“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja

नारायण बलि पूजा सनातन पितृ परंपरा का विशेष अनुष्ठान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु अकाल, असामयिक अथवा अप्राकृतिक परिस्थितियों में होती है, तब उनकी आत्मा की शांति एवं सद्गति के लिए विशेष पितृ कर्म किया जाता है। भगवान श्रीहरि नारायण को साक्षी मानकर दिवंगत जीवात्मा के उद्धार, शांति एवं मोक्ष की मंगलकामना की जाती है।
गया जी पितृ कर्म, श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। विष्णुपद मंदिर में भगवान श्रीहरि विष्णु के चरणचिह्न की पवित्र साक्षी में नारायण बलि पूजा कराकर दिवंगत परिजनों की शांति, सद्गति तथा परिवार के कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यदि परिवार में पितृ संबंधी बाधा, पितृ दोष या किसी दिवंगत सदस्य के निमित्त विशेष पितृ कर्म की आवश्यकता मानी जाती हो, तो योग्य वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में यह अनुष्ठान कराया जा सकता है।
Duration
3h – 4h
Best time
सुबह
Starting price
₹15,000
नारायण बलि पूजा विशेष रूप से उन दिवंगत व्यक्तियों के निमित्त की जाने वाली पितृ साधना है जिनकी मृत्यु अकाल, असामयिक अथवा अप्राकृतिक परिस्थितियों में हुई हो। इस अनुष्ठान का उद्देश्य दिवंगत आत्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की प्रार्थना करना तथा पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और पितृ धर्म का निर्वहन करना है।
धार्मिक परंपरा में भगवान श्रीहरि नारायण को इस अनुष्ठान का प्रमुख देवता माना जाता है। गया जी में स्थित विष्णुपद मंदिर पितृ कर्म के लिए विशेष महत्व रखता है। भगवान विष्णु के पवित्र चरणचिह्न की साक्षी में किया जाने वाला यह अनुष्ठान दिवंगत आत्मा एवं परिवार के आध्यात्मिक कल्याण की मंगलकामना से सम्पन्न कराया जाता है।
मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व
इस पूजा में मुख्य रूप से भगवान श्रीहरि नारायण की आराधना की जाती है। साथ ही भगवान गणेश, पितृ देवताओं तथा संबंधित वैदिक देवताओं का विधिपूर्वक स्मरण और पूजन किया जा सकता है।
विष्णुपद मंदिर, गया जी पितृ श्राद्ध एवं पिंडदान की प्राचीन धार्मिक परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। यहाँ किए जाने वाले पितृ कर्म दिवंगत परिजनों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना से सम्पन्न किए जाते हैं।
नारायण बलि पूजा कब करानी चाहिए?
नारायण बलि पूजा के लिए किसी एक निश्चित वार्षिक तिथि की प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं माना जाता। उपयुक्त दिन का निर्धारण कुल परंपरा और वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार किया जा सकता है।
किन परिस्थितियों में नारायण बलि पूजा कराई जाती है?
धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह अनुष्ठान निम्न परिस्थितियों में कराया जा सकता है—
इन परिस्थितियों को धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के संदर्भ में ही समझना चाहिए। इन्हें किसी समस्या का निश्चित कारण नहीं माना जाना चाहिए।
नारायण बलि पूजा के धार्मिक लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान के माध्यम से—
आध्यात्मिक महत्व
नारायण बलि पूजा दिवंगत परिजनों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और पितृ धर्म व्यक्त करने की विशेष सनातन परंपरा है। भगवान श्रीहरि नारायण की आराधना के माध्यम से दिवंगत जीवात्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की प्रार्थना की जाती है।
विष्णुपद मंदिर, गया जी में भगवान श्रीहरि विष्णु के चरणचिह्न की पवित्र साक्षी में सम्पन्न यह अनुष्ठान पितृ कर्म की धार्मिक परंपरा को श्रद्धापूर्वक निभाने तथा परिवार के आध्यात्मिक कल्याण की मंगलकामना करने का विशेष माध्यम माना जाता है।
विशेष जानकारी
नारायण बलि पूजा अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म व्यक्त करने की एक विशेष सनातन परंपरा है। विष्णुपद मंदिर, गया जी में अनुभवी वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में यह पवित्र अनुष्ठान दिवंगत जीवात्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष तथा परिवार के सुख, शांति एवं कल्याण की मंगलकामना के लिए श्रद्धापूर्वक सम्पन्न कराया जाता है।

गया
विष्णुपाद मंदिर गया में फल्गु नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत पवित्र और प्राचीन हिंदू मंदिर है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और अपनी धर्मशिला (भगवान विष्णु के चरणचिह्न) के लिए विश्वप्रसिद्ध है। लगभग 40 सेंटीमीटर लंबे ये पवित्र चरणचिह्न गर्भगृह में चांदी के आवरण के भीतर स्थापित हैं।
पुराणों के अनुसार गयासुर नामक एक दैत्य ने कठोर तपस्या कर महान शक्तियाँ प्राप्त कर ली थीं। भगवान विष्णु ने उससे यज्ञ हेतु उसके शरीर को समर्पित करने का निवेदन किया और अंततः उसे पृथ्वी के नीचे स्थापित कर दिया। उसी स्थान पर धर्मशिला पर भगवान विष्णु के चरणचिह्न अंकित हुए, जिन्हें आज विष्णुपाद मंदिर में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।
मान्यता है कि यहाँ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष, शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। इसी कारण गया हिंदू धर्म का एक प्रमुख मोक्ष-धाम माना जाता है।
