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Pujari Ji

पितृ दोष निवारण पूजा

नारायणी शिला मंदिर, हरिद्वार
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
पितृ दोष निवारण पूजा

पितृ दोष निवारण पूजा सनातन परंपरा में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म के निर्वहन से जुड़ा विशेष अनुष्ठान है। धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जन्मकुंडली में पितृ दोष की स्थिति होने पर अथवा पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण या अन्य आवश्यक पितृ कर्म उचित रूप से न हो पाने की स्थिति में पितृ शांति के लिए विशेष पूजा एवं तर्पण कराया जाता है।

नारायणी शिला, हरिद्वार पितृ कर्म, श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। माँ गंगा एवं भगवान नारायण की पवित्र साक्षी में किया गया यह अनुष्ठान पूर्वजों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति तथा परिवार के कल्याण की मंगलकामना से सम्पन्न कराया जाता है।

ज्योतिषीय परंपरा में पितृ दोष का विचार सूर्य, राहु, केतु, शनि तथा जन्मकुंडली के अन्य ग्रहों की स्थिति एवं परस्पर संबंधों के आधार पर किया जाता है। केवल किसी एक ग्रह की स्थिति के आधार पर पितृ दोष निश्चित नहीं किया जाता। इसके लिए संपूर्ण जन्मकुंडली का योग्य ज्योतिषाचार्य द्वारा अध्ययन करना उचित माना जाता है।

Duration

2h – 4h

Starting price

₹11,000

लाभ

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूजा के माध्यम से पितरों की तृप्ति, शांति एवं कल्याण की मंगलकामना की जाती है।
  • पितृ दोष एवं पितृ संबंधी बाधाओं के शमन तथा परिवार के कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
  • पूर्वजों की सद्गति एवं मोक्ष की प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक मंगलकामना की जाती है।
  • पितृ अथवा प्रेत संबंधी बाधाओं की शांति एवं उनसे संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन की प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार में सुख-शांति, सौहार्द एवं आपसी सामंजस्य की मंगलकामना की जाती है।
  • विवाह एवं संतान संबंधी बाधाओं में राहत तथा अनुकूल परिस्थितियों की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • आर्थिक एवं व्यावसायिक जीवन में स्थिरता, प्रगति एवं उन्नति की मंगलकामना की जाती है।
  • परिवार के सुख, कल्याण, समृद्धि एवं मंगल की प्रार्थना की जाती है।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने तथा पारंपरिक पितृ धर्म का निर्वहन करने का पवित्र अवसर प्राप्त होता है।

पितृ दोष निवारण पूजा

पितृ दोष निवारण पूजा पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं पितृ धर्म के निर्वहन का विशेष माध्यम मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब पितरों के निमित्त किए जाने वाले श्राद्ध, तर्पण अथवा अन्य धार्मिक कर्म किसी कारण से अधूरे रह जाएँ, तब उनकी शांति एवं तृप्ति की मंगलकामना के लिए विशेष पितृ कर्म कराया जा सकता है।

नारायणी शिला, हरिद्वार में माँ गंगा एवं भगवान नारायण की पवित्र साक्षी में किया जाने वाला यह अनुष्ठान पितृ शांति, पूर्वजों की सद्गति तथा परिवार के कल्याण की प्रार्थना के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

इस पूजा में भगवान नारायण, पितृ देवताओं एवं माँ गंगा का स्मरण एवं पूजन किया जाता है। संकल्प, तर्पण एवं पितृ शांति की प्रार्थना के माध्यम से ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।

नारायणी शिला को पितृ कर्म के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार यहाँ किए जाने वाले श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान के माध्यम से पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है।

पितृ दोष की ज्योतिषीय स्थिति

ज्योतिषीय परंपरा में पितृ दोष का विचार विशेष रूप से निम्न स्थितियों के आधार पर किया जा सकता है—

  • सूर्य एवं राहु की युति या अशुभ संबंध।
  • सूर्य एवं केतु का विशेष अशुभ संबंध।
  • सूर्य का राहु, केतु या अन्य पाप ग्रहों से पीड़ित होना।
  • पंचम भाव एवं पंचमेश पर राहु-केतु या अन्य अशुभ ग्रहों का प्रभाव।
  • नवम भाव एवं नवमेश पर पाप ग्रहों का प्रभाव।
  • सूर्य का नवम भाव, नवमेश अथवा पितृ कारक तत्वों से अशुभ संबंध।
  • पितृ कर्म एवं पूर्वजों से संबंधित भावों पर राहु-केतु का प्रभाव।

इन योगों का वास्तविक प्रभाव लग्न, भाव, भावेश, ग्रह दृष्टि, युति, राशि, दशा-अंतर्दशा तथा संपूर्ण जन्मकुंडली के अध्ययन के बाद ही निर्धारित किया जाना चाहिए।

पितृ दोष निवारण पूजा कब करानी चाहिए?

