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Pujari Ji

पितृ गायत्री मंत्र जाप

नारायणी शिला मंदिर, वाराणसी
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
पितृ गायत्री मंत्र जाप

पितृ गायत्री मंत्र जाप हिंदू धार्मिक परंपरा में पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं उनके आध्यात्मिक कल्याण की भावना से किया जाने वाला विशेष अनुष्ठान है। जन्मकुंडली में पितृ दोष होने, परिवार में बार-बार बाधाएँ आने अथवा पूर्वजों की शांति के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान की आवश्यकता अनुभव होने पर इसकी मंगलकामना की जाती है।

हरिद्वार की नारायणी शिला पितृ कर्म एवं पितृ शांति से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध पवित्र तीर्थ माना जाता है। भगवान नारायण एवं माँ गंगा की पावन उपस्थिति में पितृ गायत्री मंत्र जाप, तर्पण तथा अन्य वैदिक कर्मों के माध्यम से पितरों की तृप्ति, सद्गति एवं परिवार के आध्यात्मिक कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

Duration

3h – 4h

Best time

सुबह

Starting price

₹13,000

लाभ

  • पितृ दोष की शांति तथा परिवार के कल्याण और शुभता की मंगलकामना की जाती है।
  • पितरों की सद्गति, शांति एवं मोक्ष की प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति, समृद्धि, सौहार्द एवं सकारात्मक वातावरण के संचार की कामना की जाती है।
  • संतान, विवाह एवं करियर से संबंधित बाधाओं में राहत तथा अनुकूल परिस्थितियों की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • मानसिक तनाव, नकारात्मक विचारों एवं नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से मुक्ति तथा मानसिक शांति की मंगलकामना की जाती है।
  • भगवान नारायण एवं पितृ देवताओं की कृपा से जीवन में शुभता, आध्यात्मिक उन्नति एवं आंतरिक शांति की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।

पितृ गायत्री मंत्र जाप

पितृ गायत्री मंत्र जाप पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं उनके आध्यात्मिक कल्याण की मंगलकामना से सम्पन्न किया जाने वाला वैदिक अनुष्ठान है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में पितृ तर्पण, श्राद्ध एवं पितृ पूजन का विशेष महत्व माना गया है।

नारायणी शिला, हरिद्वार में यह अनुष्ठान भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माँ गंगा की पावन साक्षी में सम्पन्न किया जाता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार यहाँ किए गए पितृ कर्मों के माध्यम से पूर्वजों की शांति, तृप्ति एवं सद्गति की प्रार्थना की जाती है।

अनुष्ठान का प्रारम्भ भगवान गणेश के पूजन एवं संकल्प से किया जाता है। इसके पश्चात भगवान विष्णु का पूजन, पितृ आवाहन, पितृ गायत्री मंत्र जाप, तर्पण, आवश्यकता के अनुसार पिंड अर्पण, वैदिक हवन एवं पूर्णाहुति सम्पन्न की जाती है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

  • भगवान श्रीहरि विष्णु
  • माता गंगा
  • पितृ देवता
  • भगवान गणेश
  • वैदिक देवता

नारायणी शिला को पितृ कर्म एवं पितृ शांति के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान नारायण की आराधना एवं गंगा तट पर किए गए पितृ कर्मों के माध्यम से पितरों की तृप्ति, सद्गति एवं आध्यात्मिक कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

शुभ मुहूर्त / पितृ गायत्री मंत्र जाप कब कराना चाहिए?

  • पितृ दोष की स्थिति में
  • पितृ पक्ष के दौरान
  • अमावस्या के अवसर पर
  • सर्वपितृ अमावस्या के दिन
  • पूर्वजों की शांति एवं सद्गति की मंगलकामना के लिए
  • योग्य ज्योतिषाचार्य अथवा वैदिक आचार्य के परामर्शानुसार

किन परिस्थितियों में यह अनुष्ठान कराना चाहिए?

