“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja

पितृ दोष निवारण पूजा पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं धार्मिक कर्तव्य की भावना से सम्पन्न किया जाने वाला विशेष पितृ अनुष्ठान है। धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यदि किसी कारणवश पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण अथवा अन्य आवश्यक पितृ कर्म पूर्ण न हो पाए हों, तो पितृ शांति के लिए विशेष अनुष्ठान कराने की परंपरा है।
पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी को पितृ कर्म एवं प्रेत शांति से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक तीर्थ माना जाता है। यहाँ पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना से विभिन्न पितृ कर्म किए जाते हैं। पितृ दोष निवारण पूजा के माध्यम से पितृ देवताओं का स्मरण, तर्पण, पूजन एवं वैदिक अनुष्ठान करते हुए परिवार के कल्याण और पितृ शांति की प्रार्थना की जाती है।
Duration
3h – 4h
Best time
सुबह
Starting price
₹11,000
पितृ दोष की अवधारणा मुख्यतः ज्योतिषीय एवं धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है। जन्मकुंडली में सूर्य, राहु, केतु, शनि तथा पंचम एवं नवम भाव से संबंधित विशेष ग्रह स्थितियों का अध्ययन करते हुए पितृ दोष की संभावना का विचार किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों के निमित्त किए जाने वाले श्राद्ध, तर्पण एवं अन्य पितृ कर्म पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। जब जन्मकुंडली में पितृ दोष की संभावना बताई जाती है अथवा परिवार में पितृ संबंधी धार्मिक चिंता होती है, तब योग्य वैदिक आचार्य एवं ज्योतिषाचार्य के मार्गदर्शन में पितृ दोष निवारण पूजा कराने की परंपरा है।
कुंडली में पितृ दोष कैसे देखा जाता है?
ज्योतिषीय परंपरा में पितृ दोष का विचार केवल किसी एक ग्रह की स्थिति के आधार पर नहीं किया जाता। संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन आवश्यक माना जाता है। विशेष रूप से निम्न स्थितियों का विचार किया जाता है—
इन सभी स्थितियों का वास्तविक प्रभाव लग्न, भाव, भावेश, ग्रहों की दृष्टि, युति, राशि तथा दशा-अंतर्दशा सहित संपूर्ण जन्मकुंडली के अध्ययन के बाद ही निर्धारित किया जाना चाहिए।
मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व
इस पूजा में पितृ देवताओं के साथ भगवान शिव, भगवान विष्णु, भगवान गणेश एवं संबंधित देव शक्तियों का पूजन किया जा सकता है। अनुष्ठान की विधि जातक की जन्मकुंडली, संकल्प एवं पितृ कर्म की आवश्यकता के अनुसार निर्धारित की जाती है।
पिशाचमोचन कुंड को वाराणसी के महत्वपूर्ण पितृ तीर्थों में माना जाता है। धार्मिक परंपरा में यहाँ पितृ तर्पण, पिंडदान एवं पितृ शांति से जुड़े कर्मों का विशेष महत्व माना गया है। इस पवित्र स्थल पर किया जाने वाला अनुष्ठान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं उनके लिए शांति तथा सद्गति की मंगलकामना की भावना से सम्पन्न किया जाता है।
पितृ दोष निवारण पूजा कब करानी चाहिए?
