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Pujari Ji

शतचंडी पाठ

विंध्याचल मंदिर, मिर्जापुर
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
शतचंडी पाठ

शतचंडी पाठ चंडी उपासना का विस्तृत एवं विशेष रूप माना जाता है। इसमें दुर्गा सप्तशती के तेरह अध्यायों का सौ बार विधिपूर्वक पाठ कराया जाता है। माँ विंध्यवासिनी के पावन धाम में सम्पन्न होने वाला यह अनुष्ठान देवी की कृपा, शक्ति एवं संरक्षण की मंगलकामना से जुड़ा है।

यह अनुष्ठान बड़े संकटों एवं बाधाओं की शांति, विशेष धार्मिक संकल्प, कार्यसिद्धि, परिवार के सुख-शांति, व्यापार एवं कार्यक्षेत्र में उन्नति तथा विशेष मनोकामना की मंगलकामना से कराया जा सकता है। अनुष्ठान के अंतर्गत देवी पूजन, संकल्प, पाठ, हवन एवं पूर्णाहुति जैसी विधियाँ सम्पन्न की जाती हैं।

माँ विंध्यवासिनी मंदिर, विंध्याचल देवी उपासना का पावन एवं श्रद्धेय धाम माना जाता है। इस पवित्र स्थल पर यजमान के नाम, गोत्र एवं संकल्प के साथ शतचंडी पाठ सम्पन्न कराना भक्तों के लिए विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व रखता है।

Duration

3h – 5h

Best time

मुहूर्त अनुसार

Starting price

₹81,000

लाभ

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शतचंडी पाठ के माध्यम से जीवन में आने वाले संकटों एवं बाधाओं की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • विशेष मनोकामना एवं कार्यसिद्धि के लिए देवी की कृपा की मंगलकामना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति, सौहार्द एवं समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
  • व्यापार एवं कार्यक्षेत्र में उन्नति, स्थिरता एवं अनुकूल परिस्थितियों की मंगलकामना की जाती है।
  • नकारात्मक प्रभावों एवं शत्रु संबंधी बाधाओं से सुरक्षा के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • मानसिक शांति, आत्मबल एवं सकारात्मक सोच की प्राप्ति के लिए मंगलकामना की जाती है।
  • स्वास्थ्य एवं पारिवारिक कल्याण के लिए देवी की कृपा की प्रार्थना की जाती है।
  • विशेष धार्मिक संकल्प की पूर्णता तथा जीवन में शुभता एवं मंगल की प्राप्ति की मंगलकामना की जाती है।

शतचंडी पाठ

शतचंडी पाठ देवी उपासना का एक विस्तृत वैदिक अनुष्ठान है, जिसमें दुर्गा सप्तशती के तेरह अध्यायों का सौ बार पाठ कराया जाता है। दुर्गा सप्तशती को देवी महात्म्य के नाम से भी जाना जाता है और इसमें माँ भगवती के विभिन्न स्वरूपों, उनकी शक्ति तथा दैवी महिमा का वर्णन मिलता है।

माँ विंध्यवासिनी मंदिर, विंध्याचल के पावन सान्निध्य में यह अनुष्ठान श्रद्धा एवं संकल्प के साथ सम्पन्न कराया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार देवी आराधना के माध्यम से जीवन में आने वाले संकटों एवं बाधाओं की शांति, संरक्षण, सुख-समृद्धि एवं विशेष मनोकामना की मंगलकामना की जाती है।

अनुष्ठान के दौरान संकल्प लेकर देवी पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ, मंत्र जाप, हवन एवं पूर्णाहुति सम्पन्न की जाती है। निर्धारित पाठ पूर्ण होने के पश्चात हवन के माध्यम से देवी की कृपा एवं संकल्प की पूर्णता की मंगलकामना की जाती है।

मुख्य देवी एवं धार्मिक महत्व

इस अनुष्ठान की मुख्य आराध्या माँ विंध्यवासिनी एवं माँ दुर्गा हैं। देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के साथ शक्ति, संरक्षण, शुभता एवं कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

माँ विंध्यवासिनी का पावन धाम देवी उपासना के प्रमुख तीर्थस्थलों में माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहाँ श्रद्धापूर्वक देवी आराधना करने से भक्त अपने जीवन में सुख-शांति, शक्ति, संरक्षण एवं विशेष मनोकामना की मंगलकामना करते हैं।

शतचंडी पाठ कब कराया जा सकता है?

