“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja

सूर्य ग्रह शांति पूजा वैदिक ज्योतिष में सूर्य से संबंधित ग्रह दोषों एवं प्रतिकूल प्रभावों की शांति के लिए सम्पन्न की जाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य आत्मबल, पिता, प्रतिष्ठा, नेतृत्व, राजसत्ता, सरकारी कार्य, यश, ऊर्जा एवं जीवन शक्ति का प्रमुख कारक माना जाता है।
जब जन्मकुंडली में सूर्य पीड़ित या प्रतिकूल स्थिति में हो, तब व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास, करियर, सरकारी कार्य, पारिवारिक संबंधों एवं सामाजिक प्रतिष्ठा से संबंधित चुनौतियों की संभावना मानी जाती है। ऐसे में सूर्य देव की आराधना तथा ग्रह शांति अनुष्ठान के माध्यम से शुभ प्रभावों की मंगलकामना की जाती है।
हरिद्वार स्थित पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक श्रद्धेय धार्मिक स्थल है। भगवान पशुपतिनाथ की साक्षी में सूर्य ग्रह शांति पूजा श्रद्धा एवं संकल्प के साथ सम्पन्न कराई जाती है।
Duration
3h – 4h
Best time
सुबह
Starting price
₹6,100
वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मा, आत्मबल, पिता, यश, प्रतिष्ठा, नेतृत्व, ऊर्जा एवं जीवन शक्ति का कारक माना गया है। जन्मकुंडली में सूर्य की स्थिति व्यक्ति के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
यदि सूर्य अशुभ स्थिति में हो अथवा सूर्य से संबंधित ग्रह प्रभाव प्रतिकूल माने जाएँ, तो आत्मविश्वास की कमी, कार्यक्षेत्र में बाधा, सरकारी कार्यों में कठिनाई, पिता से मतभेद तथा सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ी चुनौतियों की संभावना बताई जाती है। ऐसी परिस्थितियों में सूर्य ग्रह शांति पूजा श्रद्धापूर्वक सम्पन्न कराई जाती है।
पशुपतिनाथ मंदिर, हरिद्वार में भगवान सूर्य नारायण के साथ भगवान पशुपतिनाथ, भगवान श्रीहरि विष्णु एवं नवग्रह देवताओं की आराधना की जाती है। अनुष्ठान का उद्देश्य सूर्य ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति तथा जीवन में आत्मबल, सकारात्मकता एवं मंगल की प्रार्थना करना है।
मुख्य देवता एवं धार्मिक महत्व
इस पूजा के मुख्य देवता भगवान सूर्य नारायण हैं। इनके साथ निम्न देवताओं का पूजन किया जाता हैः
धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य देव की आराधना से आत्मबल, तेज, यश एवं प्रतिष्ठा की मंगलकामना की जाती है। भगवान पशुपतिनाथ की आराधना आध्यात्मिक शक्ति, संरक्षण एवं कल्याण की प्रार्थना से जुड़ी है।
मुहूर्त / यह पूजा कब करानी चाहिए?
किन परिस्थितियों में यह पूजा करानी चाहिए?
मुख्य मंत्र
तांत्रिक मंत्रः
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥
वैदिक मंत्रः
ॐ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च। हिरण्ययेन सविता रथेन देवो याति भुवनानि पश्यन्॥
पूजा के लाभ
धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान के माध्यम से निम्न मंगलकामनाएँ की जाती हैंः
आध्यात्मिक महत्व
सूर्य देव को प्रकाश, ऊर्जा एवं जीवन शक्ति का दिव्य स्वरूप माना जाता है। सूर्य की आराधना आत्मबल, तेज, सकारात्मकता एवं आध्यात्मिक जागरण की मंगलकामना से जुड़ी है।
पशुपतिनाथ मंदिर, हरिद्वार में भगवान शिव के पावन सान्निध्य में सम्पन्न यह अनुष्ठान श्रद्धालु को सूर्य उपासना एवं शिव आराधना से जोड़ता है। वैदिक मंत्र जाप, पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से श्रद्धालु जीवन में शुभता, आत्मबल, मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करते हैं।
विशेष जानकारी
पशुपतिनाथ मंदिर, हरिद्वार में सम्पन्न होने वाली सूर्य ग्रह शांति पूजा केवल ग्रह दोष निवारण का अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मबल, तेज, सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिक जागरण की मंगलकामना करने का दिव्य माध्यम भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान पशुपतिनाथ एवं सूर्य देव की कृपा से व्यक्ति के जीवन में प्रकाश, सफलता, सम्मान एवं आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होने की प्रार्थना की जाती है।

हरिद्वार
हरिद्वार उत्तराखंड की प्रमुख तीर्थनगरी है, जिसे प्राचीन काल से ही गंगा तट पर स्थित महत्वपूर्ण धार्मिक एवं आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। पवित्र गंगा, प्राचीन मंदिरों, आश्रमों और वैदिक परंपराओं के कारण हरिद्वार का हिंदू तीर्थ परंपरा में विशेष स्थान है। गंगा के मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करने वाला यह नगर देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र रहा है।
