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Pujari Ji

कुंभ विवाह

गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
कुंभ विवाह

कुंभ विवाह एक विशेष वैदिक अनुष्ठान है, जिसमें शास्त्रोक्त विधि से कन्या का प्रतीकात्मक विवाह पवित्र कलश के साथ कराया जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मांगलिक दोष अथवा मंगल ग्रह से संबंधित प्रतिकूल प्रभावों की शांति के लिए इस अनुष्ठान को महत्वपूर्ण माना जाता है।

गौरी केदारेश्वर मंदिर में भगवान गौरी केदारेश्वर महादेव एवं माता गौरी की आराधना के साथ यह अनुष्ठान सम्पन्न किया जाता है। श्रद्धालु विवाह में विलंब, संबंधों में बार-बार बाधा अथवा मांगलिक दोष से संबंधित ज्योतिषीय स्थिति होने पर वैवाहिक सुख, स्थिरता एवं अनुकूलता की मंगलकामना से यह पूजा कराते हैं।

Duration

2h – 4h

Best time

सुबह

Starting price

₹11,000

लाभ

  • मांगलिक दोष से संबंधित अशुभ ग्रह प्रभावों की शांति तथा जीवन में शुभता की मंगलकामना की जाती है।
  • विवाह में आने वाली बाधाओं के शमन एवं अनुकूल परिस्थितियों की प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • विवाह के लिए शुभ एवं अनुकूल योग बनने की मंगलकामना की जाती है।
  • भावी दांपत्य जीवन में प्रेम, सुख, स्थिरता एवं आपसी सामंजस्य की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • मंगल ग्रह से संबंधित प्रतिकूल प्रभावों की शांति एवं अनुकूलता के लिए विधिपूर्वक पूजा की जाती है।
  • मानसिक शांति, सकारात्मकता, आत्मविश्वास एवं भावनात्मक संतुलन की मंगलकामना की जाती है।
  • भगवान शिव एवं माता गौरी की कृपा एवं आशीर्वाद से वैवाहिक जीवन के मंगलमय, सुखद एवं सौहार्दपूर्ण होने की प्रार्थना की जाती है।

कुंभ विवाह

गौरी केदारेश्वर मंदिर वाराणसी के पूजनीय शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। यहाँ भगवान शिव के गौरी केदारेश्वर स्वरूप तथा माता गौरी की आराधना की जाती है। धार्मिक परंपरा में भगवान शिव एवं माता गौरी को दांपत्य जीवन, प्रेम, समर्पण एवं पारिवारिक मंगल से जोड़ा जाता है।

कुंभ विवाह पूजा विशेष रूप से उन परिस्थितियों में सम्पन्न की जाती है, जब जन्मकुंडली में मांगलिक दोष अथवा मंगल ग्रह से संबंधित प्रतिकूल योगों की शांति की आवश्यकता मानी जाती है। इस अनुष्ठान में पवित्र कलश को प्रतीकात्मक वर के रूप में स्थापित करके वैदिक विधि से विवाह संस्कार सम्पन्न किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसके माध्यम से मांगलिक दोष से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति तथा विवाह के लिए अनुकूल परिस्थितियों की मंगलकामना की जाती है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

इस पूजा में प्रमुख रूप से निम्न देवताओं की आराधना की जाती हैः

  • भगवान गौरी केदारेश्वर महादेव
  • माता गौरी
  • भगवान गणेश
  • मंगल देव
  • नवग्रह देवता

भगवान शिव एवं माता गौरी की संयुक्त आराधना वैवाहिक सौहार्द, प्रेम, समर्पण एवं पारिवारिक सुख की मंगलकामना से जुड़ी मानी जाती है। मंगल देव की पूजा मांगलिक दोष एवं मंगल ग्रह से संबंधित प्रतिकूल प्रभावों की शांति के उद्देश्य से की जाती है।

शुभ मुहूर्त / यह पूजा कब करानी चाहिए?

  • मांगलिक दोष की ज्योतिषीय स्थिति होने पर
  • विवाह में लंबे समय से विलंब होने पर
  • विवाह संबंध बार-बार बनकर टूटने पर
  • प्रथम विवाह से संबंधित प्रतिकूल ज्योतिषीय योग होने पर
  • मंगल ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति हेतु
  • अनुभवी ज्योतिषाचार्य के परामर्शानुसार निर्धारित शुभ मुहूर्त में

किन परिस्थितियों में यह पूजा करानी चाहिए?

