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Pujari Ji

गजेन्द्र मोक्ष पाठ

नारायणी शिला मंदिर, हरिद्वार
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
गजेन्द्र मोक्ष पाठ

गजेन्द्र मोक्ष पाठ श्रीमद्भागवत महापुराण के अष्टम स्कंध में वर्णित भगवान श्रीहरि विष्णु और गजेन्द्र की पवित्र कथा पर आधारित है। जब गजेन्द्र नामक हाथी संकट में फँसकर पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान विष्णु का स्मरण करता है, तब भगवान उसकी पुकार सुनकर उसकी रक्षा करते हैं। इसी कारण गजेन्द्र मोक्ष पाठ को संकट, भय, मानसिक अशांति तथा आध्यात्मिक बाधाओं से राहत की मंगलकामना के लिए विशेष महत्व दिया जाता है।

नारायणी शिला, हरिद्वार पितृ कर्म, श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान तथा नारायण बलि जैसे धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। इस पवित्र स्थल पर गजेन्द्र मोक्ष पाठ भगवान विष्णु की कृपा, पितृ शांति तथा परिवार के आध्यात्मिक कल्याण की मंगलकामना के साथ कराया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिन परिवारों में पितृ दोष, पितरों की अतृप्ति, पारिवारिक अशांति, आर्थिक बाधाएँ, मानसिक तनाव या जीवन में बार-बार आने वाली कठिनाइयों के कारण विशेष धार्मिक अनुष्ठान की आवश्यकता महसूस होती है, वे योग्य वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में यह पाठ करा सकते हैं।

Duration

3h – 4h

Best time

सुबह

Starting price

₹13,000

लाभ

  • जीवन में आने वाली बड़ी बाधाओं, संकटों एवं कठिन परिस्थितियों से राहत तथा अनुकूल परिस्थितियों की प्राप्ति की मंगलकामना की जाती है।
  • पितृ दोष के अशुभ प्रभावों की शांति एवं पितरों की तृप्ति के लिए यह पाठ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ माना जाता है।
  • नारायण बलि एवं श्राद्ध कर्म के साथ गजेन्द्र मोक्ष पाठ करने पर आध्यात्मिक कल्याण एवं पितृ शांति की मंगलकामना की जाती है।
  • संतान प्राप्ति से संबंधित बाधाओं के शमन तथा अनुकूल परिस्थितियों की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • घर-परिवार में सुख-शांति, प्रेम, सौहार्द एवं आपसी सामंजस्य की स्थापना की मंगलकामना की जाती है।
  • आर्थिक संकट, ऋण संबंधी बाधाओं एवं बार-बार होने वाले नुकसान से राहत तथा वित्तीय स्थिरता की कामना की जाती है।
  • मानसिक तनाव, भय एवं नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से मुक्ति तथा मानसिक शांति की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा से सुरक्षा, आत्मबल, सकारात्मक ऊर्जा एवं आंतरिक शक्ति की प्राप्ति की मंगलकामना की जाती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति, आत्मिक शांति एवं मोक्ष के मार्ग पर प्रगति की श्रद्धापूर्वक कामना की जाती है।

गजेन्द्र मोक्ष पाठ

गजेन्द्र मोक्ष पाठ भगवान श्रीहरि विष्णु के प्रति पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और शरणागति का स्मरण कराने वाला पवित्र पाठ है। इसका आधार श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित गजेन्द्र मोक्ष प्रसंग है, जिसमें भगवान विष्णु अपने भक्त की पुकार सुनकर संकट से उसकी रक्षा करते हैं।

नारायणी शिला, हरिद्वार में इस पाठ को पितरों की तृप्ति, परिवार की शांति, संकटों से राहत तथा आध्यात्मिक कल्याण की मंगलकामना के लिए कराया जाता है। यदि पितृ संबंधी कोई धार्मिक बाधा मानी जाती हो, तो इसे अन्य पितृ कर्मों के साथ भी कराया जा सकता है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

इस अनुष्ठान में मुख्य रूप से भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना की जाती है। साथ ही श्री लक्ष्मी नारायण, भगवान गणेश तथा पितृ देवताओं का स्मरण और पूजन किया जा सकता है।

नारायणी शिला को हरिद्वार का महत्वपूर्ण पितृ तीर्थ माना जाता है। यहाँ श्रद्धा और संकल्प के साथ किए जाने वाले पितृ कर्मों के माध्यम से पूर्वजों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है।

मुहूर्त / गजेन्द्र मोक्ष पाठ कब कराना चाहिए?

