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Pujari Ji

गजेन्द्र मोक्ष पाठ

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
गजेन्द्र मोक्ष पाठ

पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी सनातन परंपरा में पितृ कर्म, आत्मिक शांति एवं विभिन्न प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। इसी पवित्र स्थल पर भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित गजेन्द्र मोक्ष पाठ श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न कराया जाता है।

श्रीमद्भागवत महापुराण के अष्टम स्कंध में वर्णित गजेन्द्र मोक्ष प्रसंग भगवान विष्णु की शरणागति, भक्ति और कृपा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार संकट में फँसे गजेन्द्र ने पूर्ण श्रद्धा से भगवान विष्णु का स्मरण किया और भगवान ने उसकी रक्षा की। इसी भाव से यह पाठ जीवन के संकटों, भय, चिंता, बाधाओं और आध्यात्मिक अशांति के समय भगवान विष्णु की कृपा की मंगलकामना के लिए किया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ संबंधी बाधाओं, पारिवारिक अशांति, मानसिक तनाव, आर्थिक कठिनाइयों अथवा नकारात्मक वातावरण से परेशान परिवार भी इस पाठ के माध्यम से भगवान विष्णु की कृपा, पितृ शांति और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

Duration

3h – 4h

Best time

सुबह

Starting price

₹11,000

लाभ

  • जीवन में आने वाले संकटों एवं बाधाओं की शांति तथा अनुकूल परिस्थितियों की प्राप्ति की मंगलकामना की जाती है।
  • भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा, संरक्षण एवं आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • पितृ शांति, पितरों की तृप्ति एवं उनके आशीर्वाद की प्राप्ति की मंगलकामना की जाती है।
  • मानसिक शांति, आत्मबल एवं सकारात्मक सोच के विकास के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति, प्रेम, सौहार्द एवं आपसी सामंजस्य की कामना की जाती है।
  • नकारात्मक प्रभावों एवं आध्यात्मिक बाधाओं की शांति तथा आंतरिक संतुलन की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • आर्थिक कठिनाइयों एवं जीवन में आने वाली रुकावटों से राहत तथा स्थिरता की प्राप्ति की मंगलकामना की जाती है।
  • भक्ति, आत्मिक शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।

गजेन्द्र मोक्ष पाठ

गजेन्द्र मोक्ष पाठ भगवान श्रीहरि विष्णु की भक्ति एवं शरणागति पर आधारित एक महत्वपूर्ण धार्मिक पाठ है। इसका मूल प्रसंग श्रीमद्भागवत महापुराण के अष्टम स्कंध में वर्णित है। गजेन्द्र जब गंभीर संकट में फँसता है, तब वह भगवान विष्णु की शरण ग्रहण करता है। भगवान विष्णु उसकी पुकार सुनकर उसकी रक्षा करते हैं। यह प्रसंग भक्त और भगवान के बीच पूर्ण समर्पण तथा ईश्वर की करुणा का प्रतीक माना जाता है।

पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में इस पाठ का आयोजन पितृ शांति, मानसिक शांति, आध्यात्मिक कल्याण तथा जीवन में आने वाली बाधाओं की शांति की मंगलकामना से किया जाता है। यह किसी निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं देता, बल्कि श्रद्धा, प्रार्थना और धार्मिक आस्था के आधार पर सम्पन्न किया जाने वाला अनुष्ठान है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

  • भगवान श्रीहरि विष्णु
  • श्री लक्ष्मी नारायण
  • भगवान गणेश
  • पितृ देवता

भगवान विष्णु को पालनकर्ता एवं धर्म की रक्षा करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। गजेन्द्र मोक्ष प्रसंग उनकी करुणा, भक्तवत्सलता और शरणागत की रक्षा के भाव को दर्शाता है। पिशाचमोचन कुंड की धार्मिक परंपरा में पितृ संबंधी अनुष्ठानों का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए यहाँ गजेन्द्र मोक्ष पाठ भगवान विष्णु की कृपा, पितृ शांति और आत्मिक कल्याण की मंगलकामना के साथ किया जाता है।

मुहूर्त / यह पाठ कब कराना चाहिए?

