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Pujari Ji

शुक्र ग्रह शांति पूजा

श्री पशुपति नाथ महादेव मंदिर, हरिद्वार
  • प्रमाणित पुजारी
  • पूरी पूजा सामग्री
  • वैदिक विधि-विधान
  • मार्गदर्शन व सहायता
शुक्र ग्रह शांति पूजा

शुक्र ग्रह शांति पूजा वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए की जाने वाली महत्वपूर्ण ग्रह शांति पूजा है। शुक्र ग्रह को प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, ऐश्वर्य, भौतिक सुख-सुविधाओं एवं दांपत्य जीवन से संबंधित माना जाता है।

जब जन्मकुंडली में शुक्र ग्रह पीड़ित या अशुभ स्थिति में हो, तब ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार विवाह में विलंब, दांपत्य जीवन में मतभेद, प्रेम संबंधों में बाधा, आर्थिक अस्थिरता अथवा सुख-सुविधाओं से संबंधित चुनौतियों की संभावना मानी जाती है। ऐसी परिस्थितियों में शुक्र ग्रह की शांति एवं शुभ प्रभावों की मंगलकामना के लिए यह अनुष्ठान कराया जाता है।

हरिद्वार की पवित्र धार्मिक भूमि एवं गंगा नदी के सान्निध्य में पशुपतिनाथ मंदिर में यह पूजा अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से सम्पन्न कराई जाती है।

Duration

3h – 4h

Best time

सुबह

Starting price

₹9,100

लाभ

  • धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुक्र ग्रह के अशुभ प्रभावों की शांति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • विवाह एवं दांपत्य जीवन में प्रेम, मधुरता, सौहार्द एवं आपसी सामंजस्य की मंगलकामना की जाती है।
  • आर्थिक स्थिरता, समृद्धि एवं धन संबंधी अनुकूल परिस्थितियों के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • सुख-सुविधाओं, सौभाग्य एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति तथा जीवन में शुभता की मंगलकामना की जाती है।
  • कला, सौंदर्य एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के क्षेत्रों में प्रतिभा, प्रेरणा एवं शुभ अवसरों की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति, प्रेम एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण की मंगलकामना की जाती है।
  • मानसिक शांति, संतुलित भावनाओं एवं सकारात्मक सोच की प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जाती है।
  • भगवान पशुपतिनाथ, शुक्र देव एवं माता महालक्ष्मी की कृपा, आशीर्वाद एवं संरक्षण की मंगलकामना की जाती है।

शुक्र ग्रह शांति पूजा

पशुपतिनाथ मंदिर, हरिद्वार भगवान शिव की आराधना का पावन धार्मिक स्थल है। हरिद्वार को सनातन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है और गंगा नदी का पवित्र सान्निध्य इसे विशेष आध्यात्मिक महत्व प्रदान करता है।

वैदिक ज्योतिष में शुक्र को प्रेम, विवाह, दांपत्य संबंध, सौंदर्य, कला, भौतिक सुख एवं ऐश्वर्य का कारक माना जाता है। जन्मकुंडली में शुक्र की स्थिति, भाव, राशि, दृष्टि तथा अन्य ग्रहों के साथ संबंध के आधार पर उसके शुभ अथवा अशुभ प्रभावों का विचार किया जाता है।

शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति, वैवाहिक सुख, पारिवारिक सौहार्द, समृद्धि एवं जीवन में शुभता की मंगलकामना के लिए शुक्र ग्रह शांति पूजा सम्पन्न कराई जाती है।

मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व

इस पूजा के मुख्य देवता शुक्र देव माने जाते हैं। इनके साथ निम्न देवताओं की आराधना की जा सकती हैः

  • भगवान पशुपतिनाथ
  • भगवान शिव
  • माता महालक्ष्मी
  • भगवान विष्णु
  • नवग्रह देवता

धार्मिक मान्यता के अनुसार शुक्र देव की उपासना से प्रेम, सौंदर्य, कला, वैवाहिक सुख एवं समृद्धि की मंगलकामना की जाती है। भगवान शिव की आराधना के माध्यम से आध्यात्मिक शांति एवं ग्रह शांति की प्रार्थना की जाती है।

मुहूर्त / यह पूजा कब करानी चाहिए?

