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Pujari Ji

नवग्रह शांति पूजा

गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
नवग्रह शांति पूजा

गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी भगवान केदारेश्वर शिव एवं माता गौरी को समर्पित प्राचीन एवं पूजनीय शिवधाम माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहाँ भगवान शिव एवं माता गौरी की आराधना ग्रह शांति, पारिवारिक सुख एवं आध्यात्मिक कल्याण की मंगलकामना के लिए विशेष महत्व रखती है।

नवग्रह शांति पूजा में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु सहित सभी नवग्रहों का पूजन, मंत्र जाप, स्तोत्र पाठ, हवन एवं पूर्णाहुति की जाती है। यह पूजा जन्म कुंडली में ग्रह दोष, ग्रह पीड़ा अथवा ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति होने पर उनकी शांति की प्रार्थना के लिए सम्पन्न की जाती है।

Duration

2h – 4h

Best time

सुबह

Starting price

₹11,000

लाभ

  • नवग्रहों के प्रतिकूल प्रभावों की शांति तथा जीवन में शुभता की मंगलकामना की जाती है।
  • भगवान गौरी केदारेश्वर एवं माता गौरी की कृपा, आशीर्वाद एवं संरक्षण की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • मानसिक शांति, स्थिरता एवं सकारात्मक चिंतन के लिए मंगलकामना की जाती है।
  • स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं समग्र कल्याण के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • विवाह एवं पारिवारिक जीवन में सुख, प्रेम, सौहार्द एवं सामंजस्य की प्राप्ति की मंगलकामना की जाती है।
  • कार्यक्षेत्र, व्यापार एवं आर्थिक जीवन में स्थिरता, प्रगति एवं अनुकूल परिस्थितियों की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • ग्रहजनित बाधाओं एवं प्रतिकूल प्रभावों की शांति तथा जीवन में संतुलन की मंगलकामना की जाती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति, आंतरिक शांति एवं जीवन में संतुलन की प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।

नवग्रह शांति पूजा

वैदिक ज्योतिष में नवग्रहों को जीवन के विभिन्न पक्षों से संबंधित माना गया है। जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति, दृष्टि, युति, दशा एवं गोचर के आधार पर उनके शुभ अथवा अशुभ प्रभावों का विचार किया जाता है। जब किसी ग्रह की स्थिति प्रतिकूल मानी जाती है, तब ग्रह शांति के लिए वैदिक अनुष्ठान करने की परंपरा रही है।

गौरी केदारेश्वर मंदिर में सम्पन्न नवग्रह शांति पूजा भगवान शिव एवं माता गौरी की आराधना के साथ सभी नवग्रहों की शांति एवं अनुकूलता की प्रार्थना के उद्देश्य से की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह अनुष्ठान जीवन में मानसिक शांति, पारिवारिक सौहार्द, कार्यक्षेत्र में स्थिरता तथा आध्यात्मिक संतुलन की मंगलकामना के लिए शुभ माना जाता है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

इस अनुष्ठान में निम्न देवताओं की विधिपूर्वक आराधना की जाती हैः

  • भगवान गौरी केदारेश्वर
  • माता गौरी
  • सूर्य देव
  • चंद्र देव
  • मंगल देव
  • बुध देव
  • बृहस्पति देव
  • शुक्र देव
  • शनिदेव
  • राहु
  • केतु

नवग्रहों की पूजा के साथ भगवान शिव एवं माता गौरी की आराधना इस अनुष्ठान को विशेष धार्मिक महत्व प्रदान करती है। श्रद्धालु ग्रहों के प्रतिकूल प्रभावों की शांति तथा जीवन में संतुलन एवं शुभता की मंगलकामना से यह पूजा सम्पन्न कराते हैं।

शुभ मुहूर्त / यह पूजा कब करानी चाहिए?

  • ग्रहों की महादशा अथवा अंतर्दशा के दौरान
  • शनि की साढ़ेसाती अथवा ढैया के समय
  • राहु अथवा केतु की प्रतिकूल दशा के दौरान
  • विवाह, संतान, कार्यक्षेत्र अथवा व्यापार में लगातार बाधाएँ आने पर
  • सोमवार, अमावस्या अथवा पूर्णिमा के शुभ अवसर पर
  • योग्य ज्योतिषाचार्य के परामर्शानुसार

किन परिस्थितियों में यह पूजा करानी चाहिए?

