“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja

बृहस्पति ग्रह शांति पूजा वैदिक ज्योतिष में महत्वपूर्ण माने जाने वाले देवगुरु बृहस्पति की आराधना से संबंधित विशेष अनुष्ठान है। बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, शिक्षा, संतान, विवाह, सौभाग्य एवं समृद्धि का कारक माना जाता है। जन्मकुंडली में बृहस्पति के पीड़ित या अशुभ स्थिति में होने पर श्रद्धालु ग्रह शांति एवं शुभ प्रभावों की मंगलकामना से यह पूजा करा सकते हैं।
हरिद्वार स्थित पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव के पावन स्वरूप भगवान पशुपतिनाथ की आराधना का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। इस पवित्र स्थान पर भगवान पशुपतिनाथ एवं देवगुरु बृहस्पति की आराधना के साथ यह अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है। यह पूजा विवाह, संतान, शिक्षा, आर्थिक उन्नति, भाग्य एवं आध्यात्मिक प्रगति से संबंधित मंगलकामनाओं के लिए की जाती है।
Duration
3h – 4h
Best time
सुबह
Starting price
₹9,100
वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को देवताओं के गुरु के रूप में प्रतिष्ठित माना गया है। यह ग्रह ज्ञान, धर्म, शिक्षा, संतान, विवाह, विवेक, सौभाग्य एवं समृद्धि से संबंधित माना जाता है। जन्मकुंडली में बृहस्पति के निर्बल, पीड़ित या अशुभ स्थिति में होने पर इन क्षेत्रों से संबंधित चुनौतियों की संभावना ज्योतिषीय मान्यताओं में बताई गई है।
ऐसी स्थिति में बृहस्पति ग्रह शांति पूजा श्रद्धा एवं संकल्प के साथ सम्पन्न कराई जाती है। इसका उद्देश्य बृहस्पति से संबंधित अशुभ ग्रह प्रभावों की शांति तथा जीवन में ज्ञान, सद्बुद्धि, सुख, समृद्धि एवं शुभता की मंगलकामना करना है।
पशुपतिनाथ मंदिर, हरिद्वार में भगवान पशुपतिनाथ की आराधना के साथ यह अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव की उपासना तथा देवगुरु बृहस्पति की आराधना के माध्यम से ग्रह शांति एवं आध्यात्मिक कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व
इस पूजा के मुख्य देवता देवगुरु बृहस्पति हैं। इनके साथ भगवान पशुपतिनाथ तथा नवग्रह देवताओं का विधिपूर्वक पूजन किया जाता है।
बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, विवेक, शिक्षा, संतान, विवाह एवं सौभाग्य से संबंधित ग्रह माना जाता है। भगवान पशुपतिनाथ भगवान शिव के पावन स्वरूप हैं, जिनकी आराधना आध्यात्मिक शांति एवं कल्याण की भावना से की जाती है।
इस प्रकार यह अनुष्ठान देवगुरु बृहस्पति की ग्रह आराधना तथा भगवान पशुपतिनाथ की शिव उपासना का समन्वित रूप माना जाता है।
शुभ मुहूर्त / यह पूजा कब करानी चाहिए?
किन परिस्थितियों में यह पूजा करानी चाहिए?
मुख्य मंत्र
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः॥
ॐ बृं बृहस्पतये नमः॥
ॐ नमः शिवाय॥
बृहस्पति ग्रह शांति पूजा के लाभ
धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान के माध्यम से निम्न मंगलकामनाएँ की जाती हैंः
आध्यात्मिक महत्व
पशुपतिनाथ मंदिर, हरिद्वार में सम्पन्न होने वाली बृहस्पति ग्रह शांति पूजा ग्रह आराधना के साथ भगवान शिव की उपासना का भी पवित्र माध्यम है। देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धर्म एवं सद्बुद्धि से संबंधित माना जाता है, जबकि भगवान पशुपतिनाथ की आराधना आध्यात्मिक शांति, कल्याण एवं आत्मिक उन्नति की भावना से की जाती है।
वैदिक मंत्रोच्चार, संकल्प, देवता पूजन, नवग्रह आराधना, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से श्रद्धालु अपने जीवन में ज्ञान, सद्बुद्धि, सुख, समृद्धि, आध्यात्मिक शक्ति एवं सकारात्मकता की मंगलकामना करते हैं।
विशेष जानकारी
पशुपतिनाथ मंदिर, हरिद्वार में सम्पन्न होने वाली बृहस्पति ग्रह शांति पूजा केवल ग्रह दोष निवारण का अनुष्ठान नहीं, बल्कि व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, धर्म, सद्बुद्धि, आध्यात्मिक शक्ति एवं सकारात्मक ऊर्जा की मंगलकामना करने का दिव्य माध्यम भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान पशुपतिनाथ एवं देवगुरु बृहस्पति की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि, सम्मान एवं आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होने की प्रार्थना की जाती है।

हरिद्वार