  • एकादशी तिथि
  • गुरुवार
  • पूर्णिमा
  • अमावस्या
  • पितृ पक्ष
  • वैकुण्ठ एकादशी
  • गुरु पुष्य योग
  • योग्य वैदिक आचार्य द्वारा निर्धारित शुभ समय

किन परिस्थितियों में यह पाठ कराना चाहिए?

  • जीवन में बार-बार संकट या बाधाएँ आने पर
  • मानसिक तनाव, भय अथवा चिंता की स्थिति में
  • पितृ दोष की शांति की मंगलकामना के लिए
  • परिवार में निरंतर अशांति या कलह होने पर
  • आर्थिक कठिनाइयों एवं ऋण संबंधी बाधाओं की शांति की प्रार्थना हेतु
  • नकारात्मक वातावरण अथवा आध्यात्मिक अशांति की स्थिति में
  • पितरों की शांति एवं तृप्ति की मंगलकामना के लिए

मुख्य मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

ॐ नमो नारायणाय॥

गजेन्द्र मोक्ष पाठ के लाभ

  • जीवन में आने वाले संकटों एवं बाधाओं की शांति की मंगलकामना की जाती है।
  • भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा एवं संरक्षण की प्रार्थना की जाती है।
  • पितृ शांति एवं पितरों की तृप्ति की मंगलकामना की जाती है।
  • मानसिक शांति, आत्मबल एवं सकारात्मक सोच के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति एवं आपसी सामंजस्य की कामना की जाती है।
  • नकारात्मक प्रभावों एवं आध्यात्मिक बाधाओं की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • आर्थिक कठिनाइयों एवं जीवन में आने वाली रुकावटों से राहत की मंगलकामना की जाती है।
  • भक्ति, आत्मिक शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना की जाती है।

आध्यात्मिक महत्व

गजेन्द्र मोक्ष पाठ का आध्यात्मिक महत्व भगवान विष्णु के प्रति पूर्ण शरणागति और विश्वास से जुड़ा हुआ है। गजेन्द्र की कथा यह भाव प्रस्तुत करती है कि संकट के समय मनुष्य को ईश्वर का स्मरण, भक्ति और आत्मसमर्पण बनाए रखना चाहिए।

पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में यह पाठ पितृ शांति एवं आत्मिक कल्याण की धार्मिक भावना के साथ सम्पन्न किया जाता है। श्रद्धालु भगवान विष्णु की कृपा, पितरों की शांति, मानसिक संतुलन तथा परिवार के मंगल की प्रार्थना करते हैं।

विशेष जानकारी

  • अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में सम्पूर्ण अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।
  • नाम, गोत्र एवं संकल्प के अनुसार पाठ सम्पन्न कराया जा सकता है।
  • वाराणसी में उपस्थित न हो पाने वाले श्रद्धालुओं के लिए दूरस्थ सहभागिता की व्यवस्था उपलब्ध है।
  • पाठ के लिए आवश्यक पूजन सामग्री की व्यवस्था की जाती है।
  • सम्पूर्ण अनुष्ठान वैदिक मंत्रोच्चार एवं निर्धारित धार्मिक विधि के अनुसार सम्पन्न किया जाता है।

पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में सम्पन्न यह गजेन्द्र मोक्ष पाठ भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा प्राप्त करने हेतु अत्यंत पवित्र एवं प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान माना जाता है। यह पाठ मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, पितृ दोष की शांति, प्रेत बाधा से राहत, पितरों की तृप्ति एवं सद्गति, पारिवारिक सुख-शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना के लिए श्रद्धापूर्वक सम्पन्न किया जाता है।

पूजा स्थानवाराणसी

पिशाच मोचन कुंड

पिशाच मोचन कुंड

वाराणसी

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ अकाल या असामान्य मृत्यु से पीड़ित आत्माओं की शांति हेतु अनुष्ठान किए जाते हैं।

यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष और ब्रह्म दोष से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बलि, पिंडदान और तर्पण जैसे प्रमुख अनुष्ठान संपन्न होते हैं।

निकट स्थित कपर्दीश्वर महादेव मंदिर इसकी आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाता है। कुंड के पास स्थित पीपल वृक्ष को असंतुष्ट आत्माओं की शांति का प्रतीक माना जाता है।

