मुख्य सामग्री पर जाएं
Pujari Ji

पंचक शांति पूजा

श्री विष्णुपद मंदिर, गया
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
पंचक शांति पूजा

पंचक शांति पूजा का संबंध उन धार्मिक परंपराओं से है जिनमें पंचक काल में हुए निधन के बाद विशेष शांति कर्म करने का विधान माना जाता है। इस अनुष्ठान के माध्यम से दिवंगत जीवात्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना की जाती है तथा परिवार के सुख, शांति एवं कल्याण के लिए प्रार्थना की जाती है।

विष्णुपद मंदिर, गया जी सनातन धार्मिक परंपरा में पितृ कर्म, श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान के प्रमुख तीर्थों में विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहाँ भगवान श्री विष्णु के चरणचिह्न स्थित हैं। इसी पावन स्थल पर अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में यजमान के संकल्प एवं कुल परंपरा के अनुसार पंचक शांति कर्म सम्पन्न कराया जाता है।

Duration

2h – 4h

Best time

किसी भी समय

Starting price

₹21,000

लाभ

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान के माध्यम से दिवंगत जीवात्मा की शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है।
  • पंचक से संबंधित धार्मिक आशंकाओं की शांति तथा मन की शांति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • दिवंगत जीवात्मा के उद्धार एवं मोक्ष की प्राप्ति के लिए मंगलकामना की जाती है।
  • भगवान श्री विष्णु एवं पितृ देवताओं की कृपा, आशीर्वाद एवं संरक्षण की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति, सौहार्द एवं समग्र कल्याण की मंगलकामना की जाती है।
  • दिवंगत व्यक्ति के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने तथा पितृ धर्म का विधिपूर्वक निर्वहन करने का पवित्र अवसर प्राप्त होता है।
  • परिवार के सभी सदस्यों के मंगल, सुख, शांति एवं कल्याण के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है।

पंचक शांति पूजा

पंचक शांति पूजा पंचक काल में दिवंगत हुए व्यक्ति के निमित्त की जाने वाली विशेष धार्मिक शांति विधि है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक काल में मृत्यु होने पर परिवार की कुल परंपरा एवं धार्मिक विधि के अनुसार विशेष शांति कर्म किया जा सकता है।

इस अनुष्ठान का उद्देश्य किसी निश्चित परिणाम की गारंटी देना नहीं, बल्कि दिवंगत जीवात्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना करना तथा परिवार की ओर से श्रद्धा एवं पितृ धर्म का निर्वहन करना है।

पंचक क्या होता है?

वैदिक ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के उत्तरार्ध, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्रों में स्थित रहता है, तब इस अवधि को सामान्यतः पंचक कहा जाता है।

धार्मिक परंपराओं में पंचक काल को विशेष विचारणीय अवधि माना गया है। यदि इस अवधि में किसी व्यक्ति का निधन हो जाए, तो कुल परंपरा एवं योग्य वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार पंचक शांति कर्म कराया जा सकता है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

  • भगवान श्री विष्णु
  • पितृ देवता

विष्णुपद मंदिर में भगवान श्री विष्णु की आराधना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पितृ कर्म एवं श्राद्ध परंपरा के संदर्भ में गया जी का विशेष स्थान है। यहाँ दिवंगत पूर्वजों के निमित्त पिंडदान, तर्पण एवं अन्य धार्मिक कर्म किए जाते हैं।

पंचक शांति पूजा कब करानी चाहिए?

  • जब किसी व्यक्ति का निधन पंचक काल में हुआ हो।
  • दिवंगत जीवात्मा की शांति एवं सद्गति की मंगलकामना के लिए।
  • कुल परंपरा के अनुसार पंचक शांति कर्म आवश्यक माना जाता हो।
  • दिवंगत व्यक्ति के निमित्त विशेष पितृ कर्म करने की आवश्यकता हो।
  • परिवार के सुख, शांति एवं कल्याण की प्रार्थना के लिए।
  • योग्य वैदिक आचार्य के परामर्शानुसार।

पंचक शांति की विधि एवं परंपरा विभिन्न क्षेत्रों तथा कुल परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

पंचक शांति पूजा के धार्मिक लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान के माध्यम से—

