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Pujari Ji

गया श्राद्ध पूजा

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
गया श्राद्ध पूजा

पिशाचमोचन कुंड वाराणसी के प्रमुख पितृ तीर्थों में से एक माना जाता है। गया धाम में श्राद्ध एवं पिंडदान के लिए जाने वाले श्रद्धालु पारंपरिक रूप से गया श्राद्ध से पहले पिशाचमोचन तीर्थ में पितरों के निमित्त प्रारंभिक पितृ कर्म सम्पन्न करते हैं।

इस अनुष्ठान में संकल्प, तर्पण, पिंडदान, अन्न दान तथा परंपरा के अनुसार प्रतीकात्मक घोड़ा दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस प्रारंभिक पितृ कर्म के माध्यम से पितरों की तृप्ति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है तथा गया श्राद्ध के लिए धार्मिक रूप से शुभ आरंभ माना जाता है।

यह पिंडदान गया श्राद्ध का विकल्प नहीं माना जाता, बल्कि गया धाम में किए जाने वाले मुख्य श्राद्ध एवं पिंडदान से पूर्व की जाने वाली वैदिक प्रक्रिया के रूप में परंपरागत रूप से देखा जाता है।

Duration

3h – 4h

Best time

सुबह

Starting price

₹5,100

लाभ

  • पितरों की तृप्ति एवं सद्गति की मंगलकामना श्रद्धापूर्वक की जाती है।
  • गया श्राद्ध के लिए धार्मिक रूप से शुभ आरंभ तथा मंगलमय संकल्प की प्रार्थना की जाती है।
  • पितरों के निमित्त संकल्प एवं तर्पण को विधिपूर्वक संपन्न करने की श्रद्धापूर्ण भावना व्यक्त की जाती है।
  • पितृ दोष की शांति तथा पितृ कृपा की प्राप्ति की मंगलकामना की जाती है।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं धार्मिक कर्तव्य की भावना व्यक्त करने का पवित्र अवसर प्राप्त होता है।
  • परिवार में सुख, शांति, सौहार्द एवं समृद्धि की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • गया धाम में किए जाने वाले मुख्य श्राद्ध कर्म से पूर्व धार्मिक परंपरा के अनुसार आवश्यक प्रारंभिक विधि संपन्न करने का अवसर प्राप्त होता है।

गया श्राद्ध पूजा

पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में गया श्राद्ध पूर्व पिंडदान पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं धार्मिक कर्तव्य की भावना से सम्पन्न किया जाने वाला पितृ कर्म है। गया धाम में श्राद्ध करने वाले श्रद्धालु काशी में पितरों के निमित्त संकल्प लेकर इस अनुष्ठान की शुरुआत करते हैं।

वैदिक एवं धार्मिक परंपराओं में पिंडदान और तर्पण को पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने की महत्वपूर्ण विधि माना गया है। पिशाचमोचन तीर्थ में यह कर्म अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में शास्त्रोक्त विधि से सम्पन्न कराया जाता है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

इस पितृ कर्म में मुख्य रूप से पितरों का स्मरण एवं पूजन किया जाता है। इसके साथ संबंधित वैदिक देवताओं का आह्वान, तर्पण एवं संकल्प किया जाता है।

पिशाचमोचन कुंड को वाराणसी का महत्वपूर्ण पितृ तीर्थ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां पितरों के निमित्त किए गए तर्पण एवं पिंडदान से उनकी तृप्ति, सद्गति तथा परिवार के मंगल की प्रार्थना की जाती है।

मुहूर्त / यह पिंडदान कब कराया जाता है?

  • गया श्राद्ध के लिए प्रस्थान करने से पूर्व
  • पितृ पक्ष के दौरान
  • अमावस्या के अवसर पर
  • संबंधित श्राद्ध तिथि पर
  • योग्य वैदिक आचार्य के परामर्श के अनुसार शुभ समय में

किन लोगों को यह पिंडदान कराना चाहिए?

  • जो गया धाम में श्राद्ध एवं पिंडदान करने जा रहे हों
  • जो गया श्राद्ध से पहले काशी में पितरों के निमित्त संकल्प करना चाहते हों
  • जो अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करना चाहते हों
  • जो पितृ कर्म को पारंपरिक विधि से सम्पन्न करना चाहते हों
  • जो पितरों की तृप्ति एवं सद्गति की मंगलकामना करते हों

मुख्य मंत्र

इस अनुष्ठान में आचार्य द्वारा परंपरा एवं संकल्प के अनुसार वैदिक मंत्रों, पितृ तर्पण मंत्रों तथा संबंधित श्राद्ध मंत्रों का उच्चारण कराया जाता है।

