“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja

त्रिपिंडी श्राद्ध एक विशेष पितृ कर्म है, जिसे उन पूर्वजों के निमित्त कराया जाता है जिनका श्राद्ध, तर्पण अथवा अन्य पितृ कर्म किसी कारणवश पूर्ण नहीं हो पाया हो या जिनकी शांति के लिए विशेष पितृ कर्म आवश्यक माना जाता हो। इस अनुष्ठान में तीन पिंड अर्पित किए जाते हैं और उनके माध्यम से संबंधित पितृ एवं प्रेत योनि से जुड़े जीवों की तृप्ति, शांति तथा सद्गति की मंगलकामना की जाती है।
शास्त्रीय परंपरा में सात्त्विक, राजस एवं तामस प्रेतों के निमित्त क्रमशः जौ, चावल एवं तिल की पीठी से पिंड बनाए जाने का विधान बताया गया है। पितृ कर्म के दौरान पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण, तर्पण, पिंड अर्पण तथा देवताओं का पूजन किया जाता है।
सिद्धवट, उज्जैन पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित महत्वपूर्ण पितृ तीर्थ माना जाता है। धार्मिक परंपरा में यहाँ श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान जैसे पितृ कर्मों का विशेष महत्व माना गया है। कुल परंपरा, पितृ संबंधी स्थिति तथा योग्य वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार त्रिपिंडी श्राद्ध कराया जा सकता है।
Duration
3h – 4h
Best time
सुबह
Starting price
₹11,000
त्रिपिंडी श्राद्ध अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म का निर्वहन करने वाली विशेष सनातन परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब किसी दिवंगत पूर्वज के निमित्त श्राद्ध, तर्पण अथवा अन्य आवश्यक पितृ कर्म पूर्ण नहीं हो पाता, तब उनकी तृप्ति एवं शांति की मंगलकामना से विशेष पितृ कर्म कराया जा सकता है।
इस अनुष्ठान में तीन पिंडों का विशेष महत्व है। सात्त्विक, राजस एवं तामस प्रेतों के निमित्त क्रमशः जौ, चावल एवं तिल की पीठी से पिंड बनाए जाते हैं। इन पिंडों को विधिपूर्वक अर्पित करते हुए संबंधित पितरों एवं प्रेतों की तृप्ति, शांति तथा सद्गति की प्रार्थना की जाती है।
ज्योतिषीय परंपरा में जन्मकुंडली में सूर्य, राहु, केतु तथा अन्य ग्रहों की विशेष स्थितियों के आधार पर पितृ दोष का विचार किया जाता है। हालांकि केवल जीवन में आने वाली सामान्य समस्याओं के आधार पर पितृ दोष का निश्चित निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। इसके लिए योग्य ज्योतिषाचार्य द्वारा जन्मकुंडली का परीक्षण उचित माना जाता है।
मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व
त्रिपिंडी श्राद्ध की शास्त्रीय पद्धति में भगवान विष्णु, भगवान ब्रह्मा एवं भगवान रुद्र से संबंधित पूजन एवं सूक्त पाठ का विधान मिलता है। भगवान गणेश का पूजन भी अनुष्ठान के प्रारंभ में किया जाता है।
इन देवताओं का पूजन एवं स्मरण करते हुए पितृ कर्म सम्पन्न किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार देव आराधना एवं पितृ तर्पण के माध्यम से पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है।
शुभ समय / यह श्राद्ध कब कराया जाता है?
शास्त्रीय परंपरा में कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष एवं माघ मास को त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए विशेष माना गया है। इसके अतिरिक्त कुल परंपरा एवं वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार उपयुक्त तिथियों पर भी यह अनुष्ठान कराया जा सकता है।
यदि किसी विशेष परिस्थिति में पितृ कर्म शीघ्र करना आवश्यक माना जाए, तो उचित समय के संबंध में वैदिक आचार्य से मार्गदर्शन लेना चाहिए।
किन परिस्थितियों में त्रिपिंडी श्राद्ध कराया जाता है?
धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार निम्न परिस्थितियों में त्रिपिंडी श्राद्ध कराने की परंपरा मिलती हैः
तीन पिंडों का विशेष महत्व
त्रिपिंडी श्राद्ध में तीन पिंडों का विशेष महत्व माना जाता है।
सात्त्विक प्रेत
सात्त्विक प्रेत के निमित्त जौ की पीठी से पिंड बनाया जाता है।
राजस प्रेत
राजस प्रेत के निमित्त चावल की पीठी से पिंड बनाया जाता है।
तामस प्रेत
तामस प्रेत के निमित्त तिल की पीठी से पिंड बनाया जाता है।
इन तीनों पिंडों को विधिपूर्वक अर्पित करके संबंधित पितरों एवं प्रेतों की तृप्ति, शांति तथा सद्गति की मंगलकामना की जाती है।
किन पूर्वजों का स्मरण किया जाता है?
