“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja

नारायणी शिला, हरिद्वार पितृ कर्म, श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान के लिए प्रसिद्ध पवित्र तीर्थ माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार यहाँ दिवंगत पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध कर्म सम्पन्न कर उनकी तृप्ति, सद्गति एवं शांति की मंगलकामना की जाती है।
यह पूजा विशेष रूप से वार्षिक श्राद्ध तिथि, पितृ पक्ष, सर्वपितृ अमावस्या तथा परिवार की परंपरा के अनुसार निर्धारित श्राद्ध तिथि पर कराई जाती है। श्राद्ध कर्म के माध्यम से व्यक्ति अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करता है तथा परिवार एवं कुल के कल्याण की प्रार्थना करता है।
Duration
1h – 2h
Best time
पूरा दिन
Starting price
₹5,100
नारायणी शिला, हरिद्वार में श्राद्ध पूजा एवं पिंडदान सनातन परंपरा में वर्णित प्रमुख पितृ कर्मों में से एक है। यह अनुष्ठान दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी तथा अन्य पूर्वजों के निमित्त श्रद्धापूर्वक सम्पन्न किया जाता है।
धार्मिक परंपरा में श्राद्ध का उद्देश्य पूर्वजों का स्मरण, उनके प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करना तथा पितृ तृप्ति की प्रार्थना करना माना गया है। पिंडदान के माध्यम से दिवंगत पूर्वजों के निमित्त श्रद्धापूर्वक अर्पण किया जाता है। माँ गंगा की पवित्र साक्षी और भगवान नारायण के स्मरण के साथ किया गया यह कर्म आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व
इस पितृ कर्म में भगवान श्रीहरि विष्णु एवं पितृ देवताओं का स्मरण प्रमुख रूप से किया जाता है। माँ गंगा की पवित्र साक्षी में तर्पण एवं पिंडदान सम्पन्न किया जाता है।
नारायणी शिला को हरिद्वार के प्रमुख पितृ तीर्थों में माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहाँ पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान करने से उनकी तृप्ति, सद्गति एवं शांति की मंगलकामना की जाती है। साथ ही परिवार एवं कुल के कल्याण तथा पितृ कृपा की प्रार्थना की जाती है।
श्राद्ध पूजा एवं पिंडदान कब कराया जाता है?
किन परिस्थितियों में यह पितृ कर्म कराया जाता है?
श्राद्ध पूजा एवं पिंडदान के धार्मिक लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पितृ कर्म के माध्यम से—
आध्यात्मिक महत्व
श्राद्ध एवं पिंडदान केवल एक धार्मिक विधि नहीं, बल्कि अपने दिवंगत पूर्वजों को स्मरण करने, उनके प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने और सनातन परंपरा के अनुसार पितृ धर्म निभाने का माध्यम माना जाता है।
नारायणी शिला, हरिद्वार में भगवान नारायण के स्मरण एवं माँ गंगा की पवित्र साक्षी में सम्पन्न यह पितृ कर्म पितरों की तृप्ति, सद्गति एवं शांति की मंगलकामना से जुड़ा हुआ है। श्रद्धालु इस अनुष्ठान के माध्यम से अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं और परिवार के सुख, शांति एवं कुल कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
विशेष जानकारी
आवश्यक जानकारी
नारायणी शिला, हरिद्वार में सम्पन्न यह श्राद्ध पूजा एवं पिंडदान पितरों की तृप्ति, सद्गति, पितृ शांति एवं पितृ कृपा की मंगलकामना हेतु किया जाने वाला अत्यंत पवित्र एवं महत्वपूर्ण पितृ कर्म माना जाता है। यह अनुष्ठान श्रद्धापूर्वक पितरों के प्रति कृतज्ञता एवं सम्मान अर्पित करने तथा परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि की मंगलकामना के लिए सम्पन्न किया जाता है।

हरिद्वार
पितृ श्रद्धा का पवित्र तीर्थ — जहाँ पूर्वजों का स्मरण, नारायण की भक्ति और शांति की प्रार्थना एक साथ जुड़ती है
जहाँ श्रद्धा पूर्वजों तक पहुँचती है
हरिद्वार की पवित्र भूमि पर गंगा के निकट स्थित नारायणी शिला मंदिर एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जो भगवान नारायण की आराधना और पितृ कर्मों की परंपरा से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है।
यहाँ श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नारायणी शिला भगवान विष्णु के पवित्र स्वरूप से संबंधित मानी जाती है।
गंगा के पवित्र वातावरण के बीच स्थित यह स्थान उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है, जो अपने पितरों की शांति, कल्याण और सद्गति की प्रार्थना करते हैं।
पौराणिक एवं धार्मिक महत्व
नारायणी शिला का संबंध भगवान नारायण और पितृ कर्म की प्राचीन धार्मिक परंपरा से माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र शिला के समक्ष श्रद्धापूर्वक किए गए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान अर्पित करते हैं और उनके आध्यात्मिक कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
इसी आस्था के कारण देश के विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु नारायणी शिला में अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान कराने आते हैं।
सरल पूजा, गहरी श्रद्धा
नारायणी शिला में किए जाने वाले धार्मिक कर्म बाहरी दिखावे से अधिक श्रद्धा और भावनाओं से जुड़े माने जाते हैं।
पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध, दीपदान, मंत्रोच्चार और भगवान नारायण की पूजा के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं।
यहाँ प्रत्येक धार्मिक विधि का उद्देश्य अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और उनके लिए शांति एवं कल्याण की मंगलकामना करना है।
पितृ कर्म और धार्मिक अनुष्ठान
प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानः
विशेष अवसरों पर नारायणी शिला
पितृ पक्ष नारायणी शिला में पितृ कर्म के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवधि में अनेक श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करवाते हैं।
अमावस्या जैसी धार्मिक तिथियों पर भी पितृ शांति और पूर्वजों के कल्याण की कामना से विशेष धार्मिक कर्म किए जाते हैं।
गंगा के निकट आध्यात्मिक वातावरण
नारायणी शिला मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण हरिद्वार की पवित्र गंगा और प्राचीन तीर्थ परंपरा से जुड़ा हुआ है।
वैदिक मंत्रों का उच्चारण, पिंडदान और तर्पण की धार्मिक विधियां तथा गंगा का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों के साथ आध्यात्मिक रूप से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।
यहाँ किया गया पितृ स्मरण अनेक भक्तों के लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है।
श्रद्धालुओं की मंगलकामनाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारायणी शिला में पितृ कर्म करवाने से श्रद्धालु इन मंगलकामनाओं के साथ पूजा करते हैंः
इन सभी लाभों को धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में समझा जाता है।
दर्शन एवं स्थान
नारायणी शिला मंदिर, मायापुर, हरिद्वार में स्थित है और हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
निकटतम रेलवे स्टेशनः हरिद्वार जंक्शन
निकटतम प्रमुख हवाई अड्डाः जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून
स्थानीय स्तर पर ऑटो-रिक्शा, रिक्शा और टैक्सी द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
नारायणी शिला मंदिर में पूजा करवाएं
पुजारीजी.कॉम के माध्यम से नारायणी शिला मंदिर में विभिन्न पितृ एवं धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्था कराई जा सकती है।
प्रत्येक अनुष्ठान श्रद्धा, वैदिक विधि और धार्मिक परंपरा के अनुरूप संपन्न कराने का प्रयास किया जाता है।
पुजारीजी.कॉम के माध्यम से नारायणी शिला मंदिर में पितृ पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान बुक करें और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं शांति की प्रार्थना अर्पित करें।
आपकी श्रद्धा। हमारी पवित्र सेवा।
जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।
1 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
यह पवित्र श्राद्ध कर्म नारायणी शिला, हरिद्वार में भगवान श्रीहरि विष्णु के स्मरण एवं पितृ संकल्प के साथ शास्त्रोक्त विधि-विधान से सम्पन्न कराया जाता है। इस उन्नत पैकेज में 1 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा श्राद्ध विधि, तर्पण एवं पिंडदान सहित आवश्यक पितृ कर्म सम्पन्न कराए जाते हैं। यह अनुष्ठान विशेष रूप से वार्षिक श्राद्ध तिथि पर दिवंगत माता-पिता, पूर्वजों एवं परिवार के दिवंगत सदस्यों के निमित्त किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्राद्ध एवं पिंडदान के माध्यम से पितृ तृप्ति, सद्गति, पितृ शांति एवं पितृ कृपा की मंगलकामना की जाती है।
पूजा में शामिल विधियां
शामिल सेवाएं
विशेष सुविधाएं
आवश्यक जानकारी
विशेष जानकारी
भगवान श्रीहरि विष्णु के स्मरण एवं पितृ संकल्प के साथ नारायणी शिला, हरिद्वार में सम्पन्न यह श्राद्ध पूजा एवं पिंडदान दिवंगत पूर्वजों की तृप्ति, सद्गति, पितृ शांति एवं परिवार के लिए पितृ कृपा की मंगलकामना करने वाला पवित्र पितृ कर्म माना जाता है।
2 वस्तुएँ शामिल
2 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
यह विशेष श्राद्ध अनुष्ठान नारायणी शिला, हरिद्वार में भगवान श्रीहरि विष्णु के स्मरण एवं पितृ संकल्प के साथ पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से सम्पन्न कराया जाता है। इस श्रेष्ठ पैकेज में 2 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा श्राद्ध विधि, तर्पण एवं पिंडदान सहित आवश्यक धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न कराए जाते हैं। यह पैकेज विशेष रूप से वार्षिक श्राद्ध अथवा प्रति वर्ष निर्धारित श्राद्ध तिथि पर दिवंगत माता-पिता, पूर्वजों एवं परिवार के अन्य दिवंगत सदस्यों के निमित्त श्राद्ध कर्म कराने के लिए उपयुक्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्राद्ध एवं पिंडदान पितरों की तृप्ति, शांति, सद्गति एवं पितृ कृपा की मंगलकामना के लिए किया जाता है।
श्राद्ध पूजा में शामिल प्रमुख विधियां
शामिल सेवाएं
विशेष सुविधाएं
आवश्यक जानकारी
विशेष जानकारी
नारायणी शिला, हरिद्वार में भगवान श्रीहरि विष्णु के स्मरण एवं पितृ संकल्प के साथ सम्पन्न यह श्राद्ध एवं पिंडदान दिवंगत पूर्वजों की तृप्ति, सद्गति, पितृ शांति एवं पितृ कृपा की मंगलकामना के लिए अत्यंत पवित्र धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है।
2 वस्तुएँ शामिल
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WhatsAppभक्तों की प्रतिक्रिया
“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
एक बार जानकारी दें। पुजारी, सामग्री, विधि-विधान और अपडेट — सब आपके लिए संभाला जाता है।
पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।
जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।
हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।
तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।
संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।
ऊपर दिए गए पैकेज में से चुनें या पूछताछ करें, हमारी टीम आपकी तारीख और विवरणों की पुष्टि करेगी।