पितृ दोष होने पर माने जाने वाले सामान्य संकेत
ज्योतिषीय एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ परिस्थितियों को पितृ दोष से संबंधित माना जाता है—
इन संकेतों को केवल पितृ दोष का निश्चित प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। इनका कारण निर्धारित करने के लिए संपूर्ण जन्मकुंडली का विस्तृत अध्ययन आवश्यक है।
पितृ या प्रेत बाधा की धार्मिक मान्यता होने पर
धार्मिक परंपराओं में कुछ परिस्थितियों को पितृ अथवा प्रेत बाधा से संबंधित माना जाता है, जैसे—
ऐसी स्थिति में योग्य वैदिक आचार्य एवं ज्योतिषाचार्य के मार्गदर्शन में उचित पितृ कर्म कराने की परंपरा है।
मुख्य मंत्र
पितृ दोष निवारण पूजा में संकल्प एवं अनुष्ठान की आवश्यकता के अनुसार पितृ मंत्र, तर्पण मंत्र तथा भगवान शिव एवं भगवान विष्णु से संबंधित वैदिक मंत्रों का जाप किया जा सकता है। मंत्रों का चयन जातक की परिस्थिति एवं अनुष्ठान की विधि के अनुसार किया जाता है।
पितृ दोष निवारण पूजा के लाभ
आध्यात्मिक महत्व
पितृ कर्म भारतीय धार्मिक परंपरा में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। पितृ दोष निवारण पूजा के दौरान पितरों का स्मरण, तर्पण एवं वैदिक विधि से प्रार्थना की जाती है। पिशाचमोचन कुंड जैसे पवित्र तीर्थ पर किया गया पितृ कर्म श्रद्धालु के लिए आध्यात्मिक श्रद्धा एवं आत्मिक शांति का माध्यम माना जाता है।
यह अनुष्ठान परिवार और पूर्वजों के बीच धार्मिक संबंध को स्मरण करने तथा पितरों की शांति एवं सद्गति की मंगलकामना करने की भावना से सम्पन्न किया जाता है।
विशेष जानकारी
पितृ दोष निवारण पूजा केवल किसी दोष के शमन की प्रार्थना नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म के निर्वहन की एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा भी है। पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में पितृ कर्म की धार्मिक परंपरा के अनुसार यह पूजा पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति तथा परिवार के सुख, शांति एवं कल्याण की मंगलकामना के लिए श्रद्धापूर्वक सम्पन्न कराई जाती है।

वाराणसी
पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ अकाल या असामान्य मृत्यु से पीड़ित आत्माओं की शांति हेतु अनुष्ठान किए जाते हैं।
यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष और ब्रह्म दोष से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बलि, पिंडदान और तर्पण जैसे प्रमुख अनुष्ठान संपन्न होते हैं।
निकट स्थित कपर्दीश्वर महादेव मंदिर इसकी आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाता है। कुंड के पास स्थित पीपल वृक्ष को असंतुष्ट आत्माओं की शांति का प्रतीक माना जाता है।
पितृपक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए आते हैं।
पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी में स्थित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष, ब्राह्मण दोष तथा अकाल मृत्यु से मुक्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहाँ भगवान शिव स्वयं आत्मा को तारक मंत्र देकर मुक्ति प्रदान करते हैं। किंतु जो व्यक्ति काशी के बाहर अकाल या असामयिक मृत्यु को प्राप्त होते हैं, उनकी आत्मा की शांति एवं उद्धार के लिए पिशाच मोचन कुंड का विशेष महत्व है।
इतिहास एवं पौराणिक कथा
काशी खंड एवं गरुड़ पुराण के अनुसार, पिशाच मोचन का प्राचीन नाम विमल तीर्थ या विमलोदक तीर्थ था। इसकी उत्पत्ति गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से भी पूर्व मानी जाती है।
मान्यता है कि भगवान शिव के भक्त कपर्दी ने इस कुंड की स्थापना की। उनकी तपस्या से यहाँ कपर्दीश्वर महादेव प्रकट हुए।
कथा के अनुसार महर्षि वाल्मीकि के मार्गदर्शन में एक ब्राह्मण, जो अपने पूर्व कर्मों के कारण प्रेत योनि में था, इस कुंड में स्नान कर कपर्दीश्वर महादेव की पूजा करने से मुक्त हुआ। तभी से यह स्थल “पिशाच मोचन” कहलाया।
आध्यात्मिक महत्व
पवित्र पीपल वृक्ष
कुंड के समीप स्थित पीपल वृक्ष लोक-मान्यता के अनुसार असंतुष्ट आत्माओं की शांति से जुड़ा है। यहाँ प्रतीकात्मक रूप से सिक्के और कीलें लगाई जाती हैं। यद्यपि यह शास्त्रसम्मत परंपरा नहीं है, परंतु यह वर्षों से लोक-विश्वास का भाग रही है।
यहाँ किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान
🔸 त्रिपिंडी श्राद्ध
सत्व, रज और तम – तीनों प्रकार की प्रेत योनियों से मुक्ति हेतु।
ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की पूजा तथा तिल, जौ और चावल के आटे से पिंडदान।
🔸 नारायण बलि
दुर्घटना, आत्महत्या या अकाल मृत्यु से ग्रस्त आत्माओं की शांति हेतु।
🔸 पिंडदान एवं तर्पण
तीन पीढ़ियों तक के पितरों की शांति और पितृ दोष निवारण के लिए।
पूजारी जी द्वारा उपलब्ध सेवाएँ
हम प्रत्येक अनुष्ठान को पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध वैदिक विधि और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराते हैं।
