मुख्य सामग्री पर जाएं
Pujari Ji

नारायण बलि पूजा

श्री विष्णुपद मंदिर, गया
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
नारायण बलि पूजा

नारायण बलि पूजा सनातन पितृ परंपरा का विशेष अनुष्ठान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु अकाल, असामयिक अथवा अप्राकृतिक परिस्थितियों में होती है, तब उनकी आत्मा की शांति एवं सद्गति के लिए विशेष पितृ कर्म किया जाता है। भगवान श्रीहरि नारायण को साक्षी मानकर दिवंगत जीवात्मा के उद्धार, शांति एवं मोक्ष की मंगलकामना की जाती है।

गया जी पितृ कर्म, श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। विष्णुपद मंदिर में भगवान श्रीहरि विष्णु के चरणचिह्न की पवित्र साक्षी में नारायण बलि पूजा कराकर दिवंगत परिजनों की शांति, सद्गति तथा परिवार के कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यदि परिवार में पितृ संबंधी बाधा, पितृ दोष या किसी दिवंगत सदस्य के निमित्त विशेष पितृ कर्म की आवश्यकता मानी जाती हो, तो योग्य वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में यह अनुष्ठान कराया जा सकता है।

Duration

3h – 4h

Best time

सुबह

Starting price

₹15,000

लाभ

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारायण बलि पूजा के माध्यम से दिवंगत आत्मा की शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है।
  • अकाल या अप्राकृतिक मृत्यु से संबंधित पितृ कर्म की शांति तथा दिवंगत आत्मा के कल्याण के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • पितरों के उद्धार एवं मोक्ष की प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक मंगलकामना की जाती है।
  • पितृ दोष एवं पितृ संबंधी बाधाओं के शमन तथा परिवार के कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
  • पितृ अथवा प्रेत संबंधी बाधाओं की शांति एवं उनसे संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन की मंगलकामना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति, समृद्धि एवं सौहार्द की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • जीवन में आने वाली अनचाही बाधाओं एवं रुकावटों से राहत तथा अनुकूल परिस्थितियों की प्राप्ति की मंगलकामना की जाती है।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म का विधिपूर्वक निर्वहन करने का पवित्र अवसर प्राप्त होता है।

नारायण बलि पूजा

नारायण बलि पूजा विशेष रूप से उन दिवंगत व्यक्तियों के निमित्त की जाने वाली पितृ साधना है जिनकी मृत्यु अकाल, असामयिक अथवा अप्राकृतिक परिस्थितियों में हुई हो। इस अनुष्ठान का उद्देश्य दिवंगत आत्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की प्रार्थना करना तथा पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और पितृ धर्म का निर्वहन करना है।

धार्मिक परंपरा में भगवान श्रीहरि नारायण को इस अनुष्ठान का प्रमुख देवता माना जाता है। गया जी में स्थित विष्णुपद मंदिर पितृ कर्म के लिए विशेष महत्व रखता है। भगवान विष्णु के पवित्र चरणचिह्न की साक्षी में किया जाने वाला यह अनुष्ठान दिवंगत आत्मा एवं परिवार के आध्यात्मिक कल्याण की मंगलकामना से सम्पन्न कराया जाता है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

इस पूजा में मुख्य रूप से भगवान श्रीहरि नारायण की आराधना की जाती है। साथ ही भगवान गणेश, पितृ देवताओं तथा संबंधित वैदिक देवताओं का विधिपूर्वक स्मरण और पूजन किया जा सकता है।

विष्णुपद मंदिर, गया जी पितृ श्राद्ध एवं पिंडदान की प्राचीन धार्मिक परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। यहाँ किए जाने वाले पितृ कर्म दिवंगत परिजनों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना से सम्पन्न किए जाते हैं।

नारायण बलि पूजा कब करानी चाहिए?

  • किसी दिवंगत व्यक्ति की मृत्यु अकाल या असामयिक परिस्थितियों में हुई हो।
  • मृत्यु दुर्घटना, जल, अग्नि या अन्य अप्राकृतिक परिस्थिति से हुई हो।
  • सर्पदंश अथवा विषैले जीव के कारण मृत्यु हुई हो।
  • हिंसा या अन्य अप्राकृतिक परिस्थिति में मृत्यु हुई हो।
  • मृत्यु का कारण अज्ञात या रहस्यमय रहा हो।
  • दिवंगत व्यक्ति के निमित्त आवश्यक पितृ कर्म पूर्ण न हो पाया हो।
  • कुल परंपरा या वैदिक आचार्य द्वारा विशेष पितृ कर्म की आवश्यकता बताई गई हो।

नारायण बलि पूजा के लिए किसी एक निश्चित वार्षिक तिथि की प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं माना जाता। उपयुक्त दिन का निर्धारण कुल परंपरा और वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार किया जा सकता है।

किन परिस्थितियों में नारायण बलि पूजा कराई जाती है?

धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह अनुष्ठान निम्न परिस्थितियों में कराया जा सकता है—

  • पितृ दोष की धार्मिक या ज्योतिषीय मान्यता होने पर।
  • परिवार में लंबे समय से अशांति एवं बाधाएँ बनी रहने पर।
  • विवाह में बार-बार विलंब या बाधा आने पर।
  • संतान संबंधी बाधाओं के लिए धार्मिक शांति की मंगलकामना करते समय।
  • आर्थिक एवं पारिवारिक कठिनाइयों के समय।
  • दिवंगत परिजनों से संबंधित बार-बार स्वप्न आने पर।
  • पितृ या प्रेत संबंधी बाधा की धार्मिक मान्यता होने पर।

इन परिस्थितियों को धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के संदर्भ में ही समझना चाहिए। इन्हें किसी समस्या का निश्चित कारण नहीं माना जाना चाहिए।

नारायण बलि पूजा के धार्मिक लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान के माध्यम से—

  • दिवंगत आत्मा की शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है।
  • अकाल या अप्राकृतिक मृत्यु से संबंधित पितृ कर्म की शांति की प्रार्थना की जाती है।
  • दिवंगत परिजन के उद्धार एवं मोक्ष की मंगलकामना की जाती है।
  • पितृ दोष एवं पितृ संबंधी बाधाओं की शांति की प्रार्थना की जाती है।
  • पितृ या प्रेत संबंधी धार्मिक बाधाओं के शमन की मंगलकामना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति एवं सौहार्द की प्रार्थना की जाती है।
  • जीवन की बाधाओं से राहत एवं परिवार के कल्याण की मंगलकामना की जाती है।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म का निर्वहन होता है।

आध्यात्मिक महत्व

नारायण बलि पूजा दिवंगत परिजनों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और पितृ धर्म व्यक्त करने की विशेष सनातन परंपरा है। भगवान श्रीहरि नारायण की आराधना के माध्यम से दिवंगत जीवात्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की प्रार्थना की जाती है।

विष्णुपद मंदिर, गया जी में भगवान श्रीहरि विष्णु के चरणचिह्न की पवित्र साक्षी में सम्पन्न यह अनुष्ठान पितृ कर्म की धार्मिक परंपरा को श्रद्धापूर्वक निभाने तथा परिवार के आध्यात्मिक कल्याण की मंगलकामना करने का विशेष माध्यम माना जाता है।

विशेष जानकारी

  • विष्णुपद मंदिर, गया जी में अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में यह अनुष्ठान सम्पन्न कराया जा सकता है।
  • संकल्प के लिए यजमान का नाम, गोत्र एवं दिवंगत व्यक्ति का आवश्यक विवरण लिया जाता है।
  • दिवंगत व्यक्ति का नाम, यजमान से संबंध, मृत्यु की तिथि तथा मृत्यु की परिस्थिति ज्ञात होने पर संकल्प में सम्मिलित की जा सकती है।
  • महिला एवं पुरुष दोनों अपनी कुल एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार यजमान बन सकते हैं।
  • यदि परिवार में पुरुष सदस्य उपलब्ध न हो, तो कुल परंपरा एवं वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में महिला यजमान संकल्प लेकर अनुष्ठान करा सकती हैं।
  • पूजा के समय स्वच्छ एवं पारंपरिक वस्त्र धारण करना उचित माना जाता है।

नारायण बलि पूजा अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म व्यक्त करने की एक विशेष सनातन परंपरा है। विष्णुपद मंदिर, गया जी में अनुभवी वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में यह पवित्र अनुष्ठान दिवंगत जीवात्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष तथा परिवार के सुख, शांति एवं कल्याण की मंगलकामना के लिए श्रद्धापूर्वक सम्पन्न कराया जाता है।

पूजा स्थानगया

श्री विष्णुपद मंदिर

श्री विष्णुपद मंदिर

गया

विष्णुपाद मंदिर गया में फल्गु नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत पवित्र और प्राचीन हिंदू मंदिर है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और अपनी धर्मशिला (भगवान विष्णु के चरणचिह्न) के लिए विश्वप्रसिद्ध है। लगभग 40 सेंटीमीटर लंबे ये पवित्र चरणचिह्न गर्भगृह में चांदी के आवरण के भीतर स्थापित हैं।

