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Pujari Ji

पितृ दोष निवारण पूजा

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
पितृ दोष निवारण पूजा

पितृ दोष निवारण पूजा पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं धार्मिक कर्तव्य की भावना से सम्पन्न किया जाने वाला विशेष पितृ अनुष्ठान है। धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यदि किसी कारणवश पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण अथवा अन्य आवश्यक पितृ कर्म पूर्ण न हो पाए हों, तो पितृ शांति के लिए विशेष अनुष्ठान कराने की परंपरा है।

पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी को पितृ कर्म एवं प्रेत शांति से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक तीर्थ माना जाता है। यहाँ पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना से विभिन्न पितृ कर्म किए जाते हैं। पितृ दोष निवारण पूजा के माध्यम से पितृ देवताओं का स्मरण, तर्पण, पूजन एवं वैदिक अनुष्ठान करते हुए परिवार के कल्याण और पितृ शांति की प्रार्थना की जाती है।

Duration

3h – 4h

Best time

सुबह

Starting price

₹11,000

लाभ

  • पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना श्रद्धापूर्वक की जाती है।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने तथा पितृ धर्म का निर्वहन करने का पवित्र अवसर प्राप्त होता है।
  • पितृ दोष से संबंधित अशुभ ग्रह प्रभावों के शमन तथा जीवन में शुभता की प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति, सौहार्द एवं आपसी सामंजस्य की मंगलकामना की जाती है।
  • संतान, विवाह, परिवार एवं आर्थिक जीवन में शुभता, स्थिरता एवं अनुकूल परिस्थितियों की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • मानसिक चिंता एवं पारिवारिक अशांति से राहत तथा मानसिक शांति की प्राप्ति की मंगलकामना की जाती है।
  • पितरों के आशीर्वाद एवं परिवार के आध्यात्मिक कल्याण, उन्नति एवं मंगल के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।

पितृ दोष निवारण पूजा

पितृ दोष की अवधारणा मुख्यतः ज्योतिषीय एवं धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है। जन्मकुंडली में सूर्य, राहु, केतु, शनि तथा पंचम एवं नवम भाव से संबंधित विशेष ग्रह स्थितियों का अध्ययन करते हुए पितृ दोष की संभावना का विचार किया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों के निमित्त किए जाने वाले श्राद्ध, तर्पण एवं अन्य पितृ कर्म पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। जब जन्मकुंडली में पितृ दोष की संभावना बताई जाती है अथवा परिवार में पितृ संबंधी धार्मिक चिंता होती है, तब योग्य वैदिक आचार्य एवं ज्योतिषाचार्य के मार्गदर्शन में पितृ दोष निवारण पूजा कराने की परंपरा है।

कुंडली में पितृ दोष कैसे देखा जाता है?

ज्योतिषीय परंपरा में पितृ दोष का विचार केवल किसी एक ग्रह की स्थिति के आधार पर नहीं किया जाता। संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन आवश्यक माना जाता है। विशेष रूप से निम्न स्थितियों का विचार किया जाता है—

  • सूर्य एवं राहु की युति अथवा उनका अशुभ संबंध।
  • सूर्य एवं केतु का विशेष अशुभ संबंध।
  • सूर्य का राहु, केतु अथवा अन्य पाप ग्रहों से पीड़ित होना।
  • पंचम भाव एवं पंचमेश पर राहु-केतु अथवा अन्य अशुभ ग्रहों का प्रभाव।
  • नवम भाव एवं नवमेश पर पाप ग्रहों का प्रभाव।
  • सूर्य का नवम भाव, नवमेश अथवा पितृ कारक तत्वों से अशुभ संबंध।
  • पितृ कर्म एवं पूर्वजों से संबंधित भावों पर राहु-केतु का प्रभाव।

इन सभी स्थितियों का वास्तविक प्रभाव लग्न, भाव, भावेश, ग्रहों की दृष्टि, युति, राशि तथा दशा-अंतर्दशा सहित संपूर्ण जन्मकुंडली के अध्ययन के बाद ही निर्धारित किया जाना चाहिए।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

इस पूजा में पितृ देवताओं के साथ भगवान शिव, भगवान विष्णु, भगवान गणेश एवं संबंधित देव शक्तियों का पूजन किया जा सकता है। अनुष्ठान की विधि जातक की जन्मकुंडली, संकल्प एवं पितृ कर्म की आवश्यकता के अनुसार निर्धारित की जाती है।

पिशाचमोचन कुंड को वाराणसी के महत्वपूर्ण पितृ तीर्थों में माना जाता है। धार्मिक परंपरा में यहाँ पितृ तर्पण, पिंडदान एवं पितृ शांति से जुड़े कर्मों का विशेष महत्व माना गया है। इस पवित्र स्थल पर किया जाने वाला अनुष्ठान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं उनके लिए शांति तथा सद्गति की मंगलकामना की भावना से सम्पन्न किया जाता है।

पितृ दोष निवारण पूजा कब करानी चाहिए?

