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Pujari Ji

शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा

मृत्युंजय महादेव मंदिर, वाराणसी
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा

शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा शुक्र एवं आदित्य अर्थात सूर्य से संबंधित ज्योतिषीय प्रभावों की शांति के लिए सम्पन्न किया जाने वाला विशेष ग्रह शांति अनुष्ठान है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुक्र सुख-सुविधा, वैवाहिक जीवन, प्रेम, सौंदर्य एवं समृद्धि से संबंधित माना जाता है, जबकि सूर्य आत्मबल, स्वास्थ्य, सम्मान, प्रतिष्ठा एवं नेतृत्व का कारक माना जाता है।

इन ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति अथवा अशुभ प्रभावों की शांति, ग्रहों की अनुकूलता तथा जीवन में सुख एवं शुभता की मंगलकामना से यह पूजा कराई जाती है। महामृत्युंजय मंदिर, वाराणसी में भगवान शिव के पावन सान्निध्य में सम्पन्न होने के कारण यह अनुष्ठान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।

Duration

2h – 3h

Best time

किसी भी समय

Starting price

₹18,000

लाभ

  • धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुक्र एवं सूर्य से संबंधित ग्रह प्रभावों की शांति की प्रार्थना की जाती है।
  • वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम, मधुरता एवं आपसी सामंजस्य की मंगलकामना की जाती है।
  • स्वास्थ्य, आत्मबल एवं मानसिक शांति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • सम्मान, प्रतिष्ठा एवं आत्मविश्वास की प्राप्ति तथा जीवन में शुभता की मंगलकामना की जाती है।
  • सुख-सुविधा, समृद्धि एवं पारिवारिक कल्याण की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • कार्य एवं व्यवसाय में स्थिरता, प्रगति एवं उन्नति के लिए मंगलकामना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति, सौहार्द एवं आपसी सामंजस्य की प्रार्थना की जाती है।
  • भगवान महामृत्युंजय महादेव की कृपा, आध्यात्मिक कल्याण एवं जीवन में शुभता की मंगलकामना की जाती है।

शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा

महामृत्युंजय मंदिर, वाराणसी भगवान शिव की आराधना का एक श्रद्धेय धार्मिक स्थल है। काशी की पावन भूमि पर भगवान महामृत्युंजय महादेव की उपासना के साथ ग्रह शांति अनुष्ठान सम्पन्न करना धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।

ज्योतिषीय परंपरा में शुक्र को भौतिक सुख, वैवाहिक संबंध, प्रेम, कला, सौंदर्य एवं ऐश्वर्य से तथा सूर्य को आत्मबल, स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा, अधिकार एवं नेतृत्व से संबंधित माना गया है। जन्म कुंडली में इन ग्रहों से संबंधित प्रतिकूल स्थितियों के होने पर उनके अशुभ प्रभावों की शांति की प्रार्थना के लिए शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा कराई जा सकती है।

इस अनुष्ठान में ग्रह देवताओं की आराधना, मंत्र जाप, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से जीवन में सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि, सम्मान एवं पारिवारिक शांति की मंगलकामना की जाती है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

इस पूजा में निम्न देवताओं की विधिपूर्वक आराधना की जाती हैः

  • भगवान महामृत्युंजय महादेव
  • सूर्य देव
  • शुक्र देव
  • भगवान गणेश
  • नवग्रह देवता

भगवान शिव की आराधना आध्यात्मिक शांति एवं कल्याण की प्रार्थना से जुड़ी है। सूर्य देव को आत्मबल, स्वास्थ्य, तेज, सम्मान एवं प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है। शुक्र देव को सुख, प्रेम, वैवाहिक जीवन, सौंदर्य एवं समृद्धि से संबंधित माना जाता है। इसलिए दोनों ग्रहों की उपासना उनके शुभ प्रभावों की मंगलकामना के लिए की जाती है।

मुहूर्त / यह पूजा कब करानी चाहिए?

  • शुक्रवार को शुक्र देव की उपासना के अवसर पर
  • रविवार को सूर्य देव की उपासना के अवसर पर
  • शुक्र या सूर्य से संबंधित ज्योतिषीय प्रतिकूलता होने पर
  • शुक्र महादशा या अंतर्दशा के दौरान, ज्योतिषीय परामर्श के अनुसार
  • सूर्य महादशा या अंतर्दशा के दौरान, ज्योतिषीय परामर्श के अनुसार
  • शुभ तिथि एवं शुभ नक्षत्र में
  • अनुभवी ज्योतिषाचार्य के परामर्श के अनुसार

किन परिस्थितियों में यह पूजा करानी चाहिए?

