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Pujari Ji

शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा

राम घाट, उज्जैन
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा

शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा शुक्र एवं सूर्य से संबंधित ज्योतिषीय प्रभावों की शांति के लिए किया जाने वाला विशेष वैदिक अनुष्ठान है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुक्र ग्रह सुख, प्रेम, दांपत्य जीवन, सौंदर्य, ऐश्वर्य एवं भौतिक समृद्धि से संबंधित माना जाता है, जबकि सूर्य को आत्मबल, स्वास्थ्य, सम्मान, प्रतिष्ठा एवं नेतृत्व का कारक माना जाता है।

जब जन्म कुंडली में इन ग्रहों से संबंधित प्रतिकूल स्थिति बनती है, तब उनके अशुभ प्रभावों की शांति एवं जीवन में शुभता की मंगलकामना के लिए यह अनुष्ठान कराया जा सकता है। रामघाट, उज्जैन में पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर संकल्प, पूजा, मंत्र जाप एवं हवन के साथ यह अनुष्ठान अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से सम्पन्न कराया जाता है।

यह पूजा विशेष रूप से सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन, स्वास्थ्य, आत्मबल, सम्मान, कार्यक्षेत्र एवं जीवन में स्थिरता की मंगलकामना से कराई जा सकती है।

Duration

3h – 4h

Best time

किसी भी समय

Starting price

₹15,000

लाभ

  • धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुक्र एवं सूर्य के अशुभ ग्रह प्रभावों की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम, मधुरता एवं आपसी सामंजस्य की मंगलकामना की जाती है।
  • सुख-सुविधा, ऐश्वर्य एवं आर्थिक स्थिरता की प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति एवं भावनात्मक संतुलन की मंगलकामना की जाती है।
  • आत्मबल, सम्मान एवं प्रतिष्ठा में शुभता तथा सकारात्मक वृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
  • कार्यक्षेत्र एवं व्यवसाय में स्थिरता, प्रगति एवं उन्नति की मंगलकामना की जाती है।
  • पारिवारिक सुख, शांति एवं जीवन में सकारात्मकता की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • शुक्र एवं सूर्य से संबंधित ज्योतिषीय बाधाओं के शमन एवं अनुकूल परिस्थितियों की प्राप्ति की मंगलकामना की जाती है।

शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा

शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा शुक्र एवं सूर्य से संबंधित ग्रह प्रभावों की शांति की मंगलकामना के लिए सम्पन्न कराया जाने वाला विशेष अनुष्ठान है। वैदिक ज्योतिष में शुक्र को सुख, प्रेम, दांपत्य, सौंदर्य, ऐश्वर्य एवं भौतिक सुख-सुविधाओं से संबंधित माना जाता है। सूर्य को आत्मबल, स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा, सम्मान, नेतृत्व एवं जीवनशक्ति का कारक माना जाता है।

जन्म कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति, भाव, राशि, दृष्टि तथा अन्य ग्रहों के साथ संबंधों के आधार पर उनके प्रभावों का ज्योतिषीय आकलन किया जाता है। प्रतिकूल ग्रह स्थिति होने पर ग्रह शांति की मंगलकामना से पूजा एवं मंत्र जाप कराया जा सकता है।

पवित्र रामघाट में क्षिप्रा नदी के तट पर संकल्प लेकर शुक्र एवं आदित्य देव की आराधना, मंत्र जाप, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से इस अनुष्ठान को श्रद्धापूर्वक सम्पन्न कराया जाता है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

इस पूजा में मुख्य रूप से निम्न देवताओं की आराधना की जाती हैः

  • शुक्र देव
  • सूर्य देव
  • भगवान गणेश
  • नवग्रह देवता

शुक्र देव की आराधना सुख, दांपत्य जीवन, प्रेम, सौंदर्य एवं समृद्धि की मंगलकामना से की जाती है। सूर्य देव की उपासना आत्मबल, स्वास्थ्य, सम्मान, प्रतिष्ठा एवं जीवनशक्ति की प्रार्थना से जुड़ी मानी जाती है।

दोनों ग्रहों की संयुक्त आराधना के माध्यम से उनके प्रतिकूल प्रभावों की शांति एवं जीवन में शुभता की मंगलकामना की जाती है।

मुहूर्त / यह पूजा कब करानी चाहिए?