  • जन्मकुंडली में पितृ दोष की संभावना बताई गई हो।
  • परिवार में लंबे समय से पितृ संबंधी धार्मिक चिंता बनी हो।
  • पूर्वजों का श्राद्ध अथवा तर्पण लंबे समय से न हो पाया हो।
  • किसी दिवंगत परिजन के निमित्त धार्मिक कर्म अधूरा रह गया हो।
  • योग्य ज्योतिषाचार्य द्वारा पितृ शांति अनुष्ठान की सलाह दी गई हो।
  • अमावस्या, पितृ पक्ष अथवा अन्य उपयुक्त तिथि पर।
  • योग्य वैदिक आचार्य द्वारा निर्धारित शुभ समय के अनुसार।

पितृ दोष होने पर माने जाने वाले सामान्य संकेत

ज्योतिषीय एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ परिस्थितियों को पितृ दोष से संबंधित माना जाता है—

  • विवाह में बार-बार बाधा अथवा अनावश्यक विलंब।
  • संतान प्राप्ति में बाधा अथवा संतान संबंधी चिंताएँ।
  • परिवार में लगातार कलह एवं अशांति।
  • आर्थिक स्थिति में अस्थिरता।
  • नौकरी अथवा व्यवसाय में बार-बार रुकावट।
  • महत्वपूर्ण कार्यों का बार-बार अटकना।
  • परिवार में बार-बार अप्रत्याशित संकट आना।
  • पूर्वजों से संबंधित स्वप्न बार-बार दिखाई देना।
  • श्राद्ध अथवा तर्पण का लंबे समय से न हो पाना।

इन संकेतों को केवल पितृ दोष का निश्चित प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। इनका कारण निर्धारित करने के लिए संपूर्ण जन्मकुंडली का विस्तृत अध्ययन आवश्यक है।

पितृ या प्रेत बाधा की धार्मिक मान्यता होने पर

धार्मिक परंपराओं में कुछ परिस्थितियों को पितृ अथवा प्रेत बाधा से संबंधित माना जाता है, जैसे—

  • दिवंगत परिजनों का बार-बार स्वप्न में दिखाई देना।
  • मृत पूर्वजों से संबंधित बार-बार स्वप्न अथवा घटनाएँ होना।
  • परिवार में प्रेत बाधा की धार्मिक मान्यता होना।
  • किसी दिवंगत व्यक्ति के निमित्त धार्मिक कर्म अधूरा रह जाना।
  • पूर्वजों का श्राद्ध अथवा तर्पण छूट जाना।
  • असामयिक मृत्यु के बाद विशेष पितृ शांति की आवश्यकता अनुभव होना।

ऐसी स्थिति में योग्य वैदिक आचार्य एवं ज्योतिषाचार्य के मार्गदर्शन में उचित पितृ कर्म कराने की परंपरा है।

मुख्य मंत्र

पितृ दोष निवारण पूजा में संकल्प एवं अनुष्ठान की आवश्यकता के अनुसार पितृ मंत्र, तर्पण मंत्र तथा भगवान शिव एवं भगवान विष्णु से संबंधित वैदिक मंत्रों का जाप किया जा सकता है। मंत्रों का चयन जातक की परिस्थिति एवं अनुष्ठान की विधि के अनुसार किया जाता है।

पितृ दोष निवारण पूजा के लाभ

  • पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना की जाती है।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्राप्त होता है।
  • पितृ दोष से संबंधित अशुभ ग्रह प्रभावों के शमन की प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति एवं सामंजस्य की मंगलकामना की जाती है।
  • संतान, विवाह, परिवार एवं आर्थिक जीवन में शुभता की प्रार्थना की जाती है।
  • मानसिक चिंता एवं पारिवारिक अशांति से राहत की मंगलकामना की जाती है।
  • पितरों के आशीर्वाद एवं परिवार के आध्यात्मिक कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