  • जन्मकुंडली में पितृ दोष होने पर
  • पूर्वजों की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान की इच्छा होने पर
  • परिवार में बार-बार आने वाली बाधाओं की शांति की मंगलकामना से
  • संतान संबंधी बाधाओं की स्थिति में
  • विवाह अथवा कार्यक्षेत्र से संबंधित रुकावटों के समय
  • परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की प्रार्थना हेतु

पितृ गायत्री मंत्र का जाप वैदिक परंपरा एवं आचार्य द्वारा निर्धारित विधि के अनुसार किया जाता है।

पितृ गायत्री मंत्र जाप के लाभ

  • पितृ दोष की शांति की मंगलकामना की जाती है।
  • पितरों की तृप्ति एवं सद्गति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि की मंगलकामना की जाती है।
  • पूर्वजों के शुभ आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है।
  • संतान, विवाह एवं कार्यक्षेत्र से संबंधित बाधाओं के शमन की कामना की जाती है।
  • मानसिक शांति एवं सकारात्मक वातावरण की प्रार्थना की जाती है।
  • भगवान नारायण एवं पितृ देवताओं की कृपा से आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना की जाती है।

आध्यात्मिक महत्व

पितृ गायत्री मंत्र जाप पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं आध्यात्मिक उत्तरदायित्व की भावना से सम्पन्न किया जाता है। नारायणी शिला, हरिद्वार में भगवान नारायण एवं माँ गंगा की पावन साक्षी में किया गया यह अनुष्ठान पितृ तर्पण एवं पितृ पूजन की धार्मिक परंपरा से जुड़ा हुआ है।

इस अनुष्ठान के माध्यम से पितरों की शांति, तृप्ति एवं सद्गति तथा परिवार के आध्यात्मिक कल्याण की मंगलकामना की जाती है। वैदिक मंत्र जाप, तर्पण, हवन एवं पूर्णाहुति श्रद्धा एवं धार्मिक विधि के अनुसार सम्पन्न किए जाते हैं।

विशेष जानकारी

  • नारायणी शिला, हरिद्वार में अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।
  • श्रद्धालु के नाम, गोत्र एवं पितरों के संकल्प के अनुसार पूजा सम्पन्न की जाती है।
  • आवश्यकता के अनुसार जन्मकुंडली का परीक्षण किया जा सकता है।
  • सम्पूर्ण पूजन सामग्री की व्यवस्था की जाती है।
  • ऑनलाइन अथवा प्रत्यक्ष सहभागिता की सुविधा उपलब्ध है।
  • तर्पण, मंत्र जाप, हवन एवं पूर्णाहुति सहित अनुष्ठान सम्पन्न किया जाता है।

नारायणी शिला, हरिद्वार में सम्पन्न यह पितृ गायत्री मंत्र जाप पितृ दोष की शांति, पितरों की सद्गति, भगवान नारायण की कृपा तथा परिवार के सुख, शांति, समृद्धि एवं आध्यात्मिक कल्याण की मंगलकामना हेतु अत्यंत पवित्र एवं प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान माना जाता है।

पूजा स्थानवाराणसी

नारायणी शिला मंदिर

नारायणी शिला मंदिर

वाराणसी

पितृ श्रद्धा का पवित्र तीर्थ — जहाँ पूर्वजों का स्मरण, नारायण की भक्ति और शांति की प्रार्थना एक साथ जुड़ती है

जहाँ श्रद्धा पूर्वजों तक पहुँचती है

हरिद्वार की पवित्र भूमि पर गंगा के निकट स्थित नारायणी शिला मंदिर एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जो भगवान नारायण की आराधना और पितृ कर्मों की परंपरा से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है।

यहाँ श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नारायणी शिला भगवान विष्णु के पवित्र स्वरूप से संबंधित मानी जाती है।

गंगा के पवित्र वातावरण के बीच स्थित यह स्थान उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है, जो अपने पितरों की शांति, कल्याण और सद्गति की प्रार्थना करते हैं।

पौराणिक एवं धार्मिक महत्व

नारायणी शिला का संबंध भगवान नारायण और पितृ कर्म की प्राचीन धार्मिक परंपरा से माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र शिला के समक्ष श्रद्धापूर्वक किए गए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान अर्पित करते हैं और उनके आध्यात्मिक कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