  • नवरात्रि के पावन अवसर पर
  • देवी आराधना के विशेष पर्वों पर
  • विशेष धार्मिक संकल्प के समय
  • जीवन में बड़े संकट एवं बाधाओं की शांति की मंगलकामना हेतु
  • किसी विशेष कार्य की सिद्धि की प्रार्थना के लिए
  • परिवार के सुख-शांति एवं समृद्धि की मंगलकामना से
  • व्यापार एवं कार्यक्षेत्र में उन्नति की प्रार्थना के लिए
  • योग्य आचार्य के परामर्श एवं शुभ समय के अनुसार

शतचंडी पाठ किन परिस्थितियों में कराया जाता है?

  • जीवन में आने वाले बड़े संकटों एवं बाधाओं की शांति की मंगलकामना हेतु
  • विशेष मनोकामना एवं कार्यसिद्धि की प्रार्थना के लिए
  • व्यापार एवं कार्यक्षेत्र में उन्नति की मंगलकामना से
  • आर्थिक कठिनाइयों एवं ऋण संबंधी परिस्थितियों में शांति की प्रार्थना हेतु
  • परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि की मंगलकामना से
  • शत्रु बाधाओं एवं नकारात्मक प्रभावों से रक्षा की प्रार्थना के लिए
  • स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति की मंगलकामना हेतु
  • विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक संकल्प की पूर्ति के लिए

मुख्य मंत्र

शतचंडी अनुष्ठान में दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ देवी से संबंधित मंत्रों का जाप किया जाता है। प्रमुख देवी मंत्रों में निम्न मंत्र का जाप किया जा सकता हैः

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥

मंत्र जाप एवं पाठ की संख्या अनुष्ठान की निर्धारित विधि, संकल्प एवं आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार की जाती है।

शतचंडी पाठ के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान के माध्यम से निम्न मंगलकामनाएँ की जाती हैंः

  • जीवन में आने वाले संकटों एवं बाधाओं की शांति की प्रार्थना की जाती है।
  • विशेष मनोकामना एवं कार्यसिद्धि के लिए देवी की कृपा की मंगलकामना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
  • व्यापार एवं कार्यक्षेत्र में उन्नति एवं स्थिरता की मंगलकामना की जाती है।
  • नकारात्मक प्रभावों एवं शत्रु बाधाओं से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
  • मानसिक शांति, आत्मबल एवं सकारात्मकता की मंगलकामना की जाती है।
  • स्वास्थ्य एवं पारिवारिक कल्याण के लिए देवी की कृपा की प्रार्थना की जाती है।
  • विशेष धार्मिक संकल्प की पूर्णता एवं जीवन में शुभता की मंगलकामना की जाती है।

आध्यात्मिक महत्व

शतचंडी पाठ देवी महात्म्य की विस्तृत आराधना से जुड़ा हुआ अनुष्ठान है। माँ भगवती के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण एवं स्तवन भक्तों में श्रद्धा, आत्मबल एवं आध्यात्मिक भाव को सुदृढ़ करने वाला माना जाता है।

माँ विंध्यवासिनी के पावन धाम में यह अनुष्ठान सम्पन्न होने से देवी उपासना के प्रति श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण प्राप्त होता है। यजमान के नाम, गोत्र एवं विशेष संकल्प के साथ पाठ, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति सम्पन्न कराकर देवी की कृपा, संरक्षण, सुख-शांति एवं विशेष मनोकामना की मंगलकामना की जाती है।