गया श्राद्ध पूर्व पिंडदान के लाभ

  • पितरों की तृप्ति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है।
  • गया श्राद्ध के लिए धार्मिक रूप से शुभ आरंभ की प्रार्थना की जाती है।
  • पितरों के निमित्त संकल्प एवं तर्पण पूर्ण विधि से करने की भावना रहती है।
  • पितृ दोष की शांति एवं पितृ कृपा की मंगलकामना की जाती है।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं धार्मिक कर्तव्य की भावना व्यक्त की जाती है।
  • परिवार के सुख, शांति एवं समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
  • गया धाम में किए जाने वाले मुख्य श्राद्ध कर्म से पूर्व धार्मिक परंपरा के अनुसार आवश्यक प्रारंभिक विधि सम्पन्न की जाती है।

आध्यात्मिक महत्व

पिशाचमोचन कुंड में किया जाने वाला गया श्राद्ध पूर्व पिंडदान गया श्राद्ध का विकल्प नहीं है। इसे गया धाम में किए जाने वाले मुख्य श्राद्ध एवं पिंडदान से पहले की जाने वाली पूर्व वैदिक प्रक्रिया माना जाता है।

काशी में पितरों का स्मरण, संकल्प, तर्पण एवं पिंडदान करने के पश्चात श्रद्धालु गया धाम जाकर मुख्य श्राद्ध कर्म सम्पन्न करते हैं। यह परंपरा पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पारिवारिक धार्मिक दायित्व की भावना को प्रकट करती है।

विशेष जानकारी

  • यह अनुष्ठान पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सम्पन्न कराया जाता है।
  • श्रद्धालु के नाम, गोत्र एवं पितरों के विवरण के अनुसार संकल्प कराया जाता है।
  • पिंडदान, तर्पण एवं अन्य आवश्यक पितृ कर्म शास्त्रोक्त विधि से सम्पन्न किए जाते हैं।
  • परंपरा के अनुसार आवश्यक अन्न दान एवं प्रतीकात्मक घोड़ा दान की व्यवस्था की जा सकती है।
  • गया श्राद्ध से पूर्व की जाने वाली इस प्रक्रिया के बाद श्रद्धालु गया धाम में मुख्य श्राद्ध कर्म सम्पन्न कर सकते हैं।

पिशाचमोचन कुंड में किया जाने वाला यह पिंडदान गया श्राद्ध का विकल्प नहीं, बल्कि गया श्राद्ध की पूर्व वैदिक प्रक्रिया माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार काशी में पितरों का संकल्प, तर्पण एवं पिंडदान करने के पश्चात गया धाम में मुख्य श्राद्ध कर्म सम्पन्न किया जाता है।

पूजा स्थानवाराणसी

पिशाच मोचन कुंड

पिशाच मोचन कुंड

वाराणसी

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ अकाल या असामान्य मृत्यु से पीड़ित आत्माओं की शांति हेतु अनुष्ठान किए जाते हैं।

यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष और ब्रह्म दोष से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बलि, पिंडदान और तर्पण जैसे प्रमुख अनुष्ठान संपन्न होते हैं।

निकट स्थित कपर्दीश्वर महादेव मंदिर इसकी आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाता है। कुंड के पास स्थित पीपल वृक्ष को असंतुष्ट आत्माओं की शांति का प्रतीक माना जाता है।

पितृपक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए आते हैं।

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी में स्थित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष, ब्राह्मण दोष तथा अकाल मृत्यु से मुक्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहाँ भगवान शिव स्वयं आत्मा को तारक मंत्र देकर मुक्ति प्रदान करते हैं। किंतु जो व्यक्ति काशी के बाहर अकाल या असामयिक मृत्यु को प्राप्त होते हैं, उनकी आत्मा की शांति एवं उद्धार के लिए पिशाच मोचन कुंड का विशेष महत्व है।

इतिहास एवं पौराणिक कथा

काशी खंड एवं गरुड़ पुराण के अनुसार, पिशाच मोचन का प्राचीन नाम विमल तीर्थ या विमलोदक तीर्थ था। इसकी उत्पत्ति गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से भी पूर्व मानी जाती है।

मान्यता है कि भगवान शिव के भक्त कपर्दी ने इस कुंड की स्थापना की। उनकी तपस्या से यहाँ कपर्दीश्वर महादेव प्रकट हुए।

कथा के अनुसार महर्षि वाल्मीकि के मार्गदर्शन में एक ब्राह्मण, जो अपने पूर्व कर्मों के कारण प्रेत योनि में था, इस कुंड में स्नान कर कपर्दीश्वर महादेव की पूजा करने से मुक्त हुआ। तभी से यह स्थल “पिशाच मोचन” कहलाया।