  • जन्म कुंडली में शुक्र से संबंधित अशुभ ग्रह प्रभाव होने पर
  • जन्म कुंडली में सूर्य से संबंधित प्रतिकूल स्थिति होने पर
  • वैवाहिक जीवन में सुख एवं सामंजस्य की मंगलकामना से
  • सुख-सुविधा एवं समृद्धि की प्रार्थना के लिए
  • स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति की मंगलकामना से
  • आत्मबल, सम्मान एवं प्रतिष्ठा के लिए प्रार्थना हेतु
  • कार्य एवं व्यवसाय में उन्नति की मंगलकामना से
  • पारिवारिक सुख, शांति एवं समृद्धि की प्रार्थना के लिए
  • शुक्र एवं सूर्य से संबंधित ग्रह प्रभावों की शांति हेतु

मुख्य मंत्र

ॐ शुं शुक्राय नमः॥

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

पूजा के लाभ

धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान के माध्यम से निम्न मंगलकामनाएँ की जाती हैंः

  • शुक्र एवं सूर्य से संबंधित ग्रह प्रभावों की शांति की प्रार्थना की जाती है।
  • वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम एवं सामंजस्य की मंगलकामना की जाती है।
  • स्वास्थ्य, आत्मबल एवं मानसिक शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • सम्मान, प्रतिष्ठा एवं आत्मविश्वास की मंगलकामना की जाती है।
  • सुख-सुविधा, समृद्धि एवं पारिवारिक कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
  • कार्य एवं व्यवसाय में स्थिरता एवं उन्नति की मंगलकामना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति एवं सौहार्द की प्रार्थना की जाती है।
  • भगवान महामृत्युंजय महादेव की कृपा एवं आध्यात्मिक कल्याण की मंगलकामना की जाती है।

आध्यात्मिक महत्व

महामृत्युंजय मंदिर, वाराणसी भगवान शिव की आराधना से जुड़ा पवित्र धार्मिक स्थल है। काशी की आध्यात्मिक भूमि पर भगवान महामृत्युंजय महादेव के सान्निध्य में ग्रह शांति अनुष्ठान सम्पन्न करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व रखता है।

शुक्र एवं सूर्य की आराधना के माध्यम से श्रद्धालु सुख, स्वास्थ्य, सम्मान, समृद्धि एवं आत्मबल की मंगलकामना करते हैं। मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति अनुष्ठान के धार्मिक पक्ष को पूर्णता प्रदान करते हैं तथा श्रद्धालु अपने संकल्प एवं श्रद्धा के साथ भगवान से कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

विशेष जानकारी

  • अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।
  • यजमान के नाम एवं गोत्र से वैदिक संकल्प लिया जाता है।
  • संकल्प के लिए जन्म तिथि, जन्म स्थान एवं जन्म समय की जानकारी ली जा सकती है।
  • विशेष ज्योतिषीय स्थिति होने पर जन्म कुंडली के आधार पर अनुष्ठान का स्वरूप निर्धारित किया जा सकता है।
  • यजमान की विशेष मनोकामना को संकल्प में सम्मिलित किया जा सकता है।
  • आवश्यक सम्पूर्ण पूजन सामग्री की व्यवस्था की जाती है।
  • यजमान के उपस्थित न हो पाने पर उनके नाम एवं संकल्प के आधार पर मंदिर परिसर में उनकी ओर से अनुष्ठान कराया जा सकता है।

शुक्र एवं आदित्य देव की कृपा तथा मृत्युंजय महादेव के आशीर्वाद से सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि, सम्मान, पारिवारिक शांति एवं विशेष मनोकामना की पूर्ति की मंगलकामना से यह विशेष शांति अनुष्ठान श्रद्धापूर्वक एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ सम्पन्न कराया जाता है।

पूजा स्थानवाराणसी

मृत्युंजय महादेव मंदिर

मृत्युंजय महादेव मंदिर

वाराणसी

महा मृत्युंजय मंदिर वाराणसी भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन और अत्यंत पवित्र स्थल है। इस मंदिर का विशेष महत्व आयु, स्वास्थ्य और अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए माना जाता है। यहाँ नियमित रूप से महा मृत्युंजय जाप, रुद्राभिषेक और हवन जैसे शक्तिशाली अनुष्ठान किए जाते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है और यहाँ स्थित पवित्र कुंड का जल औषधीय गुणों से भरपूर है। भक्त यहाँ जीवन की बाधाओं, रोगों और भय से मुक्ति पाने के लिए आते हैं। यही कारण है कि यह मंदिर आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

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जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।

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  • उन्नत

    3 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    2h 30m

    पावन महामृत्युंजय मंदिर, वाराणसी के मंदिर परिसर में 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाएगी। यह विशेष अनुष्ठान शुक्र एवं सूर्य ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति तथा वैवाहिक सुख, स्वास्थ्य, सम्मान, सुख-समृद्धि एवं विशेष मनोकामना की मंगलकामना से किया जाता है। इसमें शुक्र ग्रह के 2,000 मंत्र जाप, सूर्य ग्रह के 700 मंत्र जाप तथा नवग्रह, महामृत्युंजय एवं शुक्र आदित्य हवन सम्मिलित हैं।

