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Pujari Ji

श्राद्ध पूजा

सिद्धवट मंदिर, उज्जैन
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
श्राद्ध पूजा

सिद्धवट, उज्जैन को पितृ कर्म के लिए महत्वपूर्ण एवं पवित्र तीर्थ माना जाता है। यहाँ प्राचीन वटवृक्ष के समीप अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी तथा अन्य पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान करने की धार्मिक परंपरा रही है।

श्राद्ध पूजा का उद्देश्य दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करना तथा उनकी तृप्ति, सद्गति एवं पितृ शांति की मंगलकामना करना है। यह कर्म विशेष रूप से वार्षिक श्राद्ध तिथि पर, पितृ पक्ष के दौरान, सर्वपितृ अमावस्या तथा परिवार की परंपरा के अनुसार निर्धारित अवसरों पर सम्पन्न कराया जाता है।

सिद्धवट में श्राद्ध कर्म का प्रारम्भ भगवान श्रीहरि विष्णु के स्मरण एवं श्राद्ध संकल्प से किया जाता है। इसके पश्चात पितृ आवाहन, तर्पण, श्राद्ध विधि, पिंडदान, पिंड अर्पण एवं विसर्जन, ब्राह्मण भोजन, दान-दक्षिणा तथा पितृ शांति प्रार्थना सहित निर्धारित धार्मिक विधियाँ सम्पन्न की जाती हैं।

Duration

1h – 2h

Best time

पूरा दिन

Starting price

₹5,100

लाभ

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सिद्धवट श्राद्ध पूजा एवं पिंडदान के माध्यम से पितरों की तृप्ति एवं सद्गति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • दिवंगत पूर्वजों की शांति एवं आध्यात्मिक कल्याण की मंगलकामना की जाती है।
  • पितृ दोष से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार एवं कुल के कल्याण, सुख एवं समृद्धि की मंगलकामना की जाती है।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का पवित्र अवसर प्राप्त होता है।
  • सनातन धार्मिक परंपरा के अनुसार पितृ धर्म एवं धार्मिक कर्तव्यों के श्रद्धापूर्वक पालन की भावना को बल मिलता है।

श्राद्ध पूजा

श्राद्ध सनातन धर्म की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसके माध्यम से दिवंगत पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनके प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं धार्मिक कर्तव्य व्यक्त किया जाता है। श्राद्ध कर्म में तर्पण एवं पिंडदान का विशेष महत्व माना गया है।

सिद्धवट, उज्जैन में पितरों के निमित्त श्राद्ध कर्म सम्पन्न करना धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु अपने पूर्वजों की वार्षिक श्राद्ध तिथि अथवा पितृ पक्ष जैसे अवसरों पर यहाँ धार्मिक विधि से श्राद्ध कर्म सम्पन्न कराते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धापूर्वक किए गए श्राद्ध एवं पिंडदान से पितरों की तृप्ति, सद्गति एवं शांति की मंगलकामना की जाती है। साथ ही परिवार के कल्याण एवं पूर्वजों के प्रति अपने धार्मिक दायित्व के निर्वहन की भावना व्यक्त की जाती है।

श्राद्ध कर्म का क्रम परिवार की परंपरा, श्राद्ध की तिथि तथा वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार निर्धारित किया जा सकता है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

श्राद्ध कर्म में भगवान श्रीहरि विष्णु का स्मरण तथा पितृ देवताओं का आवाहन एवं पूजन विशेष महत्व रखता है।

  • भगवान श्रीहरि विष्णु
  • पितृ देवता
  • वटवृक्ष की धार्मिक परंपरा

सिद्धवट का प्राचीन वटवृक्ष धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसके समीप पितरों के निमित्त तर्पण एवं श्राद्ध करने की परंपरा है। धार्मिक विश्वास के अनुसार यहाँ सम्पन्न पितृ कर्म के माध्यम से पूर्वजों की तृप्ति एवं शांति की मंगलकामना की जाती है।

श्राद्ध पूजा कब करानी चाहिए?