पशुपति नाथ मंदिर, हरिद्वार भगवान शिव के पशुपति स्वरूप को समर्पित एक श्रद्धास्थल है। उपलब्ध प्रकाशित विवरणों के अनुसार यह मंदिर हरिद्वार में श्रवणनाथ मठ से जुड़ा हुआ है और भगवान पशुपतिनाथ की उपासना के लिए प्रसिद्ध है।
धार्मिक परंपरा में भगवान शिव को पशुपतिनाथ, अर्थात समस्त जीवों के स्वामी के रूप में पूजा जाता है। हरिद्वार की गंगा, शिव उपासना और तीर्थ परंपरा से जुड़ा वातावरण इस मंदिर की आध्यात्मिक महत्ता को और विशेष बनाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धालु यहाँ भगवान शिव की कृपा, सुख-शांति, आरोग्य, संरक्षण, बाधाओं की शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना से पूजा-अर्चना करते हैं।
भगवान शिव के पशुपति स्वरूप की उपासना सनातन परंपरा में विशेष धार्मिक महत्व रखती है। पशुपति स्वरूप भगवान शिव को समस्त जीवों के स्वामी, संरक्षक और कल्याणकारी देव के रूप में संबोधित करता है।
हरिद्वार स्थित पशुपति नाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और आध्यात्मिक साधना का माध्यम मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भक्त यहाँ विभिन्न आध्यात्मिक एवं पारिवारिक मंगलकामनाओं के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।
श्रद्धालु विशेष रूप से—
पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं।
भगवान शिव की उपासना से संबंधित विभिन्न धार्मिक एवं वैदिक अनुष्ठान श्रद्धा के अनुसार किए जाते हैं। किसी विशेष पूजा की उपलब्धता, विधि और आयोजन मंदिर की स्थानीय परंपरा तथा संबंधित आचार्य की व्यवस्था पर निर्भर कर सकती है।
प्रमुख रूप से किए जाने वाले शिव-संबंधित अनुष्ठानों में शामिल हो सकते हैं—
पूजा की विधि, मंत्र जाप और संकल्प व्यक्ति की धार्मिक आवश्यकता तथा जन्मकुंडली के आधार पर आचार्य द्वारा निर्धारित किए जा सकते हैं।
मंदिर में भगवान शिव के पशुपति स्वरूप की उपासना श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख धार्मिक केंद्र है। भक्त भगवान शिव का पूजन, अभिषेक और मंत्र जाप कर सुख, शांति, आरोग्य एवं संरक्षण की मंगलकामना करते हैं।
हरिद्वार की धार्मिक पहचान पवित्र गंगा से गहराई से जुड़ी हुई है। गंगा के तट पर स्नान, आचमन, पूजन और दीपदान हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखते हैं। गंगा का सान्निध्य हरिद्वार की तीर्थ परंपरा और आध्यात्मिक वातावरण को विशेष बनाता है।
हर की पौड़ी हरिद्वार के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यहाँ गंगा आरती और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मंदिर की यात्रा के साथ हर की पौड़ी और गंगा तट का दर्शन श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव हो सकता है।
हरिद्वार की धार्मिक परंपरा में गंगाद्वार, कुशावर्त, कनखल, बिल्व तीर्थ और नील पर्वत को पंचतीर्थ के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है। ये स्थल हरिद्वार की व्यापक तीर्थ परंपरा और धार्मिक विरासत को दर्शाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान पशुपतिनाथ की श्रद्धापूर्वक आराधना से विभिन्न आध्यात्मिक एवं सांसारिक मंगलकामनाएँ की जाती हैं। इन लाभों को धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए।
हरिद्वार का धार्मिक वातावरण गंगा, मंदिरों, आश्रमों, साधना परंपराओं, वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ा हुआ है। गंगा तट पर होने वाली आरती, दीपदान और मंत्रोच्चार तीर्थनगरी के आध्यात्मिक वातावरण को विशेष बनाते हैं।
पशुपति नाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना के साथ श्रद्धालु हरिद्वार की व्यापक तीर्थ परंपरा का अनुभव कर सकते हैं। श्रावण मास और महाशिवरात्रि जैसे शिव-संबंधित अवसरों पर भगवान शिव की उपासना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
भगवान शिव की उपासना के लिए निम्न अवसरों को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है—
इन अवसरों पर श्रद्धालु अपनी आस्था और धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान शिव का अभिषेक, पूजन, जाप एवं हवन करा सकते हैं।
हरिद्वार के लिए निकटतम प्रमुख हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून है। हवाई अड्डे से हरिद्वार तक सड़क मार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है।