  • जन्मकुंडली में पितृ दोष बताए जाने पर।
  • पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध या तर्पण लंबे समय से न हो पाने पर।
  • किसी दिवंगत सदस्य के निमित्त धार्मिक कर्म अधूरा रह जाने पर।
  • परिवार में पितृ संबंधी बाधा की धार्मिक मान्यता होने पर।
  • विवाह, संतान, परिवार या आर्थिक जीवन से संबंधित बाधाओं को पितृ दोष से जोड़े जाने पर।
  • योग्य ज्योतिषाचार्य अथवा वैदिक आचार्य के परामर्श के अनुसार।
  • अमावस्या, पितृपक्ष या अन्य उपयुक्त अवसरों पर कुल परंपरा के अनुसार।

किन परिस्थितियों में यह पूजा कराई जाती है?

धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार निम्न परिस्थितियों में पितृ शांति के लिए यह पूजा कराने की परंपरा है—

  • विवाह में बार-बार बाधा या विलंब।
  • संतान प्राप्ति में बाधा या संतान संबंधी चिंता।
  • परिवार में लगातार कलह एवं अशांति।
  • आर्थिक स्थिति में अस्थिरता।
  • नौकरी या व्यवसाय में बार-बार रुकावट।
  • महत्वपूर्ण कार्यों का बार-बार अटकना।
  • परिवार में बार-बार अप्रत्याशित संकट आना।
  • पूर्वजों से संबंधित स्वप्न बार-बार दिखाई देना।
  • पितृ या प्रेत बाधा की धार्मिक मान्यता होना।
  • किसी दिवंगत सदस्य के लिए श्राद्ध कर्म ठीक प्रकार से न हो पाना।

ये परिस्थितियाँ धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। किसी स्वास्थ्य, मानसिक, वैवाहिक या आर्थिक समस्या का कारण केवल पितृ दोष मानना उचित नहीं है।

पितृ दोष निवारण पूजा के धार्मिक लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूजा के माध्यम से—

  • पितरों की तृप्ति एवं शांति की मंगलकामना की जाती है।
  • पितृ दोष एवं पितृ संबंधी बाधाओं के शमन की प्रार्थना की जाती है।
  • पूर्वजों की सद्गति एवं मोक्ष की मंगलकामना की जाती है।
  • पितृ या प्रेत संबंधी बाधाओं की शांति की प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार में सुख-शांति एवं सौहार्द की मंगलकामना की जाती है।
  • विवाह एवं संतान संबंधी बाधाओं में राहत की प्रार्थना की जाती है।
  • आर्थिक एवं व्यवसायिक उन्नति की मंगलकामना की जाती है।
  • परिवार के कल्याण एवं समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर मिलता है।
  • पितृ धर्म एवं पारिवारिक धार्मिक परंपरा के निर्वहन की भावना दृढ़ होती है।

आध्यात्मिक महत्व

पितृ दोष निवारण पूजा केवल किसी दोष के शमन की प्रार्थना नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म के निर्वहन की सनातन परंपरा भी है। नारायणी शिला, हरिद्वार में माँ गंगा एवं भगवान नारायण की पवित्र साक्षी में किया जाने वाला यह पितृ कर्म पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति तथा परिवार के कल्याण की मंगलकामना से सम्पन्न कराया जाता है।

विशेष जानकारी

  • यह पूजा अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में शास्त्रीय विधि के अनुसार सम्पन्न कराई जाती है।
  • यजमान के नाम एवं गोत्र के अनुसार संकल्प कराया जाता है।
  • जन्मकुंडली परीक्षण आवश्यक होने पर जन्म तिथि, जन्म समय एवं जन्म स्थान की जानकारी ली जा सकती है।
  • पितरों के नाम एवं यजमान से उनके संबंध की जानकारी उपलब्ध होने पर संकल्प में सम्मिलित की जा सकती है।
  • पूजा में आवश्यक सामग्री की व्यवस्था वैदिक विधि के अनुसार की जाती है।
  • यदि श्रद्धालु हरिद्वार उपस्थित न हो सके, तो उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार संकल्प के माध्यम से अनुष्ठान कराया जा सकता है।

पितृ दोष निवारण पूजा का आध्यात्मिक उद्देश्य

पितृ दोष निवारण पूजा अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म व्यक्त करने की विशेष धार्मिक परंपरा है। नारायणी शिला, हरिद्वार में माँ गंगा एवं भगवान नारायण की पवित्र साक्षी में यह पूजा पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति तथा परिवार के कल्याण की मंगलकामना से सम्पन्न कराई जाती है।