पितृपक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए आते हैं।

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी में स्थित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष, ब्राह्मण दोष तथा अकाल मृत्यु से मुक्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहाँ भगवान शिव स्वयं आत्मा को तारक मंत्र देकर मुक्ति प्रदान करते हैं। किंतु जो व्यक्ति काशी के बाहर अकाल या असामयिक मृत्यु को प्राप्त होते हैं, उनकी आत्मा की शांति एवं उद्धार के लिए पिशाच मोचन कुंड का विशेष महत्व है।

इतिहास एवं पौराणिक कथा

काशी खंड एवं गरुड़ पुराण के अनुसार, पिशाच मोचन का प्राचीन नाम विमल तीर्थ या विमलोदक तीर्थ था। इसकी उत्पत्ति गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से भी पूर्व मानी जाती है।

मान्यता है कि भगवान शिव के भक्त कपर्दी ने इस कुंड की स्थापना की। उनकी तपस्या से यहाँ कपर्दीश्वर महादेव प्रकट हुए।

कथा के अनुसार महर्षि वाल्मीकि के मार्गदर्शन में एक ब्राह्मण, जो अपने पूर्व कर्मों के कारण प्रेत योनि में था, इस कुंड में स्नान कर कपर्दीश्वर महादेव की पूजा करने से मुक्त हुआ। तभी से यह स्थल “पिशाच मोचन” कहलाया।

आध्यात्मिक महत्व

  • गया के बाद यह पितृ कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
  • यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध विधिपूर्वक संपन्न किया जाता है।
  • पितृ पक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ श्राद्ध, तर्पण एवं विशेष अनुष्ठान करते हैं।

पवित्र पीपल वृक्ष

कुंड के समीप स्थित पीपल वृक्ष लोक-मान्यता के अनुसार असंतुष्ट आत्माओं की शांति से जुड़ा है। यहाँ प्रतीकात्मक रूप से सिक्के और कीलें लगाई जाती हैं। यद्यपि यह शास्त्रसम्मत परंपरा नहीं है, परंतु यह वर्षों से लोक-विश्वास का भाग रही है।

यहाँ किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान

🔸 त्रिपिंडी श्राद्ध

सत्व, रज और तम – तीनों प्रकार की प्रेत योनियों से मुक्ति हेतु।

ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की पूजा तथा तिल, जौ और चावल के आटे से पिंडदान।

🔸 नारायण बलि

दुर्घटना, आत्महत्या या अकाल मृत्यु से ग्रस्त आत्माओं की शांति हेतु।

🔸 पिंडदान एवं तर्पण

तीन पीढ़ियों तक के पितरों की शांति और पितृ दोष निवारण के लिए।

पूजारी जी द्वारा उपलब्ध सेवाएँ

  • पूर्ण त्रिपिंडी श्राद्ध व्यवस्था
  • नारायण बलि विशेष अनुष्ठान
  • विधिपूर्वक पिंडदान एवं तर्पण
  • नाम, गोत्र एवं कुल अनुसार व्यक्तिगत संकल्प
  • अनुभवी एवं शास्त्र-प्रमाणित स्थानीय पंडित
  • संपूर्ण पूजा सामग्री (तिल, जौ, चावल, वस्त्र, कलश, हवन सामग्री आदि)
  • ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा व्यवस्था
  • ऑन-साइट एवं ऑनलाइन बुकिंग सुविधा
  • विदेश से श्रद्धालुओं हेतु लाइव वीडियो विकल्प

हम प्रत्येक अनुष्ठान को पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध वैदिक विधि और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराते हैं।

👉 पूजारी जी से पिशाच मोचन कुंड में अपनी सेवा बुक करें और पितरों को शांति एवं मोक्ष प्रदान करने का पुण्य लाभ प्राप्त करें।

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ अकाल या असामान्य मृत्यु से पीड़ित आत्माओं की शांति हेतु अनुष्ठान किए जाते हैं।

यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष और ब्रह्म दोष से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बलि, पिंडदान और तर्पण जैसे प्रमुख अनुष्ठान संपन्न होते हैं।

निकट स्थित कपर्दीश्वर महादेव मंदिर इसकी आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाता है। कुंड के पास स्थित पीपल वृक्ष को असंतुष्ट आत्माओं की शांति का प्रतीक माना जाता है।