गजेन्द्र मोक्ष पाठ निम्न अवसरों पर कराया जा सकता है—

  • एकादशी तिथि
  • गुरुवार
  • पूर्णिमा
  • अमावस्या
  • पितृ पक्ष
  • वैकुण्ठ एकादशी
  • हरि शयनी एकादशी
  • हरि प्रबोधिनी एकादशी
  • योग्य वैदिक आचार्य द्वारा निर्धारित शुभ मुहूर्त

पितृ संबंधी विशेष अनुष्ठान के लिए तिथि और समय का निर्धारण कुल परंपरा तथा वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार करना उचित माना जाता है।

किन परिस्थितियों में गजेन्द्र मोक्ष पाठ कराया जाता है?

  • पितृ दोष की शांति की मंगलकामना के लिए।
  • पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की प्रार्थना के लिए।
  • नारायण बलि, श्राद्ध या अन्य पितृ कर्म के साथ।
  • परिवार में लंबे समय से अशांति या कलह होने पर धार्मिक शांति की मंगलकामना के लिए।
  • आर्थिक कठिनाइयों और जीवन की बाधाओं से राहत की प्रार्थना के लिए।
  • मानसिक तनाव, भय और अस्थिरता की स्थिति में आध्यात्मिक शांति की कामना के लिए।
  • जीवन में बार-बार आने वाली बाधाओं से राहत की मंगलकामना के लिए।

मुख्य मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

ॐ नमो नारायणाय॥

गजेन्द्र मोक्ष पाठ पूजा के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गजेन्द्र मोक्ष पाठ के माध्यम से—

  • भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा और संरक्षण की मंगलकामना की जाती है।
  • पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की प्रार्थना की जाती है।
  • पितृ दोष एवं पितृ संबंधी बाधाओं की शांति की कामना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति एवं सौहार्द की मंगलकामना की जाती है।
  • मानसिक तनाव, भय और नकारात्मक विचारों से राहत की प्रार्थना की जाती है।
  • जीवन की कठिन परिस्थितियों में आत्मबल एवं सकारात्मकता की मंगलकामना की जाती है।
  • आर्थिक एवं पारिवारिक स्थिरता के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति तथा भगवान विष्णु की भक्ति में वृद्धि की मंगलकामना की जाती है।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्राप्त होता है।

आध्यात्मिक महत्व

गजेन्द्र मोक्ष प्रसंग भक्त और भगवान के बीच पूर्ण शरणागति का प्रतीक माना जाता है। यह पाठ मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में ईश्वर के प्रति श्रद्धा, विश्वास और समर्पण की भावना का स्मरण कराता है।

नारायणी शिला, हरिद्वार में गंगा की पवित्र धारा और भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के मध्य किया जाने वाला यह पाठ पितृ शांति, आत्मिक कल्याण तथा परिवार के सुख-शांति की मंगलकामना से विशेष महत्व रखता है।

विशेष जानकारी

  • नारायणी शिला, हरिद्वार में अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा पाठ सम्पन्न कराया जा सकता है।
  • संकल्प के लिए यजमान का नाम, गोत्र तथा आवश्यक पारिवारिक विवरण लिया जा सकता है।
  • पितृ कर्म से संबंधित विशेष जानकारी उपलब्ध होने पर उसे संकल्प में सम्मिलित किया जा सकता है।
  • हरिद्वार में उपस्थित न हो पाने पर संकल्प के माध्यम से धार्मिक अनुष्ठान कराने की व्यवस्था की जा सकती है।
  • अनुष्ठान की विधि कुल परंपरा तथा वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार निर्धारित की जाती है।

नारायणी शिला, हरिद्वार में सम्पन्न यह गजेन्द्र मोक्ष पाठ भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा प्राप्त करने हेतु अत्यंत पवित्र एवं प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान माना जाता है। यह पाठ पितृ दोष की शांति, पितरों की तृप्ति एवं सद्गति, मानसिक शांति, पारिवारिक सुख, सकारात्मक ऊर्जा तथा आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना के लिए श्रद्धापूर्वक सम्पन्न किया जाता है।

पूजा स्थानहरिद्वार

नारायणी शिला मंदिर

नारायणी शिला मंदिर

हरिद्वार

पितृ श्रद्धा का पवित्र तीर्थ — जहाँ पूर्वजों का स्मरण, नारायण की भक्ति और शांति की प्रार्थना एक साथ जुड़ती है

जहाँ श्रद्धा पूर्वजों तक पहुँचती है

हरिद्वार की पवित्र भूमि पर गंगा के निकट स्थित नारायणी शिला मंदिर एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जो भगवान नारायण की आराधना और पितृ कर्मों की परंपरा से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है।

यहाँ श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नारायणी शिला भगवान विष्णु के पवित्र स्वरूप से संबंधित मानी जाती है।