  • शुक्रवार को शुक्र ग्रह की उपासना के लिए
  • रविवार को सूर्य देव की उपासना के लिए
  • शुक्र या सूर्य की महादशा अथवा अंतर्दशा के दौरान, ज्योतिषीय परामर्श के अनुसार
  • जन्म कुंडली में शुक्र या सूर्य की प्रतिकूल स्थिति होने पर
  • ग्रहों के प्रतिकूल गोचर के समय, योग्य ज्योतिषाचार्य के परामर्श से
  • किसी विशेष ज्योतिषीय स्थिति की शांति के लिए
  • शुभ मुहूर्त एवं यजमान के विशेष संकल्प के अनुसार

किन परिस्थितियों में यह पूजा करानी चाहिए?

  • शुक्र एवं सूर्य से संबंधित अशुभ ग्रह प्रभावों की शांति की मंगलकामना हेतु
  • वैवाहिक जीवन में सुख एवं सामंजस्य की प्रार्थना हेतु
  • सुख-सुविधा एवं ऐश्वर्य में शुभता की मंगलकामना से
  • आर्थिक स्थिरता एवं समृद्धि की प्रार्थना हेतु
  • स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति की मंगलकामना से
  • आत्मबल, सम्मान एवं प्रतिष्ठा की प्रार्थना हेतु
  • कार्य एवं व्यवसाय में उन्नति तथा स्थिरता की मंगलकामना से
  • जन्म कुंडली में शुक्र या सूर्य की विशेष स्थिति के कारण उत्पन्न बाधाओं की शांति हेतु

मुख्य मंत्र

ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः॥

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥

ॐ नमः शिवाय॥

मंत्र जाप की संख्या एवं अनुष्ठान की विधि यजमान के संकल्प तथा ज्योतिषीय आवश्यकता के अनुसार आचार्य द्वारा निर्धारित की जा सकती है।

शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा के लाभ

धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान के माध्यम से निम्न मंगलकामनाएँ की जाती हैंः

  • शुक्र एवं सूर्य के अशुभ ग्रह प्रभावों की शांति की प्रार्थना की जाती है।
  • वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम एवं सामंजस्य की मंगलकामना की जाती है।
  • सुख-सुविधा, ऐश्वर्य एवं आर्थिक स्थिरता के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • उत्तम स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति की मंगलकामना की जाती है।
  • आत्मबल, सम्मान एवं प्रतिष्ठा में शुभता की प्रार्थना की जाती है।
  • कार्यक्षेत्र एवं व्यवसाय में स्थिरता और उन्नति की मंगलकामना की जाती है।
  • पारिवारिक सुख एवं जीवन में सकारात्मकता की प्रार्थना की जाती है।
  • शुक्र एवं सूर्य से संबंधित ज्योतिषीय बाधाओं की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।

आध्यात्मिक महत्व

पवित्र रामघाट, उज्जैन क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। धार्मिक परंपरा में पवित्र नदी के तट पर संकल्प, देव आराधना, मंत्र जाप एवं हवन को विशेष श्रद्धा के साथ सम्पन्न किया जाता है।

शुक्र एवं सूर्य की आराधना जीवन के भौतिक एवं आध्यात्मिक पक्षों में संतुलन, सुख, आत्मबल, स्वास्थ्य, सम्मान एवं शुभता की मंगलकामना से जुड़ी मानी जाती है। इस अनुष्ठान में यजमान के नाम एवं गोत्र से संकल्प लेकर देव पूजन, मंत्र जाप, हवन एवं पूर्णाहुति सम्पन्न कराई जाती है।

विशेष जानकारी

  • रामघाट, उज्जैन में अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।
  • सम्पूर्ण पूजा शास्त्रोक्त वैदिक विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के अनुसार सम्पन्न की जाती है।
  • यजमान के नाम एवं गोत्र के साथ वैदिक संकल्प लिया जाता है।
  • आवश्यकता होने पर जन्म कुंडली के आधार पर पूजा की विधि निर्धारित की जा सकती है।
  • विशेष मनोकामना को यजमान के संकल्प में सम्मिलित किया जा सकता है।
  • पूजा के लिए आवश्यक सम्पूर्ण पूजन सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।
  • यजमान की अनुपस्थिति में उनके नाम, गोत्र एवं संकल्प के आधार पर उनकी ओर से अनुष्ठान कराया जा सकता है।