  • दिवंगत व्यक्ति की वार्षिक श्राद्ध तिथि पर।
  • पितृ पक्ष के दौरान।
  • सर्वपितृ अमावस्या पर।
  • अमावस्या के दिन।
  • परिवार की परंपरा के अनुसार निर्धारित श्राद्ध तिथि पर।
  • योग्य वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार।

सिद्धवट श्राद्ध पूजा के धार्मिक लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सिद्धवट में श्राद्ध एवं पिंडदान करने से निम्न मंगलकामनाएँ की जाती हैंः

  • पितरों की तृप्ति एवं सद्गति की प्रार्थना।
  • दिवंगत पूर्वजों की शांति की मंगलकामना।
  • पितृ दोष से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति की प्रार्थना।
  • परिवार एवं कुल के कल्याण की मंगलकामना।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर।
  • सनातन धार्मिक कर्तव्य के पालन की भावना।

आध्यात्मिक महत्व

श्राद्ध पूजा केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण करने और उनके प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं धार्मिक दायित्व व्यक्त करने की सनातन परंपरा है। पितरों के निमित्त तर्पण एवं पिंडदान करते समय परिवार अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान एवं स्मरण की भावना प्रकट करता है।

सिद्धवट, उज्जैन का पवित्र वातावरण इस धार्मिक कर्म को विशेष आध्यात्मिक संदर्भ प्रदान करता है। यहाँ श्रद्धालु अपने पूर्वजों की वार्षिक श्राद्ध तिथि पर पितृ शांति, तृप्ति एवं सद्गति की मंगलकामना से श्राद्ध कर्म सम्पन्न कराते हैं।

अनुभवी वैदिक आचार्य यजमान के नाम, गोत्र, दिवंगत व्यक्ति के नाम तथा यजमान से उनके संबंध के आधार पर संकल्प सहित निर्धारित श्राद्ध विधि सम्पन्न कराते हैं।

विशेष जानकारी

  • श्राद्ध कर्म के लिए यजमान को नए एवं स्वच्छ पारंपरिक वस्त्र धारण करने चाहिए।
  • श्राद्ध कर्म महिला एवं पुरुष दोनों द्वारा किया जा सकता है।
  • यजमान का निर्धारण परिवार की कुल परंपरा एवं वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार किया जाता है।
  • परिवार में पुरुष सदस्य उपलब्ध न होने की स्थिति में परिवार की परंपरा एवं योग्य वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार महिला यजमान भी संकल्प लेकर श्राद्ध कर्म सम्पन्न करा सकती हैं।
  • यजमान का नाम, गोत्र, दिवंगत व्यक्ति का नाम तथा यजमान से उनका संबंध संकल्प के लिए आवश्यक होता है।
  • वार्षिक श्राद्ध तिथि की जानकारी भी आवश्यक होती है।
  • पूजा की आवश्यक सामग्री एवं व्यवस्था चुनी गई सेवा के अनुसार उपलब्ध कराई जाती है।

सिद्धवट, उज्जैन में सम्पन्न यह श्राद्ध पूजा पितरों की तृप्ति, सद्गति, पितृ शांति एवं पितृ कृपा की मंगलकामना के साथ सनातन परंपरा एवं शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न किया जाने वाला एक पवित्र पितृ कर्म है।

पूजा स्थानउज्जैन

सिद्धवट मंदिर

सिद्धवट मंदिर

उज्जैन

पूर्वजों की श्रद्धा का पवित्र तीर्थ — जहाँ भक्ति, स्मरण और पितरों की शांति के लिए प्रार्थनाएँ एक साथ जुड़ती हैं

जहाँ श्रद्धा पितरों तक पहुँचती है

उज्जैन की पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित सिद्धवट मंदिर एक प्राचीन और श्रद्धेय धार्मिक स्थल है, जो विशेष रूप से पितृ कर्म, तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान की धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है।