  • जन्म कुंडली में ग्रह दोष अथवा ग्रह पीड़ा होने पर
  • शनि, राहु एवं केतु के प्रतिकूल प्रभाव होने पर
  • विवाह एवं दांपत्य जीवन में बाधाएँ आने पर
  • मानसिक तनाव एवं अशांति की स्थिति में
  • स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के समय
  • आर्थिक अस्थिरता अथवा व्यापार में बाधाएँ आने पर
  • कार्यक्षेत्र एवं नौकरी में लगातार रुकावटें आने पर
  • परिवार में अशांति अथवा असंतुलन की स्थिति में

प्रमुख मंत्र

  • ॐ नमः शिवाय॥
  • ॐ आदित्याय नमः॥
  • ॐ सोमाय नमः॥
  • ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः॥
  • ॐ बुं बुधाय नमः॥
  • ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः॥
  • ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः॥
  • ॐ शं शनैश्चराय नमः॥
  • ॐ रां राहवे नमः॥
  • ॐ कें केतवे नमः॥

पूजा के लाभ

  • नवग्रहों के प्रतिकूल प्रभावों की शांति की मंगलकामना की जाती है।
  • भगवान गौरी केदारेश्वर एवं माता गौरी की कृपा की प्रार्थना की जाती है।
  • मानसिक शांति, स्थिरता एवं सकारात्मक चिंतन की कामना की जाती है।
  • स्वास्थ्य एवं दीर्घायु के लिए मंगलकामना की जाती है।
  • विवाह एवं पारिवारिक जीवन में सुख तथा सौहार्द की प्रार्थना की जाती है।
  • कार्यक्षेत्र, व्यापार एवं आर्थिक जीवन में स्थिरता की मंगलकामना की जाती है।
  • ग्रहजनित बाधाओं एवं प्रतिकूल प्रभावों की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति एवं जीवन में संतुलन की कामना की जाती है।

आध्यात्मिक महत्व

गौरी केदारेश्वर मंदिर भगवान शिव एवं माता गौरी की आराधना का प्राचीन एवं पूजनीय केंद्र माना जाता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार भगवान शिव की उपासना मन की शांति, आध्यात्मिक बल एवं जीवन में शुभता की मंगलकामना से जुड़ी है।

नवग्रह शांति पूजा के माध्यम से श्रद्धालु नौ ग्रहों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके प्रतिकूल प्रभावों की शांति तथा शुभ प्रभावों की प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं। वैदिक मंत्रोच्चार, ग्रह पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से सम्पन्न यह अनुष्ठान आध्यात्मिक अनुशासन, श्रद्धा एवं ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना को सुदृढ़ करने वाला माना जाता है।

विशेष जानकारी

  • अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी में शास्त्रोक्त विधि से अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।
  • यजमान के नाम, गोत्र, जन्म तिथि, जन्म समय एवं जन्म स्थान के आधार पर वैदिक संकल्प लिया जाता है।
  • उपलब्ध होने पर जन्म कुंडली के आधार पर ग्रह शांति अनुष्ठान किया जा सकता है।
  • सम्पूर्ण पूजन सामग्री एवं हवन सामग्री की व्यवस्था की जाती है।
  • ऑनलाइन संकल्प एवं पूजा में सहभागिता की सुविधा उपलब्ध है।
  • वैदिक मंत्रोच्चार, हवन एवं पूर्णाहुति सहित सम्पूर्ण अनुष्ठान सम्पन्न किया जाता है।

गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी में सम्पन्न यह नवग्रह शांति पूजा भगवान गौरी केदारेश्वर, माता गौरी एवं नवग्रह देवताओं की कृपा प्राप्त करने हेतु अत्यंत पवित्र एवं पुण्यदायी वैदिक अनुष्ठान मानी जाती है। यह पूजा उत्तम स्वास्थ्य, ग्रह शांति, वैवाहिक सुख, सफलता, समृद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना के लिए श्रद्धापूर्वक सम्पन्न की जाती है।