त्रिपिंडी श्राद्ध में पितृवंश, मातृवंश, गुरु, श्वसुर तथा अन्य दिवंगत बंधुजनों सहित ज्ञात एवं अज्ञात पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।
पितृवंशे मृता ये च मातृवंशे तथैव च।
गुरूश्वशुरबन्धूनां ये चान्ये बान्धवा मृताः॥
इसका भाव यह है कि पितृवंश एवं मातृवंश में दिवंगत हुए पूर्वजों तथा गुरु, श्वसुर एवं अन्य दिवंगत संबंधियों का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।
त्रिपिंडी श्राद्ध में प्रमुख मंत्र एवं सूक्त
शास्त्रीय परंपरा के अनुसार इस पितृ कर्म में भगवान विष्णु, भगवान ब्रह्मा एवं भगवान रुद्र से संबंधित सूक्तों का पाठ किया जा सकता है।
मंत्रों एवं सूक्तों का पाठ वैदिक आचार्य द्वारा निर्धारित विधि के अनुसार किया जाता है।
पूजा के धार्मिक लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रिपिंडी श्राद्ध के माध्यम से निम्न मंगलकामनाएँ की जाती हैंः
इन परिणामों को धार्मिक आस्था एवं परंपरा के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
क्या त्रिपिंडी श्राद्ध प्रत्येक वर्ष कराना चाहिए?
त्रिपिंडी श्राद्ध को सामान्य वार्षिक श्राद्ध की तरह प्रत्येक वर्ष अनिवार्य रूप से दोहराने का विधान सामान्यतः नहीं माना जाता। यह एक विशेष पितृ कर्म है, जिसे आवश्यकता, कुल परंपरा तथा योग्य वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार कराया जाता है।
इसके पश्चात प्रत्येक वर्ष निर्धारित तिथि पर वार्षिक श्राद्ध एवं तर्पण करना पितृ परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।
आध्यात्मिक महत्व
त्रिपिंडी श्राद्ध पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं उत्तरदायित्व की भावना को व्यक्त करने वाली पवित्र परंपरा है। पिंड अर्पण, तर्पण, देव पूजन एवं वैदिक मंत्रों के माध्यम से पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है।
सिद्धवट, उज्जैन में पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर सम्पन्न होने वाला यह पितृ कर्म श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहाँ पितृ स्मरण एवं पितृ तर्पण के माध्यम से पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है।
विशेष जानकारी
त्रिपिंडी श्राद्ध अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म व्यक्त करने की एक विशेष सनातन परंपरा है। इसमें सात्त्विक, राजस एवं तामस प्रेतों के निमित्त तीन पिंड अर्पित कर पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है।

उज्जैन
पूर्वजों की श्रद्धा का पवित्र तीर्थ — जहाँ भक्ति, स्मरण और पितरों की शांति के लिए प्रार्थनाएँ एक साथ जुड़ती हैं
जहाँ श्रद्धा पितरों तक पहुँचती है
उज्जैन की पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित सिद्धवट मंदिर एक प्राचीन और श्रद्धेय धार्मिक स्थल है, जो विशेष रूप से पितृ कर्म, तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान की धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है।
श्रद्धालु इस पवित्र तीर्थ पर अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं तथा पितरों की शांति और आध्यात्मिक कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्धवट का पवित्र वटवृक्ष इस तीर्थ की प्रमुख धार्मिक पहचान है। क्षिप्रा नदी के पावन तट और प्राचीन वटवृक्ष के कारण यह स्थान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और धार्मिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए विशेष महत्व रखता है।
पौराणिक एवं धार्मिक महत्व
सिद्धवट उज्जैन के प्राचीन तीर्थ स्थलों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और इसे पितृ कर्म से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्रद्धापूर्वक माना जाता है।
हिंदू धार्मिक परंपरा में वटवृक्ष को अत्यंत पवित्र माना जाता है। सिद्धवट से जुड़ी विभिन्न धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, इस स्थान पर किए जाने वाले पितृ कर्म पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण की भावना को व्यक्त करते हैं।
सिद्धवट की पवित्रता और क्षिप्रा नदी के धार्मिक महत्व के कारण भारत के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां अपने पूर्वजों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए आते हैं।
सरल धार्मिक अनुष्ठान, गहरी श्रद्धा
सिद्धवट की धार्मिक परंपराएं श्रद्धा, स्मरण और पितरों के प्रति सम्मान पर केंद्रित हैं।
पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध, पितृ शांति संबंधी अनुष्ठान, मंत्र जाप, हवन और वैदिक विधियों के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
पितृ अनुष्ठान एवं पूजा
