“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja

गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी भगवान केदारेश्वर महादेव एवं माता गौरी को समर्पित एक प्राचीन एवं पूजनीय शिव मंदिर माना जाता है। यहाँ सम्पन्न होने वाली चंद्र ग्रह पूजा भगवान चंद्रदेव, भगवान केदारेश्वर महादेव, माता गौरी एवं भगवान गणेश की आराधना के साथ की जाती है।
वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, माता, स्मरण शक्ति तथा मानसिक स्थिरता का कारक माना गया है। जन्म कुंडली में चंद्रमा के अशुभ, कमजोर अथवा पीड़ित होने पर व्यक्ति मानसिक तनाव, चिंता, भावनात्मक अस्थिरता, अनिद्रा, भय अथवा पारिवारिक तनाव जैसी परिस्थितियों का अनुभव कर सकता है। ऐसी स्थिति में श्रद्धालु चंद्र ग्रह की शांति तथा भगवान शिव एवं माता गौरी की कृपा की मंगलकामना से यह पूजा सम्पन्न कराते हैं।
Duration
3h – 4h
Best time
सुबह
Starting price
₹11,000
गौरी केदारेश्वर मंदिर वाराणसी के प्राचीन एवं श्रद्धेय शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। भगवान केदारेश्वर महादेव एवं माता गौरी की आराधना से जुड़े इस पवित्र स्थान पर चंद्र ग्रह पूजा ग्रह शांति एवं आध्यात्मिक कल्याण की भावना से सम्पन्न की जाती है।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाओं, मानसिक स्थिरता, माता, स्मरण शक्ति तथा संवेदनशीलता से संबंधित माना जाता है। जन्म कुंडली में चंद्रमा कमजोर, नीच, अशुभ अथवा पीड़ित होने पर मानसिक अशांति, चिंता, अनिद्रा, भय, निर्णय लेने में कठिनाई तथा भावनात्मक अस्थिरता जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसी स्थितियों में वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन एवं हवन के माध्यम से चंद्र ग्रह की शांति की प्रार्थना की जाती है।
भगवान शिव को चंद्रशेखर एवं सोमेश्वर के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि उनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित हैं। इसलिए भगवान शिव की आराधना को चंद्र ग्रह से संबंधित धार्मिक साधना में विशेष महत्व दिया जाता है।
मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व
इस अनुष्ठान में निम्न देवताओं की विधिपूर्वक पूजा की जाती हैः
भगवान शिव के चंद्रशेखर स्वरूप का चंद्रमा से विशेष धार्मिक संबंध माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव की आराधना के माध्यम से चंद्र ग्रह के अशुभ प्रभावों की शांति तथा मानसिक स्थिरता की प्रार्थना की जाती है। माता गौरी की आराधना पारिवारिक सुख, सौहार्द एवं मंगलकामना से जुड़ी मानी जाती है।
शुभ मुहूर्त / यह पूजा कब करानी चाहिए?
किन परिस्थितियों में यह पूजा करानी चाहिए?
प्रमुख मंत्र
पूजा के लाभ
आध्यात्मिक महत्व
गौरी केदारेश्वर मंदिर भगवान शिव एवं माता गौरी की संयुक्त उपासना से जुड़ा एक पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस पावन स्थान पर श्रद्धापूर्वक की गई ग्रह शांति पूजा भगवान शिव एवं माता गौरी की कृपा प्राप्त करने की मंगलकामना के साथ सम्पन्न की जाती है।
चंद्रमा को मन एवं भावनाओं से संबंधित माना जाता है, जबकि भगवान शिव के चंद्रशेखर स्वरूप में चंद्रमा का विशेष धार्मिक महत्व है। इसलिए चंद्र ग्रह पूजा के दौरान भगवान शिव की आराधना, चंद्रदेव का पूजन, वैदिक मंत्रोच्चार तथा हवन को आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेष जानकारी
गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी में सम्पन्न यह चंद्र ग्रह पूजा चंद्र देव की कृपा प्राप्त करने हेतु अत्यंत शुभ एवं प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान मानी जाती है। यह पूजा चंद्र दोष की शांति, मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, पारिवारिक सुख, सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना के लिए श्रद्धापूर्वक सम्पन्न की जाती है।

वाराणसी
पवित्र काशी नगरी के दक्षिणी भाग में स्थित गौरी केदारेश्वर मंदिर भगवान केदारेश्वर महादेव एवं माता गौरी को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन, जागृत एवं आध्यात्मिक महत्व वाला शिव मंदिर है। यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध केदार घाट के समीप पवित्र माँ गंगा के तट पर स्थित है, जिसके कारण इसका धार्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। काशी आने वाले श्रद्धालु श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन के साथ-साथ गौरी केदारेश्वर मंदिर में रुद्राभिषेक, जलाभिषेक एवं विशेष शिव पूजा अवश्य करते हैं।
ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान शिव और माता गौरी की संयुक्त आराधना करने से वैवाहिक सुख, पारिवारिक समृद्धि, संतान सुख, मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। केदार घाट पर गंगा स्नान करने के पश्चात गौरी केदारेश्वर महादेव के दर्शन एवं पूजा का विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
गौरी केदारेश्वर मंदिर केवल एक प्राचीन मंदिर नहीं, बल्कि शिवभक्ति, सनातन परंपरा, वैदिक अनुष्ठानों एवं काशी की दिव्य आध्यात्मिक संस्कृति का जीवंत केंद्र है। भारत ही नहीं बल्कि विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु यहां रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, नवग्रह शांति पूजा, संकल्प पूजा एवं विशेष शिव अनुष्ठान सम्पन्न कराने के लिए आते हैं।
गौरी केदारेश्वर मंदिर का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गौरी केदारेश्वर मंदिर काशी के अत्यंत पवित्र शिवालयों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान केदारेश्वर महादेव स्वयं भक्तों पर कृपा करते हैं तथा माता गौरी की आराधना से सौभाग्य, दांपत्य सुख एवं जीवन में समृद्धि प्राप्त होती है।
काशी खंड सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में केदार क्षेत्र का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु पहले केदार घाट पर माँ गंगा में स्नान करके तत्पश्चात गौरी केदारेश्वर महादेव का पूजन करते हैं, उन्हें विशेष पुण्य एवं भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
ऐसी मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक पूजा एवं दर्शन करने से—
विशेष रूप से श्रावण मास, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत एवं सावन के सोमवार के दिन यहां पूजा का अत्यंत विशेष महत्व माना जाता है।
गौरी केदारेश्वर मंदिर में होने वाले प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान
मंदिर में प्रतिदिन अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा विभिन्न धार्मिक एवं वैदिक अनुष्ठान सम्पन्न कराए जाते हैं।
प्रमुख अनुष्ठान
अनेक श्रद्धालु केदार घाट पर गंगा स्नान एवं गंगा पूजन करने के पश्चात मंदिर में रुद्राभिषेक एवं शिव पूजन सम्पन्न कराते हैं, जिसे अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है।
गौरी केदारेश्वर मंदिर के प्रमुख पवित्र स्थल
भगवान केदारेश्वर महादेव
मंदिर का मुख्य आकर्षण भगवान केदारेश्वर महादेव का प्राचीन एवं पवित्र शिवलिंग है, जिसकी पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
माता गौरी मंदिर
माता गौरी का दिव्य विग्रह श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र है। यहां सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन एवं परिवार की समृद्धि के लिए विशेष पूजा की जाती है।
केदार घाट एवं माँ गंगा
मंदिर के निकट स्थित केदार घाट काशी के सबसे पवित्र घाटों में से एक माना जाता है। श्रद्धालु यहां माँ गंगा में स्नान, गंगा पूजन, दीपदान एवं संकल्प करके भगवान शिव के दर्शन करते हैं।
अभिषेक एवं अनुष्ठान स्थल
यहां श्रद्धालु जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल एवं बिल्वपत्र अर्पित कर भगवान शिव का विधिपूर्वक अभिषेक करते हैं।
ध्यान एवं साधना क्षेत्र
मंदिर का शांत, सात्त्विक एवं आध्यात्मिक वातावरण जप, ध्यान एवं शिव साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।
गौरी केदारेश्वर मंदिर में पूजा करवाने के लाभ
ऐसी मान्यता है कि यहां विधिपूर्वक पूजा एवं वैदिक अनुष्ठान सम्पन्न कराने से श्रद्धालुओं को अनेक आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं—
विशेष रूप से रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, बिल्वपत्र अर्चन एवं गंगा पूजन यहां अत्यंत फलदायी माने जाते हैं।
गौरी केदारेश्वर मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण
गौरी केदारेश्वर मंदिर एवं इसके समीप स्थित केदार घाट का वातावरण अत्यंत शांत, सात्त्विक एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहता है। प्रातःकाल माँ गंगा के तट पर उगते सूर्य का मनोहारी दृश्य, वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि एवं मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभूति प्रदान करती है।