पूजा स्थान — वाराणसी

गौरी केदारेश्वर मंदिर

गौरी केदारेश्वर मंदिर

वाराणसी

पवित्र काशी नगरी के दक्षिणी भाग में स्थित गौरी केदारेश्वर मंदिर भगवान केदारेश्वर महादेव एवं माता गौरी को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन, जागृत एवं आध्यात्मिक महत्व वाला शिव मंदिर है। यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध केदार घाट के समीप पवित्र माँ गंगा के तट पर स्थित है, जिसके कारण इसका धार्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। काशी आने वाले श्रद्धालु श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन के साथ-साथ गौरी केदारेश्वर मंदिर में रुद्राभिषेक, जलाभिषेक एवं विशेष शिव पूजा अवश्य करते हैं।

ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान शिव और माता गौरी की संयुक्त आराधना करने से वैवाहिक सुख, पारिवारिक समृद्धि, संतान सुख, मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। केदार घाट पर गंगा स्नान करने के पश्चात गौरी केदारेश्वर महादेव के दर्शन एवं पूजा का विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

गौरी केदारेश्वर मंदिर केवल एक प्राचीन मंदिर नहीं, बल्कि शिवभक्ति, सनातन परंपरा, वैदिक अनुष्ठानों एवं काशी की दिव्य आध्यात्मिक संस्कृति का जीवंत केंद्र है। भारत ही नहीं बल्कि विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु यहां रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, नवग्रह शांति पूजा, संकल्प पूजा एवं विशेष शिव अनुष्ठान सम्पन्न कराने के लिए आते हैं।

गौरी केदारेश्वर मंदिर का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गौरी केदारेश्वर मंदिर काशी के अत्यंत पवित्र शिवालयों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान केदारेश्वर महादेव स्वयं भक्तों पर कृपा करते हैं तथा माता गौरी की आराधना से सौभाग्य, दांपत्य सुख एवं जीवन में समृद्धि प्राप्त होती है।

काशी खंड सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में केदार क्षेत्र का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु पहले केदार घाट पर माँ गंगा में स्नान करके तत्पश्चात गौरी केदारेश्वर महादेव का पूजन करते हैं, उन्हें विशेष पुण्य एवं भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

ऐसी मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक पूजा एवं दर्शन करने से—

  • भगवान शिव एवं माता गौरी का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • वैवाहिक जीवन में प्रेम, सुख एवं स्थिरता आती है।
  • दांपत्य जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
  • परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास होता है।
  • ग्रह दोषों एवं जीवन की अनेक बाधाओं में राहत मिलती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति एवं आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
  • पापों का क्षय एवं पुण्य की वृद्धि होती है।
  • भगवान शिव की कृपा से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • मोक्ष प्राप्ति का पुण्य प्राप्त होता है।

विशेष रूप से श्रावण मास, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत एवं सावन के सोमवार के दिन यहां पूजा का अत्यंत विशेष महत्व माना जाता है।

गौरी केदारेश्वर मंदिर में होने वाले प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान

मंदिर में प्रतिदिन अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा विभिन्न धार्मिक एवं वैदिक अनुष्ठान सम्पन्न कराए जाते हैं।

प्रमुख अनुष्ठान

  • रुद्राभिषेक
  • महारुद्राभिषेक
  • लघु रुद्राभिषेक
  • जलाभिषेक
  • दुग्धाभिषेक
  • पंचामृत अभिषेक
  • बिल्वपत्र अर्चन
  • शिव सहस्रनाम पूजन
  • महामृत्युंजय मंत्र जाप
  • लघु महामृत्युंजय जाप
  • नवग्रह शांति पूजा
  • संकल्प पूजा
  • दांपत्य सुख एवं सौभाग्य पूजा
  • ग्रह दोष निवारण अनुष्ठान
  • विशेष पर्व पूजन

अनेक श्रद्धालु केदार घाट पर गंगा स्नान एवं गंगा पूजन करने के पश्चात मंदिर में रुद्राभिषेक एवं शिव पूजन सम्पन्न कराते हैं, जिसे अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है।

गौरी केदारेश्वर मंदिर के प्रमुख पवित्र स्थल

भगवान केदारेश्वर महादेव

मंदिर का मुख्य आकर्षण भगवान केदारेश्वर महादेव का प्राचीन एवं पवित्र शिवलिंग है, जिसकी पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