आध्यात्मिक महत्व

पितृ कर्म भारतीय धार्मिक परंपरा में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। पितृ दोष निवारण पूजा के दौरान पितरों का स्मरण, तर्पण एवं वैदिक विधि से प्रार्थना की जाती है। पिशाचमोचन कुंड जैसे पवित्र तीर्थ पर किया गया पितृ कर्म श्रद्धालु के लिए आध्यात्मिक श्रद्धा एवं आत्मिक शांति का माध्यम माना जाता है।

यह अनुष्ठान परिवार और पूर्वजों के बीच धार्मिक संबंध को स्मरण करने तथा पितरों की शांति एवं सद्गति की मंगलकामना करने की भावना से सम्पन्न किया जाता है।

विशेष जानकारी

  • पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।
  • नाम, गोत्र एवं आवश्यक जन्म विवरण के आधार पर संकल्प लिया जाता है।
  • आवश्यकता होने पर जन्मकुंडली के अनुसार विशेष पितृ शांति अनुष्ठान निर्धारित किया जा सकता है।
  • तर्पण, पूजन, पितृ मंत्र जाप, हवन एवं अन्य आवश्यक पितृ कर्म अनुष्ठान की विधि के अनुसार सम्पन्न किए जाते हैं।
  • पूजा के लिए आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की जा सकती है।
  • जो श्रद्धालु वाराणसी उपस्थित नहीं हो सकते, उनके लिए दूरस्थ संकल्प की व्यवस्था उपलब्ध हो सकती है।

पितृ दोष निवारण पूजा केवल किसी दोष के शमन की प्रार्थना नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं पितृ धर्म के निर्वहन की एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा भी है। पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में पितृ कर्म की धार्मिक परंपरा के अनुसार यह पूजा पितरों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति तथा परिवार के सुख, शांति एवं कल्याण की मंगलकामना के लिए श्रद्धापूर्वक सम्पन्न कराई जाती है।

पूजा स्थानवाराणसी

पिशाच मोचन कुंड

पिशाच मोचन कुंड

वाराणसी

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ अकाल या असामान्य मृत्यु से पीड़ित आत्माओं की शांति हेतु अनुष्ठान किए जाते हैं।

यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष और ब्रह्म दोष से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बलि, पिंडदान और तर्पण जैसे प्रमुख अनुष्ठान संपन्न होते हैं।

निकट स्थित कपर्दीश्वर महादेव मंदिर इसकी आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाता है। कुंड के पास स्थित पीपल वृक्ष को असंतुष्ट आत्माओं की शांति का प्रतीक माना जाता है।

पितृपक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए आते हैं।

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी में स्थित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष, ब्राह्मण दोष तथा अकाल मृत्यु से मुक्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहाँ भगवान शिव स्वयं आत्मा को तारक मंत्र देकर मुक्ति प्रदान करते हैं। किंतु जो व्यक्ति काशी के बाहर अकाल या असामयिक मृत्यु को प्राप्त होते हैं, उनकी आत्मा की शांति एवं उद्धार के लिए पिशाच मोचन कुंड का विशेष महत्व है।

इतिहास एवं पौराणिक कथा

काशी खंड एवं गरुड़ पुराण के अनुसार, पिशाच मोचन का प्राचीन नाम विमल तीर्थ या विमलोदक तीर्थ था। इसकी उत्पत्ति गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से भी पूर्व मानी जाती है।

मान्यता है कि भगवान शिव के भक्त कपर्दी ने इस कुंड की स्थापना की। उनकी तपस्या से यहाँ कपर्दीश्वर महादेव प्रकट हुए।

कथा के अनुसार महर्षि वाल्मीकि के मार्गदर्शन में एक ब्राह्मण, जो अपने पूर्व कर्मों के कारण प्रेत योनि में था, इस कुंड में स्नान कर कपर्दीश्वर महादेव की पूजा करने से मुक्त हुआ। तभी से यह स्थल “पिशाच मोचन” कहलाया।

आध्यात्मिक महत्व

  • गया के बाद यह पितृ कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
  • यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध विधिपूर्वक संपन्न किया जाता है।
  • पितृ पक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ श्राद्ध, तर्पण एवं विशेष अनुष्ठान करते हैं।

पवित्र पीपल वृक्ष

कुंड के समीप स्थित पीपल वृक्ष लोक-मान्यता के अनुसार असंतुष्ट आत्माओं की शांति से जुड़ा है। यहाँ प्रतीकात्मक रूप से सिक्के और कीलें लगाई जाती हैं। यद्यपि यह शास्त्रसम्मत परंपरा नहीं है, परंतु यह वर्षों से लोक-विश्वास का भाग रही है।