सायंकाल के समय केदार घाट पर दीपों की मनमोहक आभा, गंगा पूजन एवं मंदिर में होने वाली आरती भक्तों के मन को भक्ति एवं आध्यात्मिक आनंद से भर देती है।
विशेष अवसरों पर गौरी केदारेश्वर मंदिर का महत्व
विशेष पर्वों एवं धार्मिक अवसरों पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन एवं पूजा के लिए पहुंचते हैं—
इन अवसरों पर केदार घाट, माँ गंगा एवं गौरी केदारेश्वर मंदिर का संपूर्ण क्षेत्र शिव भक्ति, वैदिक अनुष्ठानों एवं धार्मिक उल्लास से आलोकित हो उठता है।
गौरी केदारेश्वर मंदिर कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग
निकटतम लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी मंदिर से लगभग 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
रेल मार्ग
वाराणसी जंक्शन, बनारस रेलवे स्टेशन एवं काशी रेलवे स्टेशन से टैक्सी, ऑटो एवं ई-रिक्शा द्वारा मंदिर एवं केदार घाट तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
सड़क मार्ग
गौरी केदारेश्वर मंदिर एवं केदार घाट वाराणसी के प्रमुख मार्गों से अच्छी तरह जुड़े हुए हैं। शहर के किसी भी हिस्से से स्थानीय परिवहन द्वारा यहां सहजता से पहुंचा जा सकता है।
दर्शन हेतु सर्वोत्तम समय
मंदिर वर्षभर दर्शन एवं पूजा के लिए खुला रहता है, किन्तु अक्टूबर से मार्च, श्रावण मास, महाशिवरात्रि एवं प्रातःकालीन गंगा स्नान का समय विशेष रूप से शुभ एवं पुण्यदायी माना जाता है।
केदार घाट पर स्नान कर गौरी केदारेश्वर महादेव के दर्शन करने की परंपरा आज भी अत्यंत श्रद्धा एवं आस्था के साथ निभाई जाती है।
निष्कर्ष
गौरी केदारेश्वर मंदिर, केदार घाट एवं माँ गंगा का पावन संगम काशी की सनातन आध्यात्मिक परंपरा का अद्भुत प्रतीक है। भगवान केदारेश्वर महादेव एवं माता गौरी की कृपा प्राप्त करने के लिए यह मंदिर वाराणसी के प्रमुख एवं अत्यंत पूजनीय धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां श्रद्धापूर्वक सम्पन्न होने वाले रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, गंगा पूजन, जलाभिषेक एवं अन्य वैदिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति तथा भगवान शिव एवं माता गौरी की दिव्य कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माने जाते हैं।
जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।
2 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी में 2 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा चंद्र ग्रह पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाएगी। यह वैदिक अनुष्ठान कुंडली में अशुभ, कमजोर अथवा पीड़ित चंद्र ग्रह से संबंधित प्रभावों की शांति तथा भगवान केदारेश्वर महादेव, माता गौरी एवं भगवान चंद्रदेव की कृपा की मंगलकामना के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पूजा मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, पारिवारिक सुख एवं सकारात्मकता की प्रार्थना के लिए विशेष रूप से की जाती है।
पूजा में शामिल विधियां
विशेष सुविधाएं
आवश्यक जानकारी
भगवान चंद्रदेव, भगवान केदारेश्वर महादेव एवं माता गौरी की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह पवित्र अनुष्ठान चंद्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, पारिवारिक सुख एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना के लिए किया जाता है। श्रद्धापूर्वक किए गए मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में शांति, स्थिरता, सकारात्मकता और मंगल की कामना की जाती है।
2 वस्तुएँ शामिल
3 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी में 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा चंद्र ग्रह पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाती है। यह विशेष वैदिक अनुष्ठान अशुभ अथवा कमजोर चंद्र ग्रह से संबंधित प्रभावों की शांति तथा भगवान केदारेश्वर महादेव, माता गौरी एवं भगवान चंद्रदेव की कृपा की मंगलकामना के लिए किया जाता है। पूजा के माध्यम से मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, स्वास्थ्य, पारिवारिक सुख एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना की जाती है। यह अनुष्ठान लगभग 2 से 3 घंटे में संपन्न होता है तथा इसमें चंद्र मंत्रों का 44,000 जप, वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति शामिल है।