हरिद्वार उत्तराखंड की प्रमुख तीर्थनगरी है, जिसे प्राचीन काल से ही गंगा तट पर स्थित महत्वपूर्ण धार्मिक एवं आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। पवित्र गंगा, प्राचीन मंदिरों, आश्रमों और वैदिक परंपराओं के कारण हरिद्वार का हिंदू तीर्थ परंपरा में विशेष स्थान है। गंगा के मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करने वाला यह नगर देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र रहा है।
पशुपति नाथ मंदिर, हरिद्वार भगवान शिव के पशुपति स्वरूप को समर्पित एक श्रद्धास्थल है। उपलब्ध प्रकाशित विवरणों के अनुसार यह मंदिर हरिद्वार में श्रवणनाथ मठ से जुड़ा हुआ है और भगवान पशुपतिनाथ की उपासना के लिए प्रसिद्ध है।
धार्मिक परंपरा में भगवान शिव को पशुपतिनाथ, अर्थात समस्त जीवों के स्वामी के रूप में पूजा जाता है। हरिद्वार की गंगा, शिव उपासना और तीर्थ परंपरा से जुड़ा वातावरण इस मंदिर की आध्यात्मिक महत्ता को और विशेष बनाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धालु यहाँ भगवान शिव की कृपा, सुख-शांति, आरोग्य, संरक्षण, बाधाओं की शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना से पूजा-अर्चना करते हैं।
भगवान शिव के पशुपति स्वरूप की उपासना सनातन परंपरा में विशेष धार्मिक महत्व रखती है। पशुपति स्वरूप भगवान शिव को समस्त जीवों के स्वामी, संरक्षक और कल्याणकारी देव के रूप में संबोधित करता है।
हरिद्वार स्थित पशुपति नाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और आध्यात्मिक साधना का माध्यम मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भक्त यहाँ विभिन्न आध्यात्मिक एवं पारिवारिक मंगलकामनाओं के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।
श्रद्धालु विशेष रूप से—
पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं।
भगवान शिव की उपासना से संबंधित विभिन्न धार्मिक एवं वैदिक अनुष्ठान श्रद्धा के अनुसार किए जाते हैं। किसी विशेष पूजा की उपलब्धता, विधि और आयोजन मंदिर की स्थानीय परंपरा तथा संबंधित आचार्य की व्यवस्था पर निर्भर कर सकती है।
प्रमुख रूप से किए जाने वाले शिव-संबंधित अनुष्ठानों में शामिल हो सकते हैं—
पूजा की विधि, मंत्र जाप और संकल्प व्यक्ति की धार्मिक आवश्यकता तथा जन्मकुंडली के आधार पर आचार्य द्वारा निर्धारित किए जा सकते हैं।
मंदिर में भगवान शिव के पशुपति स्वरूप की उपासना श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख धार्मिक केंद्र है। भक्त भगवान शिव का पूजन, अभिषेक और मंत्र जाप कर सुख, शांति, आरोग्य एवं संरक्षण की मंगलकामना करते हैं।
हरिद्वार की धार्मिक पहचान पवित्र गंगा से गहराई से जुड़ी हुई है। गंगा के तट पर स्नान, आचमन, पूजन और दीपदान हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखते हैं। गंगा का सान्निध्य हरिद्वार की तीर्थ परंपरा और आध्यात्मिक वातावरण को विशेष बनाता है।
हर की पौड़ी हरिद्वार के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यहाँ गंगा आरती और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मंदिर की यात्रा के साथ हर की पौड़ी और गंगा तट का दर्शन श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव हो सकता है।
हरिद्वार की धार्मिक परंपरा में गंगाद्वार, कुशावर्त, कनखल, बिल्व तीर्थ और नील पर्वत को पंचतीर्थ के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है। ये स्थल हरिद्वार की व्यापक तीर्थ परंपरा और धार्मिक विरासत को दर्शाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान पशुपतिनाथ की श्रद्धापूर्वक आराधना से विभिन्न आध्यात्मिक एवं सांसारिक मंगलकामनाएँ की जाती हैं। इन लाभों को धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए।
हरिद्वार का धार्मिक वातावरण गंगा, मंदिरों, आश्रमों, साधना परंपराओं, वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ा हुआ है। गंगा तट पर होने वाली आरती, दीपदान और मंत्रोच्चार तीर्थनगरी के आध्यात्मिक वातावरण को विशेष बनाते हैं।
पशुपति नाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना के साथ श्रद्धालु हरिद्वार की व्यापक तीर्थ परंपरा का अनुभव कर सकते हैं। श्रावण मास और महाशिवरात्रि जैसे शिव-संबंधित अवसरों पर भगवान शिव की उपासना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
भगवान शिव की उपासना के लिए निम्न अवसरों को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है—
इन अवसरों पर श्रद्धालु अपनी आस्था और धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान शिव का अभिषेक, पूजन, जाप एवं हवन करा सकते हैं।
