“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja

नारायण नागबली पूजा में नारायण बलि और नाग बलि दोनों धार्मिक कर्म सम्मिलित होते हैं। नारायण बलि का संबंध विशेष रूप से उन दिवंगत आत्माओं की शांति एवं सद्गति की प्रार्थना से माना जाता है, जिनकी मृत्यु अकाल, असामयिक अथवा अप्राकृतिक परिस्थितियों में हुई हो। नाग बलि नाग संबंधी धार्मिक दोष एवं प्रायश्चित्त से जुड़ा विशेष कर्म माना जाता है।
ज्योतिषीय परंपरा में पितृ दोष, नाग दोष तथा कालसर्प योग जैसी स्थितियों के लिए विशेष शांति अनुष्ठानों की सलाह दी जाती है। इन दोषों का निर्धारण केवल सामान्य जीवन की परिस्थितियों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि जन्मकुंडली के विस्तृत परीक्षण और योग्य ज्योतिषाचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार किया जाना उचित है।
नारायणी शिला, हरिद्वार पितृ कर्म, श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान से संबंधित महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। यहाँ नारायण नागबली पूजा भगवान विष्णु की आराधना, पितृ कर्म तथा नाग देवता के पूजन के माध्यम से दिवंगत आत्माओं की शांति, पितृ तृप्ति एवं परिवार के कल्याण की मंगलकामना के साथ सम्पन्न कराई जाती है।
Duration
4h – 5h
Best time
सुबह
Starting price
₹21,000
नारायण नागबली पूजा एक विशेष वैदिक अनुष्ठान है जिसमें नारायण बलि एवं नाग बलि दोनों का विधान सम्मिलित होता है। यह पूजा धार्मिक परंपरा में पितृ शांति, दिवंगत आत्माओं की सद्गति, नाग संबंधी दोषों की शांति तथा धार्मिक प्रायश्चित्त के उद्देश्य से की जाती है।
नारायण बलि के माध्यम से अकाल या असामयिक मृत्यु को प्राप्त दिवंगत आत्मा की शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है। नाग बलि के माध्यम से नाग संबंधी धार्मिक दोषों एवं प्रायश्चित्त की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व
इस अनुष्ठान में भगवान विष्णु, पितृ देवताओं तथा नाग देवता का पूजन किया जाता है। अनुष्ठान की परंपरा के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु एवं रुद्र से संबंधित सूक्तों का पाठ तथा विभिन्न वैदिक कर्म भी सम्पन्न किए जा सकते हैं।
नारायणी शिला, हरिद्वार को पितृ कर्मों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। माँ गंगा की पवित्र साक्षी में यहाँ किया जाने वाला पितृ कर्म पूर्वजों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना से विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
नारायण नागबली पूजा कब कराई जाती है?
इस पूजा का समय कुल परंपरा, जन्मकुंडली, धार्मिक आवश्यकता तथा वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार निर्धारित किया जाता है।
विशेष तीर्थ अनुष्ठान के लिए तिथि और अवधि का निर्धारण संबंधित वैदिक आचार्य से परामर्श करके करना उचित माना जाता है।
किन परिस्थितियों में नारायण नागबली पूजा कराई जाती है?
धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान के लिए निम्न परिस्थितियों में विचार किया जा सकता है—
इन परिस्थितियों को धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के संदर्भ में समझना चाहिए। इन्हें किसी समस्या का निश्चित कारण नहीं माना जाना चाहिए।
नारायण नागबली पूजा के धार्मिक लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान के माध्यम से—
आध्यात्मिक महत्व
नारायण नागबली पूजा का आध्यात्मिक उद्देश्य पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म का निर्वहन करना तथा दिवंगत आत्माओं की शांति एवं सद्गति की प्रार्थना करना है। इसके साथ नाग देवता के प्रति श्रद्धा और धार्मिक प्रायश्चित्त की भावना भी इस अनुष्ठान का महत्वपूर्ण भाग है।
नारायणी शिला, हरिद्वार में माँ गंगा की पवित्र साक्षी में सम्पन्न होने वाला यह अनुष्ठान परिवार के आध्यात्मिक कल्याण, पितृ शांति तथा धार्मिक संतोष की मंगलकामना के लिए विशेष महत्व रखता है।
विशेष जानकारी
नारायण नागबली पूजा पितृ शांति, दिवंगत आत्माओं की सद्गति, नाग संबंधी दोषों की शांति तथा परिवार के सुख, शांति एवं कल्याण की मंगलकामना से सम्पन्न किया जाने वाला एक विशेष एवं पवित्र वैदिक अनुष्ठान है।

हरिद्वार
पितृ श्रद्धा का पवित्र तीर्थ — जहाँ पूर्वजों का स्मरण, नारायण की भक्ति और शांति की प्रार्थना एक साथ जुड़ती है
जहाँ श्रद्धा पूर्वजों तक पहुँचती है
हरिद्वार की पवित्र भूमि पर गंगा के निकट स्थित नारायणी शिला मंदिर एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जो भगवान नारायण की आराधना और पितृ कर्मों की परंपरा से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है।
यहाँ श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नारायणी शिला भगवान विष्णु के पवित्र स्वरूप से संबंधित मानी जाती है।
गंगा के पवित्र वातावरण के बीच स्थित यह स्थान उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है, जो अपने पितरों की शांति, कल्याण और सद्गति की प्रार्थना करते हैं।
पौराणिक एवं धार्मिक महत्व
नारायणी शिला का संबंध भगवान नारायण और पितृ कर्म की प्राचीन धार्मिक परंपरा से माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र शिला के समक्ष श्रद्धापूर्वक किए गए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान अर्पित करते हैं और उनके आध्यात्मिक कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