श्रद्धालु इस पवित्र तीर्थ पर अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं तथा पितरों की शांति और आध्यात्मिक कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्धवट का पवित्र वटवृक्ष इस तीर्थ की प्रमुख धार्मिक पहचान है। क्षिप्रा नदी के पावन तट और प्राचीन वटवृक्ष के कारण यह स्थान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और धार्मिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए विशेष महत्व रखता है।

पौराणिक एवं धार्मिक महत्व

सिद्धवट उज्जैन के प्राचीन तीर्थ स्थलों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और इसे पितृ कर्म से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्रद्धापूर्वक माना जाता है।

हिंदू धार्मिक परंपरा में वटवृक्ष को अत्यंत पवित्र माना जाता है। सिद्धवट से जुड़ी विभिन्न धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, इस स्थान पर किए जाने वाले पितृ कर्म पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण की भावना को व्यक्त करते हैं।

सिद्धवट की पवित्रता और क्षिप्रा नदी के धार्मिक महत्व के कारण भारत के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां अपने पूर्वजों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए आते हैं।

सरल धार्मिक अनुष्ठान, गहरी श्रद्धा

सिद्धवट की धार्मिक परंपराएं श्रद्धा, स्मरण और पितरों के प्रति सम्मान पर केंद्रित हैं।

पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध, पितृ शांति संबंधी अनुष्ठान, मंत्र जाप, हवन और वैदिक विधियों के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

पितृ अनुष्ठान एवं पूजा

प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हैंः

  • पिंडदान — पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक अर्पण
  • श्राद्ध — पूर्वजों के सम्मान एवं स्मरण का पारंपरिक विधान
  • तर्पण — पितरों के निमित्त जल एवं धार्मिक अर्पण
  • पितृ शांति संबंधी अनुष्ठान
  • पितृ मोक्ष जाप एवं यज्ञ
  • भगवान विष्णु की पूजा
  • हवन एवं वैदिक मंत्रोच्चार
  • संकल्प एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान

विशेष धार्मिक अवसर

पितृपक्ष सिद्धवट में पितृ संबंधी धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवधि में श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करते हैं तथा उनकी शांति एवं सद्गति के लिए प्रार्थना करते हैं।

अमावस्या भी पितरों के स्मरण और उनके निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। श्रद्धालु इस अवसर पर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए पितृ शांति की मंगलकामना करते हैं।

सिद्धवट का आध्यात्मिक वातावरण

सिद्धवट का आध्यात्मिक वातावरण पवित्र क्षिप्रा नदी, प्राचीन वटवृक्ष और उज्जैन की धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।

वैदिक मंत्रोच्चार, पितृ अनुष्ठान, तर्पण और पूजा-अर्चना का वातावरण श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों का स्मरण करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का आध्यात्मिक अवसर प्रदान करता है।

कई श्रद्धालुओं के लिए सिद्धवट की यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, स्मरण और आध्यात्मिक चिंतन का भावपूर्ण अवसर होती है।

श्रद्धालु जिन आशीर्वादों की कामना करते हैं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्धवट पर पितृ संबंधी अनुष्ठान श्रद्धालु निम्नलिखित मंगलकामनाओं के साथ करते हैंः

  • पितरों की शांति एवं आध्यात्मिक कल्याण
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करना
  • पितृ दोष से संबंधित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शांति की प्रार्थना
  • परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना
  • परिवार पर पूर्वजों के आशीर्वाद की प्रार्थना
  • पितरों की सद्गति एवं मोक्ष के लिए प्रार्थना

इन लाभों को हिंदू धर्म की आस्था, धार्मिक परंपरा और मान्यताओं के संदर्भ में समझा जाना चाहिए।

स्थान एवं कैसे पहुंचे

सिद्धवट मंदिर उज्जैन, मध्य प्रदेश में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है और शहर के प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों से यहां पहुंचा जा सकता है।

निकटतम रेलवे स्टेशनः उज्जैन जंक्शन

निकटतम प्रमुख हवाई अड्डाः देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, इंदौर