माता गौरी मंदिर

माता गौरी का दिव्य विग्रह श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र है। यहां सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन एवं परिवार की समृद्धि के लिए विशेष पूजा की जाती है।

केदार घाट एवं माँ गंगा

मंदिर के निकट स्थित केदार घाट काशी के सबसे पवित्र घाटों में से एक माना जाता है। श्रद्धालु यहां माँ गंगा में स्नान, गंगा पूजन, दीपदान एवं संकल्प करके भगवान शिव के दर्शन करते हैं।

अभिषेक एवं अनुष्ठान स्थल

यहां श्रद्धालु जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल एवं बिल्वपत्र अर्पित कर भगवान शिव का विधिपूर्वक अभिषेक करते हैं।

ध्यान एवं साधना क्षेत्र

मंदिर का शांत, सात्त्विक एवं आध्यात्मिक वातावरण जप, ध्यान एवं शिव साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।

गौरी केदारेश्वर मंदिर में पूजा करवाने के लाभ

ऐसी मान्यता है कि यहां विधिपूर्वक पूजा एवं वैदिक अनुष्ठान सम्पन्न कराने से श्रद्धालुओं को अनेक आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं—

  • भगवान शिव एवं माता गौरी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम एवं मधुरता आती है।
  • परिवार में शांति एवं समृद्धि का वास होता है।
  • संतान सुख की प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है।
  • ग्रह दोषों एवं नकारात्मक प्रभावों में राहत मिलती है।
  • मानसिक तनाव एवं भय से मुक्ति प्राप्त होती है।
  • सकारात्मक ऊर्जा एवं आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति एवं शिव भक्ति की प्राप्ति होती है।
  • स्वास्थ्य एवं मानसिक संतुलन के लिए विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होने का पुण्य प्राप्त होता है।

विशेष रूप से रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, बिल्वपत्र अर्चन एवं गंगा पूजन यहां अत्यंत फलदायी माने जाते हैं।

गौरी केदारेश्वर मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण

गौरी केदारेश्वर मंदिर एवं इसके समीप स्थित केदार घाट का वातावरण अत्यंत शांत, सात्त्विक एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहता है। प्रातःकाल माँ गंगा के तट पर उगते सूर्य का मनोहारी दृश्य, वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि एवं मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभूति प्रदान करती है।

सायंकाल के समय केदार घाट पर दीपों की मनमोहक आभा, गंगा पूजन एवं मंदिर में होने वाली आरती भक्तों के मन को भक्ति एवं आध्यात्मिक आनंद से भर देती है।

विशेष अवसरों पर गौरी केदारेश्वर मंदिर का महत्व

विशेष पर्वों एवं धार्मिक अवसरों पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन एवं पूजा के लिए पहुंचते हैं—

  • महाशिवरात्रि
  • श्रावण मास
  • सावन के सोमवार
  • नाग पंचमी
  • प्रदोष व्रत
  • मासिक शिवरात्रि
  • कार्तिक पूर्णिमा
  • देव दीपावली
  • गंगा दशहरा
  • अमावस्या
  • पूर्णिमा
  • काशी के प्रमुख धार्मिक उत्सव

इन अवसरों पर केदार घाट, माँ गंगा एवं गौरी केदारेश्वर मंदिर का संपूर्ण क्षेत्र शिव भक्ति, वैदिक अनुष्ठानों एवं धार्मिक उल्लास से आलोकित हो उठता है।

गौरी केदारेश्वर मंदिर कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग

निकटतम लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी मंदिर से लगभग 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

रेल मार्ग

वाराणसी जंक्शन, बनारस रेलवे स्टेशन एवं काशी रेलवे स्टेशन से टैक्सी, ऑटो एवं ई-रिक्शा द्वारा मंदिर एवं केदार घाट तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग

गौरी केदारेश्वर मंदिर एवं केदार घाट वाराणसी के प्रमुख मार्गों से अच्छी तरह जुड़े हुए हैं। शहर के किसी भी हिस्से से स्थानीय परिवहन द्वारा यहां सहजता से पहुंचा जा सकता है।