इतिहास एवं पौराणिक कथा

गयासुर की कथा

पुराणों के अनुसार गयासुर नामक एक दैत्य ने कठोर तपस्या कर महान शक्तियाँ प्राप्त कर ली थीं। भगवान विष्णु ने उससे यज्ञ हेतु उसके शरीर को समर्पित करने का निवेदन किया और अंततः उसे पृथ्वी के नीचे स्थापित कर दिया। उसी स्थान पर धर्मशिला पर भगवान विष्णु के चरणचिह्न अंकित हुए, जिन्हें आज विष्णुपाद मंदिर में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।

पिंडदान का महत्व

मान्यता है कि यहाँ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष, शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। इसी कारण गया हिंदू धर्म का एक प्रमुख मोक्ष-धाम माना जाता है।

भव्य वास्तुकला

विष्णुपाद मंदिर विशाल ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित है। इसकी अष्टकोणीय (आठ-भुज) संरचना लगभग 100 फीट ऊँची है। मंदिर में चारों ओर सुंदर नक्काशीदार स्तंभ हैं तथा शिखर पर लगभग 50 किलो स्वर्ण ध्वजा और कलश स्थापित है, जो इसकी दिव्यता को दर्शाते हैं।

धर्मशिला एवं पूजन

गर्भगृह में भगवान विष्णु के पवित्र चरणचिह्न चांदी के आवरण से सुरक्षित हैं। सामने माता लक्ष्मी की प्रतिमा भी विराजमान है, जिनकी प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा और श्रृंगार किया जाता है।

पिंडदान एवं तर्पण अनुष्ठान

विष्णुपाद मंदिर पिंडदान और पितृश्राद्ध का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालु फल्गु नदी के तट पर तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और श्राद्ध कर्म संपन्न करते हैं। विशेष रूप से पितृपक्ष के दौरान लाखों भक्त यहाँ अपने पितरों की शांति हेतु अनुष्ठान कराते हैं।

श्राद्धकाल का महत्व

पितृ पक्ष एवं अमावस्या के अवसर पर यहाँ विशेष पूजा-अनुष्ठान आयोजित होते हैं। श्रद्धालु पूर्ण वैदिक विधि से पिंडदान और तर्पण कराते हैं।

Puजरिजि.coम द्वारा उपलब्ध सेवाएँ

  • पूजा आयोजन एवं पिंडदान सेवा – शास्त्रसम्मत विधि से पिंडदान, तर्पण एवं श्राद्ध की संपूर्ण व्यवस्था।
  • अनुभवी पंडित मार्गदर्शन – वैदिक मंत्रोच्चारण, संकल्प और पूजा सामग्री सहित पूर्ण सहयोग।
  • ऑन-साइट एवं ऑनलाइन सुविधा – स्थल पर व्यवस्था तथा ऑनलाइन बुकिंग विकल्प।
  • ब्राह्मण भोजन एवं दान सेवा – पूजा के पश्चात ब्राह्मण भोजन, दक्षिणा और श्रद्धादान की व्यवस्था।

👉 हम आपकी श्रद्धा-यात्रा को सरल, सुव्यवस्थित और पुण्यपूर्ण बनाने के लिए संकल्पित हैं।

धार्मिक महत्ता

पितरों को मोक्ष एवं शांति – विधिवत पिंडदान से पूर्वजों को मोक्ष मार्ग और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

परिवार में समृद्धि और संतुलन – पितृश्राद्ध से कुल में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और सुख-समृद्धि का अनुभव होता है।

आध्यात्मिक अनुभूति – फल्गु नदी के तट पर अनुष्ठान करने से मन में गहन शांति, भक्ति और आत्मिक संतुलन की अनुभूति होती है।

पहुँच एवं यात्रा

📌 स्थानः विष्णुपाद मंदिर रोड, चांद चौरा, गया, बिहार – 823001

🚆 निकटतम रेलवे स्टेशनः गया जंक्शन (ऑटो/कैब से सहज पहुँच)

✈️ निकटतम हवाई अड्डाः गया एयरपोर्ट

श्री विष्णुपाद मंदिर, गया जी — भगवान विष्णु के पवित्र पदचिह्न पर निर्मित यह प्राचीन तीर्थ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध का सर्वोच्च केंद्र माना जाता है। यह स्थल पितृमोक्ष, परिवार की शांति और आध्यात्मिक उन्नति का दिव्य स्थान है।

श्रद्धा आपकी, सेवा हमारी

मंदिर विवरण देखें

तीर्थ नहीं जा पा रहे हैं?

जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।

व्हाट्सएप पर पूछें

हमारी गारंटी

100% प्रमाणित पुजारी
पूरी पूजा सामग्री शामिल
वैदिक विधि-विधान
मार्गदर्शन व सहायता

पैकेज चुनें

  • उन्नत

    3 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    3h

    उन्नत पैकेज में 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा पवित्र विष्णुपद मंदिर, गया जी में नारायण बलि एवं पितृ शांति अनुष्ठान शास्त्रीय परंपरा के अनुसार सम्पन्न कराया जाता है। यह विशेष पितृ अनुष्ठान अकाल, असामयिक अथवा अप्राकृतिक मृत्यु को प्राप्त दिवंगत आत्माओं की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना के लिए कराया जाता है। भगवान श्रीहरि नारायण को मुख्य देवता मानकर दिवंगत आत्मा के उद्धार तथा पितृ शांति की प्रार्थना की जाती है। पूजा की अवधि लगभग 3 से 4 घंटे होती है। त्रिपिंडी श्राद्ध जोड़े जाने पर लगभग 1 घंटा अतिरिक्त समय लग सकता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • स्वस्ति वाचन
    • संकल्प
    • विष्णु पूजन
    • कलश स्थापना
    • सत्येश पूजन
    • पंच कलश पूजा
    • ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, यम एवं पितृ देवताओं का आवाहन एवं पूजन
    • पंचसूक्त पाठ
    • नारायण बलि हवन
    • पिंडदान
    • पितृ तर्पण

    शामिल सेवाएं

    • 3 अनुभवी वैदिक आचार्य
    • सभी पूजा सामग्री
    • नारायण बलि पूजा हेतु आवश्यक समस्त सामग्री
    • आवश्यक धार्मिक अनुष्ठानों की सम्पूर्ण व्यवस्था
    • आचार्य दक्षिणा

    विशेष सुविधाएं

    • विष्णुपद मंदिर, गया जी के पवित्र तीर्थ क्षेत्र में नारायण बलि एवं पितृ शांति अनुष्ठान।
    • भगवान श्रीहरि नारायण की पवित्र साक्षी में दिवंगत आत्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना।
    • ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, यम एवं पितृ देवताओं का आवाहन एवं पूजन।
    • नारायण बलि हवन, पिंडदान एवं पितृ तर्पण सहित विशेष पितृ कर्म।
    • पूजा के लिए सभी आवश्यक सामग्री एवं आचार्य दक्षिणा पैकेज में शामिल।
    • यजमान को पूजा के समय स्वच्छ एवं पारंपरिक वस्त्र धारण करने चाहिए।
    • पूजा के बाद वस्त्र बदलने की आवश्यकता हो सकती है, इसलिए अतिरिक्त पारंपरिक वस्त्र साथ रखना उचित है।
    • पूर्वजों के नाम लिखकर साथ लाना उचित रहेगा, ताकि संकल्प में उनका स्मरण किया जा सके।
    • महिला एवं पुरुष दोनों अपनी कुल एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार यजमान बन सकते हैं। परिवार में पुरुष सदस्य उपलब्ध न होने की स्थिति में कुल परंपरा एवं वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार महिला यजमान भी संकल्प लेकर पूजा करा सकती हैं।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • दिवंगत व्यक्ति का नाम
    • दिवंगत व्यक्ति से संबंध
    • यदि उपलब्ध हो तो दिवंगत व्यक्ति की जन्म एवं मृत्यु संबंधी जानकारी
    • पितृ कर्म के लिए पूर्वजों के नाम

    विष्णुपद मंदिर, गया जी में सम्पन्न यह नारायण बलि अनुष्ठान भगवान श्रीहरि नारायण की कृपा से दिवंगत आत्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष तथा पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता की मंगलकामना के लिए एक पवित्र वैदिक पितृ कर्म माना जाता है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹15,000₹21,00029% off

