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Pujari Ji

गया श्राद्ध पूजा

श्री विष्णुपद मंदिर, गया
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
गया श्राद्ध पूजा

गया धाम को सनातन परंपरा में पितृ कर्म, श्राद्ध एवं पिंडदान के प्रमुख तीर्थों में माना जाता है। यहाँ भगवान विष्णु के चरणचिह्नों से संबंधित विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी, अक्षयवट, सीता कुंड, रामशिला, प्रेतशिला तथा गया क्षेत्र की अन्य पवित्र वेदियों का विशेष धार्मिक महत्व है।

गया श्राद्ध एवं पिंडदान में यजमान अपने दिवंगत पूर्वजों के निमित्त संकल्प, तर्पण, श्राद्ध एवं पिंड अर्पण करता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन कर्मों के माध्यम से पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है तथा परिवार के सुख-शांति और कुल कल्याण के लिए प्रार्थना की जाती है।

यह विस्तृत गया श्राद्ध व्यवस्था उन श्रद्धालुओं के लिए उपयुक्त है जो गया धाम में विशेष एवं विस्तृत पितृ कर्म कराना चाहते हैं। निर्धारित धार्मिक परंपरा एवं चुनी गई व्यवस्था के अनुसार गया क्षेत्र की 45 पवित्र वेदियों पर पिंडदान तथा अन्य संबंधित पितृ कर्म सम्पन्न कराए जा सकते हैं।

Duration

1h 30m – 2h 30m

Best time

सुबह

Starting price

₹11,000

लाभ

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गया श्राद्ध एवं पिंडदान के माध्यम से पितरों की तृप्ति एवं शांति की मंगलकामना की जाती है।
  • दिवंगत पूर्वजों की सद्गति एवं मोक्ष की प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • पितृ दोष एवं पितृ संबंधी बाधाओं की शांति तथा परिवार के कल्याण की कामना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति, सौहार्द एवं आपसी सामंजस्य की मंगलकामना की जाती है।
  • कुल के कल्याण एवं पूर्वजों के आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म का विधिपूर्वक निर्वहन करने का पवित्र अवसर प्राप्त होता है।
  • परिवार की पितृ परंपरा को धार्मिक रीति से आगे बढ़ाने तथा पूर्वजों के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करने का अवसर मिलता है।

गया श्राद्ध पूजा

गया श्राद्ध एवं पिंडदान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने वाला महत्वपूर्ण सनातन धार्मिक अनुष्ठान है। गया धाम का पितृ कर्मों में विशेष स्थान माना जाता है और यहाँ विभिन्न पवित्र स्थलों पर श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान की परंपरा प्रचलित है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गया में पिंडदान करने से पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है। पितृ दोष या पितृ संबंधी धार्मिक बाधा मानी जाने पर भी योग्य वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में गया श्राद्ध कराने की परंपरा है।

गया की 45 पवित्र वेदियों का महत्व

विस्तृत गया श्राद्ध में परंपरा के अनुसार गया क्षेत्र की विभिन्न पवित्र वेदियों एवं तीर्थ स्थलों पर पितृ कर्म सम्पन्न कराया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से—

  • विष्णुपद मंदिर
  • फल्गु नदी तट
  • अक्षयवट
  • सीता कुंड
  • रामशिला
  • प्रेतशिला
  • धर्मारण्य
  • गया क्षेत्र की अन्य पवित्र वेदियाँ

यजमान की चुनी हुई व्यवस्था, कुल परंपरा और वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार इन स्थलों पर संकल्प, तर्पण, श्राद्ध एवं पिंडदान सम्पन्न कराया जा सकता है।

गया श्राद्ध कब कराया जाता है?

गया श्राद्ध एवं पिंडदान विशेष रूप से पितरों के निमित्त धार्मिक कर्म करने की इच्छा होने पर कराया जा सकता है। इसके लिए तिथि एवं विधि का निर्धारण कुल परंपरा तथा वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार करना उचित माना जाता है।

पितृ पक्ष को पितृ कर्मों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। इसके अतिरिक्त आवश्यकता एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार अन्य समय में भी गया धाम में पिंडदान कराया जा सकता है।

गया श्राद्ध किन परिस्थितियों में कराया जाता है?