दर्शन हेतु सर्वोत्तम समय

मंदिर वर्षभर दर्शन एवं पूजा के लिए खुला रहता है, किन्तु अक्टूबर से मार्च, श्रावण मास, महाशिवरात्रि एवं प्रातःकालीन गंगा स्नान का समय विशेष रूप से शुभ एवं पुण्यदायी माना जाता है।

केदार घाट पर स्नान कर गौरी केदारेश्वर महादेव के दर्शन करने की परंपरा आज भी अत्यंत श्रद्धा एवं आस्था के साथ निभाई जाती है।

निष्कर्ष

गौरी केदारेश्वर मंदिर, केदार घाट एवं माँ गंगा का पावन संगम काशी की सनातन आध्यात्मिक परंपरा का अद्भुत प्रतीक है। भगवान केदारेश्वर महादेव एवं माता गौरी की कृपा प्राप्त करने के लिए यह मंदिर वाराणसी के प्रमुख एवं अत्यंत पूजनीय धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां श्रद्धापूर्वक सम्पन्न होने वाले रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, गंगा पूजन, जलाभिषेक एवं अन्य वैदिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति तथा भगवान शिव एवं माता गौरी की दिव्य कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माने जाते हैं।

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    2h

    गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी में भगवान गौरी केदारेश्वर, माता गौरी एवं नवग्रह देवताओं की आराधना के साथ नवग्रह शांति पूजा पूर्ण वैदिक विधि-विधान से संपन्न कराई जाती है। यह अनुष्ठान नवग्रहों से संबंधित अशुभ प्रभावों, ग्रह पीड़ा, शनि तथा राहु-केतु के प्रतिकूल प्रभाव, विवाह में विलंब, आर्थिक समस्याओं, स्वास्थ्य संबंधी बाधाओं एवं मानसिक अशांति से राहत की मंगलकामना के लिए किया जाता है। इस उन्नत पैकेज में 1 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा पूजा संपन्न कराई जाती है तथा महर्षि वेदव्यास कृत नवग्रह स्तोत्र का 51 बार विधिपूर्वक पाठ कराया जाता है।

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    • संकल्प
    • गौरी-गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • वैदिक आचार्य पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • भगवान गौरी केदारेश्वर पूजन
    • माता गौरी पूजन
    • नवग्रह स्तोत्र पाठ — 108 बार
    • हवन
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं प्रसाद वितरण

    विशेष सुविधाएं

    • गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी में वैदिक विधि-विधान से नवग्रह शांति अनुष्ठान
    • नवग्रहों से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए विशेष संकल्प
    • भगवान गौरी केदारेश्वर एवं माता गौरी की विशेष आराधना
    • नवग्रह पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति सहित विस्तृत अनुष्ठान

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    4h

    गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी में भगवान गौरी केदारेश्वर, माता गौरी एवं नवग्रह देवताओं की आराधना के साथ यह विशेष वैदिक अनुष्ठान 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान से संपन्न कराया जाता है। यह पूजा नवग्रहों से संबंधित अशुभ प्रभावों, शनि की साढ़ेसाती, राहु-केतु दोष, ग्रह महादशा, विवाह में विलंब, आर्थिक संकट तथा जीवन में आने वाली बाधाओं के शमन की मंगलकामना के लिए की जाती है। इस अनुष्ठान में महर्षि वेदव्यास कृत नवग्रह स्तोत्र का 251 बार पाठ एवं महामृत्युंजय मंत्र जाप भी कराया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • गौरी-गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • वैदिक आचार्य पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • भगवान गौरी केदारेश्वर पूजन
    • माता गौरी पूजन
    • महर्षि वेदव्यास कृत नवग्रह स्तोत्र पाठ — 251 बार
    • महामृत्युंजय मंत्र जाप
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    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं प्रसाद वितरण

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    • महर्षि वेदव्यास कृत नवग्रह स्तोत्र का 251 बार पाठ
    • भगवान गौरी केदारेश्वर एवं माता गौरी की विशेष आराधना
    • नवग्रहों की शांति तथा पारिवारिक एवं वैवाहिक सुख की मंगलकामना
    • महामृत्युंजय मंत्र जाप एवं विशेष हवन सहित विस्तृत अनुष्ठान

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”

प्रिया शर्मा

मुंबई• Satyanarayan Puja

“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek

“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”

मीना अय्यर

बैंगलोर• Graha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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