    2 वस्तुएँ शामिल

  • श्रेष्ठ

    5 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    3h

    यह विशेष वैदिक पितृ अनुष्ठान पवित्र विष्णुपद मंदिर, गया जी में भगवान श्रीहरि नारायण की कृपा एवं साक्षी में शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ सम्पन्न कराया जाता है। इस श्रेष्ठ पैकेज में 5 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा नारायण बलि एवं विस्तृत पितृ शांति अनुष्ठान कराया जाता है। यह पूजा विशेष रूप से अकाल, असामयिक अथवा अप्राकृतिक मृत्यु को प्राप्त दिवंगत आत्माओं की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना तथा पितृ शांति के लिए की जाती है। पूजा की अवधि लगभग 3 से 4 घंटे होती है। त्रिपिंडी श्राद्ध जोड़े जाने पर लगभग 1 घंटा अतिरिक्त समय लग सकता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • स्वस्ति वाचन
    • संकल्प
    • विष्णु पूजन
    • सहस्रनाम अर्चन
    • सत्येश पूजन
    • कलश स्थापना
    • पंच कलश पूजा
    • ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, यम एवं पितृ देवताओं का आवाहन एवं पूजन
    • पंचसूक्त पाठ
    • मंत्र जाप
    • नारायण बलि हवन
    • पिंडदान
    • पितृ तर्पण

    शामिल सेवाएं

    • 5 अनुभवी वैदिक आचार्य
    • सभी पूजा सामग्री
    • नारायण बलि पूजा हेतु आवश्यक समस्त सामग्री
    • विस्तृत पितृ शांति अनुष्ठान
    • आचार्य दक्षिणा

    विशेष सुविधाएं

    • विष्णुपद मंदिर, गया जी के पवित्र तीर्थ क्षेत्र में नारायण बलि एवं पितृ शांति अनुष्ठान।
    • भगवान श्रीहरि नारायण की पवित्र साक्षी में दिवंगत आत्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना।
    • ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, यम एवं पितृ देवताओं का आवाहन एवं पूजन।
    • सहस्रनाम अर्चन, पंचसूक्त पाठ एवं मंत्र जाप सहित विस्तृत वैदिक अनुष्ठान।
    • नारायण बलि हवन, पिंडदान एवं पितृ तर्पण सहित विशेष पितृ कर्म।
    • पूजा के लिए आवश्यक सभी सामग्री एवं आचार्य दक्षिणा पैकेज में शामिल।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • दिवंगत पूर्वज का नाम
    • यदि उपलब्ध हो तो दिवंगत व्यक्ति की जन्म एवं मृत्यु संबंधी जानकारी
    • यजमान को पूजा के समय स्वच्छ एवं पारंपरिक वस्त्र धारण करने चाहिए।
    • पूजा के बाद वस्त्र बदलना आवश्यक हो सकता है, इसलिए अतिरिक्त पारंपरिक वस्त्र साथ रखें।
    • पूर्वजों के नाम लिखकर साथ लाना उचित रहेगा, ताकि संकल्प में उनका विधिवत स्मरण किया जा सके।
    • महिला एवं पुरुष दोनों अपनी कुल परंपरा के अनुसार यजमान बन सकते हैं। पुरुष सदस्य उपलब्ध न होने की स्थिति में महिला यजमान वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में संकल्प लेकर पूजा करा सकती हैं।

    विष्णुपद मंदिर, गया जी में भगवान श्रीहरि नारायण की कृपा से सम्पन्न यह नारायण बलि पूजा दिवंगत आत्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष तथा पितृ शांति और परिवार के कल्याण की मंगलकामना के लिए एक विशेष वैदिक पितृ अनुष्ठान है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹21,000₹25,00016% off

    2 वस्तुएँ शामिल

नारायण बलि पूजा के बारे में हमसे बात करें

WhatsApp

भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

और अधिक जानें

कैसे काम करता है

एक बार बुक करें — बाकी सब पुजारीजी संभाले

एक बार जानकारी दें। पुजारी, सामग्री, विधि-विधान और अपडेट — सब आपके लिए संभाला जाता है।

  1. आप

    बुक करें और संकल्प बताएँ

    पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।

  2. पुजारीजी

    हम प्रमाणित पुजारी नियुक्त करते हैं

    जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।

  3. पुजारीजी

    हम पूरी पूजा सामग्री की व्यवस्था करते हैं

    हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।

  4. पुजारीजी

    वैदिक विधि-विधान से पूजा संपन्न

    तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।

  5. पुजारीजी

    आपको प्रसाद व आशीर्वाद मिलता है

    संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।

हर चरण पर कॉल और व्हाट्सएप पर मार्गदर्शन व सहायता।

अभी बुक करें नारायण बलि पूजा

ऊपर दिए गए पैकेज में से चुनें या पूछताछ करें, हमारी टीम आपकी तारीख और विवरणों की पुष्टि करेगी।