  • जन्मकुंडली में मांगलिक दोष होने पर
  • विवाह में बार-बार बाधाएँ आने पर
  • विवाह योग्य संबंधों में अनुकूलता न बन पाने पर
  • विवाह में अनावश्यक विलंब होने पर
  • प्रथम विवाह से संबंधित प्रतिकूल ग्रह योग होने पर
  • भावी वैवाहिक जीवन में सुख, स्थिरता एवं सामंजस्य की मंगलकामना हेतु

प्रमुख मंत्र

  • ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः॥
  • ॐ नमः शिवाय॥
  • ॐ गौरीशंकराय नमः॥

पूजा के लाभ

  • मांगलिक दोष से संबंधित अशुभ ग्रह प्रभावों की शांति की मंगलकामना की जाती है।
  • विवाह में आने वाली बाधाओं की शांति एवं अनुकूल परिस्थितियों की प्रार्थना की जाती है।
  • विवाह के लिए शुभ एवं अनुकूल योग बनने की मंगलकामना की जाती है।
  • भावी दांपत्य जीवन में प्रेम, सुख, स्थिरता एवं सामंजस्य की प्रार्थना की जाती है।
  • मंगल ग्रह से संबंधित प्रतिकूल प्रभावों की शांति हेतु पूजा की जाती है।
  • मानसिक शांति, सकारात्मकता एवं आत्मविश्वास की मंगलकामना की जाती है।
  • भगवान शिव एवं माता गौरी की कृपा से वैवाहिक जीवन के मंगलमय होने की प्रार्थना की जाती है।

आध्यात्मिक महत्व

गौरी केदारेश्वर मंदिर में भगवान शिव एवं माता गौरी की आराधना वैवाहिक जीवन में प्रेम, समर्पण, विश्वास एवं पारिवारिक सुख की मंगलकामना से जुड़ी मानी जाती है। कुंभ विवाह अनुष्ठान में वैदिक मंत्रोच्चार, संकल्प एवं विवाह संस्कार के माध्यम से मांगलिक दोष से संबंधित प्रतिकूल प्रभावों की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।

धार्मिक विश्वास के अनुसार भगवान शिव एवं माता गौरी की आराधना जीवन में आध्यात्मिक संतुलन, सकारात्मकता तथा दांपत्य जीवन के लिए मंगल भाव को सुदृढ़ करने वाली मानी जाती है।

विशेष जानकारी

  • अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।
  • श्रद्धालु के नाम, गोत्र एवं जन्म विवरण के अनुसार संकल्प लिया जाता है।
  • आवश्यकता होने पर जन्मकुंडली के आधार पर अनुष्ठान की विधि निर्धारित की जा सकती है।
  • पवित्र कलश के साथ प्रतीकात्मक विवाह संस्कार वैदिक विधि से सम्पन्न कराया जाता है।
  • सम्पूर्ण पूजन सामग्री की व्यवस्था की जाती है।
  • दूरस्थ श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन सहभागिता की सुविधा उपलब्ध है।

यदि आप गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी में अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि से कुंभ विवाह पूजा कराना चाहते हैं, तो पूजारिजी.कॉम के माध्यम से ऑनलाइन या ऑफलाइन बुकिंग कर सकते हैं। पूजा के प्रत्येक चरण में संकल्प, वैदिक मंत्रोच्चार एवं सम्पूर्ण व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाता है।

पूजा स्थान — वाराणसी

गौरी केदारेश्वर मंदिर

गौरी केदारेश्वर मंदिर

वाराणसी

पवित्र काशी नगरी के दक्षिणी भाग में स्थित गौरी केदारेश्वर मंदिर भगवान केदारेश्वर महादेव एवं माता गौरी को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन, जागृत एवं आध्यात्मिक महत्व वाला शिव मंदिर है। यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध केदार घाट के समीप पवित्र माँ गंगा के तट पर स्थित है, जिसके कारण इसका धार्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। काशी आने वाले श्रद्धालु श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन के साथ-साथ गौरी केदारेश्वर मंदिर में रुद्राभिषेक, जलाभिषेक एवं विशेष शिव पूजा अवश्य करते हैं।

ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान शिव और माता गौरी की संयुक्त आराधना करने से वैवाहिक सुख, पारिवारिक समृद्धि, संतान सुख, मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। केदार घाट पर गंगा स्नान करने के पश्चात गौरी केदारेश्वर महादेव के दर्शन एवं पूजा का विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