पितृपक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए आते हैं।

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी में स्थित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष, ब्राह्मण दोष तथा अकाल मृत्यु से मुक्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहाँ भगवान शिव स्वयं आत्मा को तारक मंत्र देकर मुक्ति प्रदान करते हैं। किंतु जो व्यक्ति काशी के बाहर अकाल या असामयिक मृत्यु को प्राप्त होते हैं, उनकी आत्मा की शांति एवं उद्धार के लिए पिशाच मोचन कुंड का विशेष महत्व है।

इतिहास एवं पौराणिक कथा

काशी खंड एवं गरुड़ पुराण के अनुसार, पिशाच मोचन का प्राचीन नाम विमल तीर्थ या विमलोदक तीर्थ था। इसकी उत्पत्ति गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से भी पूर्व मानी जाती है।

मान्यता है कि भगवान शिव के भक्त कपर्दी ने इस कुंड की स्थापना की। उनकी तपस्या से यहाँ कपर्दीश्वर महादेव प्रकट हुए।

कथा के अनुसार महर्षि वाल्मीकि के मार्गदर्शन में एक ब्राह्मण, जो अपने पूर्व कर्मों के कारण प्रेत योनि में था, इस कुंड में स्नान कर कपर्दीश्वर महादेव की पूजा करने से मुक्त हुआ। तभी से यह स्थल “पिशाच मोचन” कहलाया।

आध्यात्मिक महत्व

  • गया के बाद यह पितृ कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
  • यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध विधिपूर्वक संपन्न किया जाता है।
  • पितृ पक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ श्राद्ध, तर्पण एवं विशेष अनुष्ठान करते हैं।

पवित्र पीपल वृक्ष

कुंड के समीप स्थित पीपल वृक्ष लोक-मान्यता के अनुसार असंतुष्ट आत्माओं की शांति से जुड़ा है। यहाँ प्रतीकात्मक रूप से सिक्के और कीलें लगाई जाती हैं। यद्यपि यह शास्त्रसम्मत परंपरा नहीं है, परंतु यह वर्षों से लोक-विश्वास का भाग रही है।

यहाँ किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान

🔸 त्रिपिंडी श्राद्ध

सत्व, रज और तम – तीनों प्रकार की प्रेत योनियों से मुक्ति हेतु।

ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की पूजा तथा तिल, जौ और चावल के आटे से पिंडदान।

🔸 नारायण बलि

दुर्घटना, आत्महत्या या अकाल मृत्यु से ग्रस्त आत्माओं की शांति हेतु।

🔸 पिंडदान एवं तर्पण

तीन पीढ़ियों तक के पितरों की शांति और पितृ दोष निवारण के लिए।

पूजारी जी द्वारा उपलब्ध सेवाएँ

  • पूर्ण त्रिपिंडी श्राद्ध व्यवस्था
  • नारायण बलि विशेष अनुष्ठान
  • विधिपूर्वक पिंडदान एवं तर्पण
  • नाम, गोत्र एवं कुल अनुसार व्यक्तिगत संकल्प
  • अनुभवी एवं शास्त्र-प्रमाणित स्थानीय पंडित
  • संपूर्ण पूजा सामग्री (तिल, जौ, चावल, वस्त्र, कलश, हवन सामग्री आदि)
  • ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा व्यवस्था
  • ऑन-साइट एवं ऑनलाइन बुकिंग सुविधा
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    3h

    यह दिव्य वैदिक अनुष्ठान पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा एवं इस पवित्र मोक्षदायी तीर्थ की आध्यात्मिक ऊर्जा के मध्य शास्त्रोक्त विधि-विधान से सम्पन्न कराया जाता है। गजेन्द्र मोक्ष पाठ भगवान श्रीहरि विष्णु की शरण, संकटों से मुक्ति, पितृ संबंधी बाधाओं की शांति, मानसिक शांति, पारिवारिक सुख एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह अनुष्ठान जीवन में आने वाली बाधाओं, नकारात्मकता एवं अशांति की शांति तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

    इस उन्नत पैकेज में 3 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा सम्पूर्ण शास्त्रोक्त विधि से पूजा एवं गजेन्द्र मोक्ष पाठ सम्पन्न कराया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • पितृदेव आवाहन एवं पितृ पूजन
    • भगवान श्रीहरि विष्णु पूजन
    • गजेन्द्र मोक्ष पाठ – 51 आवृत्तियाँ
    • तुलसी अर्चना
    • विशेष वैदिक हवन एवं आहुति
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं प्रसाद अर्पण