विशेष जानकारी

  • माँ विंध्यवासिनी मंदिर, विंध्याचल में अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।
  • यजमान के नाम एवं गोत्र से वैदिक संकल्प लिया जाता है।
  • संकल्प के लिए जन्म तिथि एवं जन्म स्थान की जानकारी आवश्यकतानुसार ली जा सकती है।
  • विशेष धार्मिक उद्देश्य होने पर उसके अनुसार संकल्प निर्धारित किया जा सकता है।
  • दुर्गा सप्तशती के निर्धारित पाठ के पश्चात विशेष हवन एवं पूर्णाहुति सम्पन्न की जाती है।
  • अनुष्ठान की अवधि एवं आचार्यों की संख्या निर्धारित व्यवस्था के अनुसार रखी जा सकती है।
  • यजमान की अनुपस्थिति में उनके नाम एवं संकल्प के आधार पर मंदिर परिसर में उनकी ओर से अनुष्ठान सम्पन्न कराया जा सकता है।

पूजा स्थानमिर्जापुर

विंध्याचल मंदिर

विंध्याचल मंदिर

मिर्जापुर

पवित्र विंध्याचल धाम में माँ गंगा के पावन तट पर स्थित माँ विंध्यवासिनी मंदिर माँ विंध्यवासिनी देवी को समर्पित एक अत्यंत प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद में स्थित यह दिव्य धाम शक्ति उपासना और सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां माँ के दर्शन, पूजा-अर्चना, दुर्गा सप्तशती पाठ तथा विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं।

माँ विंध्यवासिनी को विंध्य पर्वत पर निवास करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी ने विंध्य क्षेत्र को अपना निवास बनाया, जिसके कारण यह स्थान विंध्यवासिनी धाम के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह धाम शक्ति साधना, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ा महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है।

धार्मिक ग्रंथों तथा स्थानीय परंपराओं में माँ विंध्यवासिनी की महिमा का विशेष वर्णन मिलता है। विशेष रूप से चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।

माँ विंध्यवासिनी मंदिर का इतिहास

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय कंस ने योगमाया रूपी कन्या को मारने का प्रयास किया। मान्यता है कि वह कन्या कंस के हाथों से छूटकर आकाश में प्रकट हुईं और दिव्य स्वरूप धारण कर उन्हें बताया कि उनका वध करने वाला जन्म ले चुका है। इसके पश्चात देवी के विंध्य क्षेत्र में निवास करने की मान्यता जुड़ी हुई है और उन्हें माँ विंध्यवासिनी के नाम से पूजा जाने लगा।

देवी भागवत, मार्कण्डेय पुराण तथा स्थानीय धार्मिक परंपराओं में विंध्य क्षेत्र की देवी उपासना का विशेष महत्व बताया जाता है। प्राचीन काल से यह क्षेत्र शक्ति साधना से जुड़ा रहा है और समय-समय पर श्रद्धालुओं तथा विभिन्न शासकों द्वारा मंदिर एवं धार्मिक व्यवस्था के संरक्षण और विकास की परंपरा रही है।

आज विंध्याचल धाम उत्तर भारत के प्रमुख शक्ति तीर्थों में गिना जाता है। नवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर यहां धार्मिक गतिविधियां और श्रद्धालुओं की संख्या विशेष रूप से बढ़ जाती है।

माँ विंध्यवासिनी मंदिर का धार्मिक महत्व

सनातन धार्मिक परंपरा में माँ विंध्यवासिनी को आदिशक्ति, जगदंबा और माँ दुर्गा के स्वरूप के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ मां की आराधना करने वाले भक्तों पर उनकी कृपा बनी रहती है तथा वे सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं।

विंध्याचल धाम की त्रिकोण परिक्रमा का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस परिक्रमा में श्रद्धालु माँ विंध्यवासिनी मंदिर, अष्टभुजा देवी मंदिर और कालीखोह मंदिर के दर्शन करते हैं। धार्मिक आस्था के अनुसार यह यात्रा शक्ति उपासना की महत्वपूर्ण साधना मानी जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने सेः

