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Pujari Ji

नारायण नाग बलि पूजा

सिद्धवट मंदिर, उज्जैन
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
नारायण नाग बलि पूजा

नारायण नागबली पूजा हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष पितृ कर्म एवं प्रायश्चित्त अनुष्ठान के रूप में मानी जाती है। इसमें नारायण बलि और नाग बलि दोनों अनुष्ठान सम्मिलित होते हैं। नारायण बलि मुख्यतः अकाल, असामयिक अथवा अप्राकृतिक मृत्यु को प्राप्त दिवंगत आत्माओं की शांति एवं सद्गति की मंगलकामना से की जाती है। नाग बलि नाग संबंधी धार्मिक दोष एवं प्रायश्चित्त की भावना से सम्पन्न की जाती है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पितृ दोष, नाग दोष, कालसर्प योग अथवा राहु-केतु से संबंधित अशुभ स्थितियों में इस पूजा के माध्यम से शांति की प्रार्थना की जाती है। संतान, विवाह, पारिवारिक सुख, व्यवसाय तथा आर्थिक जीवन से संबंधित बाधाओं के संदर्भ में भी योग्य ज्योतिषाचार्य के परामर्श से यह अनुष्ठान कराया जा सकता है।

सिद्धवट, उज्जैन क्षिप्रा नदी के पवित्र तट पर स्थित एक महत्वपूर्ण पितृ तीर्थ माना जाता है। यहाँ पितृ तर्पण, श्राद्ध एवं अन्य पितृ कर्मों की धार्मिक परंपरा प्रचलित है। इसी कारण नारायण नागबली पूजा के लिए यह स्थान विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

Duration

2h – 4h

Best time

सुबह

Starting price

₹21,000

लाभ

  • धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नारायण नागबली पूजा के माध्यम से पितृ दोष के शमन एवं पितरों की शांति की मंगलकामना की जाती है।
  • अकाल अथवा असामयिक मृत्यु को प्राप्त दिवंगत आत्माओं की शांति एवं सद्गति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • नाग दोष एवं नाग संबंधी धार्मिक बाधाओं की शांति तथा अनुकूल परिस्थितियों की प्राप्ति की मंगलकामना की जाती है।
  • कालसर्प योग तथा राहु-केतु से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • संतान संबंधी बाधाओं के शमन एवं परिवार के समग्र कल्याण की मंगलकामना की जाती है।
  • विवाह एवं दांपत्य जीवन में शुभता, प्रेम, सौहार्द एवं पारिवारिक सामंजस्य की प्रार्थना की जाती है।
  • व्यवसाय, कार्यक्षेत्र एवं आर्थिक जीवन में आने वाली बाधाओं से राहत तथा स्थिरता की प्राप्ति की मंगलकामना की जाती है।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करने तथा धार्मिक कर्तव्य के विधिपूर्वक निर्वहन की भावना को बल मिलता है।

नारायण नाग बलि पूजा

नारायण नागबली पूजा दो अलग-अलग धार्मिक कर्मों का संयुक्त अनुष्ठान है। नारायण बलि में दिवंगत आत्मा की शांति एवं सद्गति के लिए भगवान विष्णु की आराधना और पितृ कर्म किए जाते हैं। नाग बलि में नाग देवता से संबंधित धार्मिक प्रायश्चित्त एवं शांति कर्म किए जाते हैं।

धार्मिक एवं ज्योतिषीय परंपराओं में ऐसी मान्यता है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में पितृ संबंधी बाधाओं अथवा नाग संबंधी दोषों की शांति के लिए इन अनुष्ठानों का विधान किया जाता है। पूजा का उद्देश्य किसी निश्चित सांसारिक परिणाम की गारंटी देना नहीं, बल्कि श्रद्धा, प्रार्थना, पितृ सम्मान एवं धार्मिक प्रायश्चित्त के माध्यम से शांति की मंगलकामना करना है।

सिद्धवट, उज्जैन में यह अनुष्ठान अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में संकल्प, पूजन, पितृ तर्पण, पिंडदान, नाग पूजन, मंत्र जाप तथा अन्य निर्धारित वैदिक कर्मों के साथ सम्पन्न कराया जाता है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