आध्यात्मिक महत्व

  • गया के बाद यह पितृ कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
  • यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध विधिपूर्वक संपन्न किया जाता है।
  • पितृ पक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ श्राद्ध, तर्पण एवं विशेष अनुष्ठान करते हैं।

पवित्र पीपल वृक्ष

कुंड के समीप स्थित पीपल वृक्ष लोक-मान्यता के अनुसार असंतुष्ट आत्माओं की शांति से जुड़ा है। यहाँ प्रतीकात्मक रूप से सिक्के और कीलें लगाई जाती हैं। यद्यपि यह शास्त्रसम्मत परंपरा नहीं है, परंतु यह वर्षों से लोक-विश्वास का भाग रही है।

यहाँ किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान

🔸 त्रिपिंडी श्राद्ध

सत्व, रज और तम – तीनों प्रकार की प्रेत योनियों से मुक्ति हेतु।

ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की पूजा तथा तिल, जौ और चावल के आटे से पिंडदान।

🔸 नारायण बलि

दुर्घटना, आत्महत्या या अकाल मृत्यु से ग्रस्त आत्माओं की शांति हेतु।

🔸 पिंडदान एवं तर्पण

तीन पीढ़ियों तक के पितरों की शांति और पितृ दोष निवारण के लिए।

पूजारी जी द्वारा उपलब्ध सेवाएँ

  • पूर्ण त्रिपिंडी श्राद्ध व्यवस्था
  • नारायण बलि विशेष अनुष्ठान
  • विधिपूर्वक पिंडदान एवं तर्पण
  • नाम, गोत्र एवं कुल अनुसार व्यक्तिगत संकल्प
  • अनुभवी एवं शास्त्र-प्रमाणित स्थानीय पंडित
  • संपूर्ण पूजा सामग्री (तिल, जौ, चावल, वस्त्र, कलश, हवन सामग्री आदि)
  • ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा व्यवस्था
  • ऑन-साइट एवं ऑनलाइन बुकिंग सुविधा
  • विदेश से श्रद्धालुओं हेतु लाइव वीडियो विकल्प

हम प्रत्येक अनुष्ठान को पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध वैदिक विधि और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराते हैं।

👉 पूजारी जी से पिशाच मोचन कुंड में अपनी सेवा बुक करें और पितरों को शांति एवं मोक्ष प्रदान करने का पुण्य लाभ प्राप्त करें।

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ अकाल या असामान्य मृत्यु से पीड़ित आत्माओं की शांति हेतु अनुष्ठान किए जाते हैं।

यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष और ब्रह्म दोष से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बलि, पिंडदान और तर्पण जैसे प्रमुख अनुष्ठान संपन्न होते हैं।

निकट स्थित कपर्दीश्वर महादेव मंदिर इसकी आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाता है। कुंड के पास स्थित पीपल वृक्ष को असंतुष्ट आत्माओं की शांति का प्रतीक माना जाता है।

पितृपक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए आते हैं।

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी में स्थित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष, ब्राह्मण दोष तथा अकाल मृत्यु से मुक्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहाँ भगवान शिव स्वयं आत्मा को तारक मंत्र देकर मुक्ति प्रदान करते हैं। किंतु जो व्यक्ति काशी के बाहर अकाल या असामयिक मृत्यु को प्राप्त होते हैं, उनकी आत्मा की शांति एवं उद्धार के लिए पिशाच मोचन कुंड का विशेष महत्व है।

इतिहास एवं पौराणिक कथा

काशी खंड एवं गरुड़ पुराण के अनुसार, पिशाच मोचन का प्राचीन नाम विमल तीर्थ या विमलोदक तीर्थ था। इसकी उत्पत्ति गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से भी पूर्व मानी जाती है।

मान्यता है कि भगवान शिव के भक्त कपर्दी ने इस कुंड की स्थापना की। उनकी तपस्या से यहाँ कपर्दीश्वर महादेव प्रकट हुए।

कथा के अनुसार महर्षि वाल्मीकि के मार्गदर्शन में एक ब्राह्मण, जो अपने पूर्व कर्मों के कारण प्रेत योनि में था, इस कुंड में स्नान कर कपर्दीश्वर महादेव की पूजा करने से मुक्त हुआ। तभी से यह स्थल “पिशाच मोचन” कहलाया।

आध्यात्मिक महत्व

  • गया के बाद यह पितृ कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
  • यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध विधिपूर्वक संपन्न किया जाता है।
  • पितृ पक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ श्राद्ध, तर्पण एवं विशेष अनुष्ठान करते हैं।