  • पितरों की तृप्ति एवं शांति की मंगलकामना के लिए।
  • दिवंगत पूर्वजों की सद्गति एवं मोक्ष की प्रार्थना के लिए।
  • पितृ दोष की धार्मिक मान्यता होने पर शांति की मंगलकामना के लिए।
  • पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध कर्म न हो पाने की स्थिति में।
  • परिवार के सुख, शांति एवं कुल कल्याण की प्रार्थना के लिए।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए।

गया श्राद्ध एवं पिंडदान के धार्मिक लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गया श्राद्ध एवं पिंडदान के माध्यम से—

  • पितरों की तृप्ति एवं शांति की मंगलकामना की जाती है।
  • दिवंगत पूर्वजों की सद्गति एवं मोक्ष की प्रार्थना की जाती है।
  • पितृ दोष एवं पितृ संबंधी बाधाओं की शांति की कामना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति एवं सौहार्द की मंगलकामना की जाती है।
  • कुल के कल्याण एवं पूर्वजों के आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म का निर्वहन किया जाता है।
  • परिवार की पितृ परंपरा को धार्मिक रीति से आगे बढ़ाने का अवसर प्राप्त होता है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

गया श्राद्ध के धार्मिक संदर्भ में भगवान विष्णु का विशेष महत्व है। विष्णुपद मंदिर को गया धाम के प्रमुख पवित्र स्थलों में माना जाता है। पितृ कर्म के दौरान भगवान विष्णु, पितृ देवताओं तथा संबंधित तीर्थों का स्मरण एवं पूजन किया जाता है।

फल्गु नदी, अक्षयवट, सीता कुंड, रामशिला और प्रेतशिला जैसे तीर्थों का भी गया के पितृ कर्मों में विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

क्या महिला गया श्राद्ध एवं पिंडदान कर सकती हैं?

महिला एवं पुरुष दोनों अपनी कुल एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार गया श्राद्ध एवं पिंडदान में यजमान बन सकते हैं। महिला यजमान के लिए संकल्प एवं धार्मिक विधि परिवार की परंपरा तथा वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार निर्धारित की जा सकती है।

गया श्राद्ध के लिए वस्त्र

श्राद्ध एवं पिंडदान के समय यजमान को स्वच्छ एवं पारंपरिक वस्त्र धारण करने चाहिए।

  • पुरुष यजमान नए धोती एवं अंगवस्त्र धारण कर सकते हैं।
  • महिला यजमान नए एवं स्वच्छ पारंपरिक वस्त्र धारण कर सकती हैं।
  • वस्त्र दान की व्यवस्था चुनी गई धार्मिक सेवा के अनुसार की जा सकती है।

विशेष धार्मिक व्यवस्थाएँ

चुनी गई सेवा के अनुसार गया श्राद्ध में निम्न व्यवस्थाएँ सम्मिलित की जा सकती हैं—

  • आवश्यक पिंडदान एवं पूजन सामग्री।
  • नए वस्त्र एवं वस्त्र दान।
  • पात्र दान।
  • वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में विस्तृत श्राद्ध कर्म।
  • ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा।
  • अतिरिक्त पितृ कर्म एवं दान व्यवस्था।

इन व्यवस्थाओं का समावेश चुनी गई सेवा और धार्मिक आवश्यकता के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।

आवश्यक जानकारी

संकल्प के लिए सामान्यतः निम्न जानकारी आवश्यक हो सकती है—

  • यजमान का नाम।
  • गोत्र।
  • दिवंगत पितरों एवं परिजनों के नाम, यदि ज्ञात हों।
  • यजमान से उनका संबंध।
  • उपलब्ध होने पर जन्म एवं मृत्यु संबंधी जानकारी।

गया धाम तक यात्रा, निवास एवं भोजन की व्यवस्था यजमान द्वारा स्वयं की जानी होगी। विभिन्न पिंडदान स्थलों तक आने-जाने की व्यवस्था भी यजमान को स्वयं करनी होगी, जब तक किसी विशेष सेवा में अलग व्यवस्था निर्धारित न हो।

वैकल्पिक विशेष पितृ कर्म

यजमान अपनी आवश्यकता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अन्य पितृ कर्म भी करा सकते हैं—

  • त्रिपिंडी श्राद्ध।
  • नारायण बलि अनुष्ठान।
  • व्यवस्थित शय्यादान।
  • पात्र दान।
  • अन्य विशेष पितृ दान।

इनमें से किसी कर्म की आवश्यकता होने पर योग्य वैदिक आचार्य से परामर्श करना उचित है।

आध्यात्मिक महत्व

गया श्राद्ध एवं पिंडदान केवल एक धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म की भावना व्यक्त करने की सनातन परंपरा है। गया धाम की पवित्र वेदियों पर पिंड अर्पित करके पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है।

भगवान विष्णु की पवित्र उपस्थिति, फल्गु नदी तथा गया क्षेत्र के तीर्थों की धार्मिक महत्ता के मध्य सम्पन्न यह पितृ कर्म परिवार एवं कुल के कल्याण की प्रार्थना का विशेष माध्यम माना जाता है।