इस अनुष्ठान में भगवान विष्णु, भगवान शिव, पितृ देवता, नाग देवता तथा संबंधित वैदिक देवताओं की आराधना की जाती है।

भगवान विष्णु की आराधना नारायण बलि में विशेष महत्व रखती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु की कृपा से दिवंगत आत्माओं की शांति एवं सद्गति के लिए प्रार्थना की जाती है। नाग बलि में नाग देवता का पूजन धार्मिक प्रायश्चित्त एवं नाग संबंधी दोषों की शांति की भावना से किया जाता है।

सिद्धवट को पितृ कर्मों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। यहाँ क्षिप्रा नदी के पवित्र तट पर किए जाने वाले तर्पण एवं अन्य पितृ कर्म श्रद्धा और पूर्वजों के प्रति सम्मान की भावना से सम्पन्न किए जाते हैं।

नारायण नागबली पूजा कब करानी चाहिए?

  • पितृ दोष की शांति की मंगलकामना होने पर।
  • नाग दोष से संबंधित ज्योतिषीय स्थिति बताए जाने पर।
  • कालसर्प योग की शांति के लिए।
  • राहु-केतु की अशुभ स्थिति के संदर्भ में योग्य ज्योतिषाचार्य के परामर्श से।
  • अकाल, असामयिक अथवा अप्राकृतिक मृत्यु से संबंधित पितृ कर्म की आवश्यकता होने पर।
  • पूर्वजों की शांति एवं सद्गति की मंगलकामना के लिए।
  • परिवार में लगातार बनी हुई पितृ संबंधी बाधाओं की शांति के लिए।

पूजा की तिथि एवं अवधि कुल परंपरा, धार्मिक विधि और वैदिक आचार्य के परामर्श के अनुसार निर्धारित करना उचित है।

किन परिस्थितियों में यह पूजा कराई जाती है?

धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार निम्न परिस्थितियों में इस अनुष्ठान के माध्यम से शांति की मंगलकामना की जाती है—

  • संतान प्राप्ति से संबंधित बाधाओं की स्थिति में।
  • बार-बार गर्भपात जैसी परिस्थितियों के संदर्भ में पितृ एवं नाग शांति की मंगलकामना के लिए।
  • विवाह में विलंब अथवा बार-बार उत्पन्न होने वाली वैवाहिक बाधाओं के समय।
  • दांपत्य जीवन में तनाव एवं पारिवारिक अशांति की स्थिति में।
  • व्यवसाय या कार्यक्षेत्र में लगातार बनी हुई बाधाओं के संदर्भ में।
  • आर्थिक अस्थिरता एवं बार-बार होने वाली हानि की स्थिति में।
  • परिवार में अनावश्यक विवाद एवं अशांति की स्थिति में।
  • दिवंगत आत्माओं की शांति एवं पितृ कर्म की आवश्यकता होने पर।

मुख्य मंत्र

नारायण नागबली अनुष्ठान में निर्धारित वैदिक मंत्रों, सूक्तों, पितृ मंत्रों तथा नाग संबंधी मंत्रों का आचार्य द्वारा विधिपूर्वक पाठ कराया जाता है। अनुष्ठान की विशेष विधि के अनुसार मंत्रों का चयन किया जाता है।

  • ॐ नमो नारायणाय॥
  • ॐ नमः शिवाय॥
  • ॐ नागाय नमः॥

पूजा के लाभ

धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नारायण नागबली पूजा के माध्यम से निम्न मंगलकामनाएँ की जाती हैं—

