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Pujari Ji

पंचक शांति पूजा

सिद्धवट मंदिर, उज्जैन
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
पंचक शांति पूजा

पंचक शांति पूजा उन परिस्थितियों में कराई जाती है जब किसी व्यक्ति का निधन पंचक काल में हुआ हो। धार्मिक परंपराओं के अनुसार पंचक काल में मृत्यु होने पर दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिवार के कल्याण के लिए विशेष शांति कर्म करने का विधान माना जाता है। इस अनुष्ठान के माध्यम से दिवंगत जीवात्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना की जाती है और परिवार के लिए सुख, शांति तथा आध्यात्मिक संरक्षण की प्रार्थना की जाती है।

सिद्धवट, उज्जैन पितृ कर्म, श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान एवं पितृ शांति से संबंधित धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है। पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित सिद्धवट में भगवान नारायण एवं पितृ देवताओं का स्मरण करते हुए दिवंगत व्यक्ति के निमित्त विशेष संकल्प लिया जाता है।

पंचक शांति पूजा दिवंगत व्यक्ति के पुत्र, परिवार के सदस्य अथवा कुल परंपरा के अनुसार योग्य निकट संबंधी द्वारा कराई जा सकती है। पूजा की विधि क्षेत्रीय परंपरा, कुलाचार तथा वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार निर्धारित की जा सकती है।

Duration

2h – 4h

Best time

किसी भी समय

Starting price

₹21,000

लाभ

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक शांति पूजा के माध्यम से पंचक काल में दिवंगत जीवात्मा की शांति एवं सद्गति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • दिवंगत व्यक्ति के आध्यात्मिक कल्याण एवं मोक्ष की मंगलकामना की जाती है।
  • पंचक से संबंधित धार्मिक आशंका या दोष की शांति तथा मानसिक संतोष के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति, सौहार्द एवं सकारात्मक वातावरण की मंगलकामना की जाती है।
  • दिवंगत व्यक्ति के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म के विधिपूर्वक निर्वहन की भावना को बल मिलता है।
  • परिवार के सदस्यों के कल्याण, मानसिक शांति एवं भावनात्मक संतुलन के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है।
  • धार्मिक परंपराओं के अनुसार संभावित अशांति एवं बाधाओं की शांति तथा परिवार के मंगल की मंगलकामना की जाती है।

पंचक शांति पूजा

पंचक शांति पूजा पंचक काल में दिवंगत हुए व्यक्ति के निमित्त किया जाने वाला धार्मिक एवं वैदिक शांति अनुष्ठान है। पंचक से संबंधित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में मृत्यु होने पर विशेष शांति कर्म करने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है।

इस अनुष्ठान का उद्देश्य किसी प्रकार के निश्चित सांसारिक परिणाम का आश्वासन देना नहीं, बल्कि दिवंगत जीवात्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की श्रद्धापूर्वक मंगलकामना करना तथा परिवार के सदस्यों के मन में शांति और संतोष की प्रार्थना करना है।

सिद्धवट, उज्जैन में पितृ संबंधी धार्मिक कर्मों की प्राचीन परंपरा के कारण पंचक शांति पूजा के लिए विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में संकल्प, देव आराधना, पितृ स्मरण, शांति कर्म, हवन एवं पूर्णाहुति जैसी विधियाँ परंपरा के अनुसार सम्पन्न कराई जा सकती हैं।

पंचक क्या होता है?

वैदिक ज्योतिष में जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के उत्तरार्ध, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्रों में स्थित होता है, तब इस अवधि को सामान्यतः पंचक कहा जाता है।

धार्मिक परंपराओं में पंचक काल को कुछ विशेष कार्यों के लिए विचारणीय माना गया है। यदि इस अवधि में किसी व्यक्ति का निधन हो जाए, तो कुल परंपरा एवं क्षेत्रीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक शांति कर्म कराया जा सकता है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

पंचक शांति पूजा में भगवान नारायण, पितृ देवताओं तथा अन्य वैदिक देवताओं का स्मरण एवं पूजन परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। भगवान नारायण की आराधना दिवंगत जीवात्मा की शांति एवं सद्गति की मंगलकामना से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पितृ देवताओं का स्मरण एवं तर्पण दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पारिवारिक धर्म की भावना को प्रकट करता है। इस अनुष्ठान में परिवार की परंपरा तथा वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार आवश्यक विधियाँ निर्धारित की जाती हैं।

पंचक शांति पूजा कब करानी चाहिए?