गौरी केदारेश्वर मंदिर केवल एक प्राचीन मंदिर नहीं, बल्कि शिवभक्ति, सनातन परंपरा, वैदिक अनुष्ठानों एवं काशी की दिव्य आध्यात्मिक संस्कृति का जीवंत केंद्र है। भारत ही नहीं बल्कि विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु यहां रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, नवग्रह शांति पूजा, संकल्प पूजा एवं विशेष शिव अनुष्ठान सम्पन्न कराने के लिए आते हैं।

गौरी केदारेश्वर मंदिर का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गौरी केदारेश्वर मंदिर काशी के अत्यंत पवित्र शिवालयों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान केदारेश्वर महादेव स्वयं भक्तों पर कृपा करते हैं तथा माता गौरी की आराधना से सौभाग्य, दांपत्य सुख एवं जीवन में समृद्धि प्राप्त होती है।

काशी खंड सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में केदार क्षेत्र का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु पहले केदार घाट पर माँ गंगा में स्नान करके तत्पश्चात गौरी केदारेश्वर महादेव का पूजन करते हैं, उन्हें विशेष पुण्य एवं भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

ऐसी मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक पूजा एवं दर्शन करने से—

  • भगवान शिव एवं माता गौरी का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • वैवाहिक जीवन में प्रेम, सुख एवं स्थिरता आती है।
  • दांपत्य जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
  • परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास होता है।
  • ग्रह दोषों एवं जीवन की अनेक बाधाओं में राहत मिलती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति एवं आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
  • पापों का क्षय एवं पुण्य की वृद्धि होती है।
  • भगवान शिव की कृपा से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • मोक्ष प्राप्ति का पुण्य प्राप्त होता है।

विशेष रूप से श्रावण मास, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत एवं सावन के सोमवार के दिन यहां पूजा का अत्यंत विशेष महत्व माना जाता है।

गौरी केदारेश्वर मंदिर में होने वाले प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान

मंदिर में प्रतिदिन अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा विभिन्न धार्मिक एवं वैदिक अनुष्ठान सम्पन्न कराए जाते हैं।

प्रमुख अनुष्ठान

  • रुद्राभिषेक
  • महारुद्राभिषेक
  • लघु रुद्राभिषेक
  • जलाभिषेक
  • दुग्धाभिषेक
  • पंचामृत अभिषेक
  • बिल्वपत्र अर्चन
  • शिव सहस्रनाम पूजन
  • महामृत्युंजय मंत्र जाप
  • लघु महामृत्युंजय जाप
  • नवग्रह शांति पूजा
  • संकल्प पूजा
  • दांपत्य सुख एवं सौभाग्य पूजा
  • ग्रह दोष निवारण अनुष्ठान
  • विशेष पर्व पूजन

अनेक श्रद्धालु केदार घाट पर गंगा स्नान एवं गंगा पूजन करने के पश्चात मंदिर में रुद्राभिषेक एवं शिव पूजन सम्पन्न कराते हैं, जिसे अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है।

गौरी केदारेश्वर मंदिर के प्रमुख पवित्र स्थल

भगवान केदारेश्वर महादेव

मंदिर का मुख्य आकर्षण भगवान केदारेश्वर महादेव का प्राचीन एवं पवित्र शिवलिंग है, जिसकी पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

माता गौरी मंदिर

माता गौरी का दिव्य विग्रह श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र है। यहां सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन एवं परिवार की समृद्धि के लिए विशेष पूजा की जाती है।

केदार घाट एवं माँ गंगा

मंदिर के निकट स्थित केदार घाट काशी के सबसे पवित्र घाटों में से एक माना जाता है। श्रद्धालु यहां माँ गंगा में स्नान, गंगा पूजन, दीपदान एवं संकल्प करके भगवान शिव के दर्शन करते हैं।

अभिषेक एवं अनुष्ठान स्थल

यहां श्रद्धालु जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल एवं बिल्वपत्र अर्पित कर भगवान शिव का विधिपूर्वक अभिषेक करते हैं।

ध्यान एवं साधना क्षेत्र

मंदिर का शांत, सात्त्विक एवं आध्यात्मिक वातावरण जप, ध्यान एवं शिव साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।

गौरी केदारेश्वर मंदिर में पूजा करवाने के लाभ

ऐसी मान्यता है कि यहां विधिपूर्वक पूजा एवं वैदिक अनुष्ठान सम्पन्न कराने से श्रद्धालुओं को अनेक आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं—