हरिद्वार रेलवे स्टेशन देश के अनेक प्रमुख शहरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। रेलवे स्टेशन से स्थानीय परिवहन के माध्यम से मंदिर क्षेत्र तक पहुँचा जा सकता है।
हरिद्वार दिल्ली, देहरादून, ऋषिकेश और उत्तर भारत के अन्य प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। निजी वाहन, टैक्सी और बस के माध्यम से हरिद्वार पहुँचा जा सकता है।
पशुपति नाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना के लिए श्रद्धालु वर्षभर आ सकते हैं। धार्मिक दृष्टि से श्रावण मास, सावन सोमवार और महाशिवरात्रि जैसे अवसर विशेष माने जाते हैं।
यदि शांत वातावरण में दर्शन करना हो तो सामान्य दिनों में अपेक्षाकृत कम भीड़ वाले समय को चुना जा सकता है। पर्वों और विशेष धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो सकती है।
पूजा या विशेष अनुष्ठान के लिए जाने से पहले स्थानीय स्तर पर पूजा व्यवस्था, उपलब्धता और समय की जानकारी प्राप्त करना उचित है।
पशुपति नाथ मंदिर, हरिद्वार भगवान शिव के पशुपति स्वरूप की आराधना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। हरिद्वार की पवित्र गंगा, प्राचीन तीर्थ परंपरा और शिव भक्ति से जुड़ा वातावरण इस मंदिर की आध्यात्मिक पहचान को विशेष बनाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहाँ भगवान शिव की पूजा-अर्चना, अभिषेक, मंत्र जाप और अन्य धार्मिक अनुष्ठान सुख-शांति, आरोग्य, पारिवारिक कल्याण, बाधाओं की शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना से किए जाते हैं। हरिद्वार की तीर्थ परंपरा के साथ पशुपतिनाथ की उपासना श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, साधना और आध्यात्मिक चिंतन का अवसर प्रदान करती है।
जो भक्त यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए हम तीर्थ पर उनके नाम और संकल्प से पूजा संपन्न कराते हैं और, जहाँ संभव हो, वीडियो व प्रसाद उन तक पहुँचाते हैं — पूरा अनुष्ठान, आपकी ओर से।
1 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
हरिद्वार के पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर में 1 अनुभवी वैदिक आचार्य द्वारा सूर्य ग्रह शांति पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाती है। यह वैदिक अनुष्ठान लगभग 1.5 से 2 घंटे में पूर्ण होता है। इसमें सूर्य दोष, सूर्य महादशा, अंतर्दशा एवं प्रतिकूल गोचर से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पूजा आत्मबल, स्वास्थ्य, करियर, सरकारी कार्यों, यश एवं मान-सम्मान से संबंधित मंगलकामनाओं के लिए की जाती है।
पूजा में शामिल विधियां
विशेष सुविधाएं
अनुष्ठान की अवधि
यह वैदिक अनुष्ठान लगभग 1.5 से 2 घंटे में संपन्न कराया जाता है।
आवश्यक जानकारी
भगवान सूर्य नारायण एवं भगवान पशुपतिनाथ की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह पवित्र अनुष्ठान सूर्य ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, आत्मबल, स्वास्थ्य, करियर, यश एवं मान-सम्मान की मंगलकामना के लिए किया जाता है। मंत्र जाप, अर्घ्यदान, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में सकारात्मकता, स्थिरता, सफलता एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना की जाती है।
2 वस्तुएँ शामिल
3 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
श्रेष्ठ पैकेज के अंतर्गत हरिद्वार के पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर में 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सूर्य ग्रह शांति पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाती है। यह पवित्र वैदिक अनुष्ठान लगभग 2.5 से 3.5 घंटे में संपन्न होता है। इसमें सूर्य दोष, सूर्य महादशा, अंतर्दशा एवं प्रतिकूल गोचर से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अनुष्ठान आत्मबल, स्वास्थ्य, करियर, सरकारी कार्यों में सफलता, यश एवं मान-सम्मान की मंगलकामना के लिए किया जाता है।
पूजा में शामिल विधियां
विशेष सुविधाएं
अनुष्ठान की अवधि
यह पवित्र वैदिक अनुष्ठान लगभग 2.5 से 3.5 घंटे में संपन्न कराया जाता है।
आवश्यक जानकारी
भगवान सूर्य नारायण एवं भगवान पशुपतिनाथ की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह अनुष्ठान सूर्य ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, आत्मबल, स्वास्थ्य, ऊर्जा, यश एवं मान-सम्मान की प्रार्थना के लिए किया जाता है। मंत्र जाप, सूर्य देव की आराधना, अर्घ्यदान, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में सफलता, स्थिरता, सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना की जाती है।