प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हैंः
विशेष धार्मिक अवसर
पितृपक्ष सिद्धवट में पितृ संबंधी धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवधि में श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करते हैं तथा उनकी शांति एवं सद्गति के लिए प्रार्थना करते हैं।
अमावस्या भी पितरों के स्मरण और उनके निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। श्रद्धालु इस अवसर पर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए पितृ शांति की मंगलकामना करते हैं।
सिद्धवट का आध्यात्मिक वातावरण
सिद्धवट का आध्यात्मिक वातावरण पवित्र क्षिप्रा नदी, प्राचीन वटवृक्ष और उज्जैन की धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
वैदिक मंत्रोच्चार, पितृ अनुष्ठान, तर्पण और पूजा-अर्चना का वातावरण श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों का स्मरण करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का आध्यात्मिक अवसर प्रदान करता है।
कई श्रद्धालुओं के लिए सिद्धवट की यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, स्मरण और आध्यात्मिक चिंतन का भावपूर्ण अवसर होती है।
श्रद्धालु जिन आशीर्वादों की कामना करते हैं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्धवट पर पितृ संबंधी अनुष्ठान श्रद्धालु निम्नलिखित मंगलकामनाओं के साथ करते हैंः
इन लाभों को हिंदू धर्म की आस्था, धार्मिक परंपरा और मान्यताओं के संदर्भ में समझा जाना चाहिए।
स्थान एवं कैसे पहुंचे
सिद्धवट मंदिर उज्जैन, मध्य प्रदेश में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है और शहर के प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों से यहां पहुंचा जा सकता है।
निकटतम रेलवे स्टेशनः उज्जैन जंक्शन
निकटतम प्रमुख हवाई अड्डाः देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, इंदौर
मंदिर तक स्थानीय ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और अन्य स्थानीय परिवहन साधनों के माध्यम से पहुंचा जा सकता है।
पूजारीजी.कॉम के माध्यम से अपनी पूजा बुक करें
सिद्धवट मंदिर, उज्जैन में प्रामाणिक एवं सुव्यवस्थित पितृ और धार्मिक अनुष्ठान सेवाएं — श्रद्धा तथा पारंपरिक वैदिक विधि-विधान के साथ आयोजित।
प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा, पारंपरिक विधि-विधान और पवित्र आध्यात्मिक भावना के साथ आयोजित किया जाता है।
पूजारीजी.कॉम के माध्यम से सिद्धवट मंदिर, उज्जैन में अपनी पितृ पूजा बुक करें और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं स्मरण अर्पित करें।
जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।
3 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
त्रिपिंडी श्राद्ध सनातन पितृ परंपरा का एक विशेष श्राद्ध कर्म है, जिसे पूर्वजों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना के लिए सम्पन्न किया जाता है। यह अनुष्ठान सिद्धवट, उज्जैन में क्षिप्रा नदी के पावन तट पर 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रीय परंपरा एवं वैदिक विधि-विधान के अनुसार कराया जाता है। इस अनुष्ठान में सात्त्विक, राजस एवं तामस प्रेतों के निमित्त तीन पिंड अर्पित किए जाते हैं। यह पैकेज उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है जो पितृ दोष या पितृ बाधा की धार्मिक मान्यता, पूर्वजों के अपूर्ण श्राद्ध कर्म अथवा पितरों की शांति एवं सद्गति के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध कराना चाहते हैं।
पूजा में शामिल विधियां
विशेष सुविधाएं
आवश्यक जानकारी
सिद्धवट, उज्जैन में शास्त्रीय विधि से सम्पन्न त्रिपिंडी श्राद्ध पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म की भावना को व्यक्त करने वाला पवित्र अनुष्ठान है। इसके माध्यम से पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति तथा परिवार में आध्यात्मिक मंगल की प्रार्थना की जाती है।
2 वस्तुएँ शामिल
त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा के बारे में हमसे बात करें
WhatsAppभक्तों की प्रतिक्रिया
“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
एक बार जानकारी दें। पुजारी, सामग्री, विधि-विधान और अपडेट — सब आपके लिए संभाला जाता है।
पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।
जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।
हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।
तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।
संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।
ऊपर दिए गए पैकेज में से चुनें या पूछताछ करें, हमारी टीम आपकी तारीख और विवरणों की पुष्टि करेगी।