हो।

जब किसी व्यक्ति का विधिवत श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान पूर्ण रूप से नहीं हो पाता, तो उसकी आत्मा असंतुष्ट रह जाती है। ऐसी आत्माएं कभी-कभी अपने परिजनों के जीवन में बाधाएं उत्पन्न करती हैं।

नारायण बलि पूजा के माध्यम से इन आत्माओं को शांति प्रदान कर उन्हें मोक्ष की प्राप्ति कराई जाती है।

नाना प्रकार के दुर्मरण (अकाल मृत्यु) जो शास्त्रों मे बताए गए है

शास्त्रों में विभिन्न प्रकार की मृत्यु को दुर्मरण कहा गया है। ऐसे दुर्मरण से मृत व्यक्ति की दुर्मरण की निवृत्ति तथा सद्गति की प्राप्ति के लिए मृतक के श्राद्ध आदि कर्मों से पूर्व प्रायश्चित्त रूप में नारायण बलि करने का विधान बताया गया है।

दुर्मरण के प्रकार

  1. डूबने से मृत्यु
  2. फाँसी लगाने से मृत्यु
  3. विष खाने से मृत्यु
  4. अग्नि में जलने से मृत्यु
  5. चाण्डाल के हाथ से मृत्यु
  6. चोर के हाथ से मृत्यु
  7. शत्रु के हाथ से मृत्यु
  8. म्लेच्छ आदि के हाथ से मृत्यु
  9. वृक्ष से गिरने से मृत्यु
  10. बन्दीखाने में मृत्यु
  11. विस्फोट/हैजा आदि से मृत्यु
  12. मकान में दबकर मृत्यु
  13. शस्त्र से मृत्यु
  14. वाहन से गिरकर मृत्यु
  15. गाड़ी के नीचे दबकर मृत्यु
  16. हाथी के दाँत से मृत्यु
  17. पर्वत से गिरकर मृत्यु
  18. पागल होकर मृत्यु
  19. कुष्ठ रोग से मृत्यु
  20. महारोग से पीड़ित होकर मृत्यु
  21. क्षयरोग से मृत्यु
  22. पाप के अन्न से मृत्यु
  23. मूत्र-विष्ठा में पड़े रहकर मृत्यु
  24. घर के अंदर मृगी रोग से मृत्यु
  25. भगन्दर, गण्डमाला, पाण्डु आदि रोगों से मृत्यु
  26. ऊपर के छिद्रों में अशुद्धि से मृत्यु
  27. नीचे के छिद्रों में अशुद्धि से मृत्यु
  28. दोनों छिद्रों में अशुद्धि से मृत्यु
  29. सन्ध्यालोप से मृत्यु
  30. शौचालोप से मृत्यु
  31. अकृतस्नान-मरण
  32. रजस्वला के स्पर्श से मृत्यु
  33. दान किए बिना मृत्यु
  34. परदेश में मृत्यु
  35. अन्य जाति के घर में मृत्यु
  36. आधा दाह होने से मृत्यु
  37. चिता का बुझ जाना
  38. दक्षिणायन में मृत्यु
  39. पंचक में मृत्यु
  40. त्रिपुष्कर में मृत्यु
  41. रात्रि में मृत्यु
  42. गुरु से हीन होने से मृत्यु
  43. तुलसी, गंगाजल आदि वस्तुओं से तथा स्नान से रहित शव का ले जाया जाना
  44. खट्वा/खाट के ऊपर मृत्यु
  45. अस्पताल में मृत्यु
  • धर्म शास्त्रों के अनुसार इन प्रकार की मृत्यु को दुर्मरण कहा गया है।

नारायण बलि (दुर्मरण होने पर)

जिससे इस दुर्मरण हुआ हो तो उसकी निवृत्ति तथा सद्गति प्राप्ति के लिए इस प्रकार मरने वाले मनुष्य के श्राद्ध के पूर्व प्रायश्चित्त रूप में नारायणबलि करने का विधान है। इस प्रायश्चित्त के बिना मृत जीव को श्राद्ध-प्रदत्त अन्नादि प्राप्त नहीं होते, वे अन्तरीक्ष में विनष्ट हो जाते हैं— “नौपतिष्ठति तत्सर्वमन्तरिक्षे विनश्यति”।” ( श्राद्ध प्रकाश)