शुक्र एवं आदित्य देव की कृपा से सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, सम्मान, वैवाहिक सुख एवं जीवन में शुभता की मंगलकामना से यह विशेष शांति अनुष्ठान श्रद्धापूर्वक एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ सम्पन्न कराया जाता है।

पूजा स्थानउज्जैन

राम घाट

राम घाट

उज्जैन

पवित्र क्षिप्रा नदी के दिव्य तट पर स्थित राम घाट उज्जैन के सबसे प्रमुख, प्राचीन एवं पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है। यह घाट सनातन धर्म के श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत आस्था, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल के दौरान इस पवित्र क्षेत्र में आगमन किया था, जिसके कारण इस घाट का नाम राम घाट पड़ा।

उज्जैन आने वाले अधिकांश श्रद्धालु सबसे पहले राम घाट पर स्नान, तर्पण एवं पूजा-अर्चना कर अपनी धार्मिक यात्रा का शुभारंभ करते हैं। क्षिप्रा नदी का यह पवित्र तट मोक्ष, पितृ तृप्ति, ग्रह शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

राम घाट का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्मग्रंथों एवं पुराणों में क्षिप्रा नदी को अत्यंत पवित्र एवं मोक्षदायिनी बताया गया है। राम घाट को उज्जैन के प्रमुख तीर्थस्थलों में विशेष स्थान प्राप्त है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां स्नान, दान, तर्पण एवं पूजा करने से—

  • पितरों को तृप्ति प्राप्त होती है।
  • पितृ दोष में शांति मिलती है।
  • ग्रह बाधाओं का निवारण होता है।
  • जीवन के पापों का क्षय होता है।
  • आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।
  • सुख, समृद्धि एवं मानसिक शांति प्राप्त होती है।
  • मोक्ष मार्ग की प्राप्ति का पुण्य मिलता है।

विशेष रूप से अमावस्या, पूर्णिमा, श्राद्ध पक्ष, सोमवती अमावस्या एवं सिंहस्थ महापर्व के दौरान राम घाट का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

राम घाट में होने वाले प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान

राम घाट पर प्रतिदिन अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान सम्पन्न कराए जाते हैं।

प्रमुख पूजाएं एवं अनुष्ठान

  • पितृ तर्पण
  • पिंडदान
  • नारायणबली पूजा
  • त्रिपिंडी श्राद्ध
  • कालसर्प दोष शांति पूजा
  • नवग्रह शांति पूजा
  • महामृत्युंजय जाप
  • रुद्राभिषेक
  • क्षिप्रा दीपदान
  • संकल्प पूजा
  • ग्रह शांति हवन
  • पूर्वज मोक्ष अनुष्ठान
  • विशेष अमावस्या तर्पण

श्राद्ध पक्ष एवं अमावस्या के दिनों में यहां विशेष रूप से हजारों श्रद्धालु अपने पितरों की शांति हेतु धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं।

राम घाट के प्रमुख पवित्र स्थल

मुख्य स्नान घाट

क्षिप्रा नदी के किनारे बना मुख्य घाट श्रद्धालुओं के पवित्र स्नान एवं धार्मिक अनुष्ठानों का प्रमुख केंद्र है। यहां स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

दीपदान स्थल

सायंकाल के समय श्रद्धालु क्षिप्रा नदी में दीप प्रवाहित कर सुख, समृद्धि एवं पितृ कृपा की कामना करते हैं। यह दृश्य अत्यंत मनोहारी एवं आध्यात्मिक माना जाता है।

तर्पण एवं श्राद्ध क्षेत्र

राम घाट पर विशेष स्थान निर्धारित हैं जहां आचार्यों के मार्गदर्शन में पितृ तर्पण एवं पिंडदान अनुष्ठान सम्पन्न कराए जाते हैं।

यज्ञ एवं हवन स्थल

यहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विभिन्न ग्रह शांति एवं धार्मिक यज्ञ सम्पन्न होते हैं।

राम घाट में पूजा करवाने के लाभ

ऐसी मान्यता है कि राम घाट पर विधिपूर्वक पूजा एवं अनुष्ठान कराने से श्रद्धालुओं को अनेक आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं—