पूजा की तिथि कुल परंपरा, जन्मकुंडली तथा वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार निर्धारित की जा सकती है। यजमान को पूजा के समय स्वच्छ एवं पारंपरिक वस्त्र धारण करने चाहिए और निर्धारित धार्मिक परंपरा एवं विधि-विधान के अनुसार पूजा सम्पन्न कराई जाती है।

पूजा स्थानहरिद्वार

नारायणी शिला मंदिर

नारायणी शिला मंदिर

हरिद्वार

पितृ श्रद्धा का पवित्र तीर्थ — जहाँ पूर्वजों का स्मरण, नारायण की भक्ति और शांति की प्रार्थना एक साथ जुड़ती है

जहाँ श्रद्धा पूर्वजों तक पहुँचती है

हरिद्वार की पवित्र भूमि पर गंगा के निकट स्थित नारायणी शिला मंदिर एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जो भगवान नारायण की आराधना और पितृ कर्मों की परंपरा से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है।

यहाँ श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नारायणी शिला भगवान विष्णु के पवित्र स्वरूप से संबंधित मानी जाती है।

गंगा के पवित्र वातावरण के बीच स्थित यह स्थान उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है, जो अपने पितरों की शांति, कल्याण और सद्गति की प्रार्थना करते हैं।

पौराणिक एवं धार्मिक महत्व

नारायणी शिला का संबंध भगवान नारायण और पितृ कर्म की प्राचीन धार्मिक परंपरा से माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र शिला के समक्ष श्रद्धापूर्वक किए गए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान अर्पित करते हैं और उनके आध्यात्मिक कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

इसी आस्था के कारण देश के विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु नारायणी शिला में अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान कराने आते हैं।

सरल पूजा, गहरी श्रद्धा

नारायणी शिला में किए जाने वाले धार्मिक कर्म बाहरी दिखावे से अधिक श्रद्धा और भावनाओं से जुड़े माने जाते हैं।

पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध, दीपदान, मंत्रोच्चार और भगवान नारायण की पूजा के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं।

यहाँ प्रत्येक धार्मिक विधि का उद्देश्य अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और उनके लिए शांति एवं कल्याण की मंगलकामना करना है।

पितृ कर्म और धार्मिक अनुष्ठान

प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानः

  • पिंडदान — पूर्वजों के लिए श्रद्धापूर्वक अर्पण
  • श्राद्ध कर्म — पितरों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता
  • तर्पण — पूर्वजों की शांति की प्रार्थना
  • पितृ शांति अनुष्ठान
  • पितृ मोक्ष जप एवं यज्ञ
  • भगवान नारायण की पूजा
  • हवन एवं वैदिक मंत्रोच्चार

विशेष अवसरों पर नारायणी शिला

पितृ पक्ष नारायणी शिला में पितृ कर्म के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवधि में अनेक श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करवाते हैं।

अमावस्या जैसी धार्मिक तिथियों पर भी पितृ शांति और पूर्वजों के कल्याण की कामना से विशेष धार्मिक कर्म किए जाते हैं।

गंगा के निकट आध्यात्मिक वातावरण

नारायणी शिला मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण हरिद्वार की पवित्र गंगा और प्राचीन तीर्थ परंपरा से जुड़ा हुआ है।

वैदिक मंत्रों का उच्चारण, पिंडदान और तर्पण की धार्मिक विधियां तथा गंगा का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों के साथ आध्यात्मिक रूप से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।

यहाँ किया गया पितृ स्मरण अनेक भक्तों के लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है।

श्रद्धालुओं की मंगलकामनाएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारायणी शिला में पितृ कर्म करवाने से श्रद्धालु इन मंगलकामनाओं के साथ पूजा करते हैंः

  • पितरों की शांति और सद्गति की प्रार्थना
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता
  • पितृ दोष से संबंधित धार्मिक मान्यताओं में शांति की कामना
  • परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना
  • पूर्वजों के आशीर्वाद एवं परिवार के कल्याण की मंगलकामना

इन सभी लाभों को धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में समझा जाता है।

दर्शन एवं स्थान

नारायणी शिला मंदिर, मायापुर, हरिद्वार में स्थित है और हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

निकटतम रेलवे स्टेशनः हरिद्वार जंक्शन

निकटतम प्रमुख हवाई अड्डाः जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून

स्थानीय स्तर पर ऑटो-रिक्शा, रिक्शा और टैक्सी द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

नारायणी शिला मंदिर में पूजा करवाएं

पुजारीजी.कॉम के माध्यम से नारायणी शिला मंदिर में विभिन्न पितृ एवं धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्था कराई जा सकती है।