नारायण बलि पूजा का उद्देश्य

नारायण बलि एक शास्त्रोक्त वैदिक अनुष्ठान है, जिसे विशेष रूप से दुर्मरण से संबंधित प्रायश्चित्त तथा मृतक की सद्गति के उद्देश्य से किया जाता है। इसके माध्यम से मृतक के लिए शास्त्रोक्त विधि से कर्म करके उसकी आत्मा की शांति एवं सद्गति की कामना की जाती है।

  • यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु उपर्युक्त दुर्मरण के प्रकारों में हुई हो, तो शास्त्रोक्त परंपरा के अनुसार सामान्य श्राद्ध कर्म से पूर्व नारायण बलि को प्रायश्चित्त के रूप में कराया जाता है।

नारायण बलि पूजा के लाभ

  • पितृ दोष का निवारण
  • अकाल मृत्यु दोष की शांति
  • भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति
  • जीवन की बाधाओं और रुकावटों का अंत
  • संतान सुख की प्राप्ति
  • विवाह एवं दांपत्य जीवन में सुधार
  • आर्थिक उन्नति एवं समृद्धि
  • मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा

यह पूजा कहाँ कराई जाती है?

नारायण बलि पूजा भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर विधिवत कराई जाती हैः

  • नारायण बलि पूजा त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), काशी, गया, उज्जैन आदि प्रमुख धार्मिक तीर्थस्थलों के साथ-साथ अपने घर पर भी अनुभवी आचार्य द्वारा पूर्ण वैदिक विधि-विधान एवं शास्त्रोक्त पद्धति से संपन्न कराई जा सकती है।

क्यों आवश्यक है नारायण बलि पूजा?

यदि परिवार में लगातार समस्याएं, आर्थिक रुकावट, संतान में बाधा, विवाह में देरी, या बिना कारण मानसिक तनाव बना रहता है, तो यह पितृ दोष का संकेत हो सकता है।

ऐसी स्थिति में नारायण बलि पूजा अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती है।

नारायण बलि पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन की जटिल समस्याओं के समाधान का एक दिव्य माध्यम है। यह पूजा पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष प्रदान कर परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाती है।

पूजा स्थान — वाराणसी

पिशाच मोचन कुंड

पिशाच मोचन कुंड

वाराणसी

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ अकाल या असामान्य मृत्यु से पीड़ित आत्माओं की शांति हेतु अनुष्ठान किए जाते हैं।

यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष और ब्रह्म दोष से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बलि, पिंडदान और तर्पण जैसे प्रमुख अनुष्ठान संपन्न होते हैं।

निकट स्थित कपर्दीश्वर महादेव मंदिर इसकी आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाता है। कुंड के पास स्थित पीपल वृक्ष को असंतुष्ट आत्माओं की शांति का प्रतीक माना जाता है।

पितृपक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए आते हैं।

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी में स्थित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष, ब्राह्मण दोष तथा अकाल मृत्यु से मुक्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहाँ भगवान शिव स्वयं आत्मा को तारक मंत्र देकर मुक्ति प्रदान करते हैं। किंतु जो व्यक्ति काशी के बाहर अकाल या असामयिक मृत्यु को प्राप्त होते हैं, उनकी आत्मा की शांति एवं उद्धार के लिए पिशाच मोचन कुंड का विशेष महत्व है।

इतिहास एवं पौराणिक कथा

काशी खंड एवं गरुड़ पुराण के अनुसार, पिशाच मोचन का प्राचीन नाम विमल तीर्थ या विमलोदक तीर्थ था। इसकी उत्पत्ति गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से भी पूर्व मानी जाती है।

मान्यता है कि भगवान शिव के भक्त कपर्दी ने इस कुंड की स्थापना की। उनकी तपस्या से यहाँ कपर्दीश्वर महादेव प्रकट हुए।