विष्णुपाद मंदिर विशाल ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित है। इसकी अष्टकोणीय (आठ-भुज) संरचना लगभग 100 फीट ऊँची है। मंदिर में चारों ओर सुंदर नक्काशीदार स्तंभ हैं तथा शिखर पर लगभग 50 किलो स्वर्ण ध्वजा और कलश स्थापित है, जो इसकी दिव्यता को दर्शाते हैं।
गर्भगृह में भगवान विष्णु के पवित्र चरणचिह्न चांदी के आवरण से सुरक्षित हैं। सामने माता लक्ष्मी की प्रतिमा भी विराजमान है, जिनकी प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा और श्रृंगार किया जाता है।
विष्णुपाद मंदिर पिंडदान और पितृश्राद्ध का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालु फल्गु नदी के तट पर तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और श्राद्ध कर्म संपन्न करते हैं। विशेष रूप से पितृपक्ष के दौरान लाखों भक्त यहाँ अपने पितरों की शांति हेतु अनुष्ठान कराते हैं।
पितृ पक्ष एवं अमावस्या के अवसर पर यहाँ विशेष पूजा-अनुष्ठान आयोजित होते हैं। श्रद्धालु पूर्ण वैदिक विधि से पिंडदान और तर्पण कराते हैं।
👉 हम आपकी श्रद्धा-यात्रा को सरल, सुव्यवस्थित और पुण्यपूर्ण बनाने के लिए संकल्पित हैं।
✨ पितरों को मोक्ष एवं शांति – विधिवत पिंडदान से पूर्वजों को मोक्ष मार्ग और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
✨ परिवार में समृद्धि और संतुलन – पितृश्राद्ध से कुल में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और सुख-समृद्धि का अनुभव होता है।
✨ आध्यात्मिक अनुभूति – फल्गु नदी के तट पर अनुष्ठान करने से मन में गहन शांति, भक्ति और आत्मिक संतुलन की अनुभूति होती है।
📌 स्थानः विष्णुपाद मंदिर रोड, चांद चौरा, गया, बिहार – 823001
🚆 निकटतम रेलवे स्टेशनः गया जंक्शन (ऑटो/कैब से सहज पहुँच)
✈️ निकटतम हवाई अड्डाः गया एयरपोर्ट
श्री विष्णुपाद मंदिर, गया जी — भगवान विष्णु के पवित्र पदचिह्न पर निर्मित यह प्राचीन तीर्थ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध का सर्वोच्च केंद्र माना जाता है। यह स्थल पितृमोक्ष, परिवार की शांति और आध्यात्मिक उन्नति का दिव्य स्थान है।
श्रद्धा आपकी, सेवा हमारी
जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।
3 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
उन्नत पैकेज में 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा पवित्र विष्णुपद मंदिर, गया जी में नारायण बलि एवं पितृ शांति अनुष्ठान शास्त्रीय परंपरा के अनुसार सम्पन्न कराया जाता है। यह विशेष पितृ अनुष्ठान अकाल, असामयिक अथवा अप्राकृतिक मृत्यु को प्राप्त दिवंगत आत्माओं की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना के लिए कराया जाता है। भगवान श्रीहरि नारायण को मुख्य देवता मानकर दिवंगत आत्मा के उद्धार तथा पितृ शांति की प्रार्थना की जाती है। पूजा की अवधि लगभग 3 से 4 घंटे होती है। त्रिपिंडी श्राद्ध जोड़े जाने पर लगभग 1 घंटा अतिरिक्त समय लग सकता है।
पूजा में शामिल विधियां
शामिल सेवाएं
विशेष सुविधाएं
आवश्यक जानकारी
विष्णुपद मंदिर, गया जी में सम्पन्न यह नारायण बलि अनुष्ठान भगवान श्रीहरि नारायण की कृपा से दिवंगत आत्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष तथा पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता की मंगलकामना के लिए एक पवित्र वैदिक पितृ कर्म माना जाता है।
2 वस्तुएँ शामिल
5 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
यह विशेष वैदिक पितृ अनुष्ठान पवित्र विष्णुपद मंदिर, गया जी में भगवान श्रीहरि नारायण की कृपा एवं साक्षी में शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ सम्पन्न कराया जाता है। इस श्रेष्ठ पैकेज में 5 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा नारायण बलि एवं विस्तृत पितृ शांति अनुष्ठान कराया जाता है। यह पूजा विशेष रूप से अकाल, असामयिक अथवा अप्राकृतिक मृत्यु को प्राप्त दिवंगत आत्माओं की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना तथा पितृ शांति के लिए की जाती है। पूजा की अवधि लगभग 3 से 4 घंटे होती है। त्रिपिंडी श्राद्ध जोड़े जाने पर लगभग 1 घंटा अतिरिक्त समय लग सकता है।
पूजा में शामिल विधियां
शामिल सेवाएं
विशेष सुविधाएं
आवश्यक जानकारी
विष्णुपद मंदिर, गया जी में भगवान श्रीहरि नारायण की कृपा से सम्पन्न यह नारायण बलि पूजा दिवंगत आत्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष तथा पितृ शांति और परिवार के कल्याण की मंगलकामना के लिए एक विशेष वैदिक पितृ अनुष्ठान है।
2 वस्तुएँ शामिल
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WhatsAppभक्तों की प्रतिक्रिया
“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
एक बार जानकारी दें। पुजारी, सामग्री, विधि-विधान और अपडेट — सब आपके लिए संभाला जाता है।
पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।
जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।
हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।
तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।
संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।
ऊपर दिए गए पैकेज में से चुनें या पूछताछ करें, हमारी टीम आपकी तारीख और विवरणों की पुष्टि करेगी।