  • दिवंगत जीवात्मा की शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है।
  • पंचक से संबंधित धार्मिक आशंकाओं की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • दिवंगत जीवात्मा के उद्धार एवं मोक्ष की मंगलकामना की जाती है।
  • भगवान श्री विष्णु एवं पितृ देवताओं की कृपा की प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार के सुख, शांति एवं कल्याण की मंगलकामना की जाती है।
  • दिवंगत व्यक्ति के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म का निर्वहन किया जाता है।
  • परिवार के सदस्यों के मंगल एवं कल्याण के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है।

विष्णुपद मंदिर, गया जी में पंचक शांति पूजा का महत्व

विष्णुपद मंदिर, गया जी सनातन धार्मिक परंपरा में पितृ कर्म एवं पिंडदान के प्रमुख तीर्थों में माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहाँ भगवान श्री विष्णु के चरणचिह्न विराजमान हैं।

गया क्षेत्र में पितरों एवं दिवंगत पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान करने की विशेष परंपरा है। पंचक काल में दिवंगत व्यक्ति के निमित्त भी यहाँ विशेष संकल्प लेकर भगवान श्री विष्णु एवं पितृ देवताओं की आराधना की जाती है।

पंचक शांति पूजा कौन करा सकता है?

सामान्यतः दिवंगत व्यक्ति के निकट संबंधी, जैसे पुत्र, पुत्री, पति, पत्नी अथवा परिवार के अन्य सदस्य, अपनी कुल परंपरा एवं वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में यजमान बन सकते हैं।

विशेष परिस्थितियों में परिवार की परंपरा के अनुसार अन्य योग्य सदस्य भी यह धार्मिक अनुष्ठान करा सकते हैं।

पंचक शांति पूजा के लिए वस्त्र

यजमान को पूजा के समय स्वच्छ एवं पारंपरिक वस्त्र धारण करने चाहिए। यदि विशेष विधि के अनुसार वस्त्र परिवर्तन आवश्यक हो, तो अतिरिक्त वस्त्र साथ रखना उचित होता है।

पंचक शांति पूजा के लिए आवश्यक जानकारी

संकल्प के लिए सामान्यतः निम्न जानकारी आवश्यक हो सकती है—

  • यजमान का नाम एवं गोत्र
  • दिवंगत व्यक्ति का नाम
  • यजमान से संबंध
  • मृत्यु की तिथि एवं समय
  • मृत्यु का स्थान

आध्यात्मिक महत्व

पंचक शांति पूजा दिवंगत जीवात्मा के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म की भावना से सम्पन्न किया जाने वाला विशेष धार्मिक अनुष्ठान है। इसका प्रमुख उद्देश्य दिवंगत आत्मा की शांति, सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना करना तथा परिवार के सुख, शांति एवं कल्याण के लिए प्रार्थना करना है।

विष्णुपद मंदिर, गया जी में भगवान श्री विष्णु की पावन साक्षी में अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में यजमान के संकल्प एवं कुल परंपरा के अनुसार यह धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।

विशेष जानकारी

  • अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि के अनुसार अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।
  • यजमान एवं दिवंगत व्यक्ति के विवरण के अनुसार संकल्प लिया जाता है।
  • कुल परंपरा एवं धार्मिक आवश्यकता के अनुसार पूजा-विधि निर्धारित की जा सकती है।
  • आवश्यक पूजन सामग्री की व्यवस्था की जा सकती है।
  • पितृ कर्म एवं संबंधित धार्मिक विधियाँ योग्य वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में सम्पन्न की जाती हैं।

विष्णुपद, गया जी में भगवान श्री विष्णु की पावन साक्षी में अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में यजमान के संकल्प एवं कुल परंपरा के अनुसार यह विशेष धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण विधि-विधान एवं श्रद्धा के साथ सम्पन्न कराया जाता है।

पूजा स्थानगया

श्री विष्णुपद मंदिर

श्री विष्णुपद मंदिर

गया

विष्णुपाद मंदिर गया में फल्गु नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत पवित्र और प्राचीन हिंदू मंदिर है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और अपनी धर्मशिला (भगवान विष्णु के चरणचिह्न) के लिए विश्वप्रसिद्ध है। लगभग 40 सेंटीमीटर लंबे ये पवित्र चरणचिह्न गर्भगृह में चांदी के आवरण के भीतर स्थापित हैं।