गंगा के पवित्र वातावरण के बीच स्थित यह स्थान उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है, जो अपने पितरों की शांति, कल्याण और सद्गति की प्रार्थना करते हैं।

पौराणिक एवं धार्मिक महत्व

नारायणी शिला का संबंध भगवान नारायण और पितृ कर्म की प्राचीन धार्मिक परंपरा से माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र शिला के समक्ष श्रद्धापूर्वक किए गए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान अर्पित करते हैं और उनके आध्यात्मिक कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

इसी आस्था के कारण देश के विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु नारायणी शिला में अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान कराने आते हैं।

सरल पूजा, गहरी श्रद्धा

नारायणी शिला में किए जाने वाले धार्मिक कर्म बाहरी दिखावे से अधिक श्रद्धा और भावनाओं से जुड़े माने जाते हैं।

पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध, दीपदान, मंत्रोच्चार और भगवान नारायण की पूजा के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं।

यहाँ प्रत्येक धार्मिक विधि का उद्देश्य अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और उनके लिए शांति एवं कल्याण की मंगलकामना करना है।

पितृ कर्म और धार्मिक अनुष्ठान

प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानः

  • पिंडदान — पूर्वजों के लिए श्रद्धापूर्वक अर्पण
  • श्राद्ध कर्म — पितरों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता
  • तर्पण — पूर्वजों की शांति की प्रार्थना
  • पितृ शांति अनुष्ठान
  • पितृ मोक्ष जप एवं यज्ञ
  • भगवान नारायण की पूजा
  • हवन एवं वैदिक मंत्रोच्चार

विशेष अवसरों पर नारायणी शिला

पितृ पक्ष नारायणी शिला में पितृ कर्म के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवधि में अनेक श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करवाते हैं।

अमावस्या जैसी धार्मिक तिथियों पर भी पितृ शांति और पूर्वजों के कल्याण की कामना से विशेष धार्मिक कर्म किए जाते हैं।

गंगा के निकट आध्यात्मिक वातावरण

नारायणी शिला मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण हरिद्वार की पवित्र गंगा और प्राचीन तीर्थ परंपरा से जुड़ा हुआ है।

वैदिक मंत्रों का उच्चारण, पिंडदान और तर्पण की धार्मिक विधियां तथा गंगा का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों के साथ आध्यात्मिक रूप से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।

यहाँ किया गया पितृ स्मरण अनेक भक्तों के लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है।

श्रद्धालुओं की मंगलकामनाएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारायणी शिला में पितृ कर्म करवाने से श्रद्धालु इन मंगलकामनाओं के साथ पूजा करते हैंः

  • पितरों की शांति और सद्गति की प्रार्थना
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता
  • पितृ दोष से संबंधित धार्मिक मान्यताओं में शांति की कामना
  • परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना
  • पूर्वजों के आशीर्वाद एवं परिवार के कल्याण की मंगलकामना

इन सभी लाभों को धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में समझा जाता है।

दर्शन एवं स्थान

नारायणी शिला मंदिर, मायापुर, हरिद्वार में स्थित है और हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

निकटतम रेलवे स्टेशनः हरिद्वार जंक्शन

निकटतम प्रमुख हवाई अड्डाः जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून

स्थानीय स्तर पर ऑटो-रिक्शा, रिक्शा और टैक्सी द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

नारायणी शिला मंदिर में पूजा करवाएं

पुजारीजी.कॉम के माध्यम से नारायणी शिला मंदिर में विभिन्न पितृ एवं धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्था कराई जा सकती है।

  • पिंडदान एवं श्राद्ध पूजा
  • तर्पण एवं पितृ शांति अनुष्ठान
  • पितृ मोक्ष जप एवं यज्ञ
  • भगवान नारायण की पूजा
  • हवन एवं वैदिक मंत्रोच्चार
  • संकल्प एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान
  • अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में पूजा व्यवस्था

प्रत्येक अनुष्ठान श्रद्धा, वैदिक विधि और धार्मिक परंपरा के अनुरूप संपन्न कराने का प्रयास किया जाता है।

पुजारीजी.कॉम के माध्यम से नारायणी शिला मंदिर में पितृ पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान बुक करें और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं शांति की प्रार्थना अर्पित करें।

आपकी श्रद्धा। हमारी पवित्र सेवा।

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जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।