यहाँ किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान

🔸 त्रिपिंडी श्राद्ध

सत्व, रज और तम – तीनों प्रकार की प्रेत योनियों से मुक्ति हेतु।

ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की पूजा तथा तिल, जौ और चावल के आटे से पिंडदान।

🔸 नारायण बलि

दुर्घटना, आत्महत्या या अकाल मृत्यु से ग्रस्त आत्माओं की शांति हेतु।

🔸 पिंडदान एवं तर्पण

तीन पीढ़ियों तक के पितरों की शांति और पितृ दोष निवारण के लिए।

पूजारी जी द्वारा उपलब्ध सेवाएँ

  • पूर्ण त्रिपिंडी श्राद्ध व्यवस्था
  • नारायण बलि विशेष अनुष्ठान
  • विधिपूर्वक पिंडदान एवं तर्पण
  • नाम, गोत्र एवं कुल अनुसार व्यक्तिगत संकल्प
  • अनुभवी एवं शास्त्र-प्रमाणित स्थानीय पंडित
  • संपूर्ण पूजा सामग्री (तिल, जौ, चावल, वस्त्र, कलश, हवन सामग्री आदि)
  • ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा व्यवस्था
  • ऑन-साइट एवं ऑनलाइन बुकिंग सुविधा
  • विदेश से श्रद्धालुओं हेतु लाइव वीडियो विकल्प

हम प्रत्येक अनुष्ठान को पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध वैदिक विधि और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराते हैं।

👉 पूजारी जी से पिशाच मोचन कुंड में अपनी सेवा बुक करें और पितरों को शांति एवं मोक्ष प्रदान करने का पुण्य लाभ प्राप्त करें।

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ अकाल या असामान्य मृत्यु से पीड़ित आत्माओं की शांति हेतु अनुष्ठान किए जाते हैं।

यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष और ब्रह्म दोष से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बलि, पिंडदान और तर्पण जैसे प्रमुख अनुष्ठान संपन्न होते हैं।

निकट स्थित कपर्दीश्वर महादेव मंदिर इसकी आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाता है। कुंड के पास स्थित पीपल वृक्ष को असंतुष्ट आत्माओं की शांति का प्रतीक माना जाता है।

पितृपक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए आते हैं।

पिशाच मोचन कुंड, वाराणसी में स्थित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। यह स्थान प्रेत योनि, पितृ दोष, ब्राह्मण दोष तथा अकाल मृत्यु से मुक्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहाँ भगवान शिव स्वयं आत्मा को तारक मंत्र देकर मुक्ति प्रदान करते हैं। किंतु जो व्यक्ति काशी के बाहर अकाल या असामयिक मृत्यु को प्राप्त होते हैं, उनकी आत्मा की शांति एवं उद्धार के लिए पिशाच मोचन कुंड का विशेष महत्व है।

इतिहास एवं पौराणिक कथा

काशी खंड एवं गरुड़ पुराण के अनुसार, पिशाच मोचन का प्राचीन नाम विमल तीर्थ या विमलोदक तीर्थ था। इसकी उत्पत्ति गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से भी पूर्व मानी जाती है।

मान्यता है कि भगवान शिव के भक्त कपर्दी ने इस कुंड की स्थापना की। उनकी तपस्या से यहाँ कपर्दीश्वर महादेव प्रकट हुए।

कथा के अनुसार महर्षि वाल्मीकि के मार्गदर्शन में एक ब्राह्मण, जो अपने पूर्व कर्मों के कारण प्रेत योनि में था, इस कुंड में स्नान कर कपर्दीश्वर महादेव की पूजा करने से मुक्त हुआ। तभी से यह स्थल “पिशाच मोचन” कहलाया।

आध्यात्मिक महत्व

  • गया के बाद यह पितृ कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
  • यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध विधिपूर्वक संपन्न किया जाता है।
  • पितृ पक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु यहाँ श्राद्ध, तर्पण एवं विशेष अनुष्ठान करते हैं।

पवित्र पीपल वृक्ष

कुंड के समीप स्थित पीपल वृक्ष लोक-मान्यता के अनुसार असंतुष्ट आत्माओं की शांति से जुड़ा है। यहाँ प्रतीकात्मक रूप से सिक्के और कीलें लगाई जाती हैं। यद्यपि यह शास्त्रसम्मत परंपरा नहीं है, परंतु यह वर्षों से लोक-विश्वास का भाग रही है।