इतिहास एवं पौराणिक कथा

गयासुर की कथा

पुराणों के अनुसार गयासुर नामक एक दैत्य ने कठोर तपस्या कर महान शक्तियाँ प्राप्त कर ली थीं। भगवान विष्णु ने उससे यज्ञ हेतु उसके शरीर को समर्पित करने का निवेदन किया और अंततः उसे पृथ्वी के नीचे स्थापित कर दिया। उसी स्थान पर धर्मशिला पर भगवान विष्णु के चरणचिह्न अंकित हुए, जिन्हें आज विष्णुपाद मंदिर में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।

पिंडदान का महत्व

मान्यता है कि यहाँ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष, शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। इसी कारण गया हिंदू धर्म का एक प्रमुख मोक्ष-धाम माना जाता है।

भव्य वास्तुकला

विष्णुपाद मंदिर विशाल ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित है। इसकी अष्टकोणीय (आठ-भुज) संरचना लगभग 100 फीट ऊँची है। मंदिर में चारों ओर सुंदर नक्काशीदार स्तंभ हैं तथा शिखर पर लगभग 50 किलो स्वर्ण ध्वजा और कलश स्थापित है, जो इसकी दिव्यता को दर्शाते हैं।

धर्मशिला एवं पूजन

गर्भगृह में भगवान विष्णु के पवित्र चरणचिह्न चांदी के आवरण से सुरक्षित हैं। सामने माता लक्ष्मी की प्रतिमा भी विराजमान है, जिनकी प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा और श्रृंगार किया जाता है।

पिंडदान एवं तर्पण अनुष्ठान

विष्णुपाद मंदिर पिंडदान और पितृश्राद्ध का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालु फल्गु नदी के तट पर तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और श्राद्ध कर्म संपन्न करते हैं। विशेष रूप से पितृपक्ष के दौरान लाखों भक्त यहाँ अपने पितरों की शांति हेतु अनुष्ठान कराते हैं।

श्राद्धकाल का महत्व

पितृ पक्ष एवं अमावस्या के अवसर पर यहाँ विशेष पूजा-अनुष्ठान आयोजित होते हैं। श्रद्धालु पूर्ण वैदिक विधि से पिंडदान और तर्पण कराते हैं।

Puजरिजि.coम द्वारा उपलब्ध सेवाएँ

  • पूजा आयोजन एवं पिंडदान सेवा – शास्त्रसम्मत विधि से पिंडदान, तर्पण एवं श्राद्ध की संपूर्ण व्यवस्था।
  • अनुभवी पंडित मार्गदर्शन – वैदिक मंत्रोच्चारण, संकल्प और पूजा सामग्री सहित पूर्ण सहयोग।
  • ऑन-साइट एवं ऑनलाइन सुविधा – स्थल पर व्यवस्था तथा ऑनलाइन बुकिंग विकल्प।
  • ब्राह्मण भोजन एवं दान सेवा – पूजा के पश्चात ब्राह्मण भोजन, दक्षिणा और श्रद्धादान की व्यवस्था।

👉 हम आपकी श्रद्धा-यात्रा को सरल, सुव्यवस्थित और पुण्यपूर्ण बनाने के लिए संकल्पित हैं।

धार्मिक महत्ता

पितरों को मोक्ष एवं शांति – विधिवत पिंडदान से पूर्वजों को मोक्ष मार्ग और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

परिवार में समृद्धि और संतुलन – पितृश्राद्ध से कुल में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और सुख-समृद्धि का अनुभव होता है।

आध्यात्मिक अनुभूति – फल्गु नदी के तट पर अनुष्ठान करने से मन में गहन शांति, भक्ति और आत्मिक संतुलन की अनुभूति होती है।

पहुँच एवं यात्रा

📌 स्थानः विष्णुपाद मंदिर रोड, चांद चौरा, गया, बिहार – 823001

🚆 निकटतम रेलवे स्टेशनः गया जंक्शन (ऑटो/कैब से सहज पहुँच)

✈️ निकटतम हवाई अड्डाः गया एयरपोर्ट

श्री विष्णुपाद मंदिर, गया जी — भगवान विष्णु के पवित्र पदचिह्न पर निर्मित यह प्राचीन तीर्थ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध का सर्वोच्च केंद्र माना जाता है। यह स्थल पितृमोक्ष, परिवार की शांति और आध्यात्मिक उन्नति का दिव्य स्थान है।

श्रद्धा आपकी, सेवा हमारी

मंदिर विवरण देखें

तीर्थ नहीं जा पा रहे हैं?

जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।

व्हाट्सएप पर पूछें

हमारी गारंटी

100% प्रमाणित पुजारी
पूरी पूजा सामग्री शामिल
वैदिक विधि-विधान
मार्गदर्शन व सहायता

पैकेज चुनें

  • उन्नत

    5 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    3h

    यह विशेष पंचक शांति पूजा पवित्र विष्णुपद मंदिर, गया में 5 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं धार्मिक परंपराओं के अनुसार सम्पन्न कराई जाती है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से पंचक काल से संबंधित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिवंगत आत्मा की शांति, सद्गति, शांति एवं परिवार के कल्याण की मंगलकामना के लिए कराया जाता है। भगवान श्री विष्णु की पावन साक्षी में सम्पन्न होने वाला यह विस्तृत अनुष्ठान पंचक शांति, देव पूजन, सूक्त जाप, हवन, दान एवं विशेष शांति प्रार्थना सहित पूर्ण किया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • श्री गणेश पूजन
    • कलश पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • विशेष संकल्प
    • भगवान श्री विष्णु पूजन
    • 5 कलश स्थापना
    • प्रतिमा पूजन
    • पंच देवता पूजन
    • पंचदश देवता स्थापना एवं पूजन
    • पंच सूक्त जाप
    • हवन
    • बलिदान विधि
    • नक्षत्र प्रतिमा दान
    • अभिषेक
    • ब्राह्मण भोजन
    • शांति संकल्प एवं प्रार्थना

    विशेष सुविधाएं

    • पवित्र विष्णुपद मंदिर, गया में विशेष पंचक शांति अनुष्ठान।
    • 5 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से पूजा सम्पन्न।
    • भगवान श्री विष्णु के पूजन सहित विस्तृत शांति अनुष्ठान।
    • 5 कलश स्थापना, पंच देवता एवं पंचदश देवता स्थापना एवं पूजन।
    • पंच सूक्त जाप, हवन एवं विशेष शांति प्रार्थना।
    • नक्षत्र प्रतिमा दान एवं अभिषेक की व्यवस्था।
    • बुकिंग के बाद पूजा संबंधी आवश्यक जानकारी एवं निर्देश प्रदान किए जाएंगे।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • दिवंगत व्यक्ति का नाम
    • दिवंगत व्यक्ति की जन्म तिथि, यदि उपलब्ध हो
    • मृत्यु की तिथि
    • पंचक काल से संबंधित उपलब्ध जानकारी

    महत्वपूर्ण सूचना: तीर्थ क्षेत्र, स्थानीय धार्मिक परंपरा एवं शास्त्रोक्त विधि के अनुसार पंचक शांति पूजा की प्रक्रिया में कुछ परिवर्तन संभव हो सकते हैं। अनुष्ठान की अंतिम विधि एवं क्रम विष्णुपद मंदिर, गया की स्थानीय तीर्थ परंपरा तथा संबंधित अनुभवी आचार्य के निर्देशानुसार निर्धारित किया जाएगा।

    पवित्र विष्णुपद मंदिर, गया में सम्पन्न यह विशेष पंचक शांति अनुष्ठान दिवंगत आत्मा की शांति एवं सद्गति तथा परिवार में सुख, शांति और मंगल की प्रार्थना के साथ श्रद्धापूर्वक कराया जाता है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹21,000₹25,00016% off

    2 वस्तुएँ शामिल

पंचक शांति पूजा के बारे में हमसे बात करें

WhatsApp

भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

और अधिक जानें

कैसे काम करता है

एक बार बुक करें — बाकी सब पुजारीजी संभाले

एक बार जानकारी दें। पुजारी, सामग्री, विधि-विधान और अपडेट — सब आपके लिए संभाला जाता है।

  1. आप

    बुक करें और संकल्प बताएँ

    पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।

  2. पुजारीजी

    हम प्रमाणित पुजारी नियुक्त करते हैं

    जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।

  3. पुजारीजी

    हम पूरी पूजा सामग्री की व्यवस्था करते हैं

    हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।

  4. पुजारीजी

    वैदिक विधि-विधान से पूजा संपन्न

    तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।

  5. पुजारीजी

    आपको प्रसाद व आशीर्वाद मिलता है

    संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।

हर चरण पर कॉल और व्हाट्सएप पर मार्गदर्शन व सहायता।

अभी बुक करें पंचक शांति पूजा

ऊपर दिए गए पैकेज में से चुनें या पूछताछ करें, हमारी टीम आपकी तारीख और विवरणों की पुष्टि करेगी।