मंदिर तक स्थानीय ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और अन्य स्थानीय परिवहन साधनों के माध्यम से पहुंचा जा सकता है।

पूजारीजी.कॉम के माध्यम से अपनी पूजा बुक करें

सिद्धवट मंदिर, उज्जैन में प्रामाणिक एवं सुव्यवस्थित पितृ और धार्मिक अनुष्ठान सेवाएं — श्रद्धा तथा पारंपरिक वैदिक विधि-विधान के साथ आयोजित।

  • पिंडदान एवं श्राद्ध पूजा
  • तर्पण एवं पितृ शांति अनुष्ठान
  • पितृ मोक्ष जाप एवं यज्ञ
  • भगवान विष्णु की पूजा
  • हवन एवं वैदिक मंत्रोच्चार
  • संकल्प एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान
  • अनुभवी वैदिक आचार्यों का मार्गदर्शन

प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा, पारंपरिक विधि-विधान और पवित्र आध्यात्मिक भावना के साथ आयोजित किया जाता है।

पूजारीजी.कॉम के माध्यम से सिद्धवट मंदिर, उज्जैन में अपनी पितृ पूजा बुक करें और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं स्मरण अर्पित करें।

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    1 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    1h

    उन्नत पैकेज में 1 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा सिद्धवट, उज्जैन में भगवान श्रीहरि विष्णु के स्मरण एवं पितृ संकल्प के साथ शास्त्रोक्त विधि-विधान से श्राद्ध पूजा एवं पिंडदान सम्पन्न कराया जाता है। यह पवित्र पितृ कर्म विशेष रूप से दिवंगत माता-पिता, पूर्वजों एवं परिवार के अन्य दिवंगत सदस्यों के निमित्त वार्षिक श्राद्ध अथवा निर्धारित श्राद्ध तिथि पर कराया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान के माध्यम से पितरों की तृप्ति, सद्गति, पितृ शांति एवं पितृ कृपा की मंगलकामना की जाती है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • भगवान श्रीहरि विष्णु का स्मरण
    • श्राद्ध संकल्प
    • पितृ आवाहन
    • तर्पण
    • शास्त्रोक्त श्राद्ध विधि
    • पिंडदान
    • पिंड अर्पण एवं विसर्जन
    • ब्राह्मण भोजन
    • दान-दक्षिणा
    • पितृ शांति प्रार्थना
    • आशीर्वाद

    विशेष सुविधाएं

    • सिद्धवट, उज्जैन में शास्त्रोक्त श्राद्ध विधि एवं पिंडदान सम्पन्न कराया जाएगा।
    • भगवान श्रीहरि विष्णु के स्मरण एवं पितृ संकल्प के साथ सम्पूर्ण श्राद्ध कर्म किया जाएगा।
    • वार्षिक श्राद्ध एवं प्रति वर्ष की श्राद्ध तिथि के निमित्त यह अनुष्ठान विशेष रूप से उपयुक्त है।
    • अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा सम्पूर्ण श्राद्ध विधि का मार्गदर्शन एवं संचालन किया जाएगा।
    • गया जी अथवा अन्य पितृ तीर्थों पर जाने में असमर्थ श्रद्धालु सिद्धवट, उज्जैन में अपनी सुविधा के अनुसार श्राद्ध कर्म सम्पन्न करा सकते हैं।
    • श्राद्ध कर्म परिवार की परंपरा एवं वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार सम्पन्न कराया जाएगा।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • दिवंगत व्यक्ति का नाम
    • यजमान से दिवंगत व्यक्ति का संबंध
    • वार्षिक श्राद्ध की तिथि

    श्राद्ध एवं पिंडदान सनातन परंपरा में दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पारिवारिक कर्तव्य की अभिव्यक्ति माना जाता है। सिद्धवट, उज्जैन में श्रद्धापूर्वक सम्पन्न यह पवित्र पितृ कर्म दिवंगत पूर्वजों की तृप्ति, सद्गति, पितृ शांति एवं परिवार के लिए पितृ कृपा की मंगलकामना के लिए किया जाने वाला महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹5,100₹7,10028% off

