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Pujari Ji

शुक्र ग्रह शांति पूजा

मार्कंडेय महादेव, वाराणसी
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
शुक्र ग्रह शांति पूजा

शुक्र ग्रह शांति पूजा शुक्र ग्रह से संबंधित ज्योतिषीय प्रभावों की शांति के लिए सम्पन्न की जाती है। वैदिक ज्योतिष में शुक्र को प्रेम, विवाह, दांपत्य सुख, सौंदर्य, कला, ऐश्वर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक माना गया है। जन्मकुंडली में शुक्र के पीड़ित या प्रतिकूल होने पर श्रद्धालु ग्रह शांति और जीवन में शुभता की मंगलकामना से यह अनुष्ठान कराते हैं।

मार्कण्डेय महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन एवं पूजनीय तीर्थ माना जाता है। इस पावन स्थल पर भगवान मार्कण्डेय महादेव की आराधना के साथ शुक्र देव तथा अन्य संबंधित देवताओं की पूजा करके सुख, समृद्धि, दांपत्य सौहार्द और आध्यात्मिक कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

Duration

3h – 4h

Best time

सुबह

Starting price

₹9,100

लाभ

  • शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति तथा जीवन में शुभता और संतुलन की मंगलकामना की जाती है।
  • विवाह एवं दांपत्य जीवन में प्रेम, मधुरता, सौहार्द एवं आपसी सामंजस्य की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • धन, समृद्धि, सुख-सुविधाओं एवं आर्थिक स्थिरता की मंगलकामना की जाती है।
  • कला, रचनात्मकता एवं सौंदर्य से संबंधित क्षेत्रों में शुभता, प्रतिभा एवं अनुकूल अवसरों की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • मानसिक शांति, प्रसन्नता एवं सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार में सुख, सौहार्द, शांति एवं समृद्धि के वातावरण की मंगलकामना की जाती है।
  • भगवान मार्कण्डेय महादेव, शुक्र देव, माता महालक्ष्मी एवं भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा, आशीर्वाद एवं संरक्षण की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।

शुक्र ग्रह शांति पूजा

मार्कण्डेय महादेव मंदिर, वाराणसी भगवान शिव के मार्कण्डेय स्वरूप को समर्पित एक प्राचीन एवं धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण मंदिर माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान मार्कण्डेय महादेव की आराधना आयु, आरोग्य, आध्यात्मिक शक्ति तथा संकटों से संरक्षण की मंगलकामना के लिए की जाती है।

वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को प्रेम, विवाह, दांपत्य जीवन, सौंदर्य, कला, आकर्षण, धन, ऐश्वर्य और सुख-सुविधाओं का कारक माना गया है। जब जन्मकुंडली में शुक्र प्रतिकूल, पीड़ित अथवा दुर्बल स्थिति में हो, तब ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार विवाह, दांपत्य संबंध, आर्थिक स्थिति तथा सुख-सुविधाओं से संबंधित चुनौतियों की संभावना मानी जाती है। ऐसे ग्रह प्रभावों की शांति के लिए शुक्र ग्रह शांति पूजा सम्पन्न की जाती है।

इस अनुष्ठान में भगवान गणेश का पूजन, संकल्प, शुक्र देव की आराधना, नवग्रह पूजन, भगवान शिव की उपासना, वैदिक मंत्र जाप, हवन तथा पूर्णाहुति आदि विधियाँ सम्मिलित की जा सकती हैं।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

इस पूजा में मुख्य रूप से निम्न देवताओं की आराधना की जाती हैः

  • शुक्र देव
  • भगवान मार्कण्डेय महादेव
  • माता महालक्ष्मी
  • भगवान श्रीहरि विष्णु
  • नवग्रह देवता

धार्मिक मान्यता के अनुसार शुक्र देव की आराधना से प्रेम, दांपत्य सुख, सौंदर्य, कला, ऐश्वर्य और समृद्धि की मंगलकामना की जाती है। माता महालक्ष्मी की उपासना धन एवं समृद्धि के लिए तथा भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना संरक्षण, संतुलन और आध्यात्मिक कल्याण के लिए की जाती है।

शुभ मुहूर्त / यह पूजा कब करानी चाहिए?