  • पिंडदान एवं श्राद्ध पूजा
  • तर्पण एवं पितृ शांति अनुष्ठान
  • पितृ मोक्ष जप एवं यज्ञ
  • भगवान नारायण की पूजा
  • हवन एवं वैदिक मंत्रोच्चार
  • संकल्प एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान
  • अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में पूजा व्यवस्था

प्रत्येक अनुष्ठान श्रद्धा, वैदिक विधि और धार्मिक परंपरा के अनुरूप संपन्न कराने का प्रयास किया जाता है।

पुजारीजी.कॉम के माध्यम से नारायणी शिला मंदिर में पितृ पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान बुक करें और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं शांति की प्रार्थना अर्पित करें।

आपकी श्रद्धा। हमारी पवित्र सेवा।

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    उन्नत पैकेज में 3 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा पवित्र नारायणी शिला, हरिद्वार में माँ गंगा एवं भगवान नारायण की पवित्र साक्षी में शास्त्रीय परंपरा के अनुसार पितृ दोष निवारण हेतु त्रिपिंडी श्राद्ध सम्पन्न कराया जाता है। यह पितृ कर्म पितृ दोष, पितृ बाधा एवं प्रेत संबंधी बाधाओं के शमन, पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना के लिए कराया जाता है। त्रिपिंडी श्राद्ध में सात्त्विक, राजस एवं तामस प्रेतों के निमित्त तीन पिंड अर्पित किए जाते हैं। यह अनुष्ठान उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है जिनकी जन्मकुंडली में पितृ दोष बताया गया हो, पूर्वजों का श्राद्ध या तर्पण छूट गया हो अथवा पितरों की शांति एवं सद्गति के लिए विशेष पितृ कर्म कराना हो।

    पितृ दोष निवारण त्रिपिंडी श्राद्ध में शामिल प्रमुख अनुष्ठान

    • पितृ दोष निवारण संकल्प
    • पितृ तर्पण
    • भगवान विष्णु का पूजन
    • भगवान ब्रह्मा का पूजन
    • भगवान रुद्र का पूजन
    • सात्त्विक, राजस एवं तामस प्रेत आवाहन एवं पूजन
    • विष्णु सूक्त पाठ
    • ब्रह्म सूक्त पाठ
    • रुद्र सूक्त पाठ
    • सात्त्विक प्रेत के निमित्त जौ के पिंड
    • राजस प्रेत के निमित्त चावल के पिंड
    • तामस प्रेत के निमित्त तिल की पीठी से निर्मित पिंड
    • पिंड अर्पण एवं तर्पण
    • पितृ दोष शांति एवं सद्गति की प्रार्थना
    • दान-दक्षिणा
    • पिंड विसर्जन

    शामिल सेवाएं

    • 3 अनुभवी वैदिक आचार्य
    • सभी पूजा सामग्री
    • गजेन्द्र मोक्ष पाठ
    • पितृ सूक्त पाठ
    • श्रीमद्भगवद्गीता पाठ
    • ब्राह्मण दक्षिणा

    विशेष सुविधाएं

    • नारायणी शिला, हरिद्वार में शास्त्रीय परंपरा के अनुसार त्रिपिंडी श्राद्ध सम्पन्न कराया जाएगा।
    • सात्त्विक, राजस एवं तामस प्रेतों के निमित्त तीन पिंडों का विधिपूर्वक अर्पण किया जाएगा।
    • भगवान विष्णु, ब्रह्मा एवं रुद्र से संबंधित पूजन एवं सूक्त पाठ सम्पन्न किए जाएंगे।
    • यजमान के नाम, गोत्र एवं पितरों के संकल्प के साथ अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाएगा।
    • माँ गंगा एवं भगवान नारायण की पवित्र साक्षी में पितृ कर्म किया जाएगा।
    • पितृ शांति, तृप्ति एवं सद्गति की मंगलकामना के साथ सम्पूर्ण अनुष्ठान सम्पन्न होगा।
    • कुल परंपरा एवं वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार महिला यजमान भी संकल्प लेकर त्रिपिंडी श्राद्ध करा सकती हैं।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • पितरों का नाम, यदि ज्ञात हो
    • परिवार एवं पितृ संबंधी आवश्यक विवरण
    • जन्मकुंडली, यदि उपलब्ध हो

    माँ गंगा एवं भगवान नारायण की पवित्र साक्षी में सम्पन्न यह त्रिपिंडी श्राद्ध पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति तथा परिवार के मंगल और कल्याण की धार्मिक भावना से किया जाने वाला पवित्र पितृ कर्म है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
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    2 वस्तुएँ शामिल

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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कैसे काम करता है

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