कथा के अनुसार महर्षि वाल्मीकि के मार्गदर्शन में एक ब्राह्मण, जो अपने पूर्व कर्मों के कारण प्रेत योनि में था, इस कुंड में स्नान कर कपर्दीश्वर महादेव की पूजा करने से मुक्त हुआ। तभी से यह स्थल “पिशाच मोचन” कहलाया।

आध्यात्मिक महत्व

  • गया के बाद यह पितृ कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
  • यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध विधिपूर्वक संपन्न किया जाता है।
  • पितृ पक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ श्राद्ध, तर्पण एवं विशेष अनुष्ठान करते हैं।

पवित्र पीपल वृक्ष

कुंड के समीप स्थित पीपल वृक्ष लोक-मान्यता के अनुसार असंतुष्ट आत्माओं की शांति से जुड़ा है। यहाँ प्रतीकात्मक रूप से सिक्के और कीलें लगाई जाती हैं। यद्यपि यह शास्त्रसम्मत परंपरा नहीं है, परंतु यह वर्षों से लोक-विश्वास का भाग रही है।

यहाँ किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान

🔸 त्रिपिंडी श्राद्ध

सत्व, रज और तम – तीनों प्रकार की प्रेत योनियों से मुक्ति हेतु।

ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की पूजा तथा तिल, जौ और चावल के आटे से पिंडदान।

🔸 नारायण बलि

दुर्घटना, आत्महत्या या अकाल मृत्यु से ग्रस्त आत्माओं की शांति हेतु।

🔸 पिंडदान एवं तर्पण

तीन पीढ़ियों तक के पितरों की शांति और पितृ दोष निवारण के लिए।

पूजारी जी द्वारा उपलब्ध सेवाएँ

  • पूर्ण त्रिपिंडी श्राद्ध व्यवस्था
  • नारायण बलि विशेष अनुष्ठान
  • विधिपूर्वक पिंडदान एवं तर्पण
  • नाम, गोत्र एवं कुल अनुसार व्यक्तिगत संकल्प
  • अनुभवी एवं शास्त्र-प्रमाणित स्थानीय पंडित
  • संपूर्ण पूजा सामग्री (तिल, जौ, चावल, वस्त्र, कलश, हवन सामग्री आदि)
  • ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा व्यवस्था
  • ऑन-साइट एवं ऑनलाइन बुकिंग सुविधा
  • विदेश से श्रद्धालुओं हेतु लाइव वीडियो विकल्प

हम प्रत्येक अनुष्ठान को पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध वैदिक विधि और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराते हैं।

👉 पूजारी जी से पिशाच मोचन कुंड में अपनी सेवा बुक करें और पितरों को शांति एवं मोक्ष प्रदान करने का पुण्य लाभ प्राप्त करें।

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ अकाल या असामान्य मृत्यु से पीड़ित आत्माओं की शांति हेतु अनुष्ठान किए जाते हैं।

यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष और ब्रह्म दोष से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बलि, पिंडदान और तर्पण जैसे प्रमुख अनुष्ठान संपन्न होते हैं।

निकट स्थित कपर्दीश्वर महादेव मंदिर इसकी आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाता है। कुंड के पास स्थित पीपल वृक्ष को असंतुष्ट आत्माओं की शांति का प्रतीक माना जाता है।

पितृपक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए आते हैं।

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी में स्थित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष, ब्राह्मण दोष तथा अकाल मृत्यु से मुक्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहाँ भगवान शिव स्वयं आत्मा को तारक मंत्र देकर मुक्ति प्रदान करते हैं। किंतु जो व्यक्ति काशी के बाहर अकाल या असामयिक मृत्यु को प्राप्त होते हैं, उनकी आत्मा की शांति एवं उद्धार के लिए पिशाच मोचन कुंड का विशेष महत्व है।

इतिहास एवं पौराणिक कथा

काशी खंड एवं गरुड़ पुराण के अनुसार, पिशाच मोचन का प्राचीन नाम विमल तीर्थ या विमलोदक तीर्थ था। इसकी उत्पत्ति गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से भी पूर्व मानी जाती है।