इसी आस्था के कारण देश के विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु नारायणी शिला में अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान कराने आते हैं।
सरल पूजा, गहरी श्रद्धा
नारायणी शिला में किए जाने वाले धार्मिक कर्म बाहरी दिखावे से अधिक श्रद्धा और भावनाओं से जुड़े माने जाते हैं।
पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध, दीपदान, मंत्रोच्चार और भगवान नारायण की पूजा के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं।
यहाँ प्रत्येक धार्मिक विधि का उद्देश्य अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और उनके लिए शांति एवं कल्याण की मंगलकामना करना है।
पितृ कर्म और धार्मिक अनुष्ठान
प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानः
विशेष अवसरों पर नारायणी शिला
पितृ पक्ष नारायणी शिला में पितृ कर्म के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवधि में अनेक श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करवाते हैं।
अमावस्या जैसी धार्मिक तिथियों पर भी पितृ शांति और पूर्वजों के कल्याण की कामना से विशेष धार्मिक कर्म किए जाते हैं।
गंगा के निकट आध्यात्मिक वातावरण
नारायणी शिला मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण हरिद्वार की पवित्र गंगा और प्राचीन तीर्थ परंपरा से जुड़ा हुआ है।
वैदिक मंत्रों का उच्चारण, पिंडदान और तर्पण की धार्मिक विधियां तथा गंगा का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों के साथ आध्यात्मिक रूप से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।
यहाँ किया गया पितृ स्मरण अनेक भक्तों के लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है।
श्रद्धालुओं की मंगलकामनाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारायणी शिला में पितृ कर्म करवाने से श्रद्धालु इन मंगलकामनाओं के साथ पूजा करते हैंः
इन सभी लाभों को धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में समझा जाता है।
दर्शन एवं स्थान
नारायणी शिला मंदिर, मायापुर, हरिद्वार में स्थित है और हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
निकटतम रेलवे स्टेशनः हरिद्वार जंक्शन
निकटतम प्रमुख हवाई अड्डाः जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून
स्थानीय स्तर पर ऑटो-रिक्शा, रिक्शा और टैक्सी द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
नारायणी शिला मंदिर में पूजा करवाएं
पुजारीजी.कॉम के माध्यम से नारायणी शिला मंदिर में विभिन्न पितृ एवं धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्था कराई जा सकती है।
प्रत्येक अनुष्ठान श्रद्धा, वैदिक विधि और धार्मिक परंपरा के अनुरूप संपन्न कराने का प्रयास किया जाता है।
पुजारीजी.कॉम के माध्यम से नारायणी शिला मंदिर में पितृ पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान बुक करें और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं शांति की प्रार्थना अर्पित करें।
आपकी श्रद्धा। हमारी पवित्र सेवा।
जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।
3 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
यह विशेष वैदिक अनुष्ठान नारायणी शिला, हरिद्वार के पवित्र तीर्थ क्षेत्र में 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रीय परंपरा एवं वैदिक विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न कराया जाता है। नारायण नागबली पूजा में नारायण बलि एवं नाग बलि दोनों प्रमुख अनुष्ठान सम्मिलित होते हैं। यह पूजा पितृ दोष, नाग दोष एवं कालसर्प योग जैसी ज्योतिषीय स्थितियों की शांति तथा दिवंगत आत्माओं की शांति, सद्गति एवं तृप्ति की मंगलकामना के लिए कराई जाती है। इस अनुष्ठान के माध्यम से पूर्वजों की शांति, पारिवारिक कल्याण एवं जीवन में शुभता की प्रार्थना की जाती है। पूजा की अवधि लगभग 3 से 4 घंटे होती है।
पूजा में शामिल विधियां
शामिल सेवाएं
विशेष सुविधाएं
आवश्यक जानकारी
नारायणी शिला, हरिद्वार में सम्पन्न यह नारायण नागबली अनुष्ठान भगवान विष्णु की कृपा, पितरों की शांति एवं नाग देवता की प्रसन्नता की मंगलकामना के साथ किया जाता है। यह पूर्वजों की तृप्ति, दिवंगत आत्माओं की सद्गति, पितृ एवं नाग संबंधी दोषों की शांति तथा परिवार में सुख, शांति और कल्याण की प्रार्थना का पवित्र वैदिक माध्यम माना जाता है।
2 वस्तुएँ शामिल
नारायण नाग बलि पूजा के बारे में हमसे बात करें
WhatsAppभक्तों की प्रतिक्रिया
“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
एक बार जानकारी दें। पुजारी, सामग्री, विधि-विधान और अपडेट — सब आपके लिए संभाला जाता है।
पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।
जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।
हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।
तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।
संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।
ऊपर दिए गए पैकेज में से चुनें या पूछताछ करें, हमारी टीम आपकी तारीख और विवरणों की पुष्टि करेगी।