  • जब किसी व्यक्ति की मृत्यु पंचक काल में हुई हो।
  • दिवंगत जीवात्मा की शांति एवं सद्गति की मंगलकामना के लिए।
  • कुल परंपरा के अनुसार पंचक से संबंधित शांति कर्म आवश्यक माना जाता हो।
  • परिवार की शांति एवं कल्याण के लिए विशेष प्रार्थना करनी हो।
  • योग्य वैदिक आचार्य द्वारा पंचक शांति कर्म कराने का परामर्श दिया गया हो।

पंचक शांति पूजा किन परिस्थितियों में कराई जाती है?

  • पंचक काल में मृत्यु होने पर।
  • दिवंगत व्यक्ति के निमित्त विशेष धार्मिक शांति कर्म के लिए।
  • दिवंगत जीवात्मा की सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना के लिए।
  • पितृ धर्म एवं पारिवारिक धार्मिक परंपरा के निर्वहन के लिए।
  • परिवार के सुख, शांति एवं कल्याण की प्रार्थना के लिए।

पंचक शांति पूजा के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक शांति पूजा के माध्यम से निम्न मंगलकामनाएँ की जाती हैं—

  • पंचक काल में दिवंगत जीवात्मा की शांति एवं सद्गति की प्रार्थना।
  • दिवंगत व्यक्ति के आध्यात्मिक कल्याण एवं मोक्ष की मंगलकामना।
  • पंचक से संबंधित धार्मिक आशंका या दोष की शांति के लिए प्रार्थना।
  • परिवार में सुख, शांति एवं सकारात्मक वातावरण की मंगलकामना।
  • दिवंगत व्यक्ति के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म के निर्वहन की भावना।
  • परिवार के सदस्यों के कल्याण एवं मानसिक शांति के लिए विशेष प्रार्थना।
  • धार्मिक परंपरा के अनुसार संभावित अशांति एवं बाधाओं की शांति की मंगलकामना।

सिद्धवट, उज्जैन का आध्यात्मिक महत्व

सिद्धवट, उज्जैन पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पितृ तीर्थ माना जाता है। यहाँ श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान तथा पितृ शांति से संबंधित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा प्रचलित है।

पंचक काल में दिवंगत हुए व्यक्ति के निमित्त सिद्धवट में विशेष संकल्प लेकर भगवान नारायण एवं पितृ देवताओं की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस पवित्र स्थल पर सम्पन्न शांति कर्म के माध्यम से दिवंगत जीवात्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष तथा परिवार के कल्याण की मंगलकामना की जाती है।

पंचक शांति पूजा कौन करा सकता है?

सामान्यतः दिवंगत व्यक्ति का पुत्र, परिवार का सदस्य अथवा कुल परंपरा के अनुसार कोई निकट संबंधी यजमान बन सकता है। विशेष परिस्थितियों में वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार अन्य योग्य सदस्य भी संकल्प ले सकते हैं।

पंचक शांति पूजा के लिए आवश्यक जानकारी

संकल्प एवं पूजा-विधि के लिए सामान्यतः निम्न जानकारी आवश्यक हो सकती है—

  • यजमान का नाम एवं गोत्र।
  • दिवंगत व्यक्ति का नाम।
  • दिवंगत व्यक्ति से यजमान का संबंध।
  • मृत्यु की तिथि एवं समय।
  • मृत्यु का स्थान।

आवश्यकता के अनुसार वैदिक आचार्य अतिरिक्त जन्म अथवा पारिवारिक विवरण भी पूछ सकते हैं।

आध्यात्मिक महत्व

पंचक शांति पूजा दिवंगत जीवात्मा के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म की भावना से किया जाने वाला विशेष धार्मिक अनुष्ठान है। इसका मुख्य उद्देश्य दिवंगत आत्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना करना तथा परिवार के सुख, शांति एवं कल्याण के लिए प्रार्थना करना है।

सिद्धवट, उज्जैन में अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में यजमान के नाम एवं संकल्प के अनुसार यह धार्मिक अनुष्ठान परंपरागत विधि-विधान से सम्पन्न कराया जा सकता है।

विशेष जानकारी

  • सिद्धवट, उज्जैन में अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में पंचक शांति अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।
  • पूजा की विधि दिवंगत व्यक्ति की मृत्यु तिथि, समय तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार निर्धारित की जा सकती है।
  • यजमान के नाम, गोत्र एवं दिवंगत व्यक्ति के विवरण के अनुसार संकल्प लिया जाता है।
  • आवश्यक पूजन सामग्री की व्यवस्था अनुष्ठान की निर्धारित विधि के अनुसार की जा सकती है।
  • पंचक शांति की विधि अलग-अलग क्षेत्रों एवं कुल परंपराओं में भिन्न हो सकती है, इसलिए योग्य वैदिक आचार्य का मार्गदर्शन उचित माना जाता है।

सिद्धवट, उज्जैन में अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में यजमान के नाम एवं संकल्प के अनुसार यह विशेष धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धापूर्वक सम्पन्न कराया जाता है।