  • भगवान शिव एवं माता गौरी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम एवं मधुरता आती है।
  • परिवार में शांति एवं समृद्धि का वास होता है।
  • संतान सुख की प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है।
  • ग्रह दोषों एवं नकारात्मक प्रभावों में राहत मिलती है।
  • मानसिक तनाव एवं भय से मुक्ति प्राप्त होती है।
  • सकारात्मक ऊर्जा एवं आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति एवं शिव भक्ति की प्राप्ति होती है।
  • स्वास्थ्य एवं मानसिक संतुलन के लिए विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होने का पुण्य प्राप्त होता है।

विशेष रूप से रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, बिल्वपत्र अर्चन एवं गंगा पूजन यहां अत्यंत फलदायी माने जाते हैं।

गौरी केदारेश्वर मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण

गौरी केदारेश्वर मंदिर एवं इसके समीप स्थित केदार घाट का वातावरण अत्यंत शांत, सात्त्विक एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहता है। प्रातःकाल माँ गंगा के तट पर उगते सूर्य का मनोहारी दृश्य, वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि एवं मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभूति प्रदान करती है।

सायंकाल के समय केदार घाट पर दीपों की मनमोहक आभा, गंगा पूजन एवं मंदिर में होने वाली आरती भक्तों के मन को भक्ति एवं आध्यात्मिक आनंद से भर देती है।

विशेष अवसरों पर गौरी केदारेश्वर मंदिर का महत्व

विशेष पर्वों एवं धार्मिक अवसरों पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन एवं पूजा के लिए पहुंचते हैं—

  • महाशिवरात्रि
  • श्रावण मास
  • सावन के सोमवार
  • नाग पंचमी
  • प्रदोष व्रत
  • मासिक शिवरात्रि
  • कार्तिक पूर्णिमा
  • देव दीपावली
  • गंगा दशहरा
  • अमावस्या
  • पूर्णिमा
  • काशी के प्रमुख धार्मिक उत्सव

इन अवसरों पर केदार घाट, माँ गंगा एवं गौरी केदारेश्वर मंदिर का संपूर्ण क्षेत्र शिव भक्ति, वैदिक अनुष्ठानों एवं धार्मिक उल्लास से आलोकित हो उठता है।

गौरी केदारेश्वर मंदिर कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग

निकटतम लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी मंदिर से लगभग 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

रेल मार्ग

वाराणसी जंक्शन, बनारस रेलवे स्टेशन एवं काशी रेलवे स्टेशन से टैक्सी, ऑटो एवं ई-रिक्शा द्वारा मंदिर एवं केदार घाट तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग

गौरी केदारेश्वर मंदिर एवं केदार घाट वाराणसी के प्रमुख मार्गों से अच्छी तरह जुड़े हुए हैं। शहर के किसी भी हिस्से से स्थानीय परिवहन द्वारा यहां सहजता से पहुंचा जा सकता है।

दर्शन हेतु सर्वोत्तम समय

मंदिर वर्षभर दर्शन एवं पूजा के लिए खुला रहता है, किन्तु अक्टूबर से मार्च, श्रावण मास, महाशिवरात्रि एवं प्रातःकालीन गंगा स्नान का समय विशेष रूप से शुभ एवं पुण्यदायी माना जाता है।

केदार घाट पर स्नान कर गौरी केदारेश्वर महादेव के दर्शन करने की परंपरा आज भी अत्यंत श्रद्धा एवं आस्था के साथ निभाई जाती है।

निष्कर्ष

गौरी केदारेश्वर मंदिर, केदार घाट एवं माँ गंगा का पावन संगम काशी की सनातन आध्यात्मिक परंपरा का अद्भुत प्रतीक है। भगवान केदारेश्वर महादेव एवं माता गौरी की कृपा प्राप्त करने के लिए यह मंदिर वाराणसी के प्रमुख एवं अत्यंत पूजनीय धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां श्रद्धापूर्वक सम्पन्न होने वाले रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, गंगा पूजन, जलाभिषेक एवं अन्य वैदिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति तथा भगवान शिव एवं माता गौरी की दिव्य कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माने जाते हैं।

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    2 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    2h