  • शुक्रवार के दिन शुभ मुहूर्त में।
  • शुक्र महादशा या अंतर्दशा के समय।
  • शुक्र से संबंधित प्रतिकूल ग्रह गोचर की स्थिति में।
  • जन्मकुंडली में शुक्र की पीड़ित या अशुभ स्थिति होने पर।
  • भरणी, पूर्वाफाल्गुनी एवं पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के शुभ अवसर पर।
  • विवाह, दांपत्य सुख एवं समृद्धि की मंगलकामना से।
  • योग्य ज्योतिषाचार्य के परामर्श के अनुसार।

किन परिस्थितियों में यह पूजा करानी चाहिए?

  • विवाह में विलंब होने पर।
  • विवाह संबंधी बार-बार बाधाएँ आने पर।
  • दांपत्य जीवन में तनाव एवं मतभेद होने पर।
  • प्रेम संबंधों में कठिनाइयाँ आने पर।
  • आर्थिक अस्थिरता एवं धन संबंधी चिंताओं की स्थिति में।
  • सुख-सुविधाओं एवं ऐश्वर्य की कमी अनुभव होने पर।
  • जन्मकुंडली में शुक्र दोष या शुक्र ग्रह की पीड़ित स्थिति होने पर।
  • शुक्र ग्रह से संबंधित ज्योतिषीय अशुभ प्रभावों की शांति की मंगलकामना होने पर।

मुख्य मंत्र

ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः॥

ॐ शुं शुक्राय नमः॥

मंत्र जाप की संख्या एवं अनुष्ठान की विधि यजमान की जन्मकुंडली, संकल्प एवं ज्योतिषीय आवश्यकता के अनुसार आचार्य द्वारा निर्धारित की जा सकती है।

पूजा के लाभ

धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान के माध्यम से निम्न मंगलकामनाएँ की जाती हैंः

  • शुक्र ग्रह के अशुभ प्रभावों की शांति की प्रार्थना की जाती है।
  • विवाह एवं दांपत्य जीवन में प्रेम, मधुरता एवं सामंजस्य की मंगलकामना की जाती है।
  • आर्थिक स्थिरता एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • सुख-सुविधाओं, सौभाग्य एवं ऐश्वर्य की मंगलकामना की जाती है।
  • कला, सौंदर्य एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के क्षेत्र में शुभता की प्रार्थना की जाती है।
  • परिवार में सुख, शांति एवं सौहार्द की मंगलकामना की जाती है।
  • मानसिक शांति एवं सकारात्मक भावनाओं के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • भगवान पशुपतिनाथ, शुक्र देव एवं माता महालक्ष्मी की कृपा की मंगलकामना की जाती है।

आध्यात्मिक महत्व

पशुपतिनाथ मंदिर, हरिद्वार में शुक्र ग्रह शांति पूजा ग्रह शांति के साथ भगवान शिव एवं शुक्र देव की आराधना का आध्यात्मिक माध्यम मानी जाती है। वैदिक मंत्र जाप, देव पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से श्रद्धालु जीवन में संतुलन, शांति, प्रेम एवं समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

गंगा नदी की पवित्रता एवं हरिद्वार की धार्मिक परंपरा इस अनुष्ठान के आध्यात्मिक वातावरण को विशेष बनाती है। श्रद्धालु इस पूजा के माध्यम से ग्रहों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए अपने जीवन एवं परिवार के लिए मंगलकामना करते हैं।

विशेष जानकारी

  • अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाता है।
  • यजमान के नाम एवं गोत्र के अनुसार वैदिक संकल्प लिया जाता है।
  • आवश्यकता होने पर जन्मकुंडली के आधार पर पूजा की विधि निर्धारित की जा सकती है।
  • शुक्र ग्रह की स्थिति के अनुसार मंत्र जाप एवं अनुष्ठान की संख्या निर्धारित की जा सकती है।
  • पूजा में आवश्यक सम्पूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।
  • वैदिक मंत्रोच्चार, हवन एवं पूर्णाहुति सहित अनुष्ठान सम्पन्न किया जाता है।

पशुपतिनाथ मंदिर, हरिद्वार में सम्पन्न होने वाली शुक्र ग्रह शांति पूजा केवल ग्रह दोष निवारण का अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान शिव की कृपा से जीवन में संतुलन, प्रेम, सुख-समृद्धि एवं सकारात्मक ऊर्जा की मंगलकामना करने का दिव्य माध्यम भी है। यह पवित्र अनुष्ठान व्यक्ति को भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करने में सहायक माना जाता है।