यहाँ किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान

🔸 त्रिपिंडी श्राद्ध

सत्व, रज और तम – तीनों प्रकार की प्रेत योनियों से मुक्ति हेतु।

ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की पूजा तथा तिल, जौ और चावल के आटे से पिंडदान।

🔸 नारायण बलि

दुर्घटना, आत्महत्या या अकाल मृत्यु से ग्रस्त आत्माओं की शांति हेतु।

🔸 पिंडदान एवं तर्पण

तीन पीढ़ियों तक के पितरों की शांति और पितृ दोष निवारण के लिए।

पूजारी जी द्वारा उपलब्ध सेवाएँ

  • पूर्ण त्रिपिंडी श्राद्ध व्यवस्था
  • नारायण बलि विशेष अनुष्ठान
  • विधिपूर्वक पिंडदान एवं तर्पण
  • नाम, गोत्र एवं कुल अनुसार व्यक्तिगत संकल्प
  • अनुभवी एवं शास्त्र-प्रमाणित स्थानीय पंडित
  • संपूर्ण पूजा सामग्री (तिल, जौ, चावल, वस्त्र, कलश, हवन सामग्री आदि)
  • ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा व्यवस्था
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    यह विशेष पितृ कर्म पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रीय परंपरा के अनुसार सम्पन्न कराया जाता है। यह अनुष्ठान पितृ दोष, पितृ बाधा एवं प्रेत संबंधी बाधाओं की शांति, पितरों की तृप्ति तथा सद्गति की मंगलकामना के लिए किया जाता है। त्रिपिंडी श्राद्ध में सात्त्विक, राजस एवं तामस प्रेतों के निमित्त तीन पिंड अर्पित किए जाते हैं। यह कर्म उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है जिनकी जन्मकुंडली में पितृ दोष बताया गया हो, पूर्वजों के श्राद्ध या तर्पण का विधान छूट गया हो अथवा पितरों की शांति एवं सद्गति के लिए विशेष पितृ कर्म कराना हो।

    पितृ दोष निवारण त्रिपिंडी श्राद्ध में शामिल प्रमुख अनुष्ठान

    • पितृ दोष निवारण संकल्प
    • पितृ तर्पण
    • भगवान विष्णु का पूजन
    • भगवान ब्रह्मा का पूजन
    • भगवान रुद्र का पूजन
    • सात्त्विक, राजस एवं तामस प्रेत आवाहन एवं पूजन
    • विष्णु सूक्त पाठ
    • ब्रह्म सूक्त पाठ
    • रुद्र सूक्त पाठ
    • सात्त्विक प्रेत के निमित्त जौ के पिंड
    • राजस प्रेत के निमित्त चावल के पिंड
    • तामस प्रेत के निमित्त तिल की पीठी से बने पिंड
    • पिंड अर्पण एवं तर्पण
    • पितृ दोष शांति एवं सद्गति की प्रार्थना
    • दान-दक्षिणा
    • पिंड विसर्जन

    विशेष सुविधाएं

    • पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में शास्त्रीय परंपरा के अनुसार त्रिपिंडी श्राद्ध सम्पन्न कराया जाएगा।
    • सात्त्विक, राजस एवं तामस प्रेतों के निमित्त तीन पिंडों का विधिपूर्वक अर्पण किया जाएगा।
    • भगवान विष्णु, ब्रह्मा एवं रुद्र से संबंधित पूजन एवं सूक्त-पाठ सम्पन्न कराया जाएगा।
    • यजमान के नाम, गोत्र एवं पितरों के संकल्प के साथ अनुष्ठान कराया जाएगा।
    • पितृ शांति, तृप्ति एवं सद्गति की मंगलकामना के साथ पितृ कर्म सम्पन्न किया जाएगा।
    • परिवार में पुरुष सदस्य उपलब्ध न होने की स्थिति में कुल परंपरा एवं वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार महिला यजमान भी संकल्प लेकर त्रिपिंडी श्राद्ध करा सकती हैं।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • पितरों के नाम एवं संबंध, यदि ज्ञात हों
    • जन्मकुंडली, यदि उपलब्ध हो
    • पितृ कर्म से संबंधित विशेष जानकारी, यदि कोई हो

    पिशाचमोचन कुंड, वाराणसी में सम्पन्न यह त्रिपिंडी श्राद्ध पितरों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने, उनकी तृप्ति, शांति एवं सद्गति की मंगलकामना करने तथा परिवार के आध्यात्मिक कल्याण के लिए किया जाने वाला महत्वपूर्ण पितृ कर्म माना जाता है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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