    2 वस्तुएँ शामिल

  • श्रेष्ठ

    2 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    3h

    श्रेष्ठ पैकेज में 2 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सिद्धवट, उज्जैन में भगवान श्रीहरि विष्णु के स्मरण एवं पितृ संकल्प के साथ पूर्ण शास्त्रोक्त विधि से श्राद्ध पूजा एवं पिंडदान सम्पन्न कराया जाता है। यह पैकेज विशेष रूप से वार्षिक श्राद्ध एवं निर्धारित श्राद्ध तिथि पर दिवंगत माता-पिता, पूर्वजों तथा परिवार के अन्य दिवंगत सदस्यों के निमित्त श्राद्ध कर्म करने के लिए उपयुक्त है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धापूर्वक सम्पन्न श्राद्ध एवं पिंडदान के माध्यम से पितरों की तृप्ति, सद्गति, पितृ शांति एवं पितृ कृपा की मंगलकामना की जाती है।

    श्राद्ध पूजा में शामिल विधियां

    • भगवान श्रीहरि विष्णु का स्मरण
    • श्राद्ध संकल्प
    • पितृ आवाहन
    • पितृ सूक्त पाठ
    • तर्पण
    • श्राद्ध विधि
    • पिंडदान
    • पिंड अर्पण एवं विसर्जन
    • ब्राह्मण पूजन
    • ब्राह्मण भोजन
    • दान-दक्षिणा
    • पितृ शांति प्रार्थना
    • आशीर्वाद

    विशेष सुविधाएं

    • सिद्धवट, उज्जैन में पूर्ण शास्त्रोक्त श्राद्ध विधि एवं पिंडदान
    • भगवान श्रीहरि विष्णु के स्मरण एवं पितृ संकल्प के साथ श्राद्ध कर्म
    • वार्षिक श्राद्ध एवं निर्धारित श्राद्ध तिथि के लिए विशेष रूप से उपयुक्त
    • अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा संपूर्ण श्राद्ध विधि का मार्गदर्शन एवं संचालन
    • यजमान को श्राद्ध कर्म की आवश्यक प्रक्रिया के संबंध में उचित मार्गदर्शन
    • विशेष परिस्थितियों में उपलब्ध सेवा के अनुसार यजमान के नाम एवं संकल्प से श्राद्ध कर्म सम्पन्न कराने की सुविधा

    विशेष जानकारी

    • श्राद्ध कर्म के लिए यजमान को नए एवं स्वच्छ पारंपरिक वस्त्र धारण करने चाहिए।
    • श्राद्ध कर्म महिला एवं पुरुष दोनों द्वारा किया जा सकता है। यजमान का निर्धारण कुल एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जाता है।
    • यदि परिवार में कोई पुरुष सदस्य उपलब्ध नहीं है, तो पारिवारिक परंपरा एवं वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार महिला यजमान भी संकल्प लेकर श्राद्ध कर्म सम्पन्न करा सकती हैं।
    • श्राद्ध कर्म के लिए यजमान का निर्धारण परिवार की परंपरा एवं आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार किया जाना उचित है।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • दिवंगत व्यक्ति का नाम
    • यजमान से दिवंगत व्यक्ति का संबंध
    • वार्षिक श्राद्ध की तिथि

    सिद्धवट, उज्जैन में श्रद्धा एवं विधि-विधानपूर्वक सम्पन्न किया गया यह श्राद्ध एवं पिंडदान दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता अर्पित करने का पवित्र माध्यम माना जाता है। इस धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से पितृ तृप्ति, सद्गति, पितृ शांति एवं परिवार पर पितरों की कृपा की मंगलकामना की जाती है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
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    2 वस्तुएँ शामिल

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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  3. पुजारीजी

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  4. पुजारीजी

    वैदिक विधि-विधान से पूजा संपन्न

    तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।

  5. पुजारीजी

    आपको प्रसाद व आशीर्वाद मिलता है

    संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।

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