पूजा स्थानहरिद्वार

श्री पशुपति नाथ महादेव मंदिर

श्री पशुपति नाथ महादेव मंदिर

हरिद्वार

हरिद्वार उत्तराखंड की प्रमुख तीर्थनगरी है, जिसे प्राचीन काल से ही गंगा तट पर स्थित महत्वपूर्ण धार्मिक एवं आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। पवित्र गंगा, प्राचीन मंदिरों, आश्रमों और वैदिक परंपराओं के कारण हरिद्वार का हिंदू तीर्थ परंपरा में विशेष स्थान है। गंगा के मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करने वाला यह नगर देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र रहा है।

पशुपति नाथ मंदिर, हरिद्वार भगवान शिव के पशुपति स्वरूप को समर्पित एक श्रद्धास्थल है। उपलब्ध प्रकाशित विवरणों के अनुसार यह मंदिर हरिद्वार में श्रवणनाथ मठ से जुड़ा हुआ है और भगवान पशुपतिनाथ की उपासना के लिए प्रसिद्ध है।

धार्मिक परंपरा में भगवान शिव को पशुपतिनाथ, अर्थात समस्त जीवों के स्वामी के रूप में पूजा जाता है। हरिद्वार की गंगा, शिव उपासना और तीर्थ परंपरा से जुड़ा वातावरण इस मंदिर की आध्यात्मिक महत्ता को और विशेष बनाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धालु यहाँ भगवान शिव की कृपा, सुख-शांति, आरोग्य, संरक्षण, बाधाओं की शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना से पूजा-अर्चना करते हैं।

पशुपति नाथ मंदिर का धार्मिक महत्व

भगवान शिव के पशुपति स्वरूप की उपासना सनातन परंपरा में विशेष धार्मिक महत्व रखती है। पशुपति स्वरूप भगवान शिव को समस्त जीवों के स्वामी, संरक्षक और कल्याणकारी देव के रूप में संबोधित करता है।

हरिद्वार स्थित पशुपति नाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और आध्यात्मिक साधना का माध्यम मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भक्त यहाँ विभिन्न आध्यात्मिक एवं पारिवारिक मंगलकामनाओं के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।

श्रद्धालु विशेष रूप से—

  • भगवान शिव की कृपा प्राप्ति की कामना से।
  • मानसिक शांति और आत्मबल की प्रार्थना हेतु।
  • स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की मंगलकामना से।
  • जीवन की बाधाओं और भय से राहत की प्रार्थना हेतु।
  • परिवार में सुख और शांति की कामना से।
  • ग्रहजनित बाधाओं की शांति के लिए।
  • वैवाहिक एवं पारिवारिक सुख की मंगलकामना से।
  • व्यवसाय और कार्यक्षेत्र में उन्नति की प्रार्थना हेतु।
  • आध्यात्मिक उन्नति और शिव भक्ति की कामना से।

पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं।

पशुपति नाथ मंदिर, हरिद्वार में होने वाली प्रमुख पूजाएं

भगवान शिव की उपासना से संबंधित विभिन्न धार्मिक एवं वैदिक अनुष्ठान श्रद्धा के अनुसार किए जाते हैं। किसी विशेष पूजा की उपलब्धता, विधि और आयोजन मंदिर की स्थानीय परंपरा तथा संबंधित आचार्य की व्यवस्था पर निर्भर कर सकती है।

प्रमुख रूप से किए जाने वाले शिव-संबंधित अनुष्ठानों में शामिल हो सकते हैं—

  • रुद्राभिषेक
  • महामृत्युंजय जाप
  • शिव पूजन
  • महामृत्युंजय हवन
  • शिव महापूजन
  • विशेष वैदिक हवन
  • नवग्रह शांति पूजा
  • ग्रह शांति अनुष्ठान
  • राहु-केतु शांति पूजा
  • शनि ग्रह शांति पूजा
  • मंगल ग्रह शांति पूजा
  • गुरु ग्रह शांति पूजा
  • शुक्र ग्रह शांति पूजा
  • सूर्य ग्रह शांति पूजा
  • पितृ शांति अनुष्ठान

पूजा की विधि, मंत्र जाप और संकल्प व्यक्ति की धार्मिक आवश्यकता तथा जन्मकुंडली के आधार पर आचार्य द्वारा निर्धारित किए जा सकते हैं।