  • शुक्रवार को शुभ मुहूर्त में
  • शुक्र महादशा अथवा अंतर्दशा के दौरान
  • शुक्र के प्रतिकूल गोचर के समय
  • जन्मकुंडली में शुक्र के पीड़ित या दुर्बल होने पर
  • भरणी, पूर्वाफाल्गुनी अथवा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में
  • योग्य ज्योतिषाचार्य के परामर्शानुसार
  • विवाह, दांपत्य सुख एवं आर्थिक समृद्धि की मंगलकामना से किसी शुभ मुहूर्त में

किन परिस्थितियों में यह पूजा करानी चाहिए?

  • जन्मकुंडली में शुक्र से संबंधित दोष या प्रतिकूल योग होने पर
  • विवाह में विलंब या बार-बार बाधाएँ आने पर
  • दांपत्य जीवन में तनाव एवं मतभेद होने पर
  • प्रेम संबंधों में दूरी अथवा असामंजस्य होने पर
  • आर्थिक अस्थिरता अथवा धन संबंधी कठिनाइयों की स्थिति में
  • सुख-सुविधाओं एवं ऐश्वर्य की कमी महसूस होने पर
  • कला एवं रचनात्मक कार्यों में ग्रह अनुकूलता की मंगलकामना के लिए

प्रमुख मंत्र

  • ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः॥
  • ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
  • ॐ नमः शिवाय॥

पूजा के लाभ

  • शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति की मंगलकामना की जाती है।
  • विवाह एवं दांपत्य जीवन में प्रेम, मधुरता तथा सामंजस्य की प्रार्थना की जाती है।
  • धन, समृद्धि एवं सुख-सुविधाओं की मंगलकामना की जाती है।
  • कला, रचनात्मकता एवं सौंदर्य से संबंधित क्षेत्रों में शुभता की प्रार्थना की जाती है।
  • मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा की कामना की जाती है।
  • परिवार में सुख, सौहार्द एवं समृद्धि की मंगलकामना की जाती है।
  • भगवान मार्कण्डेय महादेव, शुक्र देव, माता महालक्ष्मी एवं भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा की प्रार्थना की जाती है।

आध्यात्मिक महत्व

मार्कण्डेय महादेव मंदिर में सम्पन्न शुक्र ग्रह शांति पूजा ग्रह शांति के साथ भगवान शिव की आराधना और आध्यात्मिक साधना से जुड़ा एक पवित्र अनुष्ठान है। शुक्र ग्रह से संबंधित पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसकी पूजा प्रेम, दांपत्य सुख, सौंदर्य, समृद्धि और जीवन में संतुलन की मंगलकामना के लिए की जाती है।

भगवान मार्कण्डेय महादेव के पावन सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार, संकल्प, देव आराधना, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से श्रद्धालु जीवन में शुभता, शांति और आध्यात्मिक कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

विशेष जानकारी

  • अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।
  • श्रद्धालु के नाम, गोत्र एवं आवश्यक जन्म विवरण के अनुसार संकल्प लिया जाता है।
  • आवश्यकता होने पर जन्मकुंडली के आधार पर ग्रह शांति की विधि निर्धारित की जा सकती है।
  • सम्पूर्ण पूजा वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न की जाती है।
  • पूजा में आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की जाती है।
  • ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन माध्यम से पूजा सम्पन्न कराने की सुविधा उपलब्ध है।

मार्कण्डेय महादेव मंदिर, वाराणसी में सम्पन्न होने वाली शुक्र ग्रह शांति पूजा केवल ग्रह दोष निवारण का अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान शिव की कृपा से जीवन में संतुलन, प्रेम, सुख-समृद्धि एवं सकारात्मक ऊर्जा की मंगलकामना करने का दिव्य माध्यम भी है। यह पवित्र अनुष्ठान व्यक्ति को भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करने में सहायक माना जाता है।

पूजा स्थानवाराणसी

मार्कंडेय महादेव

मार्कंडेय महादेव

वाराणसी

मार्कंडेय महादेव मंदिर वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र अंतर्गत कैथी गाँव में गंगा–गोमती संगम पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन, पौराणिक और सिद्ध शिवधाम है।

यह मंदिर विशेष रूप से संतान प्राप्ति, अकाल मृत्यु भय निवारण, गंभीर रोग शांति तथा कष्ट मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं।

मंदिर का इतिहास

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह स्थान ऋषि मार्कंडेय की तपोभूमि है। अल्पायु होने के कारण जब यमराज उनके प्राण हरने आए, तब ऋषि मार्कंडेय ने यहीं शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव की घोर तपस्या की।

भगवान शिव प्रकट हुए, यमराज को रोका और ऋषि मार्कंडेय को अमरता का वरदान प्रदान किया। इसी कारण यह स्थल मार्कंडेय महादेव तथा महामृत्युंजय मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसका उल्लेख मार्कंडेय पुराण में भी मिलता है।