विशेष जानकारी

  • गया धाम में अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में श्राद्ध एवं पिंडदान सम्पन्न कराया जा सकता है।
  • संकल्प के लिए यजमान का नाम, गोत्र एवं पितरों से संबंधित आवश्यक जानकारी ली जाती है।
  • विस्तृत सेवा में गया क्षेत्र की निर्धारित पवित्र वेदियों पर पिंडदान की व्यवस्था की जा सकती है।
  • आवश्यक पिंडदान एवं पूजन सामग्री चुनी गई सेवा के अनुसार उपलब्ध कराई जा सकती है।
  • वस्त्र दान, पात्र दान, भोजन एवं दक्षिणा जैसी धार्मिक व्यवस्थाएँ चुनी गई सेवा के अनुसार निर्धारित की जा सकती हैं।

गया क्षेत्र की 45 पवित्र वेदियों पर पिंडदान, विस्तृत पितृ कर्म तथा चुने गए विशेष पैकेज के अनुसार वस्त्र दान, पात्र दान, ब्राह्मण भोजन, दक्षिणा एवं अन्य धार्मिक व्यवस्थाओं के साथ यह पवित्र अनुष्ठान पितरों की तृप्ति, शांति, सद्गति एवं कुल कल्याण की मंगलकामना से श्रद्धापूर्वक सम्पन्न कराया जाता है।

पूजा स्थानगया

श्री विष्णुपद मंदिर

श्री विष्णुपद मंदिर

गया

विष्णुपाद मंदिर गया में फल्गु नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत पवित्र और प्राचीन हिंदू मंदिर है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और अपनी धर्मशिला (भगवान विष्णु के चरणचिह्न) के लिए विश्वप्रसिद्ध है। लगभग 40 सेंटीमीटर लंबे ये पवित्र चरणचिह्न गर्भगृह में चांदी के आवरण के भीतर स्थापित हैं।

इतिहास एवं पौराणिक कथा

गयासुर की कथा

पुराणों के अनुसार गयासुर नामक एक दैत्य ने कठोर तपस्या कर महान शक्तियाँ प्राप्त कर ली थीं। भगवान विष्णु ने उससे यज्ञ हेतु उसके शरीर को समर्पित करने का निवेदन किया और अंततः उसे पृथ्वी के नीचे स्थापित कर दिया। उसी स्थान पर धर्मशिला पर भगवान विष्णु के चरणचिह्न अंकित हुए, जिन्हें आज विष्णुपाद मंदिर में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।

पिंडदान का महत्व

मान्यता है कि यहाँ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष, शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। इसी कारण गया हिंदू धर्म का एक प्रमुख मोक्ष-धाम माना जाता है।

भव्य वास्तुकला

विष्णुपाद मंदिर विशाल ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित है। इसकी अष्टकोणीय (आठ-भुज) संरचना लगभग 100 फीट ऊँची है। मंदिर में चारों ओर सुंदर नक्काशीदार स्तंभ हैं तथा शिखर पर लगभग 50 किलो स्वर्ण ध्वजा और कलश स्थापित है, जो इसकी दिव्यता को दर्शाते हैं।

धर्मशिला एवं पूजन

गर्भगृह में भगवान विष्णु के पवित्र चरणचिह्न चांदी के आवरण से सुरक्षित हैं। सामने माता लक्ष्मी की प्रतिमा भी विराजमान है, जिनकी प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा और श्रृंगार किया जाता है।

पिंडदान एवं तर्पण अनुष्ठान

विष्णुपाद मंदिर पिंडदान और पितृश्राद्ध का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालु फल्गु नदी के तट पर तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और श्राद्ध कर्म संपन्न करते हैं। विशेष रूप से पितृपक्ष के दौरान लाखों भक्त यहाँ अपने पितरों की शांति हेतु अनुष्ठान कराते हैं।

श्राद्धकाल का महत्व

पितृ पक्ष एवं अमावस्या के अवसर पर यहाँ विशेष पूजा-अनुष्ठान आयोजित होते हैं। श्रद्धालु पूर्ण वैदिक विधि से पिंडदान और तर्पण कराते हैं।

Puजरिजि.coम द्वारा उपलब्ध सेवाएँ

  • पूजा आयोजन एवं पिंडदान सेवा – शास्त्रसम्मत विधि से पिंडदान, तर्पण एवं श्राद्ध की संपूर्ण व्यवस्था।
  • अनुभवी पंडित मार्गदर्शन – वैदिक मंत्रोच्चारण, संकल्प और पूजा सामग्री सहित पूर्ण सहयोग।
  • ऑन-साइट एवं ऑनलाइन सुविधा – स्थल पर व्यवस्था तथा ऑनलाइन बुकिंग विकल्प।
  • ब्राह्मण भोजन एवं दान सेवा – पूजा के पश्चात ब्राह्मण भोजन, दक्षिणा और श्रद्धादान की व्यवस्था।

