“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja

पितृ दोष निवारण पूजा सनातन परंपरा में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म के निर्वहन से जुड़ा विशेष अनुष्ठान है। धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जन्मकुंडली में पितृ दोष की स्थिति होने पर अथवा पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण या अन्य आवश्यक पितृ कर्म उचित रूप से न हो पाने की स्थिति में पितृ शांति के लिए विशेष पूजा एवं तर्पण कराया जाता है।
नारायणी शिला, हरिद्वार पितृ कर्म, श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। माँ गंगा एवं भगवान नारायण की पवित्र साक्षी में किया गया यह अनुष्ठान पूर्वजों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति तथा परिवार के कल्याण की मंगलकामना से सम्पन्न कराया जाता है।
ज्योतिषीय परंपरा में पितृ दोष का विचार सूर्य, राहु, केतु, शनि तथा जन्मकुंडली के अन्य ग्रहों की स्थिति एवं परस्पर संबंधों के आधार पर किया जाता है। केवल किसी एक ग्रह की स्थिति के आधार पर पितृ दोष निश्चित नहीं किया जाता। इसके लिए संपूर्ण जन्मकुंडली का योग्य ज्योतिषाचार्य द्वारा अध्ययन करना उचित माना जाता है।
Duration
2h – 4h
Starting price
₹11,000
पितृ दोष निवारण पूजा पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं पितृ धर्म के निर्वहन का विशेष माध्यम मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब पितरों के निमित्त किए जाने वाले श्राद्ध, तर्पण अथवा अन्य धार्मिक कर्म किसी कारण से अधूरे रह जाएँ, तब उनकी शांति एवं तृप्ति की मंगलकामना के लिए विशेष पितृ कर्म कराया जा सकता है।
नारायणी शिला, हरिद्वार में माँ गंगा एवं भगवान नारायण की पवित्र साक्षी में किया जाने वाला यह अनुष्ठान पितृ शांति, पूर्वजों की सद्गति तथा परिवार के कल्याण की प्रार्थना के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व
इस पूजा में भगवान नारायण, पितृ देवताओं एवं माँ गंगा का स्मरण एवं पूजन किया जाता है। संकल्प, तर्पण एवं पितृ शांति की प्रार्थना के माध्यम से ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।
नारायणी शिला को पितृ कर्म के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार यहाँ किए जाने वाले श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान के माध्यम से पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है।
पितृ दोष की ज्योतिषीय स्थिति
ज्योतिषीय परंपरा में पितृ दोष का विचार विशेष रूप से निम्न स्थितियों के आधार पर किया जा सकता है—
इन योगों का वास्तविक प्रभाव लग्न, भाव, भावेश, ग्रह दृष्टि, युति, राशि, दशा-अंतर्दशा तथा संपूर्ण जन्मकुंडली के अध्ययन के बाद ही निर्धारित किया जाना चाहिए।
पितृ दोष निवारण पूजा कब करानी चाहिए?
किन परिस्थितियों में यह पूजा कराई जाती है?
धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार निम्न परिस्थितियों में पितृ शांति के लिए यह पूजा कराने की परंपरा है—
ये परिस्थितियाँ धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। किसी स्वास्थ्य, मानसिक, वैवाहिक या आर्थिक समस्या का कारण केवल पितृ दोष मानना उचित नहीं है।
पितृ दोष निवारण पूजा के धार्मिक लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूजा के माध्यम से—
आध्यात्मिक महत्व
पितृ दोष निवारण पूजा केवल किसी दोष के शमन की प्रार्थना नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म के निर्वहन की सनातन परंपरा भी है। नारायणी शिला, हरिद्वार में माँ गंगा एवं भगवान नारायण की पवित्र साक्षी में किया जाने वाला यह पितृ कर्म पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति तथा परिवार के कल्याण की मंगलकामना से सम्पन्न कराया जाता है।
विशेष जानकारी
पितृ दोष निवारण पूजा का आध्यात्मिक उद्देश्य
पितृ दोष निवारण पूजा अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म व्यक्त करने की विशेष धार्मिक परंपरा है। नारायणी शिला, हरिद्वार में माँ गंगा एवं भगवान नारायण की पवित्र साक्षी में यह पूजा पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति तथा परिवार के कल्याण की मंगलकामना से सम्पन्न कराई जाती है।
पूजा की तिथि कुल परंपरा, जन्मकुंडली तथा वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार निर्धारित की जा सकती है। यजमान को पूजा के समय स्वच्छ एवं पारंपरिक वस्त्र धारण करने चाहिए और निर्धारित धार्मिक परंपरा एवं विधि-विधान के अनुसार पूजा सम्पन्न कराई जाती है।

हरिद्वार
पितृ श्रद्धा का पवित्र तीर्थ — जहाँ पूर्वजों का स्मरण, नारायण की भक्ति और शांति की प्रार्थना एक साथ जुड़ती है
जहाँ श्रद्धा पूर्वजों तक पहुँचती है
हरिद्वार की पवित्र भूमि पर गंगा के निकट स्थित नारायणी शिला मंदिर एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जो भगवान नारायण की आराधना और पितृ कर्मों की परंपरा से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है।
यहाँ श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नारायणी शिला भगवान विष्णु के पवित्र स्वरूप से संबंधित मानी जाती है।
गंगा के पवित्र वातावरण के बीच स्थित यह स्थान उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है, जो अपने पितरों की शांति, कल्याण और सद्गति की प्रार्थना करते हैं।
पौराणिक एवं धार्मिक महत्व
