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Pujari Ji

नारायण बलि पूजा

श्री विष्णुपद मंदिर, गया
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
नारायण बलि पूजा

नारायण बलि पूजा सनातन पितृ परंपरा का विशेष अनुष्ठान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु अकाल, असामयिक अथवा अप्राकृतिक परिस्थितियों में होती है, तब उनकी आत्मा की शांति एवं सद्गति के लिए विशेष पितृ कर्म किया जाता है। भगवान श्रीहरि नारायण को साक्षी मानकर दिवंगत जीवात्मा के उद्धार, शांति एवं मोक्ष की मंगलकामना की जाती है।

गया जी पितृ कर्म, श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। विष्णुपद मंदिर में भगवान श्रीहरि विष्णु के चरणचिह्न की पवित्र साक्षी में नारायण बलि पूजा कराकर दिवंगत परिजनों की शांति, सद्गति तथा परिवार के कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यदि परिवार में पितृ संबंधी बाधा, पितृ दोष या किसी दिवंगत सदस्य के निमित्त विशेष पितृ कर्म की आवश्यकता मानी जाती हो, तो योग्य वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में यह अनुष्ठान कराया जा सकता है।

Duration

3h – 4h

Best time

सुबह

Starting price

₹21,000

लाभ

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारायण बलि पूजा के माध्यम से दिवंगत आत्मा की शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है।
  • अकाल या अप्राकृतिक मृत्यु से संबंधित पितृ कर्म की शांति तथा दिवंगत आत्मा के कल्याण के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • पितरों के उद्धार एवं मोक्ष की प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक मंगलकामना की जाती है।
  • पितृ दोष एवं पितृ संबंधी बाधाओं के शमन तथा परिवार के कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
  • पितृ अथवा प्रेत संबंधी बाधाओं की शांति एवं उनसे संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन की मंगलकामना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति, समृद्धि एवं सौहार्द की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • जीवन में आने वाली अनचाही बाधाओं एवं रुकावटों से राहत तथा अनुकूल परिस्थितियों की प्राप्ति की मंगलकामना की जाती है।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म का विधिपूर्वक निर्वहन करने का पवित्र अवसर प्राप्त होता है।

नारायण बलि पूजा

नारायण-बलि पूजा एक प्राचीन एवं अत्यंत प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान है, जिसका वर्णन गरुड़ पुराण में मिलता है। यह पूजा विशेष रूप से उन पितरों (पूर्वजों) की आत्मा की शांति एवं मोक्ष के लिए की जाती है, जिनकी मृत्यु अकाल या अप्राकृतिक परिस्थितियों में हुई हो।

जब किसी व्यक्ति का विधिवत श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान पूर्ण रूप से नहीं हो पाता, तो उसकी आत्मा असंतुष्ट रह जाती है। ऐसी आत्माएं कभी-कभी अपने परिजनों के जीवन में बाधाएं उत्पन्न करती हैं।

नारायण बलि पूजा के माध्यम से इन आत्माओं को शांति प्रदान कर उन्हें मोक्ष की प्राप्ति कराई जाती है।

नाना प्रकार के दुर्मरण (अकाल मृत्यु) जो शास्त्रों मे बताए गए है

शास्त्रों में विभिन्न प्रकार की मृत्यु को दुर्मरण कहा गया है। ऐसे दुर्मरण से मृत व्यक्ति की दुर्मरण की निवृत्ति तथा सद्गति की प्राप्ति के लिए मृतक के श्राद्ध आदि कर्मों से पूर्व प्रायश्चित्त रूप में नारायण बलि करने का विधान बताया गया है।

