“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja

महा मृत्युंजय मंत्र जाप हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और शक्तिशाली मंत्रों में से एक है। यह अकाल मृत्यु से रक्षा, रोगों से मुक्ति और मानसिक शांति प्रदान करने वाला माना जाता है। इसका नियमित जाप या विशेष अनुष्ठान जीवन की कठिनाइयों को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा लाने में सहायक होता है।
Duration
3h – 5h
Best time
सुबह
Starting price
₹16,000
महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली वैदिक मंत्र है, जिसे "संजीवनी मंत्र" भी कहा जाता है। इसका जप जीवन की गंभीर समस्याओं, रोग, भय, अकाल मृत्यु और मानसिक तनाव से मुक्ति पाने के लिए किया जाता हैः
"ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥"
मंत्र का अर्थ —
"हम तीन नेत्रों वाले (शिव) की पूजा करते हैं।जो ज्ञान की सुगंध से महक रहे हैं और सभी को पोषण देने वाले हैं।
जैसे ककड़ी (पकने पर) अपने बंधन (बेल) से अलग हो जाती है, वैसे ही। हम मृत्यु के भय से मुक्ति पाएं, और मोक्ष (अमरता) प्राप्त करें"।
इस मंत्र का नित्य जाप करने से नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं, आत्मबल और जीवन शक्ति बढ़ती है। यह शारीरिक, मानसिक और आत्मिक रोगों में अद्भुत लाभ देता है। विशेष रूप से गंभीर बीमारी, ऑपरेशन, संकट काल, या जीवन के अनिश्चित दौर में पशुपतिनाथ मंदिर, हरिद्वार में महामृत्युंजय जाप संजीवनी का कार्य करता है।
यह जाप न केवल रोग निवारण बल्कि दीर्घायु, विजय, और आध्यात्मिक उन्नति का भी मार्ग प्रशस्त करता है।
महामृत्युंजय जाप कब करें?
महाशिवरात्रि, श्रावण मास, अधिक मास, त्रयोदशी तिथि, या चतुर्दशी तिथि और इनके अलावा विशेष मुहूर्त देखकर तिथियों पर पशुपतिनाथ मंदिर,
हरिद्वार में जाप करने से पुण्य कई गुना बढ़ता है।
गंभीर रोग, मानसिक तनाव, या जीवन संकट की स्थिति मेंः तब नित्य या विशेष संख्या में जाप लाभकारी होता है।
पशुपतिनाथ मंदिर, हरिद्वार में महा मृत्युंजय जाप के लिए पंडित बुक करें। पंडितजी सारी पूजा सामग्री लेकर आएंगे। सभी पंडित बहुत अनुभवी हैं और वैदिक पाठशाला से पढ़े हुए हैं।
नोटः महा मृत्युंजय जाप की लागत देखने के लिए, कृपया "मूल्य निर्धारण और पैकेज देखें" बटन पर क्लिक करें।

हरिद्वार
हरिद्वार उत्तराखंड की प्रमुख तीर्थनगरी है, जिसे प्राचीन काल से ही गंगा तट पर स्थित महत्वपूर्ण धार्मिक एवं आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। पवित्र गंगा, प्राचीन मंदिरों, आश्रमों और वैदिक परंपराओं के कारण हरिद्वार का हिंदू तीर्थ परंपरा में विशेष स्थान है। गंगा के मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करने वाला यह नगर देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र रहा है।
पशुपति नाथ मंदिर, हरिद्वार भगवान शिव के पशुपति स्वरूप को समर्पित एक श्रद्धास्थल है। उपलब्ध प्रकाशित विवरणों के अनुसार यह मंदिर हरिद्वार में श्रवणनाथ मठ से जुड़ा हुआ है और भगवान पशुपतिनाथ की उपासना के लिए प्रसिद्ध है।
धार्मिक परंपरा में भगवान शिव को पशुपतिनाथ, अर्थात समस्त जीवों के स्वामी के रूप में पूजा जाता है। हरिद्वार की गंगा, शिव उपासना और तीर्थ परंपरा से जुड़ा वातावरण इस मंदिर की आध्यात्मिक महत्ता को और विशेष बनाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धालु यहाँ भगवान शिव की कृपा, सुख-शांति, आरोग्य, संरक्षण, बाधाओं की शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना से पूजा-अर्चना करते हैं।
भगवान शिव के पशुपति स्वरूप की उपासना सनातन परंपरा में विशेष धार्मिक महत्व रखती है। पशुपति स्वरूप भगवान शिव को समस्त जीवों के स्वामी, संरक्षक और कल्याणकारी देव के रूप में संबोधित करता है।