मंदिर परिसर एवं हरिद्वार का आध्यात्मिक महत्व

भगवान पशुपतिनाथ की आराधना

मंदिर में भगवान शिव के पशुपति स्वरूप की उपासना श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख धार्मिक केंद्र है। भक्त भगवान शिव का पूजन, अभिषेक और मंत्र जाप कर सुख, शांति, आरोग्य एवं संरक्षण की मंगलकामना करते हैं।

पवित्र गंगा

हरिद्वार की धार्मिक पहचान पवित्र गंगा से गहराई से जुड़ी हुई है। गंगा के तट पर स्नान, आचमन, पूजन और दीपदान हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखते हैं। गंगा का सान्निध्य हरिद्वार की तीर्थ परंपरा और आध्यात्मिक वातावरण को विशेष बनाता है।

हर की पौड़ी

हर की पौड़ी हरिद्वार के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यहाँ गंगा आरती और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मंदिर की यात्रा के साथ हर की पौड़ी और गंगा तट का दर्शन श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव हो सकता है।

हरिद्वार के पंचतीर्थ

हरिद्वार की धार्मिक परंपरा में गंगाद्वार, कुशावर्त, कनखल, बिल्व तीर्थ और नील पर्वत को पंचतीर्थ के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है। ये स्थल हरिद्वार की व्यापक तीर्थ परंपरा और धार्मिक विरासत को दर्शाते हैं।

पशुपति नाथ मंदिर में पूजा करवाने के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान पशुपतिनाथ की श्रद्धापूर्वक आराधना से विभिन्न आध्यात्मिक एवं सांसारिक मंगलकामनाएँ की जाती हैं। इन लाभों को धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए।

  • भगवान शिव की कृपा एवं आशीर्वाद प्राप्ति की मंगलकामना।
  • मन की शांति और आत्मबल की प्राप्ति की प्रार्थना।
  • जीवन में आने वाली बाधाओं और नकारात्मकता से राहत की कामना।
  • स्वास्थ्य एवं दीर्घायु के लिए मंगलकामना।
  • परिवार में सुख, शांति और सौहार्द की प्रार्थना।
  • ग्रहजनित बाधाओं की शांति के लिए धार्मिक प्रार्थना।
  • कार्यक्षेत्र और व्यवसाय में उन्नति की मंगलकामना।
  • भय एवं मानसिक अशांति से राहत की प्रार्थना।
  • आध्यात्मिक उन्नति तथा शिव भक्ति को मजबूत करने की कामना।

पशुपति नाथ मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण

हरिद्वार का धार्मिक वातावरण गंगा, मंदिरों, आश्रमों, साधना परंपराओं, वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ा हुआ है। गंगा तट पर होने वाली आरती, दीपदान और मंत्रोच्चार तीर्थनगरी के आध्यात्मिक वातावरण को विशेष बनाते हैं।

पशुपति नाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना के साथ श्रद्धालु हरिद्वार की व्यापक तीर्थ परंपरा का अनुभव कर सकते हैं। श्रावण मास और महाशिवरात्रि जैसे शिव-संबंधित अवसरों पर भगवान शिव की उपासना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

विशेष अवसरों पर पशुपति नाथ मंदिर का महत्व

भगवान शिव की उपासना के लिए निम्न अवसरों को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है—

  • श्रावण मास
  • सावन सोमवार
  • महाशिवरात्रि
  • प्रदोष व्रत
  • सोमवार
  • अमावस्या
  • पूर्णिमा
  • जन्मकुंडली के अनुसार निर्धारित शुभ मुहूर्त

इन अवसरों पर श्रद्धालु अपनी आस्था और धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान शिव का अभिषेक, पूजन, जाप एवं हवन करा सकते हैं।

पशुपति नाथ मंदिर, हरिद्वार कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग

हरिद्वार के लिए निकटतम प्रमुख हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून है। हवाई अड्डे से हरिद्वार तक सड़क मार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है।

रेल मार्ग

हरिद्वार रेलवे स्टेशन देश के अनेक प्रमुख शहरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। रेलवे स्टेशन से स्थानीय परिवहन के माध्यम से मंदिर क्षेत्र तक पहुँचा जा सकता है।

सड़क मार्ग

हरिद्वार दिल्ली, देहरादून, ऋषिकेश और उत्तर भारत के अन्य प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। निजी वाहन, टैक्सी और बस के माध्यम से हरिद्वार पहुँचा जा सकता है।