  • माँ विंध्यवासिनी की विशेष कृपा प्राप्त करने की मंगलकामना की जाती है।
  • मनोकामना पूर्ति की आस्था जुड़ी हुई है।
  • परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
  • भय, संकट और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा की कामना की जाती है।
  • संतान सुख और पारिवारिक मंगल की प्रार्थना की जाती है।
  • आत्मिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की जाती है।
  • जीवन में सकारात्मकता और शक्ति प्राप्त करने की धार्मिक भावना जुड़ी हुई है।

माँ विंध्यवासिनी मंदिर में होने वाली प्रमुख पूजाएं एवं धार्मिक अनुष्ठान

विंध्याचल धाम में माँ की आराधना से जुड़े विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और धार्मिक संकल्प के अनुसार पूजा-अर्चना एवं वैदिक अनुष्ठान कराते हैं।

प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान

  • माँ विंध्यवासिनी विशेष पूजा
  • दुर्गा सप्तशती पाठ
  • चंडी पाठ
  • नवचंडी यज्ञ
  • श्री सूक्त पाठ
  • लक्ष्मी पूजन
  • संकल्प पूजा
  • मनोकामना पूजन
  • नवग्रह शांति पूजा
  • महामृत्युंजय मंत्र जाप
  • हवन एवं पूर्णाहुति
  • कन्या पूजन
  • गंगा पूजन एवं दीपदान

माँ विंध्यवासिनी मंदिर परिसर के प्रमुख पवित्र स्थल

माँ विंध्यवासिनी गर्भगृह

मंदिर का मुख्य गर्भगृह माँ विंध्यवासिनी की आराधना का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालु यहां माँ के दर्शन कर उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं और सुख, शांति, समृद्धि तथा मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

माँ गंगा का पावन तट

मंदिर के निकट माँ गंगा का पवित्र तट स्थित है। श्रद्धालु धार्मिक परंपरा के अनुसार यहां स्नान, गंगा पूजन और दीपदान करते हैं तथा अपनी तीर्थयात्रा को आध्यात्मिक रूप से पूर्ण करने की कामना करते हैं।

अष्टभुजा देवी मंदिर

अष्टभुजा देवी मंदिर विंध्याचल क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है और त्रिकोण परिक्रमा से जुड़ा महत्वपूर्ण देवालय माना जाता है। श्रद्धालु यहां माँ अष्टभुजा के दर्शन करते हैं।

कालीखोह मंदिर

कालीखोह मंदिर माँ महाकाली की उपासना से जुड़ा प्रमुख धार्मिक स्थल है। विंध्याचल की शक्ति साधना परंपरा में इसका विशेष महत्व माना जाता है।

त्रिकोण परिक्रमा मार्ग

माँ विंध्यवासिनी, अष्टभुजा देवी और कालीखोह के दर्शन को सम्मिलित करने वाली त्रिकोण परिक्रमा विंध्याचल धाम की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में से एक है। श्रद्धालु इसे श्रद्धा और संकल्प के साथ पूर्ण करते हैं।

माँ विंध्यवासिनी मंदिर में पूजा करवाने के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां विधिपूर्वक पूजा-अर्चना और वैदिक अनुष्ठान कराने से श्रद्धालुओं को अनेक आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ प्राप्त होने की आस्था है। पूजा का उद्देश्य केवल सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति ही नहीं, बल्कि देवी के प्रति श्रद्धा, आत्मिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की भावना को भी मजबूत करना माना जाता है।