  • पितृ दोष से मुक्ति
  • पूर्वजों की कृपा प्राप्ति
  • ग्रह दोषों की शांति
  • मानसिक तनाव में कमी
  • परिवार में सुख एवं समृद्धि
  • स्वास्थ्य एवं आयु में वृद्धि
  • नकारात्मक ऊर्जा का नाश
  • व्यापार एवं कार्यक्षेत्र में उन्नति
  • आध्यात्मिक जागृति
  • मोक्ष प्राप्ति का पुण्य

विशेष रूप से पितृ दोष, कालसर्प दोष एवं पूर्वजों की अशांति से पीड़ित श्रद्धालुओं के लिए राम घाट अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

राम घाट का आध्यात्मिक वातावरण

राम घाट का वातावरण अत्यंत शांत, पवित्र एवं भक्तिमय रहता है। प्रातःकालीन स्नान, वैदिक मंत्रोच्चार, संध्या आरती एवं दीपदान का दृश्य श्रद्धालुओं को दिव्य आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है।

सायंकाल होने वाली क्षिप्रा महाआरती विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं।

विशेष अवसरों पर यहां अत्यधिक भीड़ रहती है—

  • सिंहस्थ कुंभ
  • सोमवती अमावस्या
  • श्राद्ध पक्ष
  • पूर्णिमा
  • अमावस्या
  • श्रावण मास
  • महाशिवरात्रि
  • कार्तिक पूर्णिमा

राम घाट कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग

निकटतम हवाई अड्डा देवी अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा, इंदौर है, जो उज्जैन से लगभग पचपन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

रेल मार्ग

उज्जैन जंक्शन देश के प्रमुख नगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, वाराणसी, अहमदाबाद एवं भोपाल से सीधे जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग

उज्जैन राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों से सुगमता से जुड़ा हुआ है। इंदौर, भोपाल, ओंकारेश्वर एवं अन्य प्रमुख नगरों से नियमित बस एवं किराये के वाहन उपलब्ध रहते हैं।

उज्जैन नगर के किसी भी भाग से राम घाट तक स्थानीय परिवहन आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

दर्शन एवं अनुष्ठान हेतु सर्वोत्तम समय

राम घाट वर्षभर दर्शन एवं धार्मिक अनुष्ठानों के लिए खुला रहता है, किन्तु निम्न अवसर विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं—

  • अमावस्या
  • पूर्णिमा
  • श्राद्ध पक्ष
  • सोमवती अमावस्या
  • कार्तिक मास
  • श्रावण मास
  • महाशिवरात्रि

प्रातःकालीन समय स्नान, संकल्प एवं पूजा-अनुष्ठान के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

निष्कर्ष: राम घाट केवल एक घाट नहीं, बल्कि श्रद्धा, पितृ तृप्ति, मोक्ष एवं आध्यात्मिक साधना का महान केंद्र है। पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित यह दिव्य तीर्थ श्रद्धालुओं को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति एवं पूर्वजों का आशीर्वाद प्रदान करने वाला अत्यंत पुण्यदायी स्थल माना जाता है। यहां सम्पन्न होने वाले वैदिक अनुष्ठान जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले माने जाते हैं।

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    3 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    2h

    पावन रामघाट, उज्जैन में पवित्र क्षिप्रा नदी के तट स्थित मंदिर परिसर में शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा विधि-विधान एवं श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाएगी। इस विशेष अनुष्ठान का उद्देश्य शुक्र एवं सूर्य (आदित्य) ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति तथा वैवाहिक सुख, स्वास्थ्य, सम्मान, सुख-समृद्धि एवं विशेष मनोकामना की मंगलकामना करना है। इस अनुष्ठान में 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा लगभग 3 घंटे तक पूजा, मंत्र जाप एवं हवन संपन्न कराया जाएगा।

    पूजा में शामिल विधियां

    • गणपति पूजन
    • पुण्याहवाचन एवं संकल्प
    • कलश स्थापना एवं पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • शुक्र ग्रह मंत्र जाप — 16000 जाप
    • सूर्य ग्रह मंत्र जाप — 7000जाप
    • नवग्रह हवन
    • महामृत्युंजय हवन
    • शुक्र आदित्य हवन
    • पूर्णाहुति
    • आशीर्वचन
    • आरती एवं पुष्पांजलि