2 वस्तुएँ शामिल
3 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
हरिद्वार के पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर में 3 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सूर्य ग्रह शांति पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं श्रद्धापूर्वक संपन्न कराई जाती है। यह पवित्र वैदिक अनुष्ठान लगभग 3 से 4 घंटे में संपन्न होता है। इसमें सूर्य दोष, सूर्य महादशा, अंतर्दशा एवं प्रतिकूल गोचर से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अनुष्ठान आत्मबल, स्वास्थ्य, करियर, सरकारी कार्यों में सफलता, यश एवं मान-सम्मान की मंगलकामना के लिए किया जाता है।
पूजा में शामिल विधियां
विशेष सुविधाएं
अनुष्ठान की अवधि
यह विशेष वैदिक अनुष्ठान लगभग 3 से 4 घंटे में संपन्न कराया जाता है।
आवश्यक जानकारी
भगवान सूर्य नारायण, भगवान पशुपतिनाथ एवं भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह पवित्र अनुष्ठान सूर्य ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, आत्मबल, स्वास्थ्य, ऊर्जा, करियर में उन्नति, यश एवं मान-सम्मान की प्रार्थना के लिए किया जाता है। मंत्र जाप, पूजन, अर्घ्यदान, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में सुख, शांति, स्थिरता और सकारात्मकता की मंगलकामना की जाती है।
2 वस्तुएँ शामिल
11 आचार्य + सभी पूजा सामग्री
दिव्य पैकेज में हरिद्वार के पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर में 11 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा सूर्य ग्रह शांति पूजा एवं विशेष वैदिक अनुष्ठान पूर्ण शास्त्रोक्त विधि-विधान से संपन्न कराया जाता है। इसमें सूर्य दोष, आत्मविश्वास की कमी, स्वास्थ्य संबंधी बाधाओं, करियर में रुकावट तथा सरकारी कार्यों में आने वाली समस्याओं की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है।
इस पवित्र अनुष्ठान में सूर्य वैदिक मंत्र का 28,000 जप कराया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मंत्र जाप सूर्य ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति, आत्मबल, ऊर्जा, स्वास्थ्य, सफलता एवं मान-सम्मान की मंगलकामना के लिए किया जाता है। यह अनुष्ठान विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए किया जाता है जिनकी कुंडली में सूर्य से संबंधित प्रतिकूल प्रभाव या जीवन में सूर्य ग्रह से जुड़ी बाधाएं मानी जाती हैं।
पूजा में शामिल विधियां
विशेष सुविधाएं
आवश्यक जानकारी
भगवान सूर्य नारायण एवं भगवान पशुपतिनाथ की कृपा की मंगलकामना के साथ संपन्न यह पवित्र अनुष्ठान सूर्य ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों के शमन, आत्मबल, ऊर्जा, स्वास्थ्य, सफलता एवं मानसिक स्थिरता की प्रार्थना के लिए किया जाता है। वैदिक मंत्र जाप, सूर्य देव की आराधना, अर्घ्यदान, हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से यजमान के जीवन में सुख, समृद्धि, यश, मान-सम्मान एवं सकारात्मकता की मंगलकामना की जाती है।
2 वस्तुएँ शामिल
सूर्य ग्रह जाप के बारे में हमसे बात करें
WhatsAppभक्तों की प्रतिक्रिया
“पूरी प्रक्रिया बहुत सरल थी। पंडित जी ने पूरी श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा संपन्न की और हमें उसी दिन वीडियो प्रमाण मिल गया।”
प्रिया शर्मा
मुंबई• Satyanarayan Puja
“विदेश में रहते हुए काशी में प्रामाणिक पूजा कराने को लेकर चिंतित था। पुजारीजी ने सब कुछ संभाला — सामग्री से लेकर संकल्प तक।”
राजेश गुप्ता
सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका• Rudrabhishek
“अपने नए घर के लिए ग्रह शांति पूजा बुक की। पंडित जी बहुत ज्ञानी थे और हर चरण समझाया। वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत अच्छी लगी।”
मीना अय्यर
बैंगलोर• Graha Shanti Puja
एक बार जानकारी दें। पुजारी, सामग्री, विधि-विधान और अपडेट — सब आपके लिए संभाला जाता है।
पूजा, तिथि और संकल्प की जानकारी दें।
जाँचे-परखे, आपकी पूजा के अनुसार।
हर वस्तु लाई जाती है — आपको कुछ नहीं जुटाना।
तीर्थ पर आपके नाम और संकल्प से।
संपन्न पूजा का आशीर्वादित प्रसाद और पूर्ण आशीर्वाद आपको।
ऊपर दिए गए पैकेज में से चुनें या पूछताछ करें, हमारी टीम आपकी तारीख और विवरणों की पुष्टि करेगी।