दर्शन हेतु सर्वोत्तम समय

पशुपति नाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना के लिए श्रद्धालु वर्षभर आ सकते हैं। धार्मिक दृष्टि से श्रावण मास, सावन सोमवार और महाशिवरात्रि जैसे अवसर विशेष माने जाते हैं।

यदि शांत वातावरण में दर्शन करना हो तो सामान्य दिनों में अपेक्षाकृत कम भीड़ वाले समय को चुना जा सकता है। पर्वों और विशेष धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो सकती है।

पूजा या विशेष अनुष्ठान के लिए जाने से पहले स्थानीय स्तर पर पूजा व्यवस्था, उपलब्धता और समय की जानकारी प्राप्त करना उचित है।

निष्कर्ष

पशुपति नाथ मंदिर, हरिद्वार भगवान शिव के पशुपति स्वरूप की आराधना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। हरिद्वार की पवित्र गंगा, प्राचीन तीर्थ परंपरा और शिव भक्ति से जुड़ा वातावरण इस मंदिर की आध्यात्मिक पहचान को विशेष बनाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहाँ भगवान शिव की पूजा-अर्चना, अभिषेक, मंत्र जाप और अन्य धार्मिक अनुष्ठान सुख-शांति, आरोग्य, पारिवारिक कल्याण, बाधाओं की शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना से किए जाते हैं। हरिद्वार की तीर्थ परंपरा के साथ पशुपतिनाथ की उपासना श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, साधना और आध्यात्मिक चिंतन का अवसर प्रदान करती है।

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    2 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

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    हरिद्वार के पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर में 2 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शुक्र ग्रह शांति पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाएगी। यह पवित्र वैदिक अनुष्ठान लगभग 2.5 से 3 घंटे में संपन्न होता है। इसमें शुक्र दोष, शुक्र महादशा, अंतर्दशा एवं गोचर के अशुभ प्रभावों की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अनुष्ठान वैवाहिक सुख, प्रेम, आर्थिक समृद्धि, ऐश्वर्य, आकर्षण एवं मानसिक शांति की मंगलकामना के लिए किया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • गौरी-गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • ब्राह्मण पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • भगवान पशुपतिनाथ अर्थात भगवान शिव का पूजन
    • शुक्र देव पूजन
    • शुक्र तांत्रिक मंत्र जाप — 16,000 जप
    • विशेष वैदिक हवन
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं आशीर्वाद

    विशेष सुविधाएं

    • पशुपतिनाथ मंदिर, हरिद्वार में वैदिक विधि-विधान से अनुष्ठान
    • अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा जन्मकुंडली एवं संकल्प के अनुसार पूजा
    • शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए विशेष संकल्प
    • वैवाहिक सुख, प्रेम, समृद्धि एवं मानसिक शांति की मंगलकामना
    • विशेष हवन एवं पूर्णाहुति सहित विस्तृत अनुष्ठान

    अनुष्ठान की अवधि

    यह पवित्र वैदिक अनुष्ठान लगभग 2.5 से 3 घंटे में संपन्न कराया जाता है।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • जन्मकुंडली, यदि उपलब्ध हो

    भगवान पशुपतिनाथ एवं शुक्र देव की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह अनुष्ठान शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन तथा जीवन में प्रेम, वैवाहिक सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य, आकर्षण और मानसिक शांति की प्रार्थना के लिए किया जाता है। मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में सुख, संतुलन, समृद्धि और मंगल की कामना की जाती है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹9,100₹11,00017% off

    2 वस्तुएँ शामिल

  • श्रेष्ठ

    5 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    3h

    श्रेष्ठ पैकेज में हरिद्वार के पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर में 5 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शुक्र ग्रह शांति पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाती है। यह पवित्र वैदिक अनुष्ठान लगभग 3 से 4 घंटे में संपन्न होता है। इसमें शुक्र दोष, विवाह में विलंब, दांपत्य जीवन में तनाव, प्रेम संबंधों में बाधा, आर्थिक अस्थिरता तथा भौतिक सुख-सुविधाओं में कमी से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है। यह अनुष्ठान शुक्र देव की कृपा, वैवाहिक सुख, प्रेम, समृद्धि, ऐश्वर्य एवं मानसिक शांति की मंगलकामना से किया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • गौरी-गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • वैदिक आचार्य पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • भगवान पशुपतिनाथ का पूजन
    • शुक्र देव पूजन
    • शुक्र तांत्रिक मंत्र जाप — 64,000 जप (16,000 × 4)
    • विशेष वैदिक हवन
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं आशीर्वाद