हरिद्वार स्थित पशुपति नाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और आध्यात्मिक साधना का माध्यम मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भक्त यहाँ विभिन्न आध्यात्मिक एवं पारिवारिक मंगलकामनाओं के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।
श्रद्धालु विशेष रूप से—
पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं।
भगवान शिव की उपासना से संबंधित विभिन्न धार्मिक एवं वैदिक अनुष्ठान श्रद्धा के अनुसार किए जाते हैं। किसी विशेष पूजा की उपलब्धता, विधि और आयोजन मंदिर की स्थानीय परंपरा तथा संबंधित आचार्य की व्यवस्था पर निर्भर कर सकती है।
प्रमुख रूप से किए जाने वाले शिव-संबंधित अनुष्ठानों में शामिल हो सकते हैं—
पूजा की विधि, मंत्र जाप और संकल्प व्यक्ति की धार्मिक आवश्यकता तथा जन्मकुंडली के आधार पर आचार्य द्वारा निर्धारित किए जा सकते हैं।
मंदिर में भगवान शिव के पशुपति स्वरूप की उपासना श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख धार्मिक केंद्र है। भक्त भगवान शिव का पूजन, अभिषेक और मंत्र जाप कर सुख, शांति, आरोग्य एवं संरक्षण की मंगलकामना करते हैं।
हरिद्वार की धार्मिक पहचान पवित्र गंगा से गहराई से जुड़ी हुई है। गंगा के तट पर स्नान, आचमन, पूजन और दीपदान हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखते हैं। गंगा का सान्निध्य हरिद्वार की तीर्थ परंपरा और आध्यात्मिक वातावरण को विशेष बनाता है।
हर की पौड़ी हरिद्वार के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यहाँ गंगा आरती और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मंदिर की यात्रा के साथ हर की पौड़ी और गंगा तट का दर्शन श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव हो सकता है।
हरिद्वार की धार्मिक परंपरा में गंगाद्वार, कुशावर्त, कनखल, बिल्व तीर्थ और नील पर्वत को पंचतीर्थ के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है। ये स्थल हरिद्वार की व्यापक तीर्थ परंपरा और धार्मिक विरासत को दर्शाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान पशुपतिनाथ की श्रद्धापूर्वक आराधना से विभिन्न आध्यात्मिक एवं सांसारिक मंगलकामनाएँ की जाती हैं। इन लाभों को धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए।
हरिद्वार का धार्मिक वातावरण गंगा, मंदिरों, आश्रमों, साधना परंपराओं, वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ा हुआ है। गंगा तट पर होने वाली आरती, दीपदान और मंत्रोच्चार तीर्थनगरी के आध्यात्मिक वातावरण को विशेष बनाते हैं।
पशुपति नाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना के साथ श्रद्धालु हरिद्वार की व्यापक तीर्थ परंपरा का अनुभव कर सकते हैं। श्रावण मास और महाशिवरात्रि जैसे शिव-संबंधित अवसरों पर भगवान शिव की उपासना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
भगवान शिव की उपासना के लिए निम्न अवसरों को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है—
इन अवसरों पर श्रद्धालु अपनी आस्था और धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान शिव का अभिषेक, पूजन, जाप एवं हवन करा सकते हैं।
हरिद्वार के लिए निकटतम प्रमुख हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून है। हवाई अड्डे से हरिद्वार तक सड़क मार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है।
हरिद्वार रेलवे स्टेशन देश के अनेक प्रमुख शहरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। रेलवे स्टेशन से स्थानीय परिवहन के माध्यम से मंदिर क्षेत्र तक पहुँचा जा सकता है।
हरिद्वार दिल्ली, देहरादून, ऋषिकेश और उत्तर भारत के अन्य प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। निजी वाहन, टैक्सी और बस के माध्यम से हरिद्वार पहुँचा जा सकता है।