इसी आस्था के कारण देश के विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु नारायणी शिला में अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान कराने आते हैं।

सरल पूजा, गहरी श्रद्धा

नारायणी शिला में किए जाने वाले धार्मिक कर्म बाहरी दिखावे से अधिक श्रद्धा और भावनाओं से जुड़े माने जाते हैं।

पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध, दीपदान, मंत्रोच्चार और भगवान नारायण की पूजा के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं।

यहाँ प्रत्येक धार्मिक विधि का उद्देश्य अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और उनके लिए शांति एवं कल्याण की मंगलकामना करना है।

पितृ कर्म और धार्मिक अनुष्ठान

प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानः

  • पिंडदान — पूर्वजों के लिए श्रद्धापूर्वक अर्पण
  • श्राद्ध कर्म — पितरों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता
  • तर्पण — पूर्वजों की शांति की प्रार्थना
  • पितृ शांति अनुष्ठान
  • पितृ मोक्ष जप एवं यज्ञ
  • भगवान नारायण की पूजा
  • हवन एवं वैदिक मंत्रोच्चार

विशेष अवसरों पर नारायणी शिला

पितृ पक्ष नारायणी शिला में पितृ कर्म के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवधि में अनेक श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करवाते हैं।

अमावस्या जैसी धार्मिक तिथियों पर भी पितृ शांति और पूर्वजों के कल्याण की कामना से विशेष धार्मिक कर्म किए जाते हैं।

गंगा के निकट आध्यात्मिक वातावरण

नारायणी शिला मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण हरिद्वार की पवित्र गंगा और प्राचीन तीर्थ परंपरा से जुड़ा हुआ है।

वैदिक मंत्रों का उच्चारण, पिंडदान और तर्पण की धार्मिक विधियां तथा गंगा का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों के साथ आध्यात्मिक रूप से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।

यहाँ किया गया पितृ स्मरण अनेक भक्तों के लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है।

श्रद्धालुओं की मंगलकामनाएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारायणी शिला में पितृ कर्म करवाने से श्रद्धालु इन मंगलकामनाओं के साथ पूजा करते हैंः

  • पितरों की शांति और सद्गति की प्रार्थना
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता
  • पितृ दोष से संबंधित धार्मिक मान्यताओं में शांति की कामना
  • परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना
  • पूर्वजों के आशीर्वाद एवं परिवार के कल्याण की मंगलकामना

इन सभी लाभों को धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में समझा जाता है।

दर्शन एवं स्थान

नारायणी शिला मंदिर, मायापुर, हरिद्वार में स्थित है और हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

निकटतम रेलवे स्टेशनः हरिद्वार जंक्शन

निकटतम प्रमुख हवाई अड्डाः जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून

स्थानीय स्तर पर ऑटो-रिक्शा, रिक्शा और टैक्सी द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

नारायणी शिला मंदिर में पूजा करवाएं

पुजारीजी.कॉम के माध्यम से नारायणी शिला मंदिर में विभिन्न पितृ एवं धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्था कराई जा सकती है।

  • पिंडदान एवं श्राद्ध पूजा
  • तर्पण एवं पितृ शांति अनुष्ठान
  • पितृ मोक्ष जप एवं यज्ञ
  • भगवान नारायण की पूजा
  • हवन एवं वैदिक मंत्रोच्चार
  • संकल्प एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान
  • अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में पूजा व्यवस्था

प्रत्येक अनुष्ठान श्रद्धा, वैदिक विधि और धार्मिक परंपरा के अनुरूप संपन्न कराने का प्रयास किया जाता है।

पुजारीजी.कॉम के माध्यम से नारायणी शिला मंदिर में पितृ पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान बुक करें और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं शांति की प्रार्थना अर्पित करें।