    विशेष सुविधाएं

    • पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर, हरिद्वार में 5 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सामूहिक वैदिक अनुष्ठान
    • शुक्र तांत्रिक मंत्र का 64,000 जप
    • कलियुग में मंत्रों के चार गुना जाप की धार्मिक मान्यता के अनुसार विशेष मंत्र अनुष्ठान
    • शुक्र दोष, विवाह संबंधी बाधाओं एवं आर्थिक अस्थिरता की शांति के लिए विशेष संकल्प
    • भगवान पशुपतिनाथ, शुक्र देव, माता महालक्ष्मी एवं भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा की मंगलकामना
    • विशेष हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सहित विस्तृत वैदिक अनुष्ठान

    अनुष्ठान की अवधि

    यह विशेष वैदिक अनुष्ठान लगभग 3 से 4 घंटे में संपन्न कराया जाता है।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • जन्मकुंडली, यदि उपलब्ध हो

    भगवान पशुपतिनाथ एवं शुक्र देव की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह पवित्र अनुष्ठान शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, वैवाहिक सुख, प्रेम, आर्थिक स्थिरता, समृद्धि एवं मानसिक शांति की प्रार्थना के लिए किया जाता है। मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में सुख, सौहार्द, ऐश्वर्य, सकारात्मकता एवं पारिवारिक मंगल की कामना की जाती है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹19,000₹21,00010% off

    2 वस्तुएँ शामिल

  • विशिष्ट

    7 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    4h

    विशिष्ट पैकेज के अंतर्गत हरिद्वार के पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर में 7 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शुक्र ग्रह शांति पूजा एवं विशेष वैदिक अनुष्ठान पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से श्रद्धापूर्वक संपन्न कराया जाता है। यह पवित्र अनुष्ठान लगभग 4 से 5 घंटे में संपन्न होता है। इसमें शुक्र दोष, विवाह में विलंब, दांपत्य जीवन में तनाव, प्रेम संबंधों में बाधा, आर्थिक अस्थिरता तथा भौतिक सुख-सुविधाओं से संबंधित कठिनाइयों की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है।

    इस अनुष्ठान में शुक्र देव की कृपा प्राप्ति के लिए शुक्र वैदिक मंत्र का 16,000 जप कराया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मंत्र जाप शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति, वैवाहिक सुख, आर्थिक समृद्धि तथा जीवन में सकारात्मकता की मंगलकामना के लिए किया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • गौरी-गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • वैदिक आचार्य पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • भगवान पशुपतिनाथ अर्थात भगवान शिव का पूजन
    • शुक्र देव पूजन
    • भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता महालक्ष्मी की आराधना
    • शुक्र वैदिक मंत्र जाप — 16,000 जप
    • मंत्र — ॐ अन्नात् परिस्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत्। क्षत्रं पयः सोमं प्रजापतिः। क्षत्रेण सत्यं इन्द्रियं विपानं शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोऽमृतं मधु॥
    • विशेष वैदिक हवन
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं आशीर्वाद

    विशेष सुविधाएं

    • पशुपतिनाथ मंदिर, हरिद्वार में 7 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सामूहिक वैदिक अनुष्ठान
    • शुक्र वैदिक मंत्र का 16,000 जप
    • शुक्र दोष एवं शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए विशेष संकल्प
    • वैवाहिक सुख, प्रेम संबंधों एवं आर्थिक स्थिरता के लिए मंगलकामना
    • भगवान पशुपतिनाथ, शुक्र देव, भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता महालक्ष्मी की विशेष आराधना
    • विशेष हवन एवं पूर्णाहुति सहित विस्तृत वैदिक अनुष्ठान

    अनुष्ठान की अवधि

    यह विशेष वैदिक अनुष्ठान लगभग 4 से 5 घंटे में संपन्न कराया जाता है।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • जन्मकुंडली, यदि उपलब्ध हो