पौराणिक एवं धार्मिक महत्व

यह धाम महामृत्युंजय स्वरूप में भगवान शिव की आराधना का प्रमुख केंद्र है।

मान्यता है कि यहाँ पूजा करने से—

  • संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है
  • गर्भ बाधा का निवारण होता है
  • वंश वृद्धि होती है

सावन मास, प्रदोष और त्रयोदशी तिथि पर यहाँ विशेष भीड़ रहती है।

यह स्थल पूर्वांचल के प्रमुख शिवधामों में गिना जाता है और द्वादश ज्योतिर्लिंगों के तुल्य प्रभावशाली माना जाता है।

यहाँ होने वाली प्रमुख पूजाएँ

पुजारी जी के माध्यम से या स्थल पर निम्न पूजाएँ कराई जाती हैंः

संतान प्राप्ति विशेष पूजा

  • संतान गोपाल मंत्र जप
  • संतान बाधा निवारण हवन
  • दंपत्ति विशेष संकल्प पूजा

महामृत्युंजय पूजा

  • महामृत्युंजय मंत्र जप
  • लघु मृत्युंजय अनुष्ठान
  • अकाल मृत्यु, रोग, भय एवं ग्रहबाधा शांति हेतु

शिव रुद्राभिषेक

  • दूध, दही, घृत, गंगाजल एवं तीर्थ जल से अभिषेक
  • सावन, महाशिवरात्रि एवं नागपंचमी पर विशेष फलदायी

अन्य पूजाएँ

  • मंगल दोष निवारण पूजा
  • विवाह बाधा निवारण पूजा
  • ग्रह शांति एवं विशेष अनुष्ठान

प्रमुख मंत्र (श्रद्धालुओं हेतु)

महामृत्युंजय मंत्रः

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥

संतान गोपाल मंत्रः

ॐ देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥

कैसे पहुँचे?

  • दूरीः वाराणसी शहर से लगभग 30 किमी
  • मार्गः वाराणसी–गाजीपुर राजमार्ग
  • निकटतम रेलवे स्टेशनः
  • राजवारी स्टेशन – लगभग 7 किमी
  • औनिहार जंक्शन – लगभग 11 किमी
  • स्थानः कैथी गाँव, गंगा–गोमती संगम, वाराणसी

श्रद्धालुओं के लिए विशेष

  • यह मंदिर अत्यंत शांत, प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण में स्थित है। संगम तट पर होने के कारण यहाँ ध्यान, जप और अनुष्ठान का प्रभाव विशेष रूप से अनुभव किया जाता है।
  • मार्कंडेय महादेव मंदिर, कैथी केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि संतान सुख, जीवन रक्षा और शिव कृपा का सिद्ध केंद्र है। जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से यहाँ पूजन करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।
मंदिर विवरण देखें

तीर्थ नहीं जा पा रहे हैं?

जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।

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हमारी गारंटी

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    मार्कण्डेय महादेव मंदिर, वाराणसी में 2 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शुक्र ग्रह शांति पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाती है। यह पवित्र वैदिक अनुष्ठान लगभग 2.5 से 3 घंटे में संपन्न होता है। इसमें शुक्र दोष, शुक्र महादशा, अंतर्दशा एवं गोचर से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है। यह अनुष्ठान वैवाहिक सुख, प्रेम, आर्थिक समृद्धि, ऐश्वर्य, आकर्षण एवं मानसिक शांति की मंगलकामना से किया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • गौरी-गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • आचार्य पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • भगवान मार्कण्डेय महादेव पूजन
    • शुक्र देव पूजन
    • शुक्र तांत्रिक मंत्र जाप — 16,000 जप
    • विशेष वैदिक हवन
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं आशीर्वाद

    विशेष सुविधाएं

    • मार्कण्डेय महादेव मंदिर, वाराणसी में शास्त्रोक्त विधि-विधान से अनुष्ठान
    • जन्मकुंडली के अनुसार वैदिक आचार्यों द्वारा अनुष्ठान
    • शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए विशेष संकल्प
    • वैवाहिक सुख, प्रेम, समृद्धि एवं ऐश्वर्य की मंगलकामना
    • भगवान मार्कण्डेय महादेव एवं शुक्र देव की विशेष आराधना