आपकी श्रद्धा। हमारी पवित्र सेवा।

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  • उन्नत

    3 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    2h 59m

    यह विशेष वैदिक पितृ गायत्री मंत्र जाप अनुष्ठान नारायणी शिला, हरिद्वार में भगवान विष्णु की कृपा एवं पितृ देवताओं की शांति की भावना के साथ पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से सम्पन्न कराया जाता है। यह अनुष्ठान पितृ दोष की शांति, दिवंगत पूर्वजों की सद्गति, पितरों की तृप्ति तथा परिवार में सुख, शांति एवं मंगल की कामना के लिए किया जाता है। इस उन्नत पैकेज में 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा मंत्र जाप, तर्पण, पिंड अर्पण, श्राद्ध विधि एवं वैदिक हवन सहित सम्पूर्ण अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • स्वस्तिवाचन एवं संकल्प
    • गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • भगवान विष्णु पूजन
    • नारायणी शिला पूजन
    • पितृ आवाहन
    • पितृ गायत्री मंत्र जाप – 11,000 जप
    • वैदिक हवन
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं पितृ शांति प्रार्थना
    • आशीर्वाद

    शामिल सेवाएं

    • 3 अनुभवी वैदिक आचार्य
    • सभी पूजा सामग्री
    • ब्राह्मण दक्षिणा

    विशेष सुविधाएं

    • नारायणी शिला, हरिद्वार में शास्त्रोक्त विधि से पितृ गायत्री मंत्र जाप।
    • 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सम्पूर्ण पितृ शांति अनुष्ठान।
    • भगवान विष्णु एवं नारायणी शिला की साक्षी में पितृ शांति की प्रार्थना।
    • यजमान के नाम, गोत्र एवं पितरों के संकल्प से अनुष्ठान।
    • वैदिक मंत्र जाप, तर्पण, पिंड अर्पण एवं श्राद्ध विधि सहित विस्तृत अनुष्ठान।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • पितरों के नाम, यदि ज्ञात हों
    • पितरों से संबंधित आवश्यक विवरण, यदि उपलब्ध हो

    भगवान विष्णु एवं नारायणी शिला की कृपा से सम्पन्न यह पवित्र पितृ गायत्री मंत्र जाप अनुष्ठान पितरों की शांति, तृप्ति एवं सद्गति तथा परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल की कामना के लिए अत्यंत श्रद्धापूर्ण वैदिक अनुष्ठान माना जाता है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹13,000₹15,00013% off

    2 वस्तुएँ शामिल

  • श्रेष्ठ

    11 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    3h

    यह विस्तृत एवं पवित्र वैदिक पितृ शांति एवं पितृ गायत्री मंत्र जाप अनुष्ठान नारायणी शिला, हरिद्वार में भगवान विष्णु की साक्षी में पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से सम्पन्न कराया जाता है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से पितृ दोष की शांति, पितृ तृप्ति, पूर्वजों की सद्गति तथा परिवार में सुख, शांति एवं मंगल की कामना के लिए कराया जाता है। इस श्रेष्ठ पैकेज में 11 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा विस्तृत वैदिक विधियों, मंत्र जाप, तर्पण, पिंड अर्पण, श्राद्ध एवं महाहवन सहित सम्पूर्ण अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है। यजमान के नाम, गोत्र एवं पितरों के संकल्प के साथ यह अनुष्ठान श्रद्धापूर्वक सम्पन्न किया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • स्वस्तिवाचन एवं संकल्प
    • गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • भगवान विष्णु पूजन
    • नारायणी शिला पूजन
    • पितृ आवाहन
    • पितृ गायत्री मंत्र जाप – 51,000 जप
    • विष्णु सहस्रनाम पाठ
    • विशेष वैदिक महाहवन
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं पितृ शांति प्रार्थना
    • पितृ आशीर्वाद

    शामिल सेवाएं

    • 11 अनुभवी वैदिक आचार्य
    • सभी पूजा सामग्री
    • ब्राह्मण दक्षिणा
    • हवन सामग्री