मान्यता है कि भगवान शिव के भक्त कपर्दी ने इस कुंड की स्थापना की। उनकी तपस्या से यहाँ कपर्दीश्वर महादेव प्रकट हुए।

कथा के अनुसार महर्षि वाल्मीकि के मार्गदर्शन में एक ब्राह्मण, जो अपने पूर्व कर्मों के कारण प्रेत योनि में था, इस कुंड में स्नान कर कपर्दीश्वर महादेव की पूजा करने से मुक्त हुआ। तभी से यह स्थल “पिशाच मोचन” कहलाया।

आध्यात्मिक महत्व

  • गया के बाद यह पितृ कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
  • यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध विधिपूर्वक संपन्न किया जाता है।
  • पितृ पक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ श्राद्ध, तर्पण एवं विशेष अनुष्ठान करते हैं।

पवित्र पीपल वृक्ष

कुंड के समीप स्थित पीपल वृक्ष लोक-मान्यता के अनुसार असंतुष्ट आत्माओं की शांति से जुड़ा है। यहाँ प्रतीकात्मक रूप से सिक्के और कीलें लगाई जाती हैं। यद्यपि यह शास्त्रसम्मत परंपरा नहीं है, परंतु यह वर्षों से लोक-विश्वास का भाग रही है।

यहाँ किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान

🔸 त्रिपिंडी श्राद्ध

सत्व, रज और तम – तीनों प्रकार की प्रेत योनियों से मुक्ति हेतु।

ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की पूजा तथा तिल, जौ और चावल के आटे से पिंडदान।

🔸 नारायण बलि

दुर्घटना, आत्महत्या या अकाल मृत्यु से ग्रस्त आत्माओं की शांति हेतु।

🔸 पिंडदान एवं तर्पण

तीन पीढ़ियों तक के पितरों की शांति और पितृ दोष निवारण के लिए।

पूजारी जी द्वारा उपलब्ध सेवाएँ

  • पूर्ण त्रिपिंडी श्राद्ध व्यवस्था
  • नारायण बलि विशेष अनुष्ठान
  • विधिपूर्वक पिंडदान एवं तर्पण
  • नाम, गोत्र एवं कुल अनुसार व्यक्तिगत संकल्प
  • अनुभवी एवं शास्त्र-प्रमाणित स्थानीय पंडित
  • संपूर्ण पूजा सामग्री (तिल, जौ, चावल, वस्त्र, कलश, हवन सामग्री आदि)
  • ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा व्यवस्था
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    इस पैकेज में 5 आचार्य एवं सभी आवश्यक पूजा सामग्री शामिल है, जो नारायण बली एवं पितृ शांति अनुष्ठान को पवित्र तीर्थ क्षेत्र में अधिक विस्तृत और प्रभावशाली रूप से सम्पन्न करता है।

    पूजा की अवधि लगभग 3 से 4 घंटे होती है। यदि त्रिपिंडी श्राद्ध जोड़ा जाता है, तो इसमें लगभग 1 घंटा अतिरिक्त लगेगा।

    पूजा प्रक्रिया:

    • स्वस्ति वाचन
    • संकल्प
    • विष्णु पूजन
    • सहस्रनाम अर्चन
    • सत्येश पूजन
    • कलश स्थापना
    • पंच कलश पूजा
    • ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, यम एवं पितृ देवताओं का आवाहन एवं पूजन
    • पंचसूक्त पाठ
    • मंत्र जाप
    • नारायण बली हवन
    • पिंड दान
    • पिंड तर्पण

    महत्वपूर्ण निर्देश:

    • कृपया अपने पूर्वजों के नाम लिखकर साथ लाएं।
    • पूजा के बाद वस्त्र बदलना आवश्यक है, इसलिए अतिरिक्त कपड़े साथ रखें।
    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹21,000₹25,00016% off

    2 वस्तुएँ शामिल

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”

प्रिया शर्मा

मुंबई• Satyanarayan Puja

“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek

“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”

मीना अय्यर

बैंगलोर• Graha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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कैसे काम करता है

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  1. आप

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  3. पुजारीजी

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  4. पुजारीजी

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    तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।

  5. पुजारीजी

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    संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।

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