पवित्र पीपल वृक्ष

कुंड के समीप स्थित पीपल वृक्ष लोक-मान्यता के अनुसार असंतुष्ट आत्माओं की शांति से जुड़ा है। यहाँ प्रतीकात्मक रूप से सिक्के और कीलें लगाई जाती हैं। यद्यपि यह शास्त्रसम्मत परंपरा नहीं है, परंतु यह वर्षों से लोक-विश्वास का भाग रही है।

यहाँ किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान

🔸 त्रिपिंडी श्राद्ध

सत्व, रज और तम – तीनों प्रकार की प्रेत योनियों से मुक्ति हेतु।

ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की पूजा तथा तिल, जौ और चावल के आटे से पिंडदान।

🔸 नारायण बलि

दुर्घटना, आत्महत्या या अकाल मृत्यु से ग्रस्त आत्माओं की शांति हेतु।

🔸 पिंडदान एवं तर्पण

तीन पीढ़ियों तक के पितरों की शांति और पितृ दोष निवारण के लिए।

पूजारी जी द्वारा उपलब्ध सेवाएँ

  • पूर्ण त्रिपिंडी श्राद्ध व्यवस्था
  • नारायण बलि विशेष अनुष्ठान
  • विधिपूर्वक पिंडदान एवं तर्पण
  • नाम, गोत्र एवं कुल अनुसार व्यक्तिगत संकल्प
  • अनुभवी एवं शास्त्र-प्रमाणित स्थानीय पंडित
  • संपूर्ण पूजा सामग्री (तिल, जौ, चावल, वस्त्र, कलश, हवन सामग्री आदि)
  • ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा व्यवस्था
  • ऑन-साइट एवं ऑनलाइन बुकिंग सुविधा
  • विदेश से श्रद्धालुओं हेतु लाइव वीडियो विकल्प

हम प्रत्येक अनुष्ठान को पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध वैदिक विधि और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराते हैं।

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    1h

    गया श्राद्ध एवं पिंडदान हिंदू धार्मिक परंपरा में पितरों के निमित्त किया जाने वाला महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान है। यह पवित्र कर्म पितरों की तृप्ति, आत्मिक शांति, पितृ दोष से संबंधित बाधाओं की शांति तथा पूर्वजों की सद्गति और मोक्ष की मंगलकामना के लिए सम्पन्न किया जाता है। इस उन्नत पैकेज में 1 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा सभी आवश्यक पूजा विधियां शास्त्रोक्त परंपरा के अनुसार सम्पन्न कराई जाती हैं। पिंडदान, तर्पण, पितृ पूजन एवं दान-दक्षिणा के माध्यम से श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण एवं सम्मान किया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • आचमन
    • तर्पण
    • भगवान विष्णु पूजन
    • पितृ पूजन
    • 16 पिंडों द्वारा पिंडदान
    • वैदिक मंत्रोच्चार
    • पिंड विसर्जन
    • ब्राह्मण भोजन
    • दान-दक्षिणा
    • शांति पाठ एवं आशीर्वचन

    विशेष सुविधाएं

    • शास्त्रोक्त विधि-विधान के अनुसार गया श्राद्ध एवं पिंडदान
    • 16 पिंडों द्वारा विधिवत पिंडदान
    • पितरों के निमित्त तर्पण एवं पूजन
    • भगवान विष्णु की आराधना के साथ पितृ कर्म
    • पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना
    • दान, भोजन एवं दक्षिणा की आवश्यक व्यवस्था

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • पितर का नाम एवं संबंध
    • जिन पितरों के लिए श्राद्ध किया जाना है उनका विवरण
    • निर्धारित तिथि एवं समय के अनुसार आचार्य द्वारा आवश्यक निर्देशों का पालन करें
    • पूजा के समय स्वच्छ एवं सफेद वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है

    भगवान विष्णु एवं पितरों की कृपा से सम्पन्न यह पवित्र गया श्राद्ध एवं पिंडदान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता अर्पित करने का महत्वपूर्ण वैदिक कर्म है। श्रद्धापूर्वक सम्पन्न तर्पण, पिंडदान, दान एवं प्रार्थना के माध्यम से पितरों की तृप्ति, आत्मिक शांति, सद्गति एवं परिवार में मंगल की कामना की जाती है।

    सभी पिंड दान सामग्रीदक्षिणा
    ₹5,100₹7,10028% off

    2 वस्तुएँ शामिल

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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कैसे काम करता है

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  1. आप

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  2. पुजारीजी

    हम प्रमाणित पुजारी नियुक्त करते हैं

    जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।

  3. पुजारीजी

    हम पूरी पूजा सामग्री की व्यवस्था करते हैं

    हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।

  4. पुजारीजी

    वैदिक विधि-विधान से पूजा संपन्न

    तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।

  5. पुजारीजी

    आपको प्रसाद व आशीर्वाद मिलता है

    संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।

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