    विशेष सुविधाएं

    • नारायणी शिला, हरिद्वार में भगवान विष्णु की साक्षी में विस्तृत पितृ शांति अनुष्ठान।
    • 11 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सम्पूर्ण वैदिक विधि से अनुष्ठान।
    • 51,000 पितृ गायत्री मंत्र जाप।
    • विष्णु सहस्रनाम पाठ एवं विशेष पितृ शांति महाहवन।
    • यजमान के नाम, गोत्र एवं पितरों के संकल्प से व्यक्तिगत अनुष्ठान।
    • तर्पण, पिंड अर्पण एवं श्राद्ध विधि सहित विस्तृत पितृ कर्म।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • पितरों के नाम, यदि ज्ञात हों
    • संबंधित पूर्वज से संबंध
    • जन्म विवरण, यदि उपलब्ध हो

    भगवान विष्णु की कृपा एवं पितृ देवताओं के आशीर्वाद से नारायणी शिला, हरिद्वार में सम्पन्न यह पवित्र अनुष्ठान पितृ शांति, पितृ तृप्ति, पूर्वजों की सद्गति तथा परिवार के सुख, शांति, समृद्धि एवं आध्यात्मिक कल्याण की मंगलकामना करने वाला अत्यंत श्रद्धापूर्ण वैदिक अनुष्ठान माना जाता है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
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  • विशिष्ट

    25 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    4h

    यह महा वैदिक पितृ शांति अनुष्ठान उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से किया जाता है जो गंभीर पितृ दोष, पितृ अशांति, पूर्वजों की शांति, संतान संबंधी बाधाओं तथा परिवार में बार-बार आने वाली समस्याओं के निवारण हेतु विस्तृत वैदिक अनुष्ठान कराना चाहते हैं। यह अनुष्ठान नारायणी शिला, हरिद्वार में भगवान विष्णु की साक्षी में 25 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान से सम्पन्न कराया जाता है। इसमें पितृ गायत्री मंत्र जाप, तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध विधि एवं विशेष पितृ शांति हवन के माध्यम से पितरों की तृप्ति, सद्गति एवं परिवार की मंगलकामना की जाती है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • स्वस्तिवाचन एवं संकल्प
    • गणेश पूजन
    • पुण्याह वाचन
    • कलश स्थापना
    • भगवान विष्णु पूजन
    • नारायणी शिला पूजन
    • पितृ आवाहन
    • पितृ गायत्री मंत्र जाप – 1,25,000 जप
    • विष्णु सहस्रनाम पाठ
    • श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 15 पाठ
    • महा पितृ शांति हवन
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं पितृ मोक्ष प्रार्थना
    • आशीर्वाद

    शामिल सेवाएं

    • 25 अनुभवी वैदिक आचार्य
    • सभी पूजा सामग्री
    • ब्राह्मण दक्षिणा
    • हवन सामग्री
    • पूजा प्रसाद

    विशेष सुविधाएं

    • 25 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा महा वैदिक पितृ शांति अनुष्ठान।
    • नारायणी शिला, हरिद्वार में भगवान विष्णु की साक्षी में सम्पूर्ण अनुष्ठान।
    • 1,25,000 पितृ गायत्री मंत्र जाप।
    • विष्णु सहस्रनाम एवं श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 15 का पाठ।
    • विशेष पितृ शांति महाहवन एवं पूर्णाहुति।
    • यजमान के नाम, गोत्र एवं पितरों के नाम से व्यक्तिगत संकल्प।
    • पितरों की शांति एवं परिवार की मंगलकामना हेतु विस्तृत वैदिक अनुष्ठान।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • दिवंगत पितरों के नाम, यदि ज्ञात हों
    • संकल्प हेतु आवश्यक जन्म विवरण
    • संपर्क नंबर

    नारायणी शिला, हरिद्वार में भगवान विष्णु की साक्षी में सम्पन्न यह पितृ गायत्री मंत्र जाप एवं पितृ शांति अनुष्ठान पितरों की तृप्ति, सद्गति एवं शांति तथा परिवार में सुख, शांति, समृद्धि एवं पितृ कृपा की मंगलकामना हेतु अत्यंत पवित्र वैदिक अनुष्ठान माना जाता है।

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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  3. पुजारीजी

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  4. पुजारीजी

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    तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।

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    संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।

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