    अनुष्ठान की अवधि

    यह वैदिक अनुष्ठान लगभग 2.5 से 3 घंटे में संपन्न कराया जाता है।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • जन्मकुंडली, यदि उपलब्ध हो

    भगवान मार्कण्डेय महादेव एवं शुक्र देव की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह अनुष्ठान शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन तथा जीवन में प्रेम, वैवाहिक सुख, मानसिक शांति, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्रार्थना के लिए किया जाता है। मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में सुख, संतुलन और सकारात्मकता की मंगलकामना की जाती है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
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  • श्रेष्ठ

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    3h

    श्रेष्ठ पैकेज के अंतर्गत मार्कण्डेय महादेव मंदिर, वाराणसी में 5 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शुक्र ग्रह शांति पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाती है। यह पवित्र वैदिक अनुष्ठान लगभग 3 से 4 घंटे में संपन्न होता है। इसमें शुक्र दोष, विवाह में विलंब, दांपत्य जीवन में तनाव, प्रेम संबंधों में बाधा, आर्थिक अस्थिरता तथा भौतिक सुखों से संबंधित कठिनाइयों की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अनुष्ठान शुक्र देव की कृपा, वैवाहिक सुख, प्रेम, समृद्धि, ऐश्वर्य एवं मानसिक शांति की मंगलकामना से किया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • गौरी-गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • वैदिक आचार्य पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • भगवान मार्कण्डेय महादेव पूजन
    • शुक्र देव पूजन
    • शुक्र तांत्रिक मंत्र जाप — 64,000 जप
    • विशेष वैदिक हवन
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं आशीर्वाद

    विशेष सुविधाएं

    • पवित्र मार्कण्डेय महादेव मंदिर, वाराणसी में 5 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सामूहिक वैदिक अनुष्ठान
    • शुक्र तांत्रिक मंत्र का 64,000 जप
    • शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए विशेष संकल्प
    • विवाह, दांपत्य जीवन, प्रेम संबंधों एवं आर्थिक स्थिति से संबंधित बाधाओं के शमन की मंगलकामना
    • भगवान मार्कण्डेय महादेव एवं शुक्र देव की विशेष आराधना
    • विशेष हवन एवं पूर्णाहुति सहित विस्तृत वैदिक अनुष्ठान

    अनुष्ठान की अवधि

    यह विशेष वैदिक अनुष्ठान लगभग 3 से 4 घंटे में संपन्न कराया जाता है।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • जन्मकुंडली, यदि उपलब्ध हो

    भगवान मार्कण्डेय महादेव एवं शुक्र देव की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह पवित्र अनुष्ठान शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, वैवाहिक सुख, प्रेम, समृद्धि, ऐश्वर्य एवं मानसिक शांति के लिए किया जाता है। मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में सुख, सामंजस्य, स्थिरता और सकारात्मकता की मंगलकामना की जाती है।

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    विशिष्ट पैकेज के अंतर्गत मार्कण्डेय महादेव मंदिर, वाराणसी में 7 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शुक्र ग्रह शांति पूजा एवं विशेष वैदिक अनुष्ठान पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से श्रद्धापूर्वक संपन्न कराया जाता है। यह पवित्र अनुष्ठान लगभग 4 से 5 घंटे में संपन्न होता है। इसमें शुक्र दोष, विवाह में विलंब, दांपत्य जीवन में तनाव, प्रेम संबंधों में बाधा, आर्थिक अस्थिरता तथा भौतिक सुख-सुविधाओं से संबंधित कठिनाइयों की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है।

    इस अनुष्ठान में शुक्र देव की कृपा प्राप्ति के लिए शुक्र वैदिक मंत्र का 16,000 जप शास्त्रोक्त विधि से कराया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अनुष्ठान वैवाहिक सुख, प्रेम, समृद्धि, ऐश्वर्य एवं जीवन में सकारात्मकता की मंगलकामना के लिए किया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • गौरी-गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • वैदिक आचार्य पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • भगवान मार्कण्डेय महादेव पूजन
    • शुक्र देव पूजन
    • भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता महालक्ष्मी की आराधना
    • शुक्र वैदिक मंत्र जाप — 16,000 जप
    • मंत्र — ॐ अन्नात् परिस्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत्। क्षत्रं पयः सोमं प्रजापतिः। क्षत्रेण सत्यं इन्द्रियं विपानं शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोऽमृतं मधु॥
    • विशेष वैदिक हवन
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं आशीर्वाद