👉 पूजारी जी से पिशाच मोचन कुंड में अपनी सेवा बुक करें और पितरों को शांति एवं मोक्ष प्रदान करने का पुण्य लाभ प्राप्त करें।
पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ अकाल या असामान्य मृत्यु से पीड़ित आत्माओं की शांति हेतु अनुष्ठान किए जाते हैं।
यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष और ब्रह्म दोष से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बलि, पिंडदान और तर्पण जैसे प्रमुख अनुष्ठान संपन्न होते हैं।
निकट स्थित कपर्दीश्वर महादेव मंदिर इसकी आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाता है। कुंड के पास स्थित पीपल वृक्ष को असंतुष्ट आत्माओं की शांति का प्रतीक माना जाता है।
पितृपक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए आते हैं।
पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी में स्थित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष, ब्राह्मण दोष तथा अकाल मृत्यु से मुक्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहाँ भगवान शिव स्वयं आत्मा को तारक मंत्र देकर मुक्ति प्रदान करते हैं। किंतु जो व्यक्ति काशी के बाहर अकाल या असामयिक मृत्यु को प्राप्त होते हैं, उनकी आत्मा की शांति एवं उद्धार के लिए पिशाच मोचन कुंड का विशेष महत्व है।
इतिहास एवं पौराणिक कथा
काशी खंड एवं गरुड़ पुराण के अनुसार, पिशाच मोचन का प्राचीन नाम विमल तीर्थ या विमलोदक तीर्थ था। इसकी उत्पत्ति गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से भी पूर्व मानी जाती है।
मान्यता है कि भगवान शिव के भक्त कपर्दी ने इस कुंड की स्थापना की। उनकी तपस्या से यहाँ कपर्दीश्वर महादेव प्रकट हुए।
कथा के अनुसार महर्षि वाल्मीकि के मार्गदर्शन में एक ब्राह्मण, जो अपने पूर्व कर्मों के कारण प्रेत योनि में था, इस कुंड में स्नान कर कपर्दीश्वर महादेव की पूजा करने से मुक्त हुआ। तभी से यह स्थल “पिशाच मोचन” कहलाया।
आध्यात्मिक महत्व
पवित्र पीपल वृक्ष
कुंड के समीप स्थित पीपल वृक्ष लोक-मान्यता के अनुसार असंतुष्ट आत्माओं की शांति से जुड़ा है। यहाँ प्रतीकात्मक रूप से सिक्के और कीलें लगाई जाती हैं। यद्यपि यह शास्त्रसम्मत परंपरा नहीं है, परंतु यह वर्षों से लोक-विश्वास का भाग रही है।
यहाँ किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान
🔸 त्रिपिंडी श्राद्ध
सत्व, रज और तम – तीनों प्रकार की प्रेत योनियों से मुक्ति हेतु।
ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की पूजा तथा तिल, जौ और चावल के आटे से पिंडदान।
🔸 नारायण बलि
दुर्घटना, आत्महत्या या अकाल मृत्यु से ग्रस्त आत्माओं की शांति हेतु।
🔸 पिंडदान एवं तर्पण
तीन पीढ़ियों तक के पितरों की शांति और पितृ दोष निवारण के लिए।
पूजारी जी द्वारा उपलब्ध सेवाएँ
हम प्रत्येक अनुष्ठान को पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध वैदिक विधि और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराते हैं।
पूजारी जी से पिशाच मोचन कुंड में अपनी सेवा बुक करें और पितरों को शांति एवं मोक्ष प्रदान करने का पुण्य लाभ प्राप्त करें।
जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।
3 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
यह विशेष पितृ कर्म पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रीय परंपरा के अनुसार सम्पन्न कराया जाता है। यह अनुष्ठान पितृ दोष, पितृ बाधा एवं प्रेत संबंधी बाधाओं की शांति, पितरों की तृप्ति तथा सद्गति की मंगलकामना के लिए किया जाता है। त्रिपिंडी श्राद्ध में सात्त्विक, राजस एवं तामस प्रेतों के निमित्त तीन पिंड अर्पित किए जाते हैं। यह कर्म उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है जिनकी जन्मकुंडली में पितृ दोष बताया गया हो, पूर्वजों के श्राद्ध या तर्पण का विधान छूट गया हो अथवा पितरों की शांति एवं सद्गति के लिए विशेष पितृ कर्म कराना हो।
पितृ दोष निवारण त्रिपिंडी श्राद्ध में शामिल प्रमुख अनुष्ठान
विशेष सुविधाएं
आवश्यक जानकारी
पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में सम्पन्न यह त्रिपिंडी श्राद्ध पितरों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने, उनकी तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना करने तथा परिवार के आध्यात्मिक कल्याण के लिए किया जाने वाला महत्वपूर्ण पितृ कर्म माना जाता है।
2 वस्तुएँ शामिल
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WhatsAppभक्तों की प्रतिक्रिया
“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
एक बार जानकारी दें। पुजारी, सामग्री, विधि-विधान और अपडेट — सब आपके लिए संभाला जाता है।
पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।
जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।
हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।
तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।
संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।
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