    काशी के प्राचीन एवं पवित्र गौरी केदारेश्वर मंदिर में 2 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा संपूर्ण कुंभ विवाह संस्कार एवं संबंधित वैदिक पूजा शास्त्रोक्त विधि-विधान से संपन्न कराई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह अनुष्ठान मांगलिक दोष, विवाह में विलंब, वैवाहिक बाधाओं तथा दांपत्य जीवन से संबंधित अशांति की शांति की मंगलकामना के लिए किया जाता है। विशेष रूप से उन जातकों के लिए यह अनुष्ठान कराया जाता है जिनकी कुंडली में मंगल दोष या विवाह संबंधी बाधाओं के संकेत माने जाते हैं।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • गणेश पूजन
    • स्वस्तिवाचन
    • कलश स्थापना
    • मातृका पूजन
    • नांदी श्राद्ध
    • नवग्रह पूजन
    • भगवान गौरी केदारेश्वर एवं माता गौरी का पूजन
    • कुंभ पूजन
    • प्रतीकात्मक कुंभ विवाह संस्कार
    • अभिषेक
    • आरती एवं प्रसाद वितरण

    विशेष सुविधाएं

    • गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी में शास्त्रोक्त विधि-विधान से कुंभ विवाह अनुष्ठान
    • 2 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा संपूर्ण पूजा प्रक्रिया
    • मांगलिक दोष एवं विवाह संबंधी बाधाओं की शांति के लिए विशेष संकल्प
    • कुंडली एवं संकल्प के अनुसार अनुष्ठान की विधि निर्धारित करने की व्यवस्था
    • पूजा के लिए आवश्यक सामग्री एवं व्यवस्थाओं का समुचित प्रबंध

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • जन्मकुंडली, यदि उपलब्ध हो

    गौरी केदारेश्वर मंदिर में भगवान शिव एवं माता गौरी की आराधना के साथ संपन्न यह पवित्र कुंभ विवाह अनुष्ठान मांगलिक दोष एवं वैवाहिक बाधाओं के शमन तथा सुखी, शांतिपूर्ण और मंगलमय दांपत्य जीवन की मंगलकामना के लिए किया जाता है। श्रद्धापूर्वक किए गए संकल्प, पूजन, कुंभ विवाह संस्कार, अभिषेक और आरती के माध्यम से यजमान के वैवाहिक जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मकता की प्रार्थना की जाती है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹11,000₹15,00027% off

    2 वस्तुएँ शामिल

  • श्रेष्ठ

    5 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    4h

    काशी के प्राचीन एवं पवित्र गौरी केदारेश्वर मंदिर में 5 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा कुंभ विवाह संस्कार, विशेष मंत्र जाप एवं विस्तृत वैदिक पूजा विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अनुष्ठान मांगलिक दोष, विवाह में आने वाली बाधाओं तथा वैवाहिक जीवन से संबंधित समस्याओं की शांति और सुखी दांपत्य जीवन की मंगलकामना के लिए किया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • गणेश पूजन
    • स्वस्तिवाचन
    • पुण्याह वाचन
    • कलश स्थापना
    • नवग्रह पूजन
    • मंगल दोष शांति पूजन
    • भगवान गौरी केदारेश्वर एवं माता गौरी का विशेष पूजन
    • कुंभ पूजन
    • मंगल मंत्र जाप
    • प्रतीकात्मक कुंभ विवाह संस्कार
    • मृत्युंजय मंत्र जप 5100
    • अभिषेक
    • आरती एवं प्रसाद वितरण

    विशेष सुविधाएं

    • गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी में शास्त्रोक्त विधि-विधान से अनुष्ठान
    • 5 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सामूहिक पूजा
    • मांगलिक दोष एवं वैवाहिक बाधाओं की शांति के लिए विशेष संकल्प एवं पूजा
    • प्रतीकात्मक कुंभ विवाह संस्कार सहित विस्तृत वैदिक अनुष्ठान
    • विशेष मंत्र जाप, अभिषेक एवं आरती सहित संपूर्ण पूजा विधि
    • पूजा की आवश्यक व्यवस्था एवं अनुष्ठान संबंधी मार्गदर्शन

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • जन्मकुंडली, यदि उपलब्ध हो

    गौरी केदारेश्वर मंदिर में श्रद्धापूर्वक संपन्न किया जाने वाला यह कुंभ विवाह अनुष्ठान भगवान शिव एवं माता गौरी की कृपा की मंगलकामना के साथ किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके माध्यम से मांगलिक दोष एवं वैवाहिक बाधाओं की शांति, दांपत्य जीवन में सुख-शांति, सकारात्मकता और मंगल की प्रार्थना की जाती है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹21,000₹25,00016% off

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”

प्रिया शर्मा

मुंबई• Satyanarayan Puja

“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek

“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”

मीना अय्यर

बैंगलोर• Graha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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कैसे काम करता है

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    हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।

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    तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।

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    संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।

हर चरण पर कॉल और व्हाट्सएप पर मार्गदर्शन व सहायता।

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