पशुपति नाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना के लिए श्रद्धालु वर्षभर आ सकते हैं। धार्मिक दृष्टि से श्रावण मास, सावन सोमवार और महाशिवरात्रि जैसे अवसर विशेष माने जाते हैं।
यदि शांत वातावरण में दर्शन करना हो तो सामान्य दिनों में अपेक्षाकृत कम भीड़ वाले समय को चुना जा सकता है। पर्वों और विशेष धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो सकती है।
पूजा या विशेष अनुष्ठान के लिए जाने से पहले स्थानीय स्तर पर पूजा व्यवस्था, उपलब्धता और समय की जानकारी प्राप्त करना उचित है।
पशुपति नाथ मंदिर, हरिद्वार भगवान शिव के पशुपति स्वरूप की आराधना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। हरिद्वार की पवित्र गंगा, प्राचीन तीर्थ परंपरा और शिव भक्ति से जुड़ा वातावरण इस मंदिर की आध्यात्मिक पहचान को विशेष बनाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहाँ भगवान शिव की पूजा-अर्चना, अभिषेक, मंत्र जाप और अन्य धार्मिक अनुष्ठान सुख-शांति, आरोग्य, पारिवारिक कल्याण, बाधाओं की शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना से किए जाते हैं। हरिद्वार की तीर्थ परंपरा के साथ पशुपतिनाथ की उपासना श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, साधना और आध्यात्मिक चिंतन का अवसर प्रदान करती है।
जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।
4 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
इस पैकेज में 4 आचार्य एवं सभी आवश्यक पूजा सामग्री शामिल है, जो महामृत्युंजय मंत्र जाप (11,000) एवं दशांश हवन के माध्यम से स्वास्थ्य, सुरक्षा और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने के लिए किया जाता है।
पूजा की अवधि लगभग 4 से 5 घंटे होती है।
पूजा प्रक्रिया:
2 वस्तुएँ शामिल
7 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
इस पैकेज में 7 आचार्य एवं सभी आवश्यक पूजा सामग्री शामिल है, जो महामृत्युंजय मंत्र जाप (25,000) एवं दशांश हवन के माध्यम से स्वास्थ्य, सुरक्षा और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने के लिए किया जाता है।
पूजा की अवधि लगभग 4 से 5 घंटे होती है।
पूजा प्रक्रिया:
2 वस्तुएँ शामिल
18 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
इस पैकेज में 18 आचार्य एवं सभी आवश्यक पूजा सामग्री शामिल है, जो महामृत्युंजय मंत्र जाप (54,000) एवं दशांश हवन के माध्यम से स्वास्थ्य, सुरक्षा और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने के लिए किया जाता है।
पूजा की अवधि लगभग 4 से 5 घंटे होती है।
पूजा प्रक्रिया:
2 वस्तुएँ शामिल
41 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
इस पैकेज में 41 आचार्य एवं सभी आवश्यक पूजा सामग्री शामिल है, जो महामृत्युंजय मंत्र जाप (1,25,000) एवं दशांश हवन के माध्यम से स्वास्थ्य, दीर्घायु, सुरक्षा और गंभीर दोषों के निवारण के लिए अत्यंत प्रभावशाली अनुष्ठान है।
पूजा की अवधि लगभग 4 से 5 घंटे होती है।
पूजा प्रक्रिया:
2 वस्तुएँ शामिल
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“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
एक बार जानकारी दें। पुजारी, सामग्री, विधि-विधान और अपडेट — सब आपके लिए संभाला जाता है।
पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।
जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।
हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।
तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।
संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।
ऊपर दिए गए पैकेज में से चुनें या पूछताछ करें, हमारी टीम आपकी तारीख और विवरणों की पुष्टि करेगी।