पूजा में शामिल विधियां
विशेष सुविधाएं
अनुष्ठान की अवधि
यह विशेष चंद्र ग्रह पूजा लगभग 2 से 3 घंटे में संपन्न कराई जाती है।
आवश्यक जानकारी
भगवान चंद्रदेव, भगवान केदारेश्वर महादेव एवं माता गौरी की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह पवित्र अनुष्ठान चंद्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, पारिवारिक सुख एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए किया जाता है। श्रद्धापूर्वक किए गए मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में सुख, शांति, स्थिरता, समृद्धि और मंगल की प्रार्थना की जाती है।
2 वस्तुएँ शामिल
5 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी में 5 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा चंद्र ग्रह पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाती है। यह विशेष वैदिक अनुष्ठान भगवान चंद्रदेव, भगवान केदारेश्वर महादेव एवं माता गौरी की कृपा की मंगलकामना तथा चंद्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन एवं पारिवारिक सुख-शांति की प्रार्थना के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पूजा चंद्र दोष, मानसिक तनाव, भय, अनिद्रा, पारिवारिक अशांति तथा आध्यात्मिक उन्नति से संबंधित मंगलकामनाओं के लिए की जाती है। अनुष्ठान लगभग 3 से 4 घंटे में संपन्न होता है, जिसमें चंद्र ग्रह के वैदिक मंत्र का 11,000 जप, वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति शामिल है।
पूजा में शामिल विधियां
विशेष सुविधाएं
आवश्यक जानकारी
भगवान चंद्रदेव, भगवान केदारेश्वर महादेव एवं माता गौरी की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह पवित्र अनुष्ठान चंद्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, पारिवारिक सुख-शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना के लिए किया जाता है। श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में शांति, स्थिरता, सुख, समृद्धि और मंगल की मंगलकामना की जाती है।
2 वस्तुएँ शामिल
21 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी में 21 अनुभवी वैदिक ब्राह्मणों द्वारा भगवान चंद्रदेव, भगवान केदारेश्वर महादेव एवं माता गौरी की विशेष आराधना के साथ चंद्र ग्रह पूजा शास्त्रोक्त विधि-विधान से संपन्न कराई जाएगी। यह विशेष अनुष्ठान चंद्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति, मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, पारिवारिक सुख एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना से किया जाता है। अनुष्ठान सामान्यतः 3 दिनों में तथा आचार्य एवं यजमान की उपलब्धता के अनुसार 1 दिन में भी संपन्न किया जा सकता है।
पूजा में शामिल विधियां
विशेष सुविधाएं
अनुष्ठान की अवधि
यह विशेष अनुष्ठान सामान्यतः 3 दिनों में संपन्न कराया जाता है। आचार्य एवं यजमान की उपलब्धता के अनुसार इसे 1 दिन में भी संपन्न कराया जा सकता है।
आवश्यक जानकारी
भगवान चंद्रदेव, भगवान केदारेश्वर महादेव एवं माता गौरी की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह पवित्र अनुष्ठान चंद्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, पारिवारिक सुख-समृद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना के लिए किया जाता है। वैदिक मंत्र जाप, पूजन, हवन, पूर्णाहुति एवं महाआरती के माध्यम से यजमान के जीवन में शांति, स्थिरता, सकारात्मकता और मंगल की कामना की जाती है।
2 वस्तुएँ शामिल
चंद्र ग्रह जाप के बारे में हमसे बात करें
WhatsAppभक्तों की प्रतिक्रिया
“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
एक बार जानकारी दें। पुजारी, सामग्री, विधि-विधान और अपडेट — सब आपके लिए संभाला जाता है।
पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।
जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।
हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।
तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।
संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।
ऊपर दिए गए पैकेज में से चुनें या पूछताछ करें, हमारी टीम आपकी तारीख और विवरणों की पुष्टि करेगी।