दुर्मरण के प्रकार

  1. डूबने से मृत्यु
  2. फाँसी लगाने से मृत्यु
  3. विष खाने से मृत्यु
  4. अग्नि में जलने से मृत्यु
  5. चाण्डाल के हाथ से मृत्यु
  6. चोर के हाथ से मृत्यु
  7. शत्रु के हाथ से मृत्यु
  8. म्लेच्छ आदि के हाथ से मृत्यु
  9. वृक्ष से गिरने से मृत्यु
  10. बन्दीखाने में मृत्यु
  11. विस्फोट/हैजा आदि से मृत्यु
  12. मकान में दबकर मृत्यु
  13. शस्त्र से मृत्यु
  14. वाहन से गिरकर मृत्यु
  15. गाड़ी के नीचे दबकर मृत्यु
  16. हाथी के दाँत से मृत्यु
  17. पर्वत से गिरकर मृत्यु
  18. पागल होकर मृत्यु
  19. कुष्ठ रोग से मृत्यु
  20. महारोग से पीड़ित होकर मृत्यु
  21. क्षयरोग से मृत्यु
  22. पाप के अन्न से मृत्यु
  23. मूत्र-विष्ठा में पड़े रहकर मृत्यु
  24. घर के अंदर मृगी रोग से मृत्यु
  25. भगन्दर, गण्डमाला, पाण्डु आदि रोगों से मृत्यु
  26. ऊपर के छिद्रों में अशुद्धि से मृत्यु
  27. नीचे के छिद्रों में अशुद्धि से मृत्यु
  28. दोनों छिद्रों में अशुद्धि से मृत्यु
  29. सन्ध्यालोप से मृत्यु
  30. शौचालोप से मृत्यु
  31. अकृतस्नान-मरण
  32. रजस्वला के स्पर्श से मृत्यु
  33. दान किए बिना मृत्यु
  34. परदेश में मृत्यु
  35. अन्य जाति के घर में मृत्यु
  36. आधा दाह होने से मृत्यु
  37. चिता का बुझ जाना
  38. दक्षिणायन में मृत्यु
  39. पंचक में मृत्यु
  40. त्रिपुष्कर में मृत्यु
  41. रात्रि में मृत्यु
  42. गुरु से हीन होने से मृत्यु
  43. तुलसी, गंगाजल आदि वस्तुओं से तथा स्नान से रहित शव का ले जाया जाना
  44. खट्वा/खाट के ऊपर मृत्यु
  45. अस्पताल में मृत्यु
  • धर्म शास्त्रों के अनुसार इन प्रकार की मृत्यु को दुर्मरण कहा गया है।

नारायण बलि (दुर्मरण होने पर)

जिससे इस दुर्मरण हुआ हो तो उसकी निवृत्ति तथा सद्गति प्राप्ति के लिए इस प्रकार मरने वाले मनुष्य के श्राद्ध के पूर्व प्रायश्चित्त रूप में नारायणबलि करने का विधान है। इस प्रायश्चित्त के बिना मृत जीव को श्राद्ध-प्रदत्त अन्नादि प्राप्त नहीं होते, वे अन्तरीक्ष में विनष्ट हो जाते हैं— “नौपतिष्ठति तत्सर्वमन्तरिक्षे विनश्यति”।” ( श्राद्ध प्रकाश)

नारायण बलि पूजा का उद्देश्य

नारायण बलि एक शास्त्रोक्त वैदिक अनुष्ठान है, जिसे विशेष रूप से दुर्मरण से संबंधित प्रायश्चित्त तथा मृतक की सद्गति के उद्देश्य से किया जाता है। इसके माध्यम से मृतक के लिए शास्त्रोक्त विधि से कर्म करके उसकी आत्मा की शांति एवं सद्गति की कामना की जाती है।

  • यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु उपर्युक्त दुर्मरण के प्रकारों में हुई हो, तो शास्त्रोक्त परंपरा के अनुसार सामान्य श्राद्ध कर्म से पूर्व नारायण बलि को प्रायश्चित्त के रूप में कराया जाता है।

नारायण बलि पूजा के लाभ

  • पितृ दोष का निवारण
  • अकाल मृत्यु दोष की शांति
  • भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति
  • जीवन की बाधाओं और रुकावटों का अंत
  • संतान सुख की प्राप्ति
  • विवाह एवं दांपत्य जीवन में सुधार
  • आर्थिक उन्नति एवं समृद्धि
  • मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा

यह पूजा कहाँ कराई जाती है?

नारायण बलि पूजा भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर विधिवत कराई जाती हैः

  • नारायण बलि पूजा त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), काशी, गया, उज्जैन आदि प्रमुख धार्मिक तीर्थस्थलों के साथ-साथ अपने घर पर भी अनुभवी आचार्य द्वारा पूर्ण वैदिक विधि-विधान एवं शास्त्रोक्त पद्धति से संपन्न कराई जा सकती है।

क्यों आवश्यक है नारायण बलि पूजा?

यदि परिवार में लगातार समस्याएं, आर्थिक रुकावट, संतान में बाधा, विवाह में देरी, या बिना कारण मानसिक तनाव बना रहता है, तो यह पितृ दोष का संकेत हो सकता है।

ऐसी स्थिति में नारायण बलि पूजा अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती है।

नारायण बलि पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन की जटिल समस्याओं के समाधान का एक दिव्य माध्यम है। यह पूजा पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष प्रदान कर परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाती है।