    पूजा में शामिल विधियां

    • गणपति पूजा
    • पुण्याहवाचन एवं संकल्प
    • कलश स्थापना एवं पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • सूर्य देव का विशेष पूजन
    • शुक्र देव का विशेष पूजन
    • शुक्र ग्रह मंत्र जाप — 16000 जाप
    • सूर्य ग्रह मंत्र जाप — 7000 जाप
    • नवग्रह हवन
    • महामृत्युंजय हवन
    • शुक्र आदित्य हवन
    • विशेष आहुति
    • पूर्णाहुति
    • आशीर्वचन
    • आरती एवं पुष्पांजलि

    विशेष सुविधाएं

    • पावन महामृत्युंजय मंदिर, वाराणसी के मंदिर परिसर में वैदिक विधि-विधान से पूजा
    • 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा निर्धारित संख्या में शुक्र एवं सूर्य मंत्र जाप
    • नवग्रह हवन, महामृत्युंजय हवन एवं शुक्र आदित्य हवन
    • पूजा एवं अनुष्ठान की आवश्यक व्यवस्था
    • यजमान के संकल्प के अनुसार अनुष्ठान का संपादन

    आवश्यक जानकारी

    • जातक का नाम
    • गोत्र, यदि ज्ञात हो
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • पूजा का विशेष उद्देश्य या मनोकामना

    महामृत्युंजय मंदिर, वाराणसी में संपन्न यह विशेष शुक्र आदित्य संधि शांति अनुष्ठान शुक्र एवं सूर्य ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति तथा सुख, स्वास्थ्य, वैवाहिक सौहार्द, समृद्धि, सम्मान एवं विशेष मनोकामना के लिए श्रद्धापूर्वक किया जाता है। ग्रह पूजन, निर्धारित मंत्र जाप, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान और परिवार के मंगल एवं कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹18,000₹21,00014% off

    2 वस्तुएँ शामिल

  • श्रेष्ठ

    9 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    3h

    पावन महामृत्युंजय मंदिर, वाराणसी के मंदिर परिसर में 9 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शुक्र आदित्य संधि शांति पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से संपन्न कराई जाएगी। इस विशेष अनुष्ठान में शुक्र ग्रह के 16000 मंत्र जाप एवं सूर्य ग्रह के 7,000 मंत्र जाप के साथ नवग्रह हवन, महामृत्युंजय हवन तथा शुक्र आदित्य हवन किया जाएगा। यह अनुष्ठान शुक्र एवं सूर्य से संबंधित ग्रह प्रभावों की शांति तथा सुख, स्वास्थ्य, वैवाहिक सुख, समृद्धि, सम्मान एवं विशेष मनोकामना की मंगलकामना से कराया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • गणपति पूजा
    • पुण्याहवाचन एवं संकल्प
    • कलश स्थापना एवं पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • सूर्य देव का विशेष पूजन
    • शुक्र देव का विशेष पूजन
    • वैदिक शुक्र ग्रह मंत्र जाप — 16,000 जाप
    • वैदिक सूर्य ग्रह मंत्र जाप — 7,000 जाप
    • नवग्रह हवन
    • महामृत्युंजय हवन
    • शुक्र आदित्य हवन
    • विशेष आहुति
    • पूर्णाहुति
    • आशीर्वचन
    • आरती एवं पुष्पांजलि

    शामिल सेवाएं

    • 9 अनुभवी वैदिक आचार्य
    • सभी पूजा सामग्री
    • ब्राह्मण दक्षिणा
    • मंदिर परिसर में पूजा व्यवस्था
    • निर्धारित मंत्र जाप
    • नवग्रह एवं ग्रह शांति अनुष्ठान
    • हवन एवं पूर्णाहुति
    • पूजा के पश्चात आवश्यक पूजा विवरण

    विशेष सुविधाएं

    • महामृत्युंजय मंदिर, वाराणसी के पवित्र मंदिर परिसर में पूजा
    • 9 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा निर्धारित संख्या में शुक्र एवं सूर्य मंत्र जाप
    • नवग्रह हवन, महामृत्युंजय हवन एवं शुक्र आदित्य हवन
    • पूजा एवं अनुष्ठान की आवश्यक व्यवस्था
    • निर्धारित तिथि एवं समय के अनुसार अनुष्ठान का आयोजन
    • यजमान के नाम एवं संकल्प के अनुसार पूजा

    आवश्यक जानकारी

    • जातक का नाम
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • गोत्र, यदि ज्ञात हो
    • विशेष उद्देश्य या मनोकामना, यदि कोई हो

    महामृत्युंजय मंदिर, वाराणसी में संपन्न यह विशेष शुक्र आदित्य संधि शांति अनुष्ठान शुक्र एवं सूर्य ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति तथा जीवन में सुख, स्वास्थ्य, वैवाहिक सुख, समृद्धि, सम्मान एवं मंगल की कामना से श्रद्धापूर्वक किया जाता है। नवग्रह पूजन, निर्धारित मंत्र जाप, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में शांति, संतुलन एवं कल्याण की मंगलकामना की जाती है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹41,000₹45,0009% off

    2 वस्तुएँ शामिल

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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