👉 हम आपकी श्रद्धा-यात्रा को सरल, सुव्यवस्थित और पुण्यपूर्ण बनाने के लिए संकल्पित हैं।

धार्मिक महत्ता

पितरों को मोक्ष एवं शांति – विधिवत पिंडदान से पूर्वजों को मोक्ष मार्ग और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

परिवार में समृद्धि और संतुलन – पितृश्राद्ध से कुल में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और सुख-समृद्धि का अनुभव होता है।

आध्यात्मिक अनुभूति – फल्गु नदी के तट पर अनुष्ठान करने से मन में गहन शांति, भक्ति और आत्मिक संतुलन की अनुभूति होती है।

पहुँच एवं यात्रा

📌 स्थानः विष्णुपाद मंदिर रोड, चांद चौरा, गया, बिहार – 823001

🚆 निकटतम रेलवे स्टेशनः गया जंक्शन (ऑटो/कैब से सहज पहुँच)

✈️ निकटतम हवाई अड्डाः गया एयरपोर्ट

श्री विष्णुपाद मंदिर, गया जी — भगवान विष्णु के पवित्र पदचिह्न पर निर्मित यह प्राचीन तीर्थ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध का सर्वोच्च केंद्र माना जाता है। यह स्थल पितृमोक्ष, परिवार की शांति और आध्यात्मिक उन्नति का दिव्य स्थान है।

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    3h

    गया धाम की पवित्र भूमि पर अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान से गया श्राद्ध एवं पिंडदान सम्पन्न कराया जाता है। यह पैकेज उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है जो अपने पितरों के निमित्त विस्तृत श्राद्ध एवं पितृ कर्म सम्पन्न कराकर उनकी तृप्ति, शांति, सद्गति एवं कुल कल्याण की मंगलकामना करना चाहते हैं। गया धाम में किए जाने वाले इस पितृ अनुष्ठान में संकल्प, तर्पण, श्राद्ध विधि एवं पिंडदान सहित प्रमुख वैदिक कर्म विधिपूर्वक सम्पन्न कराए जाते हैं।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • तर्पण
    • भगवान विष्णु पूजन
    • पितृ आवाहन
    • श्राद्ध संकल्प एवं श्राद्ध विधि
    • पिंडदान
    • विशेष पितृ प्रार्थना
    • ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा
    • पितृ शांति प्रार्थना
    • आशीर्वाद

    विशेष सुविधाएं

    • गया धाम में अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा शास्त्रोक्त विधि से गया श्राद्ध एवं पिंडदान।
    • पितरों के निमित्त विस्तृत श्राद्ध एवं पितृ कर्म की व्यवस्था।
    • यजमान की आवश्यकता के अनुसार विशेष पितृ कर्म को अतिरिक्त रूप से चुनने की सुविधा।
    • अनुष्ठान से संबंधित आवश्यक जानकारी एवं निर्देश प्रदान किए जाएंगे।
    • आवश्यकता अनुसार ऑनलाइन सहभागिता की सुविधा उपलब्ध है।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • पितर का नाम
    • पितर से संबंध
    • आवश्यक जन्म विवरण, यदि उपलब्ध हो
    • पूजा के लिए निर्धारित तिथि

    वैकल्पिक विशेष अनुष्ठान

    यजमान की आवश्यकता के अनुसार निम्न विशेष पितृ कर्म अतिरिक्त रूप से चुने जा सकते हैं:

    • त्रिपिंडी श्राद्ध
    • नारायण बलि अनुष्ठान
    • व्यवस्थित शय्यादान एवं पात्र दान

    नोट: त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बलि एवं व्यवस्थित शय्यादान इस पैकेज में शामिल नहीं हैं। इन्हें यजमान अपनी आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक सेवा के रूप में अतिरिक्त रूप से चुन सकते हैं।

    गया धाम में सम्पन्न यह गया श्राद्ध एवं पिंडदान अनुष्ठान पितरों की तृप्ति, शांति, सद्गति एवं कुल कल्याण की मंगलकामना से किया जाता है। पितृ कर्म की यह पवित्र परंपरा श्रद्धा एवं संकल्प के साथ सम्पन्न कर परिवार में आध्यात्मिक शांति और मंगल की प्रार्थना की जाती है।