विशेष जानकारी

  • विष्णुपद मंदिर, गया जी में अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में यह अनुष्ठान सम्पन्न कराया जा सकता है।
  • संकल्प के लिए यजमान का नाम, गोत्र एवं दिवंगत व्यक्ति का आवश्यक विवरण लिया जाता है।
  • दिवंगत व्यक्ति का नाम, यजमान से संबंध, मृत्यु की तिथि तथा मृत्यु की परिस्थिति ज्ञात होने पर संकल्प में सम्मिलित की जा सकती है।
  • महिला एवं पुरुष दोनों अपनी कुल एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार यजमान बन सकते हैं।
  • यदि परिवार में पुरुष सदस्य उपलब्ध न हो, तो कुल परंपरा एवं वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में महिला यजमान संकल्प लेकर अनुष्ठान करा सकती हैं।
  • पूजा के समय स्वच्छ एवं पारंपरिक वस्त्र धारण करना उचित माना जाता है।

नारायण बलि पूजा अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म व्यक्त करने की एक विशेष सनातन परंपरा है। विष्णुपद मंदिर, गया जी में अनुभवी वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में यह पवित्र अनुष्ठान दिवंगत जीवात्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष तथा परिवार के सुख, शांति एवं कल्याण की मंगलकामना के लिए श्रद्धापूर्वक सम्पन्न कराया जाता है।

पूजा स्थान — गया

श्री विष्णुपद मंदिर

श्री विष्णुपद मंदिर

गया

विष्णुपाद मंदिर गया में फल्गु नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत पवित्र और प्राचीन हिंदू मंदिर है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और अपनी धर्मशिला (भगवान विष्णु के चरणचिह्न) के लिए विश्वप्रसिद्ध है। लगभग 40 सेंटीमीटर लंबे ये पवित्र चरणचिह्न गर्भगृह में चांदी के आवरण के भीतर स्थापित हैं।

इतिहास एवं पौराणिक कथा

गयासुर की कथा

पुराणों के अनुसार गयासुर नामक एक दैत्य ने कठोर तपस्या कर महान शक्तियाँ प्राप्त कर ली थीं। भगवान विष्णु ने उससे यज्ञ हेतु उसके शरीर को समर्पित करने का निवेदन किया और अंततः उसे पृथ्वी के नीचे स्थापित कर दिया। उसी स्थान पर धर्मशिला पर भगवान विष्णु के चरणचिह्न अंकित हुए, जिन्हें आज विष्णुपाद मंदिर में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।

पिंडदान का महत्व

मान्यता है कि यहाँ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष, शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। इसी कारण गया हिंदू धर्म का एक प्रमुख मोक्ष-धाम माना जाता है।

भव्य वास्तुकला

विष्णुपाद मंदिर विशाल ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित है। इसकी अष्टकोणीय (आठ-भुज) संरचना लगभग 100 फीट ऊँची है। मंदिर में चारों ओर सुंदर नक्काशीदार स्तंभ हैं तथा शिखर पर लगभग 50 किलो स्वर्ण ध्वजा और कलश स्थापित है, जो इसकी दिव्यता को दर्शाते हैं।

धर्मशिला एवं पूजन

गर्भगृह में भगवान विष्णु के पवित्र चरणचिह्न चांदी के आवरण से सुरक्षित हैं। सामने माता लक्ष्मी की प्रतिमा भी विराजमान है, जिनकी प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा और श्रृंगार किया जाता है।

पिंडदान एवं तर्पण अनुष्ठान

विष्णुपाद मंदिर पिंडदान और पितृश्राद्ध का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालु फल्गु नदी के तट पर तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और श्राद्ध कर्म संपन्न करते हैं। विशेष रूप से पितृपक्ष के दौरान लाखों भक्त यहाँ अपने पितरों की शांति हेतु अनुष्ठान कराते हैं।

श्राद्धकाल का महत्व

पितृ पक्ष एवं अमावस्या के अवसर पर यहाँ विशेष पूजा-अनुष्ठान आयोजित होते हैं। श्रद्धालु पूर्ण वैदिक विधि से पिंडदान और तर्पण कराते हैं।

Puजरिजि.coम द्वारा उपलब्ध सेवाएँ

  • पूजा आयोजन एवं पिंडदान सेवा – शास्त्रसम्मत विधि से पिंडदान, तर्पण एवं श्राद्ध की संपूर्ण व्यवस्था।
  • अनुभवी पंडित मार्गदर्शन – वैदिक मंत्रोच्चारण, संकल्प और पूजा सामग्री सहित पूर्ण सहयोग।
  • ऑन-साइट एवं ऑनलाइन सुविधा – स्थल पर व्यवस्था तथा ऑनलाइन बुकिंग विकल्प।
  • ब्राह्मण भोजन एवं दान सेवा – पूजा के पश्चात ब्राह्मण भोजन, दक्षिणा और श्रद्धादान की व्यवस्था।

👉 हम आपकी श्रद्धा-यात्रा को सरल, सुव्यवस्थित और पुण्यपूर्ण बनाने के लिए संकल्पित हैं।

धार्मिक महत्ता

✨ पितरों को मोक्ष एवं शांति – विधिवत पिंडदान से पूर्वजों को मोक्ष मार्ग और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