पूजा स्थानउज्जैन

सिद्धवट मंदिर

सिद्धवट मंदिर

उज्जैन

पूर्वजों की श्रद्धा का पवित्र तीर्थ — जहाँ भक्ति, स्मरण और पितरों की शांति के लिए प्रार्थनाएँ एक साथ जुड़ती हैं

जहाँ श्रद्धा पितरों तक पहुँचती है

उज्जैन की पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित सिद्धवट मंदिर एक प्राचीन और श्रद्धेय धार्मिक स्थल है, जो विशेष रूप से पितृ कर्म, तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान की धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है।

श्रद्धालु इस पवित्र तीर्थ पर अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं तथा पितरों की शांति और आध्यात्मिक कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्धवट का पवित्र वटवृक्ष इस तीर्थ की प्रमुख धार्मिक पहचान है। क्षिप्रा नदी के पावन तट और प्राचीन वटवृक्ष के कारण यह स्थान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और धार्मिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए विशेष महत्व रखता है।

पौराणिक एवं धार्मिक महत्व

सिद्धवट उज्जैन के प्राचीन तीर्थ स्थलों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और इसे पितृ कर्म से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्रद्धापूर्वक माना जाता है।

हिंदू धार्मिक परंपरा में वटवृक्ष को अत्यंत पवित्र माना जाता है। सिद्धवट से जुड़ी विभिन्न धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, इस स्थान पर किए जाने वाले पितृ कर्म पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण की भावना को व्यक्त करते हैं।

सिद्धवट की पवित्रता और क्षिप्रा नदी के धार्मिक महत्व के कारण भारत के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां अपने पूर्वजों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए आते हैं।

सरल धार्मिक अनुष्ठान, गहरी श्रद्धा

सिद्धवट की धार्मिक परंपराएं श्रद्धा, स्मरण और पितरों के प्रति सम्मान पर केंद्रित हैं।

पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध, पितृ शांति संबंधी अनुष्ठान, मंत्र जाप, हवन और वैदिक विधियों के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

पितृ अनुष्ठान एवं पूजा

प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हैंः

  • पिंडदान — पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक अर्पण
  • श्राद्ध — पूर्वजों के सम्मान एवं स्मरण का पारंपरिक विधान
  • तर्पण — पितरों के निमित्त जल एवं धार्मिक अर्पण
  • पितृ शांति संबंधी अनुष्ठान
  • पितृ मोक्ष जाप एवं यज्ञ
  • भगवान विष्णु की पूजा
  • हवन एवं वैदिक मंत्रोच्चार
  • संकल्प एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान

विशेष धार्मिक अवसर

पितृपक्ष सिद्धवट में पितृ संबंधी धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवधि में श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करते हैं तथा उनकी शांति एवं सद्गति के लिए प्रार्थना करते हैं।

अमावस्या भी पितरों के स्मरण और उनके निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। श्रद्धालु इस अवसर पर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए पितृ शांति की मंगलकामना करते हैं।

सिद्धवट का आध्यात्मिक वातावरण

सिद्धवट का आध्यात्मिक वातावरण पवित्र क्षिप्रा नदी, प्राचीन वटवृक्ष और उज्जैन की धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।

वैदिक मंत्रोच्चार, पितृ अनुष्ठान, तर्पण और पूजा-अर्चना का वातावरण श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों का स्मरण करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का आध्यात्मिक अवसर प्रदान करता है।

कई श्रद्धालुओं के लिए सिद्धवट की यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, स्मरण और आध्यात्मिक चिंतन का भावपूर्ण अवसर होती है।

श्रद्धालु जिन आशीर्वादों की कामना करते हैं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्धवट पर पितृ संबंधी अनुष्ठान श्रद्धालु निम्नलिखित मंगलकामनाओं के साथ करते हैंः

  • पितरों की शांति एवं आध्यात्मिक कल्याण
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करना
  • पितृ दोष से संबंधित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शांति की प्रार्थना
  • परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना
  • परिवार पर पूर्वजों के आशीर्वाद की प्रार्थना
  • पितरों की सद्गति एवं मोक्ष के लिए प्रार्थना

इन लाभों को हिंदू धर्म की आस्था, धार्मिक परंपरा और मान्यताओं के संदर्भ में समझा जाना चाहिए।

स्थान एवं कैसे पहुंचे

सिद्धवट मंदिर उज्जैन, मध्य प्रदेश में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है और शहर के प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों से यहां पहुंचा जा सकता है।

निकटतम रेलवे स्टेशनः उज्जैन जंक्शन

निकटतम प्रमुख हवाई अड्डाः देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, इंदौर