  • पितृ दोष के शमन एवं पितरों की शांति की मंगलकामना की जाती है।
  • अकाल अथवा असामयिक मृत्यु को प्राप्त दिवंगत आत्माओं की शांति एवं सद्गति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • नाग दोष एवं नाग संबंधी धार्मिक बाधाओं की शांति की मंगलकामना की जाती है।
  • कालसर्प योग तथा राहु-केतु से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन की प्रार्थना की जाती है।
  • संतान संबंधी बाधाओं के शमन एवं परिवार के कल्याण की मंगलकामना की जाती है।
  • विवाह एवं दांपत्य जीवन में शुभता तथा पारिवारिक सामंजस्य की प्रार्थना की जाती है।
  • व्यवसाय, कार्यक्षेत्र एवं आर्थिक जीवन में आने वाली बाधाओं से राहत की मंगलकामना की जाती है।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान एवं धार्मिक कर्तव्य के निर्वहन की भावना को बल मिलता है।

आध्यात्मिक महत्व

नारायण नागबली पूजा का आध्यात्मिक उद्देश्य पितरों के प्रति श्रद्धा, दिवंगत आत्माओं की शांति एवं सद्गति की प्रार्थना तथा नाग देवता के प्रति धार्मिक सम्मान एवं प्रायश्चित्त की भावना से जुड़ा है।

सिद्धवट, उज्जैन में क्षिप्रा नदी के पवित्र तट पर किया जाने वाला पितृ कर्म श्रद्धालु को अपनी पारिवारिक एवं धार्मिक परंपराओं से जोड़ता है। नारायण बलि के माध्यम से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है, जबकि नाग बलि धार्मिक प्रायश्चित्त एवं नाग संबंधी दोषों की शांति की मंगलकामना से सम्पन्न की जाती है।

विशेष जानकारी

  • यह अनुष्ठान अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में शास्त्रोक्त विधि के अनुसार सम्पन्न कराया जाता है।
  • यजमान के नाम एवं गोत्र के अनुसार संकल्प कराया जाता है।
  • नारायण बलि के लिए दिवंगत व्यक्ति का नाम एवं यजमान से संबंध, यदि ज्ञात हो, उपयोगी रहता है।
  • पितरों के नाम उपलब्ध होने पर संकल्प एवं तर्पण कर्म में उनका उल्लेख किया जा सकता है।
  • जन्मकुंडली उपलब्ध होने पर ज्योतिषीय कारण के अनुसार अनुष्ठान की विधि निर्धारित करने में सहायता मिल सकती है।
  • पूजा में आवश्यक सामग्री की व्यवस्था निर्धारित अनुष्ठान के अनुसार की जाती है।
  • महिला एवं पुरुष दोनों अपनी कुल परंपरा तथा वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार यजमान बन सकते हैं।

नारायण नागबली पूजा के लिए वस्त्र

यजमान को पूजा के समय नए एवं स्वच्छ पारंपरिक वस्त्र धारण करने चाहिए। अनुष्ठान की विशेष विधि के अनुसार वस्त्र परिवर्तन की आवश्यकता हो सकती है, इसलिए अतिरिक्त वस्त्र साथ रखना उचित है।

नारायण नागबली पूजा पितृ शांति, दिवंगत आत्माओं की सद्गति, नाग संबंधी दोषों की शांति तथा परिवार के सुख, शांति एवं कल्याण की मंगलकामना के लिए सम्पन्न किया जाने वाला एक विशेष एवं पवित्र वैदिक अनुष्ठान है।

पूजा स्थानउज्जैन

सिद्धवट मंदिर

सिद्धवट मंदिर

उज्जैन

पूर्वजों की श्रद्धा का पवित्र तीर्थ — जहाँ भक्ति, स्मरण और पितरों की शांति के लिए प्रार्थनाएँ एक साथ जुड़ती हैं

जहाँ श्रद्धा पितरों तक पहुँचती है

उज्जैन की पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित सिद्धवट मंदिर एक प्राचीन और श्रद्धेय धार्मिक स्थल है, जो विशेष रूप से पितृ कर्म, तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान की धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है।

श्रद्धालु इस पवित्र तीर्थ पर अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं तथा पितरों की शांति और आध्यात्मिक कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्धवट का पवित्र वटवृक्ष इस तीर्थ की प्रमुख धार्मिक पहचान है। क्षिप्रा नदी के पावन तट और प्राचीन वटवृक्ष के कारण यह स्थान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और धार्मिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए विशेष महत्व रखता है।