    विशेष सुविधाएं

    • मार्कण्डेय महादेव मंदिर, वाराणसी में 7 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सामूहिक वैदिक अनुष्ठान
    • शुक्र वैदिक मंत्र का 16,000 जप
    • शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए विशेष संकल्प
    • भगवान मार्कण्डेय महादेव, शुक्र देव, भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता महालक्ष्मी की विशेष आराधना
    • वैवाहिक जीवन, प्रेम संबंधों एवं आर्थिक स्थिरता से संबंधित मंगलकामनाओं के लिए विशेष अनुष्ठान
    • विशेष हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सहित विस्तृत वैदिक विधि

    अनुष्ठान की अवधि

    यह विशेष वैदिक अनुष्ठान लगभग 4 से 5 घंटे में संपन्न कराया जाता है।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • जन्मकुंडली, यदि उपलब्ध हो

    भगवान मार्कण्डेय महादेव, शुक्र देव, भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता महालक्ष्मी की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह पवित्र अनुष्ठान शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, प्रेम एवं वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, आर्थिक स्थिरता, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्रार्थना के लिए किया जाता है। मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में संतुलन, सकारात्मकता और मंगल की कामना की जाती है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹24,500₹26,0006% off

    2 वस्तुएँ शामिल

  • दिव्य

    31 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    4h

    दिव्य पैकेज के अंतर्गत मार्कण्डेय महादेव मंदिर, वाराणसी में 31 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शुक्र ग्रह शांति पूजा एवं विशेष वैदिक अनुष्ठान पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक संपन्न कराया जाता है। यह विस्तृत अनुष्ठान 3 या 5 दिनों में निर्धारित विधि के अनुसार संपन्न कराया जा सकता है।

    इस पवित्र अनुष्ठान में शुक्र वैदिक मंत्र का 64,000 जप कराया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलियुग में वैदिक मंत्रों के अधिक जप का विशेष महत्व माना जाता है। यह पूजा शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति, विवाह एवं दांपत्य जीवन में आने वाली बाधाओं, प्रेम संबंधों से जुड़ी समस्याओं तथा आर्थिक अस्थिरता से राहत की मंगलकामना के लिए की जाती है। विशेष रूप से शुक्र दोष, विवाह में विलंब, दांपत्य तनाव, प्रेम संबंधों में बाधा, आर्थिक अस्थिरता अथवा भौतिक सुख-सुविधाओं से संबंधित चिंताओं के लिए यह अनुष्ठान किया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • गौरी-गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • वैदिक आचार्य पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • भगवान मार्कण्डेय महादेव पूजन
    • शुक्र देव पूजन
    • शुक्र वैदिक मंत्र जाप — 64,000 जप
    • विशेष वैदिक हवन
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं आशीर्वाद

    विशेष सुविधाएं

    • मार्कण्डेय महादेव मंदिर, वाराणसी में 31 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सामूहिक वैदिक अनुष्ठान
    • अनुष्ठान 3 या 5 दिनों में निर्धारित विधि के अनुसार संपन्न किया जा सकता है
    • 3 या 5 दिनों के विभिन्न चरणों में कुल 31 आचार्य निर्धारित 64,000 शुक्र वैदिक मंत्र जाप को पूर्ण करेंगे
    • शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए विशेष संकल्प
    • विवाह, दांपत्य जीवन, प्रेम संबंधों एवं आर्थिक स्थिरता से संबंधित मंगलकामनाओं के लिए विशेष अनुष्ठान
    • विशेष हवन एवं पूर्णाहुति सहित विस्तृत वैदिक विधि

    अनुष्ठान की अवधि

    यह विशेष अनुष्ठान 3 या 5 दिनों में, मंत्र जाप की संख्या एवं निर्धारित पूजा-विधि के अनुसार संपन्न कराया जा सकता है।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
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    • जन्म समय
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    भगवान मार्कण्डेय महादेव एवं शुक्र देव की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह विशेष अनुष्ठान शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, वैवाहिक सुख, दांपत्य सामंजस्य, प्रेम संबंधों में सकारात्मकता, आर्थिक स्थिरता एवं जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना के लिए किया जाता है। मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में समृद्धि, सौहार्द, ऐश्वर्य और सकारात्मकता की मंगलकामना की जाती है।

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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  3. पुजारीजी

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  4. पुजारीजी

    वैदिक विधि-विधान से पूजा संपन्न

    तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।

  5. पुजारीजी

    आपको प्रसाद व आशीर्वाद मिलता है

    संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।

हर चरण पर कॉल और व्हाट्सएप पर मार्गदर्शन व सहायता।

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