हरिद्वार के लिए निकटतम प्रमुख हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून है। हवाई अड्डे से हरिद्वार तक सड़क मार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है।
हरिद्वार रेलवे स्टेशन देश के अनेक प्रमुख शहरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। रेलवे स्टेशन से स्थानीय परिवहन के माध्यम से मंदिर क्षेत्र तक पहुँचा जा सकता है।
हरिद्वार दिल्ली, देहरादून, ऋषिकेश और उत्तर भारत के अन्य प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। निजी वाहन, टैक्सी और बस के माध्यम से हरिद्वार पहुँचा जा सकता है।
पशुपति नाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना के लिए श्रद्धालु वर्षभर आ सकते हैं। धार्मिक दृष्टि से श्रावण मास, सावन सोमवार और महाशिवरात्रि जैसे अवसर विशेष माने जाते हैं।
यदि शांत वातावरण में दर्शन करना हो तो सामान्य दिनों में अपेक्षाकृत कम भीड़ वाले समय को चुना जा सकता है। पर्वों और विशेष धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो सकती है।
पूजा या विशेष अनुष्ठान के लिए जाने से पहले स्थानीय स्तर पर पूजा व्यवस्था, उपलब्धता और समय की जानकारी प्राप्त करना उचित है।
पशुपति नाथ मंदिर, हरिद्वार भगवान शिव के पशुपति स्वरूप की आराधना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। हरिद्वार की पवित्र गंगा, प्राचीन तीर्थ परंपरा और शिव भक्ति से जुड़ा वातावरण इस मंदिर की आध्यात्मिक पहचान को विशेष बनाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहाँ भगवान शिव की पूजा-अर्चना, अभिषेक, मंत्र जाप और अन्य धार्मिक अनुष्ठान सुख-शांति, आरोग्य, पारिवारिक कल्याण, बाधाओं की शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना से किए जाते हैं। हरिद्वार की तीर्थ परंपरा के साथ पशुपतिनाथ की उपासना श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, साधना और आध्यात्मिक चिंतन का अवसर प्रदान करती है।
जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।
2 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
हरिद्वार के पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर में 2 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा बृहस्पति ग्रह शांति पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाएगी। यह पवित्र वैदिक अनुष्ठान लगभग 2.5 से 3 घंटे में संपन्न होता है। इसमें गुरु दोष, बृहस्पति महादशा, अंतर्दशा एवं गोचर से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अनुष्ठान विवाह, संतान सुख, शिक्षा, भाग्य, आर्थिक उन्नति एवं आध्यात्मिक प्रगति की मंगलकामना के लिए किया जाता है।
पूजा में शामिल विधियां
विशेष सुविधाएं
अनुष्ठान की अवधि
यह पवित्र वैदिक अनुष्ठान लगभग 2.5 से 3 घंटे में संपन्न कराया जाता है।
आवश्यक जानकारी
देवगुरु बृहस्पति एवं भगवान पशुपतिनाथ की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह अनुष्ठान गुरु दोष एवं बृहस्पति से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए किया जाता है। मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से ज्ञान, शिक्षा, विवाह, संतान सुख, आर्थिक स्थिरता, भाग्योदय एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना की जाती है।
2 वस्तुएँ शामिल
5 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
श्रेष्ठ पैकेज के अंतर्गत हरिद्वार के पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर में 5 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा बृहस्पति ग्रह शांति पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाती है। यह पवित्र वैदिक अनुष्ठान लगभग 3 से 4 घंटे में संपन्न होता है। इसमें गुरु दोष, विवाह में विलंब, संतान संबंधी बाधाओं, शिक्षा में रुकावट, आर्थिक समस्याओं एवं भाग्य संबंधी अवरोधों के शमन की मंगलकामना की जाती है। यह अनुष्ठान देवगुरु बृहस्पति एवं भगवान पशुपतिनाथ की कृपा प्राप्ति के लिए किया जाता है।
पूजा में शामिल विधियां
विशेष सुविधाएं
अनुष्ठान की अवधि
यह विशेष वैदिक अनुष्ठान लगभग 3 से 4 घंटे में संपन्न कराया जाता है।
आवश्यक जानकारी
देवगुरु बृहस्पति एवं भगवान पशुपतिनाथ की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह पवित्र अनुष्ठान गुरु दोष एवं बृहस्पति ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन के लिए किया जाता है। मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में ज्ञान, सुख, शांति, समृद्धि, विवाह, संतान सुख, शिक्षा एवं भाग्योदय की मंगलकामना की जाती है।