  • मनोकामना पूर्तिः श्रद्धालु अपनी उचित मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माँ के समक्ष श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करते हैं।
  • सुख एवं समृद्धिः परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की जाती है।
  • सकारात्मकताः धार्मिक आस्था के अनुसार देवी की आराधना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल की भावना को बढ़ाने में सहायक मानी जाती है।
  • भय और संकट से रक्षाः माँ की शक्ति की उपासना के माध्यम से भय, संकट और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
  • संतान एवं पारिवारिक मंगलः श्रद्धालु संतान सुख और परिवार के कल्याण के लिए देवी की आराधना करते हैं।
  • शक्ति और साहसः माँ भगवती की उपासना से आंतरिक शक्ति, साहस और आत्मविश्वास प्राप्त करने की धार्मिक मान्यता है।
  • मानसिक शांतिः पूजा, मंत्रोच्चार और देवी स्मरण के माध्यम से मन को शांति और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त होने की आस्था है।
  • आध्यात्मिक उन्नतिः नियमित भक्ति और साधना को आत्मिक विकास तथा आध्यात्मिक चेतना की दिशा में सहायक माना जाता है।
  • माँ की कृपाः श्रद्धालु देवी की कृपा, आशीर्वाद और संरक्षण की मंगलकामना के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।

माँ विंध्यवासिनी मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण

विंध्याचल धाम का वातावरण वर्षभर भक्ति और श्रद्धा से परिपूर्ण रहता है। मंदिर में होने वाली आरती, शंखध्वनि, मंत्रोच्चार और देवी की आराधना श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण करती है।

माँ गंगा के पावन तट की निकटता इस तीर्थ की धार्मिक अनुभूति को और विशेष बनाती है। प्रातःकाल और सायंकाल पूजा-अर्चना, दीपदान और धार्मिक गतिविधियों के कारण यहां भक्तिमय वातावरण दिखाई देता है।

नवरात्रि के दौरान विंध्याचल धाम विशेष रूप से जीवंत हो उठता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति, देवी के जयकारे, धार्मिक अनुष्ठान और दीपों की आभा पूरे धाम को भक्तिमय बना देती है।

विशेष अवसरों पर माँ विंध्यवासिनी मंदिर का महत्व

माँ विंध्यवासिनी मंदिर में विभिन्न धार्मिक पर्वों और विशेष तिथियों का विशेष महत्व माना जाता है। इन अवसरों पर श्रद्धालु दर्शन, पूजा और देवी आराधना के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

प्रमुख अवसरों में शामिल हैंः

  • चैत्र नवरात्रि
  • शारदीय नवरात्रि
  • दुर्गाष्टमी
  • महानवमी
  • गुप्त नवरात्रि
  • दीपावली
  • कार्तिक पूर्णिमा
  • गंगा दशहरा
  • अमावस्या
  • पूर्णिमा
  • अन्य विशेष शक्ति उपासना पर्व

माँ विंध्यवासिनी मंदिर कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग

विंध्याचल धाम के लिए निकटतम प्रमुख हवाई संपर्क लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी है। वहां से सड़क मार्ग द्वारा विंध्याचल धाम तक पहुंचा जा सकता है।

रेल मार्ग

विंध्याचल रेलवे स्टेशन मंदिर क्षेत्र के निकट स्थित प्रमुख रेलवे स्टेशन है। इसके अतिरिक्त मिर्जापुर रेलवे स्टेशन से भी सड़क मार्ग द्वारा मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग

विंध्याचल धाम उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे मिर्जापुर, वाराणसी और प्रयागराज से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। श्रद्धालु बस, टैक्सी या निजी वाहन के माध्यम से मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

दर्शन हेतु सर्वोत्तम समय

माँ विंध्यवासिनी मंदिर में वर्षभर श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक दृष्टि से चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि तथा अन्य शक्ति उपासना से जुड़े पर्व विशेष महत्व रखते हैं।

यात्रा की दृष्टि से सामान्यतः अक्टूबर से मार्च के दौरान मौसम अपेक्षाकृत अनुकूल माना जाता है। हालांकि नवरात्रि जैसे प्रमुख पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक हो सकती है, इसलिए ऐसे अवसरों पर यात्रा की योजना पहले से बनाना उपयोगी रहता है।

मंदिर के दर्शन समय और विशेष पर्वों की व्यवस्था यात्रा से पहले संबंधित आधिकारिक स्रोत से जांच लेना उचित है।