मंदिर तक स्थानीय ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और अन्य स्थानीय परिवहन साधनों के माध्यम से पहुंचा जा सकता है।

पूजारीजी.कॉम के माध्यम से अपनी पूजा बुक करें

सिद्धवट मंदिर, उज्जैन में प्रामाणिक एवं सुव्यवस्थित पितृ और धार्मिक अनुष्ठान सेवाएं — श्रद्धा तथा पारंपरिक वैदिक विधि-विधान के साथ आयोजित।

  • पिंडदान एवं श्राद्ध पूजा
  • तर्पण एवं पितृ शांति अनुष्ठान
  • पितृ मोक्ष जाप एवं यज्ञ
  • भगवान विष्णु की पूजा
  • हवन एवं वैदिक मंत्रोच्चार
  • संकल्प एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान
  • अनुभवी वैदिक आचार्यों का मार्गदर्शन

प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा, पारंपरिक विधि-विधान और पवित्र आध्यात्मिक भावना के साथ आयोजित किया जाता है।

पूजारीजी.कॉम के माध्यम से सिद्धवट मंदिर, उज्जैन में अपनी पितृ पूजा बुक करें और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं स्मरण अर्पित करें।

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जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।

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    पवित्र सिद्धवट, उज्जैन में 5 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सम्पन्न किया जाने वाला यह विशेष पंचक शांति अनुष्ठान धार्मिक परंपराओं के अनुसार पंचक दोष की शांति, दिवंगत आत्मा की शांति एवं सद्गति तथा परिवार के सुख-शांति और कल्याण की मंगलकामना से कराया जाता है। इस अनुष्ठान में भगवान श्री विष्णु का पूजन, पंच देवताओं एवं पंचदश देवताओं की स्थापना, पंच सूक्त जाप, हवन, अभिषेक, नक्षत्र प्रतिमा दान तथा अन्य शांति विधियां सम्मिलित रहती हैं। तीर्थ क्षेत्र की स्थानीय परंपरा एवं संबंधित आचार्य के निर्देशानुसार अनुष्ठान की अंतिम विधि और क्रम में आवश्यक परिवर्तन संभव हो सकते हैं।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • श्री गणेश पूजन
    • कलश पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • विशेष शांति संकल्प
    • भगवान श्री विष्णु पूजन
    • 5 कलश स्थापना
    • प्रतिमा पूजन
    • पंच देवता पूजन
    • पंचदश देवता स्थापना एवं पूजन
    • पंच सूक्त जाप
    • हवन
    • बलिदान विधि
    • नक्षत्र प्रतिमा दान
    • अभिषेक
    • ब्राह्मण भोजन
    • शांति संकल्प एवं प्रार्थना

    विशेष सुविधाएं

    • पवित्र सिद्धवट, उज्जैन में विशेष पंचक शांति अनुष्ठान
    • 5 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से पूजा
    • भगवान श्री विष्णु पूजन सहित विस्तृत शांति अनुष्ठान
    • 5 कलश स्थापना, पंच देवता एवं पंचदश देवता पूजन
    • पंच सूक्त जाप, हवन एवं विशेष शांति प्रार्थना
    • नक्षत्र प्रतिमा दान एवं अभिषेक की व्यवस्था
    • स्थानीय धार्मिक परंपरा एवं आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार अनुष्ठान का संचालन

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • दिवंगत व्यक्ति का नाम
    • दिवंगत व्यक्ति से संबंधित आवश्यक जन्म विवरण, यदि उपलब्ध हो
    • मृत्यु की तिथि, यदि आवश्यक हो
    • संकल्प हेतु परिवार से संबंधित आवश्यक जानकारी

    महत्वपूर्ण सूचना: तीर्थ क्षेत्र, स्थानीय परंपरा एवं शास्त्रोक्त विधि के अनुसार पंचक शांति पूजा की प्रक्रिया में कुछ परिवर्तन संभव हो सकते हैं। अनुष्ठान की अंतिम विधि एवं क्रम सिद्धवट, उज्जैन के स्थानीय तीर्थ क्षेत्र एवं संबंधित अनुभवी आचार्य के निर्देशानुसार निर्धारित किया जाएगा।

    पवित्र सिद्धवट, उज्जैन में श्रद्धापूर्वक सम्पन्न यह पंचक शांति अनुष्ठान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिवंगत आत्मा की शांति एवं सद्गति तथा परिवार के सुख-शांति, मंगल और कल्याण की प्रार्थना के लिए किया जाता है। भगवान श्री विष्णु एवं अन्य देवशक्तियों की आराधना के साथ सम्पन्न यह वैदिक अनुष्ठान परिवार को आध्यात्मिक संबल और शांति की मंगलकामना प्रदान करता है।

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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