✨ परिवार में समृद्धि और संतुलन – पितृश्राद्ध से कुल में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और सुख-समृद्धि का अनुभव होता है।

✨ आध्यात्मिक अनुभूति – फल्गु नदी के तट पर अनुष्ठान करने से मन में गहन शांति, भक्ति और आत्मिक संतुलन की अनुभूति होती है।

पहुँच एवं यात्रा

📌 स्थानः विष्णुपाद मंदिर रोड, चांद चौरा, गया, बिहार – 823001

🚆 निकटतम रेलवे स्टेशनः गया जंक्शन (ऑटो/कैब से सहज पहुँच)

✈️ निकटतम हवाई अड्डाः गया एयरपोर्ट

श्री विष्णुपाद मंदिर, गया जी — भगवान विष्णु के पवित्र पदचिह्न पर निर्मित यह प्राचीन तीर्थ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध का सर्वोच्च केंद्र माना जाता है। यह स्थल पितृमोक्ष, परिवार की शांति और आध्यात्मिक उन्नति का दिव्य स्थान है।

श्रद्धा आपकी, सेवा हमारी

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जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।

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  • श्रेष्ठ

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    3h

    यह विशेष वैदिक पितृ अनुष्ठान पवित्र विष्णुपद मंदिर, गया जी में भगवान श्रीहरि नारायण की कृपा एवं साक्षी में शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ सम्पन्न कराया जाता है। इस श्रेष्ठ पैकेज में 5 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा नारायण बलि एवं विस्तृत पितृ शांति अनुष्ठान कराया जाता है। यह पूजा विशेष रूप से अकाल, असामयिक अथवा अप्राकृतिक मृत्यु को प्राप्त दिवंगत आत्माओं की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना तथा पितृ शांति के लिए की जाती है। पूजा की अवधि लगभग 3 से 4 घंटे होती है। त्रिपिंडी श्राद्ध जोड़े जाने पर लगभग 1 घंटा अतिरिक्त समय लग सकता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • स्वस्ति वाचन
    • संकल्प
    • विष्णु पूजन
    • सत्येश पूजन
    • कलश स्थापना
    • पंच कलश पूजा
    • ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, यम एवं पितृ देवताओं का आवाहन एवं पूजन
    • पंचसूक्त पाठ
    • मंत्र जाप
    • नारायण बलि हवन
    • पिंडदान
    • पितृ तर्पण

    विशेष सुविधाएं

    • विष्णुपद मंदिर, गया जी के पवित्र तीर्थ क्षेत्र में नारायण बलि एवं पितृ शांति अनुष्ठान।
    • भगवान श्रीहरि नारायण की पवित्र साक्षी में दिवंगत आत्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना।
    • ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, यम एवं पितृ देवताओं का आवाहन एवं पूजन।
    • सहस्रनाम अर्चन, पंचसूक्त पाठ एवं मंत्र जाप सहित विस्तृत वैदिक अनुष्ठान।
    • नारायण बलि हवन, पिंडदान एवं पितृ तर्पण सहित विशेष पितृ कर्म।
    • पूजा के लिए आवश्यक सभी सामग्री एवं आचार्य दक्षिणा पैकेज में शामिल।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • दिवंगत पूर्वज का नाम
    • यदि उपलब्ध हो तो दिवंगत व्यक्ति की जन्म एवं मृत्यु संबंधी जानकारी
    • यजमान को पूजा के समय स्वच्छ एवं पारंपरिक वस्त्र धारण करने चाहिए।
    • पूजा के बाद वस्त्र बदलना आवश्यक हो सकता है, इसलिए अतिरिक्त पारंपरिक वस्त्र साथ रखें।
    • पूर्वजों के नाम लिखकर साथ लाना उचित रहेगा, ताकि संकल्प में उनका विधिवत स्मरण किया जा सके।
    • महिला एवं पुरुष दोनों अपनी कुल परंपरा के अनुसार यजमान बन सकते हैं। पुरुष सदस्य उपलब्ध न होने की स्थिति में महिला यजमान वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में संकल्प लेकर पूजा करा सकती हैं।

    विष्णुपद मंदिर, गया जी में भगवान श्रीहरि नारायण की कृपा से सम्पन्न यह नारायण बलि पूजा दिवंगत आत्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष तथा पितृ शांति और परिवार के कल्याण की मंगलकामना के लिए एक विशेष वैदिक पितृ अनुष्ठान है।

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नारायण बलि पूजा के बारे में हमसे बात करें

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”

प्रिया शर्मा

मुंबई• Satyanarayan Puja

“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek

“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”

मीना अय्यर

बैंगलोर• Graha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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कैसे काम करता है

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    तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।

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    संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।

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