    विशेष सुविधाएं

    • पावन रामघाट, उज्जैन के मंदिर परिसर में शास्त्रोक्त विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई जाएगी।
    • शुक्र एवं आदित्य ग्रह के निर्धारित मंत्रों का विधिपूर्वक जाप कराया जाएगा।
    • नवग्रह हवन, महामृत्युंजय हवन एवं शुक्र आदित्य हवन संपन्न कराया जाएगा।
    • यजमान के नाम एवं गोत्र के अनुसार विशेष संकल्प लिया जाएगा।
    • पूजा एवं हवन की आवश्यक व्यवस्था अनुभवी आचार्यों द्वारा की जाएगी।
    • पूजा की तिथि, समय एवं आवश्यक निर्देश पहले से साझा किए जाएंगे।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • विशेष मनोकामना या संकल्प, यदि कोई हो

    पावन रामघाट, उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर संपन्न यह शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा शुक्र एवं सूर्य ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति तथा सुख, स्वास्थ्य, वैवाहिक सौभाग्य, सम्मान, समृद्धि एवं विशेष मनोकामना की मंगलकामना से की जाती है। धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह अनुष्ठान ग्रह शांति एवं जीवन में शुभता की प्रार्थना के लिए श्रद्धापूर्वक संपन्न कराया जाता है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹15,000₹18,00017% off

    2 वस्तुएँ शामिल

  • श्रेष्ठ

    9 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    3h

    पावन रामघाट, उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित मंदिर परिसर में 9 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाएगी। यह विशेष अनुष्ठान शुक्र एवं सूर्य से संबंधित ग्रह प्रभावों की शांति तथा वैवाहिक सुख, स्वास्थ्य, सम्मान, सुख-समृद्धि एवं विशेष मनोकामना की मंगलकामना से किया जाता है। इस अनुष्ठान में निर्धारित संख्या में शुक्र एवं सूर्य मंत्र जाप के साथ नवग्रह हवन, महामृत्युंजय हवन एवं शुक्र आदित्य हवन संपन्न कराया जाएगा।

    पूजा में शामिल विधियां

    • गणपति पूजा
    • पुण्याहवाचन एवं संकल्प
    • कलश स्थापना एवं पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • सूर्य देव का विशेष पूजन
    • शुक्र देव का विशेष पूजन
    • शुक्र ग्रह मंत्र जाप — 16,000 जाप
    • सूर्य ग्रह मंत्र जाप — 7,000 जाप
    • नवग्रह हवन
    • महामृत्युंजय हवन
    • शुक्र आदित्य हवन
    • विशेष आहुति
    • पूर्णाहुति
    • आशीर्वचन
    • आरती एवं पुष्पांजलि

    विशेष सुविधाएं

    • पावन रामघाट, उज्जैन के मंदिर परिसर में वैदिक एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान से अनुष्ठान
    • 9 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा निर्धारित संख्या में शुक्र एवं सूर्य मंत्र जाप
    • नवग्रह हवन, महामृत्युंजय हवन एवं शुक्र आदित्य हवन
    • यजमान के नाम एवं संकल्पानुसार पूजा
    • अनुष्ठान की आवश्यक व्यवस्था

    आवश्यक जानकारी

    • जातक का नाम
    • गोत्र, यदि ज्ञात हो
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • पूजा का विशेष उद्देश्य या मनोकामना

    पूजा के समय यजमान के लिए स्वच्छ एवं पारंपरिक वस्त्र धारण करना तथा सात्विक वातावरण बनाए रखना उचित रहेगा। स्वयं उपस्थित होने की स्थिति में निर्धारित समय पर रामघाट, उज्जैन पहुँचना आवश्यक होगा।

    पावन रामघाट, उज्जैन में संपन्न यह विस्तृत शुक्र आदित्य संधि शांति अनुष्ठान शुक्र एवं सूर्य से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति तथा स्वास्थ्य, वैवाहिक सुख, सम्मान, सुख-समृद्धि एवं विशेष मनोकामना की मंगलकामना के लिए श्रद्धापूर्वक किया जाता है। नवग्रह पूजन, मंत्र जाप, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से जीवन में शांति, संतुलन एवं मंगल की प्रार्थना की जाती है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹41,000₹45,0009% off

    2 वस्तुएँ शामिल

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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