    विशेष सुविधाएं

    • पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सम्पूर्ण अनुष्ठान।
    • यजमान के नाम एवं गोत्र से वैदिक संकल्प।
    • गजेन्द्र मोक्ष पाठ की निर्धारित आवृत्तियों सहित विधिवत अनुष्ठान।
    • पितृ पूजन एवं भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना का विशेष विधान।
    • सम्पूर्ण पूजा व्यवस्था व्यवस्थित एवं शास्त्रोक्त विधि से सम्पन्न की जाएगी।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • जन्म तिथि, जन्म समय एवं जन्म स्थान, यदि उपलब्ध हो
    • संकल्प के लिए आवश्यक पारिवारिक विवरण, यदि आवश्यक हो

    भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा एवं पिशाचमोचन तीर्थ की पवित्रता से सम्पन्न यह गजेन्द्र मोक्ष पाठ पूजा जीवन में मानसिक शांति, पारिवारिक सुख-शांति, पितृ संबंधी बाधाओं की शांति, संकटों से रक्षा, सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना करने वाला पवित्र वैदिक अनुष्ठान माना जाता है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹11,000₹15,00027% off

    2 वस्तुएँ शामिल

  • श्रेष्ठ

    7 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    4h

    पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में सम्पन्न होने वाला गजेन्द्र मोक्ष पाठ भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना से जुड़ा एक पवित्र वैदिक अनुष्ठान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पाठ जीवन में आने वाली बाधाओं, पितृ संबंधी अशांति, नकारात्मक प्रभावों तथा मानसिक एवं पारिवारिक परेशानियों की शांति के लिए किया जाता है। भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा और पिशाचमोचन तीर्थ की पावन महिमा के मध्य सम्पन्न यह अनुष्ठान शांति, सुरक्षा, सौभाग्य, पारिवारिक सुख एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना के लिए विशेष माना जाता है। इस श्रेष्ठ पैकेज में 7 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा विस्तृत पाठ, वैदिक विधियों एवं महाहवन सहित सम्पूर्ण अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • स्वस्ति वाचन
    • संकल्प
    • गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • पितृदेव एवं प्रेतात्माओं का वैदिक आवाहन
    • भगवान श्रीहरि विष्णु पूजन
    • विष्णु सहस्रनाम पाठ
    • गजेन्द्र मोक्ष पाठ – 108 आवृत्तियाँ
    • तुलसी अर्चना
    • विशेष वैदिक हवन एवं आहुति
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं प्रसाद अर्पण

    विशेष सुविधाएं

    • पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में विस्तृत वैदिक अनुष्ठान
    • 7 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सामूहिक पूजा एवं पाठ
    • भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के साथ गजेन्द्र मोक्ष पाठ की विशेष व्यवस्था
    • पितृ संबंधी अशांति एवं नकारात्मक प्रभावों की शांति हेतु विशेष अनुष्ठान
    • मानसिक शांति, पारिवारिक सुख एवं सकारात्मक ऊर्जा की मंगलकामना
    • वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति सहित सम्पूर्ण शास्त्रोक्त विधि

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • जन्म कुंडली (यदि उपलब्ध हो)

    भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा एवं पिशाचमोचन तीर्थ की पावन आध्यात्मिक महिमा से सम्पन्न यह दिव्य वैदिक अनुष्ठान जीवन में शांति, सुरक्षा, पारिवारिक सुख, सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना करता है। श्रद्धा एवं संकल्प के साथ सम्पन्न गजेन्द्र मोक्ष पाठ पितृ संबंधी अशांति, जीवन की बाधाओं एवं नकारात्मक प्रभावों की शांति तथा सौभाग्य और मंगल की कामना के लिए अत्यंत पवित्र अनुष्ठान माना जाता है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹21,000₹25,00016% off

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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    हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।

  4. पुजारीजी

    वैदिक विधि-विधान से पूजा संपन्न

    तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।

  5. पुजारीजी

    आपको प्रसाद व आशीर्वाद मिलता है

    संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।

हर चरण पर कॉल और व्हाट्सएप पर मार्गदर्शन व सहायता।

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