निष्कर्ष

माँ विंध्यवासिनी मंदिर, विंध्याचल धाम, शक्ति उपासना, सनातन आस्था और आध्यात्मिक साधना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। माँ विंध्यवासिनी की आराधना, दुर्गा सप्तशती पाठ, चंडी पाठ, नवचंडी यज्ञ, गंगा पूजन और त्रिकोण परिक्रमा जैसी धार्मिक परंपराएं इस धाम की विशिष्ट पहचान से जुड़ी हैं।

श्रद्धालु यहां माँ के दर्शन कर सुख, शांति, समृद्धि, शक्ति, साहस और आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना करते हैं। माँ विंध्यवासिनी के प्रति श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई पूजा को भक्त देवी के आशीर्वाद और आत्मिक शांति प्राप्त करने का माध्यम मानते हैं।

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    पावन माँ विंध्यवासिनी मंदिर, विंध्याचल के मंदिर परिसर में 25 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शतचंडी पाठ एवं विशेष देवी अनुष्ठान विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक संपन्न कराया जाएगा। इस अनुष्ठान में दुर्गा सप्तशती के 100 संपूर्ण पाठ कराए जाएंगे। माँ विंध्यवासिनी के पावन सान्निध्य में यह विशेष अनुष्ठान संकट एवं बाधाओं के शमन, विशेष मनोकामना, कार्यसिद्धि, सुख-समृद्धि एवं माँ भगवती की कृपा की मंगलकामना से किया जाता है।

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    • संकल्प एवं स्वस्तिवाचन
    • गणेश पूजन
    • कलश स्थापना एवं पूजन
    • माँ विंध्यवासिनी एवं माँ दुर्गा का विशेष पूजन
    • देवी कवच पाठ
    • अर्गला स्तोत्र पाठ
    • कीलक स्तोत्र पाठ
    • दुर्गा सप्तशती के 100 संपूर्ण पाठ
    • देवी मंत्र जाप
    • विशेष हवन एवं आहुति
    • पूर्णाहुति
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    • 25 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा विस्तृत देवी अनुष्ठान
    • दुर्गा सप्तशती के 100 संपूर्ण पाठ
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    • विशेष मनोकामना एवं कार्यसिद्धि के लिए प्रार्थना
    • विस्तृत हवन, आहुति एवं पूर्णाहुति
    • पूजा एवं अनुष्ठान की आवश्यक व्यवस्था

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    • गोत्र
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    • जन्म समय, यदि आवश्यक हो
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    यजमान को व्यक्तिगत उपयोग एवं संकल्प से संबंधित आवश्यक सामग्री स्वयं लानी होगी। पूजा एवं हवन की अन्य आवश्यक सामग्री अनुष्ठान के अनुसार उपलब्ध कराई जाएगी।

    माँ विंध्यवासिनी एवं माँ भगवती की कृपा की मंगलकामना के साथ यह विशेष शतचंडी अनुष्ठान संकटों एवं बाधाओं के शमन, सुख-शांति, समृद्धि, कार्यसिद्धि एवं विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक संपन्न किया जाता है। दुर्गा सप्तशती के 100 पाठ, देवी मंत्र जाप, विशेष हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान और उसके परिवार के कल्याण एवं मंगलमय जीवन की प्रार्थना की जाती है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
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  • विशिष्ट

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    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प एवं स्वस्तिवाचन
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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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    हम प्रमाणित पुजारी नियुक्त करते हैं

    जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।

  3. पुजारीजी

    हम पूरी पूजा सामग्री की व्यवस्था करते हैं

    हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।

  4. पुजारीजी

    वैदिक विधि-विधान से पूजा संपन्न

    तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।

  5. पुजारीजी

    आपको प्रसाद व आशीर्वाद मिलता है

    संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।

हर चरण पर कॉल और व्हाट्सएप पर मार्गदर्शन व सहायता।

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