पौराणिक एवं धार्मिक महत्व

सिद्धवट उज्जैन के प्राचीन तीर्थ स्थलों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और इसे पितृ कर्म से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्रद्धापूर्वक माना जाता है।

हिंदू धार्मिक परंपरा में वटवृक्ष को अत्यंत पवित्र माना जाता है। सिद्धवट से जुड़ी विभिन्न धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, इस स्थान पर किए जाने वाले पितृ कर्म पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण की भावना को व्यक्त करते हैं।

सिद्धवट की पवित्रता और क्षिप्रा नदी के धार्मिक महत्व के कारण भारत के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां अपने पूर्वजों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए आते हैं।

सरल धार्मिक अनुष्ठान, गहरी श्रद्धा

सिद्धवट की धार्मिक परंपराएं श्रद्धा, स्मरण और पितरों के प्रति सम्मान पर केंद्रित हैं।

पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध, पितृ शांति संबंधी अनुष्ठान, मंत्र जाप, हवन और वैदिक विधियों के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

पितृ अनुष्ठान एवं पूजा

प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हैंः

  • पिंडदान — पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक अर्पण
  • श्राद्ध — पूर्वजों के सम्मान एवं स्मरण का पारंपरिक विधान
  • तर्पण — पितरों के निमित्त जल एवं धार्मिक अर्पण
  • पितृ शांति संबंधी अनुष्ठान
  • पितृ मोक्ष जाप एवं यज्ञ
  • भगवान विष्णु की पूजा
  • हवन एवं वैदिक मंत्रोच्चार
  • संकल्प एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान

विशेष धार्मिक अवसर

पितृपक्ष सिद्धवट में पितृ संबंधी धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवधि में श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करते हैं तथा उनकी शांति एवं सद्गति के लिए प्रार्थना करते हैं।

अमावस्या भी पितरों के स्मरण और उनके निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। श्रद्धालु इस अवसर पर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए पितृ शांति की मंगलकामना करते हैं।

सिद्धवट का आध्यात्मिक वातावरण

सिद्धवट का आध्यात्मिक वातावरण पवित्र क्षिप्रा नदी, प्राचीन वटवृक्ष और उज्जैन की धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।

वैदिक मंत्रोच्चार, पितृ अनुष्ठान, तर्पण और पूजा-अर्चना का वातावरण श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों का स्मरण करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का आध्यात्मिक अवसर प्रदान करता है।

कई श्रद्धालुओं के लिए सिद्धवट की यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, स्मरण और आध्यात्मिक चिंतन का भावपूर्ण अवसर होती है।

श्रद्धालु जिन आशीर्वादों की कामना करते हैं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्धवट पर पितृ संबंधी अनुष्ठान श्रद्धालु निम्नलिखित मंगलकामनाओं के साथ करते हैंः

  • पितरों की शांति एवं आध्यात्मिक कल्याण
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करना
  • पितृ दोष से संबंधित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शांति की प्रार्थना
  • परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना
  • परिवार पर पूर्वजों के आशीर्वाद की प्रार्थना
  • पितरों की सद्गति एवं मोक्ष के लिए प्रार्थना

इन लाभों को हिंदू धर्म की आस्था, धार्मिक परंपरा और मान्यताओं के संदर्भ में समझा जाना चाहिए।

स्थान एवं कैसे पहुंचे

सिद्धवट मंदिर उज्जैन, मध्य प्रदेश में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है और शहर के प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों से यहां पहुंचा जा सकता है।

निकटतम रेलवे स्टेशनः उज्जैन जंक्शन

निकटतम प्रमुख हवाई अड्डाः देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, इंदौर

मंदिर तक स्थानीय ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और अन्य स्थानीय परिवहन साधनों के माध्यम से पहुंचा जा सकता है।

पूजारीजी.कॉम के माध्यम से अपनी पूजा बुक करें

सिद्धवट मंदिर, उज्जैन में प्रामाणिक एवं सुव्यवस्थित पितृ और धार्मिक अनुष्ठान सेवाएं — श्रद्धा तथा पारंपरिक वैदिक विधि-विधान के साथ आयोजित।