2 वस्तुएँ शामिल
7 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
विशिष्ट पैकेज के अंतर्गत हरिद्वार के पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर में 7 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा बृहस्पति ग्रह शांति पूजा एवं विशेष वैदिक अनुष्ठान पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से श्रद्धापूर्वक संपन्न कराया जाता है। यह अनुष्ठान लगभग 4 से 5 घंटे में संपन्न होता है। इसमें गुरु दोष, विवाह में विलंब, संतान संबंधी बाधाओं, शिक्षा एवं करियर में रुकावटों, आर्थिक समस्याओं तथा भाग्योदय में आने वाले अवरोधों के शमन की मंगलकामना की जाती है।
इस अनुष्ठान में देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्ति के लिए बृहस्पति वैदिक मंत्र का 19,000 जप कराया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मंत्र जाप ज्ञान, सद्बुद्धि, भाग्योदय, आर्थिक समृद्धि, विवाह एवं संतान सुख तथा जीवन में सकारात्मकता की मंगलकामना के लिए किया जाता है।
पूजा में शामिल विधियां
विशेष सुविधाएं
अनुष्ठान की अवधि
यह विशेष वैदिक अनुष्ठान लगभग 4 से 5 घंटे में संपन्न कराया जाता है।
आवश्यक जानकारी
देवगुरु बृहस्पति एवं भगवान पशुपतिनाथ की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह पवित्र अनुष्ठान गुरु दोष एवं बृहस्पति ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, ज्ञान, सद्बुद्धि, भाग्योदय, आर्थिक स्थिरता, वैवाहिक सुख, संतान संबंधी मंगलकामनाओं तथा जीवन में आध्यात्मिक उन्नति के लिए किया जाता है। मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, सफलता एवं सकारात्मकता की प्रार्थना की जाती है।
2 वस्तुएँ शामिल
31 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
दिव्य पैकेज के अंतर्गत हरिद्वार के पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर में 31 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा बृहस्पति ग्रह शांति पूजा एवं विशेष वैदिक अनुष्ठान पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से श्रद्धापूर्वक संपन्न कराया जाता है। यह विस्तृत अनुष्ठान 3 या 5 दिनों में, निर्धारित पूजा-विधि एवं मंत्र जाप के अनुसार संपन्न कराया जाता है।
इस अनुष्ठान में बृहस्पति वैदिक मंत्र का 76,000 जप कराया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह विशेष मंत्र जाप गुरु दोष, विवाह में विलंब, संतान संबंधी बाधाओं, शिक्षा एवं करियर से जुड़ी समस्याओं, आर्थिक कठिनाइयों तथा भाग्य संबंधी अवरोधों के शमन की मंगलकामना से किया जाता है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए किया जाता है जिनकी जन्मकुंडली में बृहस्पति से संबंधित प्रतिकूल प्रभाव अथवा जीवन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बाधाएँ हों।
पूजा में शामिल विधियां
विशेष सुविधाएं
अनुष्ठान की अवधि
यह विशेष अनुष्ठान 3 या 5 दिनों में, मंत्र जाप की संख्या एवं पूजा की विस्तृत विधि के अनुसार संपन्न कराया जाता है।
आवश्यक जानकारी
देवगुरु बृहस्पति एवं भगवान पशुपतिनाथ की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह विशेष अनुष्ठान गुरु ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, ज्ञान, विवाह, संतान सुख, शिक्षा, करियर, आर्थिक स्थिरता एवं भाग्योदय की प्रार्थना के लिए किया जाता है। विधिपूर्वक मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, सम्मान एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना की जाती है।
2 वस्तुएँ शामिल
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WhatsAppभक्तों की प्रतिक्रिया
“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
एक बार जानकारी दें। पुजारी, सामग्री, विधि-विधान और अपडेट — सब आपके लिए संभाला जाता है।
पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।
जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।
हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।
तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।
संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।
ऊपर दिए गए पैकेज में से चुनें या पूछताछ करें, हमारी टीम आपकी तारीख और विवरणों की पुष्टि करेगी।