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  • उन्नत

    3 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    3h

    यह दिव्य वैदिक अनुष्ठान नारायणी शिला, हरिद्वार में भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा एवं पवित्र तीर्थ की आध्यात्मिक ऊर्जा के मध्य शास्त्रोक्त विधि-विधान से सम्पन्न कराया जाता है। नारायणी शिला पितृ कर्म, पिंडदान, नारायण बलि एवं पितृ शांति से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ मानी जाती है। इस पूजा में गजेन्द्र मोक्ष पाठ के माध्यम से पितृ शांति, मानसिक शांति, पारिवारिक सुख-शांति, संतान सुख, आर्थिक उन्नति एवं भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा की मंगलकामना की जाती है। इस उन्नत पैकेज में 3 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा सम्पूर्ण अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • पितृदेव आवाहन एवं पितृ पूजन
    • भगवान श्रीहरि विष्णु पूजन
    • गजेन्द्र मोक्ष पाठ – 51 आवृत्तियाँ
    • तुलसी अर्चना
    • विशेष वैदिक हवन एवं आहुति
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं प्रसाद अर्पण

    शामिल सेवाएं

    • 3 अनुभवी वैदिक आचार्य
    • सभी पूजा सामग्री
    • तुलसी एवं भोग सामग्री
    • ब्राह्मण दक्षिणा

    विशेष सुविधाएं

    • नारायणी शिला, हरिद्वार में शास्त्रोक्त विधि से गजेन्द्र मोक्ष पाठ एवं वैदिक अनुष्ठान।
    • 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सम्पूर्ण पूजा सम्पन्न।
    • यजमान के नाम एवं गोत्र से वैदिक संकल्प।
    • पितृ शांति एवं भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा की मंगलकामना हेतु विशेष पाठ।
    • हवन, आहुति एवं पूर्णाहुति सहित सम्पूर्ण वैदिक विधि।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • जन्म कुंडली (यदि उपलब्ध हो)

    भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा एवं नारायणी शिला की पावन महिमा से सम्पन्न यह गजेन्द्र मोक्ष पाठ पूजा पितृ शांति, पितरों की तृप्ति, पारिवारिक सुख-शांति, संतान सुख, मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना करने वाला पवित्र वैदिक अनुष्ठान माना जाता है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹13,000₹15,00013% off

    2 वस्तुएँ शामिल

  • श्रेष्ठ

    7 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    5h

    यह अत्यंत पवित्र वैदिक अनुष्ठान नारायणी शिला, हरिद्वार में भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा एवं इस पावन मोक्षदायी तीर्थ की आध्यात्मिक महिमा के मध्य शास्त्रोक्त विधि-विधान से सम्पन्न कराया जाता है। यह पाठ पितृ दोष, पितरों की अतृप्ति, संतान प्राप्ति में आने वाली बाधाओं, पारिवारिक अशांति, मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानियों तथा जीवन की विभिन्न बाधाओं से शांति की मंगलकामना के लिए किया जाता है। इस श्रेष्ठ पैकेज में 7 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा लगभग 5 से 7 घंटे तक विस्तृत पाठ, पूजन एवं विशेष हवन सहित सम्पूर्ण अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • स्वस्ति वाचन
    • संकल्प
    • गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • पितृदेव आवाहन एवं पितृ पूजन
    • भगवान श्रीहरि विष्णु पूजन
    • विष्णु सहस्रनाम पाठ
    • गजेन्द्र मोक्ष पाठ – 108 आवृत्तियाँ
    • पुरुष सूक्त पाठ
    • तुलसी अर्चना
    • विशेष वैदिक हवन एवं आहुति
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं प्रसाद अर्पण

    शामिल सेवाएं

    • 7 अनुभवी वैदिक आचार्य
    • सभी पूजा सामग्री
    • तुलसी एवं विशेष भोग सामग्री
    • वैदिक आचार्यों की दक्षिणा

    विशेष सुविधाएं

    • नारायणी शिला, हरिद्वार में 7 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त अनुष्ठान।
    • आपके नाम एवं गोत्र से वैदिक संकल्प।
    • गजेन्द्र मोक्ष पाठ की 108 आवृत्तियों सहित विस्तृत अनुष्ठान।
    • भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना एवं विशेष वैदिक हवन।
    • पितृ शांति एवं पारिवारिक मंगलकामना हेतु विशेष संकल्प।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • अन्य आवश्यक जन्म विवरण, यदि उपलब्ध हो

    भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा एवं नारायणी शिला की पावन महिमा से सम्पन्न यह गजेन्द्र मोक्ष पाठ पूजा पितृ शांति, पितरों की तृप्ति, पारिवारिक सुख-शांति, संतान सुख, जीवन की बाधाओं से राहत तथा आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना करने वाला अत्यंत पवित्र वैदिक अनुष्ठान माना जाता है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹25,000₹31,00019% off

    2 वस्तुएँ शामिल

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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  3. पुजारीजी

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    तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।

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    संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।

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