    भगवान पशुपतिनाथ, शुक्र देव, भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता महालक्ष्मी की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह विशेष अनुष्ठान शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, वैवाहिक सुख, प्रेम एवं पारिवारिक सौहार्द, आर्थिक स्थिरता तथा जीवन में सुख-समृद्धि की प्रार्थना के लिए किया जाता है। मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में शांति, समृद्धि, संतुलन एवं मंगल की कामना की जाती है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹24,500₹26,0006% off

    2 वस्तुएँ शामिल

  • दिव्य

    31 आचार्य + सभी पूजा सामग्री

    5h

    दिव्य पैकेज में हरिद्वार के पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर में 31 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा शुक्र ग्रह शांति पूजा एवं विशेष वैदिक अनुष्ठान पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से श्रद्धापूर्वक संपन्न कराया जाता है। यह विस्तृत अनुष्ठान 3 या 5 दिनों में, निर्धारित पूजा-विधि एवं मंत्र जाप के अनुसार संपन्न कराया जा सकता है। इसमें शुक्र के वैदिक मंत्र का 64,000 जप कराया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अनुष्ठान शुक्र दोष, वैवाहिक बाधाओं, दांपत्य जीवन में तनाव, प्रेम संबंधों से जुड़ी कठिनाइयों, आर्थिक अस्थिरता तथा भौतिक सुख-सुविधाओं से संबंधित बाधाओं की शांति के लिए किया जाता है।

    पूजा में शामिल विधियां

    • संकल्प
    • गौरी-गणेश पूजन
    • कलश स्थापना
    • वैदिक आचार्य पूजन
    • नवग्रह पूजन
    • भगवान पशुपतिनाथ एवं भगवान शिव का पूजन
    • शुक्र देव पूजन
    • शुक्र वैदिक मंत्र जाप — 64,000 जप (16,000 × 4)
    • विशेष वैदिक हवन
    • पूर्णाहुति
    • आरती एवं आशीर्वाद

    विशेष सुविधाएं

    • पशुपतिनाथ मंदिर, हरिद्वार में 31 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सामूहिक वैदिक अनुष्ठान
    • 3 या 5 दिनों में विस्तृत अनुष्ठान संपन्न कराने की व्यवस्था
    • विभिन्न चरणों में कुल 31 आचार्यों द्वारा निर्धारित 64,000 वैदिक मंत्र जाप पूर्ण किया जाएगा
    • शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों एवं बाधाओं की शांति के लिए विशेष संकल्प
    • भगवान पशुपतिनाथ एवं शुक्र देव की विशेष आराधना
    • विस्तृत हवन एवं पूर्णाहुति सहित वैदिक अनुष्ठान

    अनुष्ठान की अवधि

    यह विशेष अनुष्ठान 3 या 5 दिनों में मंत्र जाप की संख्या एवं पूजा की विस्तृत विधि के अनुसार संपन्न कराया जा सकता है।

    आवश्यक जानकारी

    • यजमान का नाम
    • गोत्र
    • जन्म तिथि
    • जन्म समय
    • जन्म स्थान
    • जन्मकुंडली, यदि उपलब्ध हो

    भगवान पशुपतिनाथ, शुक्र देव, माता महालक्ष्मी एवं भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह विशेष अनुष्ठान शुक्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति, वैवाहिक सुख, दांपत्य जीवन में सामंजस्य, आर्थिक स्थिरता एवं समृद्धि की प्रार्थना के लिए किया जाता है। मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में सुख, शांति, प्रेम, ऐश्वर्य और सकारात्मकता की मंगलकामना की जाती है।

    सभी पूजा सामग्रीदक्षिणा
    ₹91,000₹95,0004% off

    2 वस्तुएँ शामिल

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भक्तों की प्रतिक्रिया

भक्तों का अनुभव

पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।

प्रिया शर्मा

मुंबईSatyanarayan Puja

विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।

राजेश गुप्ता

सैन फ्रांसिस्को, अमेरिकाRudrabhishek

अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।

मीना अय्यर

बैंगलोरGraha Shanti Puja

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न

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कैसे काम करता है

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    जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।

  3. पुजारीजी

    हम पूरी पूजा सामग्री की व्यवस्था करते हैं

    हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।

  4. पुजारीजी

    वैदिक विधि-विधान से पूजा संपन्न

    तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।

  5. पुजारीजी

    आपको प्रसाद व आशीर्वाद मिलता है

    संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।

हर चरण पर कॉल और व्हाट्सएप पर मार्गदर्शन व सहायता।

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