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Pujari Ji

महालक्ष्मी मंत्र जाप

इन शहरों में घर पर सेवा उपलब्ध:बेंगलुरुगुरुग्राममुंबईदिल्लीलखनऊनोएडा
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
महालक्ष्मी मंत्र जाप

सनातन धर्म में माँ महालक्ष्मी को धन, वैभव, सौभाग्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। द्वादशाक्षर महालक्ष्मी मंत्र जप के माध्यम से भक्त देवी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और परिवार की सुख-शांति, आर्थिक स्थिरता तथा कार्य-व्यवसाय में उन्नति के लिए प्रार्थना करते हैं।

इस अनुष्ठान में निर्धारित मंत्र का जप किया जाता है। जप की संख्या, अवधि, संकल्प और समापन विधान यजमान की आवश्यकता, पारिवारिक परंपरा तथा योग्य वैदिक आचार्य के परामर्श के अनुसार निर्धारित किए जा सकते हैं।

Duration

4h – 5h

Best time

मुहूर्त अनुसार

Starting price

₹61,000

लाभ

  • व्यवसाय एवं कार्यक्षेत्र में प्रगति, उन्नति और अनुकूल अवसरों की प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक संकल्प लिया जाता है।
  • जीवन में ऐश्वर्य, वैभव, सम्मान, सौभाग्य एवं शुभता की प्राप्ति के लिए देवी से कृपा और आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है।
  • घर-परिवार में सुख-शांति, सद्भाव, आपसी सामंजस्य एवं मंगलमय वातावरण बनाए रखने की मंगलकामना की जाती है।
  • भक्ति, श्रद्धा एवं देवी के प्रति समर्पण की भावना को सुदृढ़ करने तथा आध्यात्मिक उन्नति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।

महालक्ष्मी मंत्र जाप

द्वादशाक्षर महालक्ष्मी मंत्र जप माँ महालक्ष्मी की उपासना का एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। श्रद्धालु इसे देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने, जीवन में मंगल की कामना करने और आध्यात्मिक साधना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सम्पन्न कराते हैं।

इस अनुष्ठान में संकल्प, देवी पूजन, मंत्र जप तथा परंपरा के अनुसार हवन और अन्य समापन विधान सम्मिलित हो सकते हैं। इसकी संपूर्ण विधि मंत्र के प्रमाणित पाठ और योग्य वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार निर्धारित करना उचित है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

इस अनुष्ठान की मुख्य आराध्य देवी माँ महालक्ष्मी हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वे धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य, वैभव और समृद्धि की प्रतीक हैं। उनकी आराधना के माध्यम से भक्त अपने परिवार के कल्याण, आर्थिक स्थिरता, कार्यक्षेत्र में प्रगति और जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं।

मंत्र जप नियमित साधना, एकाग्रता और भक्ति को प्रोत्साहित करने वाला माना जाता है। इसका उद्देश्य केवल भौतिक समृद्धि की कामना करना ही नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन, सदाचार और आध्यात्मिक उन्नति के लिए देवी का आशीर्वाद प्राप्त करना भी है।

प्रमुख मंत्र

द्वादशाक्षर महालक्ष्मी मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौंः जगत्सूत्र्यै नमः॥

विशेष सूचनाः दिए गए मंत्र के शुद्ध पाठ और द्वादशाक्षर नाम की पुष्टि योग्य वैदिक आचार्य से कर लें। मंत्र के अक्षरों, उच्चारण और विनियोग में परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है।

शुभ मुहूर्त / यह पूजा कब करानी चाहिए?

द्वादशाक्षर महालक्ष्मी मंत्र जप के लिए शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस और अक्षय तृतीया जैसे अवसर धार्मिक दृष्टि से शुभ माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, नए व्यवसाय के शुभारंभ, गृह प्रवेश अथवा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से भी यह अनुष्ठान कराया जा सकता है।

जप आरंभ करने के लिए उपयुक्त तिथि, समय और अवधि का निर्धारण पंचांग, पारिवारिक परंपरा तथा योग्य वैदिक आचार्य के परामर्श से किया जाना चाहिए।

किन परिस्थितियों में यह पूजा करानी चाहिए?