नारायणी शिला का संबंध भगवान नारायण और पितृ कर्म की प्राचीन धार्मिक परंपरा से माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र शिला के समक्ष श्रद्धापूर्वक किए गए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान अर्पित करते हैं और उनके आध्यात्मिक कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
इसी आस्था के कारण देश के विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु नारायणी शिला में अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान कराने आते हैं।
सरल पूजा, गहरी श्रद्धा
नारायणी शिला में किए जाने वाले धार्मिक कर्म बाहरी दिखावे से अधिक श्रद्धा और भावनाओं से जुड़े माने जाते हैं।
पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध, दीपदान, मंत्रोच्चार और भगवान नारायण की पूजा के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं।
यहाँ प्रत्येक धार्मिक विधि का उद्देश्य अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और उनके लिए शांति एवं कल्याण की मंगलकामना करना है।
पितृ कर्म और धार्मिक अनुष्ठान
प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानः
विशेष अवसरों पर नारायणी शिला
पितृ पक्ष नारायणी शिला में पितृ कर्म के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवधि में अनेक श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करवाते हैं।
अमावस्या जैसी धार्मिक तिथियों पर भी पितृ शांति और पूर्वजों के कल्याण की कामना से विशेष धार्मिक कर्म किए जाते हैं।
गंगा के निकट आध्यात्मिक वातावरण
नारायणी शिला मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण हरिद्वार की पवित्र गंगा और प्राचीन तीर्थ परंपरा से जुड़ा हुआ है।
वैदिक मंत्रों का उच्चारण, पिंडदान और तर्पण की धार्मिक विधियां तथा गंगा का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों के साथ आध्यात्मिक रूप से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।
यहाँ किया गया पितृ स्मरण अनेक भक्तों के लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है।
श्रद्धालुओं की मंगलकामनाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारायणी शिला में पितृ कर्म करवाने से श्रद्धालु इन मंगलकामनाओं के साथ पूजा करते हैंः
इन सभी लाभों को धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में समझा जाता है।
दर्शन एवं स्थान
नारायणी शिला मंदिर, मायापुर, हरिद्वार में स्थित है और हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
निकटतम रेलवे स्टेशनः हरिद्वार जंक्शन
निकटतम प्रमुख हवाई अड्डाः जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून
स्थानीय स्तर पर ऑटो-रिक्शा, रिक्शा और टैक्सी द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
नारायणी शिला मंदिर में पूजा करवाएं
पुजारीजी.कॉम के माध्यम से नारायणी शिला मंदिर में विभिन्न पितृ एवं धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्था कराई जा सकती है।
प्रत्येक अनुष्ठान श्रद्धा, वैदिक विधि और धार्मिक परंपरा के अनुरूप संपन्न कराने का प्रयास किया जाता है।
पुजारीजी.कॉम के माध्यम से नारायणी शिला मंदिर में पितृ पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान बुक करें और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं शांति की प्रार्थना अर्पित करें।
आपकी श्रद्धा। हमारी पवित्र सेवा।
जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।
3 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
उन्नत पैकेज में 3 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा पवित्र नारायणी शिला, हरिद्वार में माँ गंगा एवं भगवान नारायण की पवित्र साक्षी में शास्त्रीय परंपरा के अनुसार पितृ दोष निवारण हेतु त्रिपिंडी श्राद्ध सम्पन्न कराया जाता है। यह पितृ कर्म पितृ दोष, पितृ बाधा एवं प्रेत संबंधी बाधाओं के शमन, पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना के लिए कराया जाता है। त्रिपिंडी श्राद्ध में सात्त्विक, राजस एवं तामस प्रेतों के निमित्त तीन पिंड अर्पित किए जाते हैं। यह अनुष्ठान उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है जिनकी जन्मकुंडली में पितृ दोष बताया गया हो, पूर्वजों का श्राद्ध या तर्पण छूट गया हो अथवा पितरों की शांति एवं सद्गति के लिए विशेष पितृ कर्म कराना हो।
पितृ दोष निवारण त्रिपिंडी श्राद्ध में शामिल प्रमुख अनुष्ठान
शामिल सेवाएं
विशेष सुविधाएं
आवश्यक जानकारी
माँ गंगा एवं भगवान नारायण की पवित्र साक्षी में सम्पन्न यह त्रिपिंडी श्राद्ध पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति तथा परिवार के मंगल और कल्याण की धार्मिक भावना से किया जाने वाला पवित्र पितृ कर्म है।
2 वस्तुएँ शामिल
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WhatsAppभक्तों की प्रतिक्रिया
“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
एक बार जानकारी दें। पुजारी, सामग्री, विधि-विधान और अपडेट — सब आपके लिए संभाला जाता है।
पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।
जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।
हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।
तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।
संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।
ऊपर दिए गए पैकेज में से चुनें या पूछताछ करें, हमारी टीम आपकी तारीख और विवरणों की पुष्टि करेगी।