  • पिंडदान एवं श्राद्ध पूजा
  • तर्पण एवं पितृ शांति अनुष्ठान
  • पितृ मोक्ष जाप एवं यज्ञ
  • भगवान विष्णु की पूजा
  • हवन एवं वैदिक मंत्रोच्चार
  • संकल्प एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान
  • अनुभवी वैदिक आचार्यों का मार्गदर्शन

प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा, पारंपरिक विधि-विधान और पवित्र आध्यात्मिक भावना के साथ आयोजित किया जाता है।

पूजारीजी.कॉम के माध्यम से सिद्धवट मंदिर, उज्जैन में अपनी पितृ पूजा बुक करें और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं स्मरण अर्पित करें।

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    नारायण नागबली पूजा नारायण बलि एवं नाग बलि का संयुक्त वैदिक अनुष्ठान है, जो पवित्र सिद्धवट, उज्जैन में शास्त्रीय परंपरा एवं वैदिक विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न कराया जाता है। यह पूजा पितृ दोष, नाग दोष एवं कालसर्प योग जैसी ज्योतिषीय स्थितियों की शांति तथा दिवंगत आत्माओं की शांति, सद्गति और तृप्ति की मंगलकामना के लिए की जाती है। इस अनुष्ठान के माध्यम से पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करते हुए परिवार के सुख, शांति एवं कल्याण की प्रार्थना की जाती है। इस उन्नत पैकेज में 3 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा लगभग 3 से 4 घंटे में सम्पूर्ण अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • शुद्धिकरण एवं तीर्थ स्नान संबंधी कर्म
    • भगवान विष्णु का पूजन
    • पंच कलश पूजन
    • सूक्त पाठ
    • त्रिपिंडी श्राद्ध एवं पितृ तर्पण
    • सात्त्विक, राजस एवं तामस प्रेतों का पूजन
    • ब्रह्म सूक्त, विष्णु सूक्त एवं रुद्र सूक्त पाठ
    • पिंड निर्माण
    • पिंडदान एवं पिंड तर्पण
    • नाग पूजन
    • नाग स्तोत्र पाठ
    • नाग दोष शांति मंत्र जाप
    • नारायण बलि एवं नाग बलि से संबंधित वैदिक कर्म

    विशेष सुविधाएं

    • सिद्धवट, उज्जैन के पवित्र तीर्थ क्षेत्र में नारायण नागबली पूजा
    • नारायण बलि एवं नाग बलि दोनों वैदिक अनुष्ठानों का संयोजन
    • भगवान विष्णु का पूजन, पितृ तर्पण एवं त्रिपिंडी श्राद्ध
    • नाग पूजन, नाग स्तोत्र पाठ एवं नाग दोष शांति मंत्र जाप
    • पितृ दोष, नाग दोष एवं कालसर्प योग की शांति की मंगलकामना
    • पूर्वजों की शांति, सद्गति एवं तृप्ति तथा परिवार के कल्याण की प्रार्थना
    • महिला यजमान भी वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में संकल्प लेकर पूजा करा सकती हैं, यदि परिवार में कोई पुरुष सदस्य उपलब्ध न हो
    • यजमान को पूजा के समय नए एवं स्वच्छ पारंपरिक वस्त्र धारण करना चाहिए तथा आवश्यकता होने पर अतिरिक्त वस्त्र साथ रखना उचित है

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • परिवार एवं पितरों से संबंधित आवश्यक जानकारी
    • पूजा के लिए निर्धारित तिथि
    • संकल्प हेतु आवश्यक विवरण

    सिद्धवट, उज्जैन में श्रद्धा एवं वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न यह नारायण नागबली पूजा पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने, उनकी शांति एवं सद्गति की मंगलकामना करने तथा नाग संबंधी दोषों की शांति के लिए एक महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान माना जाता है। भगवान विष्णु एवं नाग देवता की कृपा से परिवार में शांति, संतुलन, शुभता एवं कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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