  • जब परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना हो।
  • जब आर्थिक स्थिरता और धन-धान्य की प्राप्ति के लिए धार्मिक संकल्प लेना हो।
  • जब व्यापार, व्यवसाय या कार्यक्षेत्र में प्रगति के लिए देवी का आशीर्वाद माँगना हो।
  • जब जीवन में सौभाग्य, संतुलन और सकारात्मकता की कामना हो।
  • जब नियमित मंत्र साधना के माध्यम से भक्ति और आध्यात्मिक एकाग्रता बढ़ाने की इच्छा हो।
  • जब किसी शुभ अवसर पर माँ महालक्ष्मी की विशेष आराधना करानी हो।

मंत्र जप की संख्या एवं अनुष्ठान विधान

इस मंत्र प्रयोग के लिए एक लाख मंत्र जप का विधान बताया जाता है। जप संख्या और उससे जुड़े समापन विधान को संबंधित धार्मिक परंपरा तथा योग्य वैदिक आचार्य के निर्देशानुसार निश्चित करना उचित है।

  • निर्धारित जप संख्याः संकल्प के अनुसार एक लाख मंत्र जप अथवा आचार्य द्वारा निर्धारित संख्या।
  • जप विधिः योग्य वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में मंत्र जप।
  • हवन विधानः परंपरा और निर्धारित संकल्प के अनुसार हवन एवं आहुति।
  • अनुष्ठान अवधिः आचार्यों की संख्या, प्रतिदिन के जप लक्ष्य और पूजन विधान के अनुसार निर्धारित की जाती है।

यदि एक लाख मंत्र जप कराना संभव न हो, तो यजमान अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जप संख्या पर आचार्य से परामर्श कर सकते हैं। जप आरंभ करने से पहले संकल्प, संख्या और समापन विधि निश्चित करना उचित है।

द्वादशाक्षर महालक्ष्मी मंत्र जप की सामान्य विधि

अनुष्ठान की विधि संबंधित परंपरा, मंत्र के विनियोग और आचार्य के निर्देशानुसार निर्धारित की जाती है। सामान्यतः इसमें निम्नलिखित चरण सम्मिलित हो सकते हैं।

  • संकल्प एवं मंगलाचरण।
  • गौरी-गणेश पूजन।
  • कलश स्थापना और माँ महालक्ष्मी का पूजन।
  • निर्धारित संख्या में महालक्ष्मी मंत्र जप।
  • जप संख्या की गणना और संकल्प की पूर्ति।
  • परंपरा के अनुसार हवन एवं आहुति।
  • पूर्णाहुति, आरती और प्रसाद वितरण।

पूजा के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वादशाक्षर महालक्ष्मी मंत्र जप माँ महालक्ष्मी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और जीवन में शुभता की कामना करने का एक माध्यम है।

  • माँ महालक्ष्मी की कृपाः देवी के आशीर्वाद, अनुग्रह और परिवार के कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
  • धन-धान्य एवं समृद्धिः परिवार में संपन्नता, आवश्यक संसाधनों और सुख-सुविधाओं के लिए मंगलकामना की जाती है।
  • आर्थिक कठिनाइयों का सामना करने का संबलः आर्थिक चुनौतियों के समय धैर्य, विवेक और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की प्रेरणा मिल सकती है।
  • व्यापार एवं कार्यक्षेत्र में उन्नतिः व्यवसाय और आजीविका में प्रगति, स्थिरता तथा उचित निर्णय लेने की क्षमता के लिए संकल्प किया जाता है।
  • ऐश्वर्य एवं सौभाग्यः जीवन में शुभता, सम्मान, संतुलन और समृद्धि की कामना की जाती है।
  • पारिवारिक सुख-शांतिः घर-परिवार में सद्भाव, प्रेम और मंगलमय वातावरण के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • आध्यात्मिक उन्नतिः मंत्र जप के माध्यम से भक्ति, एकाग्रता और देवी के प्रति समर्पण की भावना को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जाता है।

ये लाभ धार्मिक आस्था और परंपरागत मान्यताओं पर आधारित हैं। अनुष्ठान से निश्चित आर्थिक लाभ, धन प्राप्ति या व्यावसायिक सफलता की गारंटी नहीं दी जाती।

आध्यात्मिक महत्व

महालक्ष्मी मंत्र जप भक्त को श्रद्धा, अनुशासन और एकाग्रता के साथ देवी की आराधना करने का अवसर प्रदान करता है। नियमित जप के माध्यम से व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक साधना को व्यवस्थित कर सकता है और जीवन में संतुलन, संतोष तथा सदाचार के महत्व पर चिंतन कर सकता है।

माँ महालक्ष्मी की उपासना में भौतिक समृद्धि के साथ-साथ परिवार के कल्याण, सद्भाव और आध्यात्मिक उन्नति की कामना भी की जाती है।