    सभी पिंड दान सामग्रीदक्षिणा
    ₹11,000₹15,00027% off

    2 वस्तुएँ शामिल

  • श्रेष्ठ

    3 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    3h

    गया धाम में शास्त्रोक्त विधि-विधान से सम्पन्न किया जाने वाला यह विशेष एवं विस्तृत गया श्राद्ध पैकेज वायु पुराण में वर्णित पारंपरिक क्रम के अनुसार 3 दिनों तक गया क्षेत्र की 45 पवित्र वेदियों पर पिंडदान की व्यवस्था प्रदान करता है। इस अनुष्ठान में1 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा श्राद्ध, तर्पण, पितृ आवाहन, पिंडदान एवं अन्य निर्धारित पितृ कर्म सम्पन्न कराए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार गया श्राद्ध एवं पिंडदान के माध्यम से पितरों की तृप्ति, शांति, सद्गति एवं परिवार के मंगल की प्रार्थना की जाती है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • तर्पण
    • भगवान विष्णु पूजन
    • पितृ आवाहन
    • श्राद्ध संकल्प एवं श्राद्ध विधि
    • 3 दिनों तक गया क्षेत्र की 45 पवित्र वेदियों पर पिंडदान
    • गजेन्द्र मोक्ष पाठ – 11 बार
    • पितृ सूक्त पाठ – 51 बार
    • ब्राह्मण भोजन
    • ब्राह्मण वस्त्र दान
    • पितृ शांति प्रार्थना
    • ब्राह्मण एवं आचार्य दक्षिणा

    शामिल सेवाएं

    • 1अनुभवी वैदिक आचार्य
    • 3 दिवसीय गया श्राद्ध एवं पिंडदान
    • गया क्षेत्र की 45 पवित्र वेदियों पर पिंडदान
    • सभी पूजा एवं पिंडदान सामग्री
    • 3 ब्राह्मणों का भोजन
    • ब्राह्मण वस्त्र दान
    • आचार्य दक्षिणा
    • पंडा जी के पारंपरिक रजिस्टर में नाम दर्ज करना

    विशेष सुविधाएं

    • 1अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से गया श्राद्ध एवं पिंडदान सम्पन्न कराया जाएगा।
    • 3 दिनों तक गया क्षेत्र की 45 पवित्र वेदियों पर निर्धारित क्रम के अनुसार पिंडदान कराया जाएगा।
    • गजेन्द्र मोक्ष पाठ एवं पितृ सूक्त पाठ सहित विशेष पितृ शांति प्रार्थना की जाएगी।
    • सम्पूर्ण पूजा एवं पिंडदान सामग्री की व्यवस्था की जाएगी।
    • यजमान की आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त पितृ कर्मों को वैकल्पिक सेवा के रूप में जोड़ने की सुविधा उपलब्ध होगी।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • पितरों का नाम एवं उपलब्ध विवरण
    • पारिवारिक परंपरा के अनुसार आवश्यक संकल्प संबंधी जानकारी
    • पिंडदान के समय नए एवं स्वच्छ वस्त्र धारण करना आवश्यक होगा।
    • पुरुष यजमान पारंपरिक रूप से धोती एवं अंगवस्त्र तथा महिला यजमान नए एवं स्वच्छ पारंपरिक वस्त्र धारण कर सकती हैं।
    • गया धाम तक यात्रा, निवास एवं भोजन की व्यवस्था यजमान को स्वयं करनी होगी।
    • एक पिंडदान स्थल से दूसरे स्थल तक आने-जाने की व्यवस्था यजमान द्वारा स्वयं करनी होगी।

    वैकल्पिक विशेष अनुष्ठान

    यजमान अपनी आवश्यकता के अनुसार निम्न विशेष पितृ कर्म सशुल्क अतिरिक्त सेवा के रूप में चुन सकते हैं:

    • त्रिपिंडी श्राद्ध
    • नारायण बलि अनुष्ठान
    • व्यवस्थित शय्यादान एवं पात्र दान

    नोट: त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बलि एवं व्यवस्थित शय्यादान इस पैकेज में शामिल नहीं हैं। इन्हें आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त सेवा के रूप में कराया जा सकता है।

    गया धाम में सम्पन्न यह पवित्र श्राद्ध एवं पिंडदान अनुष्ठान पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति तथा परिवार के सुख, शांति और कुल कल्याण की मंगलकामना के लिए श्रद्धापूर्वक सम्पन्न कराया जाता है।

    सभी पिंड दान सामग्रीदक्षिणा
    ₹23,000₹31,00026% off

    2 वस्तुएँ शामिल

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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    तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।

  5. पुजारीजी

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    संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।

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