विशेष जानकारी

  • मंत्र के शुद्ध पाठ, उच्चारण, अक्षर संख्या और विनियोग की पुष्टि योग्य वैदिक आचार्य से अवश्य करें।
  • जप संख्या, अनुष्ठान की अवधि और हवन सहित समापन विधान संकल्प तथा धार्मिक परंपरा के अनुसार निर्धारित किए जाने चाहिए।
  • पूजा घर, कार्यालय या प्रतिष्ठान में कराने की व्यवस्था उपलब्धता और अनुष्ठान की आवश्यकताओं के अनुसार की जा सकती है।
  • पूजा के धार्मिक लाभ आस्था पर आधारित हैं; इन्हें किसी निश्चित आर्थिक परिणाम का आश्वासन नहीं समझना चाहिए।

विशेष सूचनाः मंत्र के शुद्ध पाठ, जप संख्या एवं अनुष्ठान-विधि की पुष्टि किसी योग्य वैदिक आचार्य से अवश्य करें। पूजा से संबंधित धार्मिक लाभ आस्था एवं पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इस अनुष्ठान से निश्चित आर्थिक लाभ या व्यापारिक सफलता की कोई गारंटी नहीं दी जाती।

हमारी गारंटी

100% प्रमाणित पुजारी
पूरी पूजा सामग्री शामिल
वैदिक विधि-विधान
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  • उन्नत

    11 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    4h

    द्वादशाक्षर महालक्ष्मी मंत्र जप अनुष्ठान माँ महालक्ष्मी की कृपा, धन-धान्य, ऐश्वर्य, सौभाग्य एवं सुख-समृद्धि की कामना से किया जाने वाला विशेष धार्मिक अनुष्ठान है। इस उन्नत पैकेज में 11 अनुभवी वैदिक ब्राह्मणों द्वारा एक लाख मंत्र जप का संकल्प लिया जाता है। अनुष्ठान में माँ महालक्ष्मी का विधिवत पूजन, निर्धारित मंत्र का जप तथा योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में हवन, आहुति एवं पूर्णाहुति जैसे धार्मिक विधान संपन्न किए जाते हैं। अनुष्ठान की अवधि जप संख्या और धार्मिक विधान के अनुसार निर्धारित होती है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प एवं मंगलाचरण
    • गौरी-गणेश पूजन
    • कलश स्थापना एवं पूजन
    • पुण्याहवाचन
    • मातृका पूजन
    • नान्दी श्राद्ध
    • रक्षा-विधान
    • ब्राह्मण पूजन
    • योगिनी पूजन
    • क्षेत्रपाल पूजन
    • वास्तु पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • माँ महालक्ष्मी का विधिवत पूजन
    • द्वादशाक्षर महालक्ष्मी मंत्र का एक लाख (1,00,000) बार जाप
    • योग्य आचार्य के निर्देशानुसार हवन एवं आहुति
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं समापन विधान

    विशेष सुविधाएं

    • 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा एक लाख मंत्र जप का संकल्प।
    • माँ महालक्ष्मी की पारंपरिक विधि-विधान से आराधना।
    • योग्य वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में हवन एवं पूर्णाहुति।
    • पंचांग और आचार्य के परामर्श के अनुसार शुभ मुहूर्त का निर्धारण।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्वादशाक्षर महालक्ष्मी मंत्र जप अनुष्ठान माँ महालक्ष्मी की कृपा, आर्थिक स्थिरता, सौभाग्य, पारिवारिक सुख-शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना के लिए किया जाता है। श्रद्धापूर्वक संपन्न यह साधना भक्ति-भाव को सुदृढ़ करने और जीवन में सकारात्मकता एवं मंगल की कामना करने का आध्यात्मिक माध्यम मानी जाती है। पूजा से निश्चित आर्थिक लाभ या व्यापारिक सफलता की गारंटी नहीं दी जाती।

    सभी आवश्यक पूजा सामग्री जैसे हल्दी, अबीर, गुलाल, आम के पत्ते, तुलसी, दर्भा, कलश, पान के पत्ते, सुपारी, समिधा, पूजन द्रव्य, वस्त्र, घी आदि आचार्य द्वारा लाई जाएगी।

    यजमान को घर की सामान्य वस्तुएँ जैसे बर्तन, दीपक, आसन, कटोरी,

    चौकी, थाली, प्रसाद, फोटो, हवन कुंड आदि की व्यवस्था करनी होगी।

    नोट: बुकिंग के बाद विस्तृत निर्देश साझा किए जाएंगे।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹61,000₹65,0006% off

    2 वस्तुएँ शामिल

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”

प्रिया शर्मा

मुंबई• Satyanarayan Puja

“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek

“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”

मीना अय्यर

बैंगलोर• Graha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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कैसे काम करता है

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